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ममता कैबिनेट बर्खास्त, विधानसभा पर राज्यपाल का वीटो प्रभाव

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं।  अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स · ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है।  · संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है।  · अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।  · संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है।  · आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।  सवाल-जवाब राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है।  पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है।  क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं।  मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। 

गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों से बिजली की मांग बढ़ी, इक्रा ने जताई 5-5.5% वृद्धि की संभावना

नई दिल्ली   औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों के निरंतर बढ़ने से 2026-27 में बिजली की मांग 5.0-5.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। 2025-26 में यह वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही थी. साख निर्धारण करने वाली एजेंसी इक्रा ने यह बात कही।  इक्रा ने बयान में कहा कि संभावित ‘एल नीनो’ के बीच सामान्य से कम वर्षा के आसार से वित्त वर्ष 2026-27 में कृषि एवं घरेलू क्षेत्रों से भी मांग को समर्थन मिलने की संभावना है. साथ ही उद्योगों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों एवं डाटा सेंटर जैसे उभरते स्रोतों से भी मांग बढ़ेगी।  देश में तापीय बिजली संयंत्रों का ‘प्लांट लोड फैक्टर’ (पीएलएफ या क्षमता उपयोग) 2025-26 में मांग में कमी के कारण घटकर 65-66 प्रतिशत रह गया. यह 2026-27 में करीब 65 प्रतिशत पर आ सकता है. नवीकरणीय स्रोतों से उत्पादन में अच्छी वृद्धि और तापीय क्षेत्र में छह गीगावाट क्षमता वृद्धि की संभावना इसकी मुख्य वजह रहेगी।  इक्रा के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग्स) अंकित जैन ने कहा कि भारत में तापीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर फिर से जोर दिया जा रहा है जबकि नवीकरणीय क्षमता तेजी से बढ़ती जा रही है।  उन्होंने साथ ही बताया कि आठ अप्रैल 2026 तक घरेलू बिजली संयंत्रों के वास्ते कोयला भंडार लगभग 19 दिन के लिए पर्याप्त था।  समूचे भारत में वितरण कंपनियों के बही-खाता घाटे में 2024-25 में 2023-24 की तुलना में सुधार हुआ. मार्च 2025 तक राज्य-स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों का सकल ऋण घटकर 7.1 लाख करोड़ रुपये रह गया जो मार्च 2024 में 7.4 लाख करोड़ रुपये था।  वर्तमान राजस्व और लाभप्रदता को देखते हुए हालांकि इतना उच्च ऋण स्तर कंपनियों के लिए टिकाऊ नहीं है।  अप्रैल 2026 तक 28 में से 17 राज्यों में 2026-27 के लिए शुल्क आदेश जारी किए जा चुके हैं।  बिजली वितरण कंपनियों के घाटे में काम करने के बावजूद अधिकतर राज्यों में 2026-27 के लिए स्वीकृत शुल्क वृद्धि सीमित रही है।  इक्रा का अनुमान है कि सीमित शुल्क वृद्धि और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क वाली क्षमताओं के जुड़ने से बिजली खरीद लागत बढ़ने की स्थिति में 2026-27 में प्रति इकाई नकद अंतर 30-33 पैसे के उच्च स्तर पर बना रह सकता है।  इक्रा ने कहा कि सीमित शुल्क वृद्धि और लगातार घाटे के कारण बिजली वितरण क्षेत्र के लिए उसका दृष्टिकोण नकारात्मक बना हुआ है। 

टकराव के बावजूद अमेरिका को 90 अरब डॉलर का फायदा, ट्रंप की रणनीति रंग लाई

तेहरान  ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका की जमीन के नीचे ऐसा खजाना मिला है, जो आने वाले कई दशकों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी (USGS) ने खुलासा किया है कि देश के एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में लिथियम मौजूद है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर बताई जा रही है. यह ईरान युद्ध में हुए नुकसान और खर्च लगभग 25 बिलियन डॉलर से कहीं ज्यादा है. यह खोज ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ रही है।  अमेरिका की लिथियम खोज क्यों है खास रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2.3 मिलियन मीट्रिक टन लिथियम ऑक्साइड मौजूद है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि आने वाली कई पीढ़ियों तक अमेरिका की जरूरतों को पूरा कर सकती है. यही वजह है कि इस खोज को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह लिथियम मुख्य रूप से कैरोलिना क्षेत्र के ‘टिन-स्पोड्यूमीन बेल्ट’ में पाया गया है. यह इलाका पहले भी दुनिया का प्रमुख लिथियम स्रोत रह चुका है, लेकिन समय के साथ यहां खनन गतिविधियां कम हो गई थीं. अब एक बार फिर यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा के नक्शे पर लौटता हुआ नजर आ रहा है. खास बात यह है कि यहां पाया जाने वाला स्पोड्यूमीन एक ऐसा खनिज है, जिससे सीधे लिथियम निकाला जा सकता है, जो बैटरियों के लिए बेहद जरूरी होता है।  चीन की नहीं होगी जरूरत  रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक अमेरिका अपनी लिथियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता रहा है. खासकर चीन और चिली जैसे देशों पर उसकी निर्भरता ज्यादा रही है. लेकिन इस नई खोज के बाद अमेरिका के पास मौका है कि वह अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करे और विदेशी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दे. दुनिया भर में लिथियम को ‘व्हाइट गोल्ड’ यानी सफेद सोना कहा जाने लगा है. इसकी वजह है इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2040 तक लिथियम की मांग में करीब 40 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है. अनुमान है कि इस भंडार से करीब 13 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां तैयार की जा सकती हैं।   

