samacharsecretary.com

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, पीएम मोदी का ‘करीबी’ बनकर ठगी करने वाले आरोपी को मिली जमानत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब तीन साल से जेल में बंद आरोपी मोहम्मद काशिफ को सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी। काशिफ पर आरोप है कि उसने पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों के साथ अपनी एडिट की हुई यानी मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर लोगों से धोखाधड़ी की थी। हाईकोर्ट के फैसले को किया रद्द बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें काशिफ की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी लगभग तीन साल से हिरासत में है और इस मामले में अपराध की कथित आय 1.10 करोड़ रुपये है। अदालत ने कहा- हम विवादित आदेश को इस कारण से रद्द करने के इच्छुक हैं कि अपीलकर्ता तीन साल से जेल में है। आरोपी ने कोर्ट में दी यह अंडरटेकिंग सुनवाई के दौरान आरोपी काशिफ ने कोर्ट को यह वचन दिया कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने उसे ट्रायल में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि काशिफ सहयोग नहीं करता है या जमानत की शर्तों और अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) जमानत रद्द कराने के लिए निचली अदालत का रुख कर सकता है। क्या है पूरा मामला? ऐसे करता था ठगी: ईडी के मुताबिक, काशिफ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड और एडिटेड तस्वीरें पोस्ट की थीं। इसका मकसद लोगों में यह भ्रम पैदा करना था कि उसकी सरकार के उच्च स्तर तक सीधी पहुंच है। नौकरी और ठेके का झांसा: इस झूठे रसूख का इस्तेमाल कर उसने लोगों से सरकारी विभागों में काम कराने, सरकारी नौकरी दिलाने और सरकारी ठेके दिलाने का वादा करके पैसे ऐंठे। 1.10 करोड़ की बरामदगी: यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) से जुड़ा है, जो गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की एफआईआर पर आधारित था। ईडी ने काशिफ से जुड़े ठिकानों से 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी का दावा किया है। कोर्ट में किसने क्या दी दलील? काशिफ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि मूल अपराध में उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। वह 25 मई 2023 से हिरासत में है और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के ट्रायल में काफी देरी हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नवंबर 2023 में आरोप तय हुए थे और अगस्त 2024 में पहले गवाह की गवाही पूरी हुई थी। वहीं, ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने जमानत का विरोध किया और कहा कि ट्रायल में कोई अनुचित देरी नहीं हुई है। इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ईडी की दलीलों को मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया है।

भारतीय वायुसेना में सान्या का बड़ा कारनामा, 93 साल बाद पहली बार किसी महिला ने किया ये कमाल