भारत-इजराइल दोस्ती को मजबूत करने वाली मेगा डील, PM मोदी ने एयर डिफेंस पर किया ऐतिहासिक सौदा

नई दिल्ली भारत ने अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इजरायल की IAI और HAL के साथ लगभग 1.1 अरब डॉलर की बड़ी डील की है। इसके तहत छह Boeing 767 विमानों को आधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदला जाएगा। यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति और भारत-इजरायल रक्षा… International Desk: भारत ने अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इजरायल की IAI और HAL के साथ लगभग 1.1 अरब डॉलर की बड़ी डील की है जिससे भारत-इजरायल रणनीतिक दोस्ती में  एक नया अध्याय जुड़ गया है। इसके तहत छह Boeing 767 विमानों को आधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदला जाएगा। इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति  के तहत जबरदस्त मेगा डील माना जा रहा है जिससे भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक मार करने और हवा में ईंधन भरने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी को मजबूती इजरायली कंपनी IAI पिछले कई वर्षों से भारत के साथ रक्षा तकनीक पर काम कर रही है। मार्च 2024 में कंपनी ने नई दिल्ली में अपनी भारतीय शाखा Aerospace Services India (ASI) शुरू की थी। यह कंपनी भारत की सरकारी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DRDO के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। ASI में करीब 97 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं। MRSAM सिस्टम भी बना रहा है IAI । IAI और DRDO मिलकर भारत के लिए Medium Range Surface-to-Air Missile (MRSAM) सिस्टम भी बना चुके हैं। यह अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों इस्तेमाल कर रही हैं। इस सिस्टम में एडवांस रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, मोबाइल लॉन्चर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं। Boeing 767 को टैंकर में बदलने का फायदा IAI दुनिया की बड़ी विमान कन्वर्जन कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी यात्री विमानों को कार्गो या विशेष सैन्य विमानों में बदलने की विशेषज्ञ मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार:     नया टैंकर विमान खरीदने की तुलना में कन्वर्जन करीब 20 प्रतिशत सस्ता पड़ता है।     Boeing 767 को अपग्रेड करने के बाद उसे कई दशकों तक उपयोग किया जा सकता है।     इससे भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी के ऑपरेशन में बड़ी मदद मिलेगी।     इन नए टैंकर विमानों से भारतीय लड़ाकू विमान हवा में ही ईंधन भर सकेंगे। इससे:     लड़ाकू विमानों की रेंज बढ़ेगी     लंबी दूरी के मिशन आसान होंगे     युद्ध के दौरान प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी     हिंद महासागर और पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ेगी 2030 से शुरू हो सकती डिलीवरी रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू हो सकती है। HAL और IAI पहले से ड्रोन और मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर भी साथ काम कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता सिर्फ एयर टैंकर खरीद नहीं, बल्कि भारत-इजरायल रक्षा सहयोग के नए दौर की शुरुआत है।  

अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ प्लान, MEA की कार्रवाई से हड़कंप