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना में महिलाओं का दम लगातार बढ़ता जा रहा है. अब स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो आज तक कोई महिला अधिकारी हासिल नहीं कर सकी थी. सान्या भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें सबसे प्रतिष्ठित कैट ए क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (Cat-A Qualified Flying Instructor, QFI) रेटिंग मिली है. यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बदलती भूमिका और बढ़ते भरोसे की बड़ी तस्वीर भी है।  IAF ने बताया ऐतिहासिक पल भारतीय वायुसेना (IAF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा-उत्कृष्टता को नई उड़ान मिली है. स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने इतिहास रचते हुए Cat-A Qualified Flying Instructor की प्रतिष्ठित योग्यता हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है.वायुसेना ने इसे देशभर के युवा एविएटर्स के लिए प्रेरणादायक बताया.IAF ने कहा कि सान्या की यह उपलब्धि समर्पण, कड़ी मेहनत और उत्कृष्टता हासिल करने की निरंतर कोशिश की मिसाल है।  क्या होता है कैट ए क्‍वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर? भारतीय वायुसेना अपने पायलट इंस्ट्रक्टर्स की क्षमता को अलग-अलग कैटेगरी में बांटती है. इसमें Cat-C सबसे शुरुआती स्तर होता है जहां प्रशिक्षु या प्रोबेशनरी इंस्ट्रक्टर्स होते हैं. इसके बाद Cat-B आता है, जिसमें सामान्य फ्लाइंग ट्रेनिंग देने वाले इंस्ट्रक्टर्स शामिल होते हैं, लेकिन Cat-A इस पूरी प्रणाली का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है. इस रेटिंग को हासिल करने वाले पायलट सिर्फ नए पायलटों को ही नहीं, बल्कि दूसरे फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को भी ट्रेन कर सकते हैं. उन्हें एडवांस फ्लाइंग स्किल्स को परखने और एयर कॉम्बैट के लिए पायलट तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाती है।  नई पीढ़ी के फाइटर पायलट तैयार करेंगे ऐसे इंस्ट्रक्टर Cat-A QFI की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. ऐसे इंस्ट्रक्टर्स युवा पायलटों को ट्रेन करते हैं, उनकी गलतियों को सुधारते हैं.उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें जटिल एयर कॉम्बैट स्किल्स के लिए तैयार करते हैं.इस भूमिका के लिए सिर्फ बेहतरीन उड़ान कौशल ही नहीं, बल्कि धैर्य, तकनीकी समझ, स्पष्ट निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन की भी जरूरत होती है. यही वजह है कि Cat-A रेटिंग को IAF में बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है।  2015 में हुई थी कमीशन सार्वजनिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक स्क्वाड्रन लीडर सान्या को 20 जून 2015 को 42 SSC (W) FP Course के जरिए भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन मिला था.उन्हें 2017 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट और फिर 2021 में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर प्रमोट किया गया. पिछले 10 सालों में उन्होंने खुद को एक शानदार ट्रांसपोर्ट पायलट के रूप में साबित किया है।  महिलाओं के लिए बड़ा माइलस्टोन IAF के 93 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला अधिकारी ने Cat-A QFI रेटिंग हासिल की है. इसे भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का बड़ा संकेत माना जा रहा है।  आज महिला अधिकारी फाइटर जेट उड़ा रही हैं. हेलिकॉप्टर यूनिट्स संभाल रही हैं. फ्लाइट टेस्टिंग कर रही हैं और कमांड रोल्स में भी दिखाई दे रही हैं. अब फ्लाइंग इंस्ट्रक्शन जैसे सबसे कठिन क्षेत्रों में भी महिलाएं अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।  शिवांगी सिंह के बाद एक और बड़ी उपलब्धि यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब कुछ महीने पहले ही स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनी थीं जिन्होंने QFI बैज हासिल किया था. उन्होंने तमिलनाडु के तांबरम स्थित Flying Instructors’ School में छह महीने का कठिन कोर्स पूरा किया था हालांकि इससे पहले महिला ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर पायलटों को QFI बैज मिल चुका था लेकिन Cat-A रेटिंग हासिल करने वाली सान्या पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।  बदल रही है भारतीय सेना की तस्वीर 1990 के दशक में भारतीय सेना ने महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए शामिल करना शुरू किया था. तब महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.आज महिलाएं फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं.युद्धपोतों पर तैनात हैं.फ्रंटलाइन यूनिट्स संभाल रही हैं. स्थायी कमीशन पा रही हैं और NDA जैसी प्रतिष्ठित सैन्य अकादमियों में ट्रेनिंग भी ले रही हैं हालांकि भारतीय सेना में अब भी टैंक और इन्फैंट्री की कुछ कॉम्बैट पोजिशन महिलाओं के लिए खुली नहीं हैं, लेकिन लगातार बदलाव की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं।  देशभर की लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा स्क्वाड्रन लीडर सान्या की यह उपलब्धि सिर्फ एक सैन्य रिकॉर्ड नहीं है. यह उन लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखती हैं और कठिन रास्तों पर आगे बढ़ना चाहती हैं.भारतीय वायुसेना ने भी कहा कि सान्या की सफलता आने वाली पीढ़ियों के एविएटर्स के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। 

RG Kar मामले में शिकंजा और कसा, पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ ED केस को बंगाल सरकार की हरी झंडी

 कोलकाता बंगाल सरकार ने सोमवार को वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित जांच में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दे दी।  मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई क्रूर हत्या और बलात्कार के मामले में, ईडी को तत्कालीन आरजीकर अधीक्षक संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति मिल गई है।  शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस मामले की जांच प्रक्रिया को लंबे समय तक जबरन और अनैतिक रूप से रोके रखा।  उन्होंने आगे कहा कि, हमारा मानना ​​है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता. मैं चाहता हूं कि असली दोषियों की जल्द से जल्द पहचान हो, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले, बंगाल की जनता को न्याय मिले।  आरजी कर मामला क्या है? कोलकाता के राधागोविंद कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 9 अगस्त 2024 की रात 31 साल की महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था. ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल से बरामद हुआ था. इसके बाद इस मामले में कोलकाता पुलिस ने मुख्य आरोपी सिविल वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया। अस्पताल परिसर में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया. घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल समेत देशभर में डॉक्टरों ने प्रदर्शन और हड़ताल देखने को मिली. कोलकाता के कई प्रमुख अस्पतालों में डॉक्टर करीब 42 दिनों तक काम पर नहीं लौटे।  मामले की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. जांच के बाद सीबीआई ने गैंगरेप के आरोपों से इनकार किया. मामले में संजय रॉय को दोषी पाया गया. इसके बाद जनवरी 2025 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।  केंद्रीय एजेंसियों को सौंपे 7 राष्ट्रीय राजमार्ग इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 7 राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी दे दी है, जिससे करीब एक साल से लंबित प्रक्रिया पूरी हो गई।  ये हाईवे पहले राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन थे, लेकिन अब इन्हें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) संभालेंगे. करीब एक साल तक प्रस्ताव लंबित रहने की वजह से इन मार्गों पर विकास और निर्माण कार्य पूरी तरह रुके हुए थे। 

घर में रखें ये 8 हेल्थ गैजेट्स, इमरजेंसी में बन सकते हैं लाइफसेवर

 नई दिल्ली दुनियाभर में इन दिनों हंतावायरस को लेकर चर्चा बढ़ गई है. यह एक खतरनाक वायरस माना जाता है, जो ज्यादातर चूहों और दूसरे रोडेंट्स से इंसानों तक पहुंचता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्रमित चूहों की लार या गंदगी के संपर्क में आने से यह वायरस फैल सकता है. कई मामलों में बंद जगहों की सफाई के दौरान हवा में फैले छोटे कणों से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।  शुरुआती लक्षण आम वायरल जैसे लगते हैं, जैसे बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत. गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।  हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम लोगों के लिए खतरा फिलहाल कम है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है. दूसरे देशों में इस वायरस के मामले लगातार मिल रहे हैं। हंतावायरस के खौफ के बीच अब कांगो में इबोला से अब तक 80 मौतें हो चुकी हैं. WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है।  इबोला वायरस ने फिलहाल अफ्रिका के दो मुल्कों में हड़कंप मचा रखा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो हालात कोविड जैसे हो सकते हैं।  ऐसे समय में सिर्फ दवाइयां ही नहीं, बल्कि कुछ जरूरी हेल्थ डिवाइस घर में होना भी बहुत काम आ सकता है. खासकर तब जब घर में बुजुर्ग, बच्चे या पहले से बीमार लोग हों. कई बार छोटी-सी हेल्थ दिक्कत अचानक बड़ी इमरजेंसी में बदल जाती है और तब ये गैजेट तुरंत मदद करते हैं।  ऑक्सीमीटर कोविड के बाद यह डिवाइस लगभग हर घर का हिस्सा बन गया. ऑक्सीमीटर उंगली में लगाकर शरीर का ऑक्सीजन लेवल और पल्स चेक करता है।  अगर किसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, कमजोरी लग रही हो या वायरल के लक्षण हों, तो यह डिवाइस तुरंत संकेत दे सकता है कि बॉडी में ऑक्सीजन कम तो नहीं हो रही।  डिजिटल थर्मामीटर बुखार लगभग हर बीमारी का पहला संकेत होता है. इसलिए घर में एक अच्छा डिजिटल थर्मामीटर जरूर होना चाहिए. पुराने मर्करी थर्मामीटर के मुकाबले यह ज्यादा सेफ और तेज होता है. कुछ सेकंड में तापमान बता देता है और छोटे बच्चों के लिए भी आसान रहता है।  ब्लड प्रेशर मॉनिटर आजकल हाई BP और लो BP की समस्या बहुत आम हो चुकी है. कई बार टेंशन, वायरल या कमजोरी की वजह से अचानक ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगता है. डिजिटल BP मॉनिटर घर में होने से तुरंत स्थिति समझी जा सकती है. खासकर बुजुर्गों और दिल के मरीजों के लिए यह बहुत जरूरी गैजेट माना जाता है।  एयर प्यूरिफायर हंतावायरस जैसी बीमारियों में साफ हवा और साफ माहौल बहुत जरूरी माना जाता है. अगर घर ऐसी जगह है जहां धूल, गंदगी या पॉल्यूशन ज्यादा रहता है, तो एयर प्यूरिफायर काफी मदद कर सकता है. अच्छे एयर प्यूरिफायर HEPA फिल्टर के साथ आते हैं, जो हवा में मौजूद छोटे पार्टिकल्स और डस्ट को फिल्टर करते हैं।  स्टीम इनहेलर नाक बंद होना, गले में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं में स्टीम इनहेलर काफी काम आता है. गर्म भाप लेने से सांस की नली खुलती है और राहत मिलती है. वायरल सीजन में यह छोटा गैजेट बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।  नेब्युलाइजर अगर घर में किसी को अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्कत है, तो नेब्युलाइजर जरूर होना चाहिए. यह लिक्विड दवा को धुंध में बदलकर सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है. अचानक सांस फूलने जैसी स्थिति में यह काफी मदद कर सकता है।  स्मार्ट हेल्थ वॉच आजकल कई स्मार्टवॉच सिर्फ स्टेप्स नहीं गिनतीं, बल्कि हार्ट रेट, SpO2, स्ट्रेस लेवल और स्लीप ट्रैकिंग जैसी चीजें भी मॉनिटर करती हैं. कुछ डिवाइस इरेगुलर हार्टबीट का अलर्ट भी देती हैं. लगातार हेल्थ ट्रैकिंग के लिए यह काफी काम की डिवाइस बन चुकी है।  पोर्टेबल इमरजेंसी लाइट और पावर बैंक यह सुनने में हेल्थ गैजेट नहीं लगता, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी में बिजली जाना बड़ी समस्या बन सकता है. खासकर रात में या खराब मौसम में. इसलिए घर में चार्ज्ड पावर बैंक और इमरजेंसी लाइट रखना भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर फोन, मेडिकल डिवाइस या इंटरनेट बंद न हो।  एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी गैजेट डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता. लेकिन सही समय पर सही जानकारी देकर ये डिवाइस बड़ी परेशानी को समय रहते पकड़ने में मदद जरूर कर सकते हैं. यही वजह है कि अब हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि घर में कुछ जरूरी मेडिकल गैजेट हमेशा मौजूद होने चाहिए, ताकि इमरजेंसी में घबराहट कम और तैयारी ज्यादा हो।   