नई दिल्ली  भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों पर गाज गिरने वाली है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मामले में रुख एकदम साफ कर दिया है. MEA ने बांग्लादेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी है. भारत ने कहा है कि अवैध प्रवासियों की वापसी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. भारत से अवैध नागरिकों की वापसी का यह बड़ा मुद्दा है. इसके लिए बांग्लादेश सरकार का सपोर्ट बहुत जरूरी है।  नेशनलिटी वेरिफिकेशन से जुड़े 2862 से ज्यादा मामले बांग्लादेश के पास पेंडिंग हैं. इनमें से कई मामले पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से लटके हुए हैं. भारत की पॉलिसी अवैध विदेशियों को वापस भेजने को लेकर एकदम स्पष्ट है. MEA के इस भारी बयान से अवैध घुसपैठियों में दहशत मच गई है।  ‘2862 मामले सरेआम लटके’ विदेश मंत्रालय ने पेंडिंग मामलों पर अपना भारी गुस्सा एकदम जाहिर किया है. नेशनलिटी वेरिफिकेशन के 2862 मामले सरेआम बहुत लंबे समय से पेंडिंग हैं. इनमें से कई मामले पिछले पांच साल से लटके हुए हैं।  MEA ने बांग्लादेश से इस प्रोसेस में तेजी लाने की उम्मीद जताई है. वेरिफिकेशन में तेजी से प्रवासियों की वापसी आसानी से हो सकेगी. भारत सरकार का यह कड़ा स्टेप एकदम माना जा रहा है।  ‘अवैध नागरिकों को भेजा जाएगा वापस’ भारत ने अपनी लीगल पॉलिसी को लेकर ऐलान कर दिया है. MEA ने साफ कहा कि भारत में अवैध रहने वालों पर गाज गिरेगी. सभी अवैध विदेशी नागरिकों को कानून के तहत वापस भेजा जाएगा. इसके लिए निर्धारित लीगल प्रोसेस और बायलेटरल व्यवस्थाओं का पालन होगा. अवैध नागरिक वापसी के इस मुद्दे पर बांग्लादेश का सपोर्ट जरूरी है. सरकार की इस कड़ी चेतावनी से घुसपैठियों में हाहाकार मचा है।  बांग्लादेशी सरकार ने बॉर्डर पर कड़ी की सुरक्षा पश्चिम बंगाल में चुनाव संपन्न हो चुके हैं. भाजपा ने चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है. बंगाल में भाजपा की जीत ने बांग्लादेश सरकार की नींद उड़ा दी है. बांग्लादेशी सरकार को आशंका है कि लोगों को जबरन भारत से निकाला जा सकता है. बांग्लादेश के गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मामले में एक बयान भी जारी किया है. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भारत से लोगों को जबरन सीमा पार भेजने यानी 'पुशबैक' की घटनाएं नहीं बढ़ेंगी।  बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने दी चेतावनी सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि वे नहीं चाहते हैं कि किसी को अवैध प्रवासी बताकर भारत से बांग्लादेश की ओर धकेल दिया जाए. इसी वजह से हमने बांग्लादेश की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है. बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इससे पहले कहा था कि अगर भारत की ओर से पुशबैक की घटनाएं सामने आती हैं तो बांग्लादेश कड़ी कार्रवाई करेगा. हम कड़ी कार्रवाई करने सेे हिचकेंगे नहीं।  क्या होता है पुशबैक बता दें, पुशबैक का मतलब होता है कि किसी व्यक्ति को जबरन सीमा के पार भेज देना. पिछले कुछ वक्त में भारत और बांग्लादेश की सीमा से ऐसे मामले सामने आते रहे हैं।  घुसपैठ पर निशाना साध चुकी है भाजपा दरअसल, बंगाल चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित से लेकर भाजपा के विभिन्न बड़े नेताओं ने घुसपैठ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. भाजपा नेतृत्व ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को शरण दे रखी है।  पीएम मोदी ने घुसपैठ के खिलाफ दिया था कड़ा संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी रैलियों से साफ कह दिया था कि जो लोग भारत में अवैध रूप से घुसे हैं. यहां फर्जी दस्तावेजों के साथ रह रहे हैं, उनको देश से निकाला जाएगा. पीएम मोदी ने कहा था कि सिर्फ घुसपैठियों को ही नहीं बल्कि उन लोगों का भी हिसाब किया जाएगा, जिन्होंने घुसपैठियों की मदद की थी. पीएम मोदी ने एक रैली में तो पीएम मोदी ने घुसपैठियों को साफ संदेश दे दिया था कि वह अपना बोरिया बिस्तर बांध लें. प्रधानमंत्री मोदी ने ने आरोप लगाया था कि TMC सरकार अपने 'वोट बैंक' को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर घुसपैठ करवा रही है।  बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के नेता ने BJP को बधाई दी इसके अलावा, बांग्लादेशी सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने भाजपा को जीत की बधाई दी. उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते इससे मजबूत हो सकते हैं. उन्होंने बंगाल की निर्वतमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी वजह से तीस्ता जल समझौते में देरी हो रही है. हेलाल ने दावा किया कि तीस्ता जल समझौता भारत और बांग्लादेश की सरकार चाहती है। 

इस्तीफे से इनकार के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम, बंगाल विधानसभा भंग