सरकार ने बैंकों पर लगाई बड़ी पाबंदी, नए निर्देशों से मची हलचल

 नई दिल्ली देश में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी की कीमतों में बीते सप्ताह इजाफा देखने को मिल चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मिडिल ईस्ट युद्ध के गंभीर असर का हवाला देते हुए ईंधन के सीमित इस्तेमाल की अपील कर चुके हैं. अब वित्त मंत्रालय की ओर से सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को खर्च कम करने के उपाय लागू करने के निर्देश दिया गया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आदेश में लागत कम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत लागू किए जाने वाले उपायों में अधिकारियों की विदेश यात्राएं कम करने से लेकर, बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ज्यादा उपयोग और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्टिंग करना शामिल हैं. वित्तीय सेवा विभाग द्वारा सोमवार को जारी किया गया यह आदेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) समेत अन्य फाइनेंस और इंश्योरेंस फर्मों पर लागू होगा।  विदेश यात्रा में करें कटौती  सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नए कॉस्ट कटिंग उपायों के तहत सभी बैठकें, काम-प्रोजेक्ट्स की समीक्षाएं और सुझावों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग आयोजित की जानी चाहिए, ऐसा तब तक होना चाहिए, जब तक कि शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य न हो. इसके अलावा चेयरमैन, एमडी या CEO समेत अन्य टॉप ऑफिशियल की विदेश यात्रा निर्धारित लिमिट से कम रखी जानी चाहिए, और जहां तक ​​संभव हो, विदेशी कार्यक्रमों में वर्चुअल तौर पर भाग लिया जाना चाहिए।  इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने की भी अपील की गई है. जारी आदेश में कहा गया है कि सभी संगठनों को अपने हेडक्वाटरों और ब्रांचों के लिए किराए पर अटैच किए गए पेट्रोल और डीजल वाहनों को जितना संभव हो इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का टारगेट सेट करना चाहिए।  PM मोदी ने की थी अपील गौरतलब है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों और देश के नागरिकों से कोरोना महामारी के दौरान लागू किए गए उपायों की तरह वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को फिर से शुरू करने का आग्रह किया था, उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित में उठाया जाने वाला कदम करार दिया था।  पीएम मोदी ने कहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल अस्थिरता भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं. दुनिया की तेल-गैस जरूरत के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट और इसके आसपास रुकावट ने तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ाने का काम किया है।  अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने मेट्रो कनेक्टिविटी वाले शहरों के लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और निजी वाहनों का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील की थी. इसके अलावा PM Modi ने मिडिल क्लास से विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्रा न करने,  एक वर्ष तक सोना न खरीदने और भारत में निर्मित उत्पादों की खरीदने की अपील की थी। 

दुनिया में बढ़ा भारत का गौरव, PM मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से नवाजा गया

नई दिल्ली स्वीडन के बाद अब नॉर्वे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे की ओर से विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मानों में शामिल है। ‘ग्रैंड क्रॉस’ रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट का सर्वोच्च ग्रेड माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान वैश्विक कूटनीति, भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नेतृत्व के योगदान के लिए दिया गया। क्या है रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट ? नार्वे ने पीएम मोदी को जिस रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है, वह नॉर्वे का एक प्रतिष्ठित शाही सम्मान है। ग्रैंड क्रॉस नॉर्वे के शाही सम्मान का सर्वोच्च श्रेणी का पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। नॉर्वे और मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा देने वाले विदेशियों और विदेश में रहने वाले नॉर्वे के नागरिकों को यह प्रदान किया जाता है किसे दिया जाता है यह सम्मान? रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट को मुख्य रूप से विदेशी राजनयिकों, सिविल सेवकों, मानद वाणिज्य दूतों और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाता है। इस सम्मान को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों या ग्रेड में बांटा गया है। इसमें 'ग्रैंड क्रॉस'सर्वोच्च ग्रेड है। इसके बाद सेंट ओलाव आता है। सेंट ओलाव का शाही नॉर्वेजियन पदक ऑर्डर ऑफ सेंट ओलाव नॉर्वे के नागरिकों के लिए है, वहीं, 'ऑर्डर ऑफ मेरिट'मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉर्वे के साथ संबंधों को मजबूत करने वालों को दिया जाता है। कल स्वीडन ने किया था सम्मानित एक दिन पहले,मोदी को द्विपक्षीय संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मान में स्वीडन के प्रतिष्ठित 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान है जो विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाता है। अब तक 32 देश पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से कर चुके हैं सम्मानित इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 32 पहुंच गई है। बीते दिन ही स्वीडन ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था। ट्रेड पर भी हुई बात सम्मान समारोह में दोनों देशों के बीच व्यापार, ग्रीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक साख और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है. इस सम्मान के बाद भारत और नॉर्वे के रिश्तों में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है. अब तक 32वां सम्‍मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.

हेरिटेज शिमला रेल कार का आधुनिक अवतार, इमरजेंसी में भी नहीं थमेगी सुरक्षा

कालका   वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कालका शिमला रेल मार्ग पर चलने वाली रेल मोटर कार का सफर और सुहाना और सुरक्षित होने जा रहा हैं। इंग्लैंड से 1927 में आई रेल कार में लगने वाले वैक्यूम ब्रेक सिस्टम को रेलवे ने कहा बाय-बाय कह दिया है। अब एयर ब्रेक सिस्टम का प्रयोग किया है। इसके ट्रायल भी सफल हो गए हैं। बस अब इस रेल कार को चलाने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से हरी झंडी का इंतजार हैं। पुराना ब्रेक सिस्टम आपात स्थिति में ज्यादा प्रभावी नहीं माना जाता था। रेलवे को नए प्रयोग की आवश्यता महसूस हुई। लंबे परीक्षण के बाद रेल कार में एयर ब्रेक सिस्टम को लगाया गया है, जोकि आपात स्थिति में ज्यादा प्रभारी होगी। इससे सैलानियों का सफर ज्यादा सुहाना होगा और सुरक्षित होगा। कालका-शिमला रेल मार्ग पर टाॅय ट्रेन की शुरुआत वर्ष 1903 में हुई थी और उस वक्त स्टीम इंजन इस ट्रेक पर चलते थे। टाॅय ट्रेन से शिमला तक पहुंचने में करीब साढ़े पांच घंटों का समय लगता है। अंग्रेजों ने इस मार्ग पर रेल सेवा को ज्यादा आरामदायक बनाने और समय की बचत के लिए वर्ष 1927 में रेल कार सेवा का प्रारंभ की थी। समय के साथ नैरो गेज पटरी पर रेल कार सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने लगी,जिससे रेल कार ने कम ही समय में देश और विदेशों में अपनी खास पहचान बनाई,जिसके चलते सैलानियों में रेल मोटर कार का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा। रेल कार-टाॅय ट्रेन में अंतर टाॅय ट्रेन में छह डब्बे होते हैं। वर्तमान में रोजाना छह टाॅय ट्रेन कालका से शिमला जा रही है और उतनी ही वापस आ रही है। टाॅय ट्रेन शिमला तक जाने में 5.30 घंटे का समय लेती है। रेल कार में एक ही डिब्बा होता हैं। यानी ट्रेन ड्राइवर और यात्री एक साथ बैठते हैं। इसमें 12 व्यक्ति बैठ सकते हैं। ऑन डिमांड चलने वाली रेल कार चार घंटे में शिमला का सफर तय करती हैं। डेढ़ घंटे का समय बचता है। चार रेल मोटर कार वर्ष 1927 में शुरू हुई रेल कार सेवा अपनी तरह की एक खास सेवा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षो से यह रेलवे विभाग के लिए मानो मुसीबत भी बनी हुई है। रेल कार की रिपेयर के लिए पार्ट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। तकनीकी खामियों के चलते रेल कार कार को ट्रैक पर चलाए रखना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। रेलवे विभाग के पास फिलहाल चार रेल मोटर कार है, जिसमें दो की हालत ज्यादा ठीक नहीं मानी जा सकती है, जिससे रेल कार को रेगुलर चलाने की बजाय आन डिमांड ही चलाया जा रहा है।  

मतदान से पहले बंगाल की राजनीति गरमाई, फलता सीट को लेकर कोर्ट पहुंचे जहांगीर खान

 कोलकाता पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता सीट पर रीपोलिंग से महज 72 घंटे पहले टीएमसी उम्मीदवार ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए अग्रिम राहत की मांग की है. जहांगीर खान का आरोप है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत कई झूठी FIR दर्ज कराई गई हैं. इन्हीं मामलों के चलते उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया है।  जहांगीर ने अपनी याचिका में कहा कि वह फलता विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और क्षेत्र में उनका चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है. उम्मीदवार का स्पष्ट आरोप है कि उनके खिलाफ जानबूझकर कई झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराए गए हैं, ताकि उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर किया जा सके. इसी चुनावी दबाव और गिरफ्तारी के डर के चलते उन्होंने अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत की शरण ली है।  TMC उम्मीदवार की ओर से वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया. बताया जा रहा है कि इस याचिका पर आज दोपहर 2:00 बजे सुनवाई होने की संभावना है।  आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के फलता में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान हुआ था, जहां कई केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं थीं. इसके बाद चुनाव आयोग ने फिर से मतदान कराने का आदेश दिया था।  चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, फलता विधानसभा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक री-पोलिंग कराई जाएगी. इसमें सहायक मतदान केंद्र भी शामिल रहेंगे. पूरी प्रक्रिया एक साथ कराई जाएगी, ताकि हर बूथ पर समान माहौल बना रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।  आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत रखी जाए और हर केंद्र पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो. री-पोलिंग खत्म होने के बाद मतगणना 24 मई 2026 को की जाएगी। 

वीडी सतीशन बने केरल के नए मुख्यमंत्री, शपथग्रहण समारोह में नई सरकार की शुरुआत

तिरुअनंतपुरम   केरलम में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया. वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने शपथ दिलवाई. वीडी सतीशन केरलम के मुख्यमंत्री बने। IUML से पीके कुन्हालीकुट्टी नेमंत्री पद की शपथ ली. रमेश चेन्निथला ने मंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे. तिरुअनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। PM मोदी ने वीडी सतीशन को केरलम के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी।  पी.के. कुन्हालीकुट्टी, सनी जोसेफ, के. मुरलीधरन और मॉन्स जोसेफ ने वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली केरलम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और लोकसभा नेता राहुल गांधी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला को केरलम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मंच पर मौजूद शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेता केरल के तिरुवनंतपुरम में मंच पर मौजूद रहे। कौन-कौन से विधायक बने मंत्री? कांग्रेस के रमेश चेन्निथला, सन्नी जोसेफ, के. मुरलीधरन, ए.पी. अनिल कुमार, पी.सी. विष्णुनाथ, टी. सिद्दीकी, बिंदु कृष्णा, के.ए. तुलसी, रोजी एम. जॉन, एम. लिजू और ओ.जे. जनीश। आईयूएमएल के पी.के. कुन्हालीकुट्टी, एन. शमसुद्दीन, के.एम. शाजी, पी.के. बशीर और वी.ई. अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली। अन्य गठबंधन सहयोगियों में से केरल कांग्रेस (जोसेफ) के मॉन्स जोसेफ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के शिबू बेबी जॉन, केरल कांग्रेस (जैकब) के अनूप जैकब और कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी के सी.पी. जॉन भी मंत्री बने हैं। यूडीएफ को मिला स्पष्ट जनादेश कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने केरल में 2026 का विधानसभा चुनाव स्पष्ट जनादेश के साथ जीता। दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद UDF को 46.55% वोट मिले। इससे पहले 2001 में 49.05% वोट मिले थे। यह उसके 2021 के वोटों के हिस्से के मुकाबले 7.67 प्रतिशत अंकों की बढ़त है। वोटों में इस उछाल का नतीजा यह हुआ कि उसे 62 सीटें ज्यादा मिलीं, जिससे 2026 में UDF की सीटों की संख्या बढ़कर 102 हो गई। यूडीएफ को मिला स्पष्ट जनादेश कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने केरल में 2026 का विधानसभा चुनाव स्पष्ट जनादेश के साथ जीता। दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद UDF को 46.55% वोट मिले। इससे पहले 2001 में 49.05% वोट मिले थे। यह उसके 2021 के वोटों के हिस्से के मुकाबले 7.67 प्रतिशत अंकों की बढ़त है। वोटों में इस उछाल का नतीजा यह हुआ कि उसे 62 सीटें ज्यादा मिलीं, जिससे 2026 में UDF की सीटों की संख्या बढ़कर 102 हो गई।    

AAP नेताओं से जुड़े तार! 155 करोड़ घोटाले में ईडी की रेड से मचा सियासी हड़कंप

नई दिल्ली ईडी ने 155 करोड़ रुपये के एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में आज बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले को लेकर दिल्ली और गोवा में 7 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही है. इस मामले में ईडी ने AAP नेता दीपक सिंगला के ठिकानों पर भी रेड की है।  ये पूरा मामला 'महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ दर्ज वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है. जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ये छापेमारी मुख्य रूप से दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरीक गिल और कुछ अन्य संदिग्धों से जुड़े परिसरों और ठिकानों पर की जा रही है।  ईडी की टीमें सुबह-सुबह ही सभी संदिग्धों के घरों और व्यावसायिक ठिकानों पर पहुंच गईं. जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है, ताकि 155 करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके।  संजीव अरोड़ा से जुड़े मामले के तार दीपक सिंगला का नाम आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार किया जाता है. बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों के तार पंजाब सरकार के गिरफ्तार मंत्री संजीव अरोड़ा से भी जुड़े हुए हैं. संजीव अरोड़ा को पहले ही भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।  अब इस नए बैंक फ्रॉड केस में भी संजीव अरोड़ा, उनके करीबियों और पार्टी सहयोगियों का नाम आने से आम आदमी पार्टी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।  बता दें कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक बैंक फ्रॉड केस दर्ज है. कंपनी पर कई बैंकों से लगभग 155 करोड़ रुपये का लोन लेकर उसमें हेराफेरी करने और बैंकों को बड़ा नुकसान पहुंचाने का आरोप है।