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार करने वाली ममता बनर्जी का दांव नहीं चला है। राज्यपाल ने बंगाल विधानसभा को भंग कर दिया है। चार मई को आए चुनावी नतीजों में न सिर्फ ममता बनर्जी को भवानीपुर से हार का सामना करना पड़ा, बल्कि 15 सालों तक रही सत्ता भी चली गई। भाजपा ने बंपर जीत हासिल करते हुए 207 सीटों पर जीत दर्ज की। एक आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्यपाल आरएन रवि ने पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद, सात मई से उसे भंग कर दिया है। वर्तमान विधानसभा का गठन मई 2021 में हुआ था, जब ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी। विधानसभा का भंग किया जाना हाल ही में संपन्न हुए दो चरणों के चुनावों के बाद मौजूदा विधानसभा के कार्यकाल की औपचारिक समाप्ति का प्रतीक है। चुनावी नतीजे लोगों का जनादेश नहीं, बल्कि साजिश थे, यह आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्य में एक संवैधानिक अनिश्चितता और राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी। बनर्जी ने नतीजे को मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी भाजपा से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से लड़ रही है। हार के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, ''मैं इस्तीफा क्यों दूं? हम हारे नहीं हैं। जनादेश को लूट लिया गया है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?'' उन्होंने कहा, "मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हम लोगों के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश की वजह से हारे हैं… मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।"

तीनों सेनाओं ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का विस्तृत हाल, 13 एयरक्राफ्ट और 11 बेस तबाह

नई दिल्ली   भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बताया. पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के एक साल बाद सेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ऑपरेशन की सफलता और उसके सबकों पर विस्तार से चर्चा की।  लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश भारती और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने संयुक्त रूप से कहा कि यह ऑपरेशन आतंकवादियों और उनके समर्थन ढांचे के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का एक प्रतीक है. उन्होने कहा कि भारत ने 13 पाकिस्तानी विमान गिराए, 11 बेस को तबाह किया और 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों मार गिराया।  'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने गुरुवार को कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, पेशेवर तरीके से और पूरी जिम्मेदारी के साथ करेगा, और आतंक के खिलाफ उसकी लड़ाई जारी रहेगी।  राजस्थान के जयपुर में 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट घई ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर को एक साल हो गया है, और उस समय के डीजीएमओ के तौर पर, मैं इसे न सिर्फ एक मिलिट्री ऑपरेशन बल्कि शायद भारत की रणनीतिक यात्रा में एक अहम पल के तौर पर देखता हूं।  उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहुत सोच-समझकर और सही तरीके से अपने पुराने तरीकों और तरीकों से आगे बढ़कर लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और पाकिस्तान के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंक को टारगेट किया।  ऑपरेशन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सटीकता, अनुपात और मकसद की स्पष्टता के साथ, यह एक देश का पक्का इरादा, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का बयान था।  लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि शुरू से ही सरकार ने हमें दो साफ निर्देश दिए थे, साफ राजनीतिक-मिलिट्री मकसद और इन्हें पाने के लिए परिचालन लचीलापन. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आतंक पारिस्थितिकी तंत्र (terror ecosystems) को खत्म करना और कमजोर करना, उनकी प्लानिंग में रुकावट डालना और इन बेस से भविष्य में होने वाले हमले को रोकना बहुत साफ-साफ बताया गया था. जबकि आर्म्ड फोर्सेज को इस ऑपरेशन की प्लानिंग करने और उसे पूरा करने के लिए जरूरी चीजें सौंपी गई थीं।  उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर कोई अंत नहीं है, यह तो बस शुरुआत है. उन्होंने कहा, "आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी. भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, प्रोफेशनल तरीके से और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करेगा।  यह बताते हुए कि ऑपरेशन तीनों सेनाओं का एक मिला-जुला प्रयास था, लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि इसमें जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं को हालात की जानकारी, कॉमन ऑपरेशन और इंटेलिजेंस तस्वीरों और रियल टाइम में फैसले लेने के साथ जोड़ा गया।  उन्होंने कहा, "सटीक हमले, कुल नौ, जिनमें से सात भारतीय सेना ने और दो भारतीय वायुसेना ने किए, एकदम सही समय पर किए गए, पूरी तरह से हैरान करने वाले थे और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर और पाकिस्तान के बीचों-बीच हर बने हुए हब में ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुंचाया।  लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि ऑपरेशन ने स्वदेशी क्षमता को भी दिखाया और कहा कि इस्तेमाल किए गए हथियार सिस्टम, गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइल, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया और बनाया गया था।  उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस, आकाश, एडवांस्ड सर्विलांस और टारगेटिंग सिस्टम के साथ-साथ देसी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स, सभी ने अहम भूमिका निभाई. एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि पहलगाम की घटना अपने आप में एक ऐसी घटना थी जिसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम होगी।  उन्होंने कहा, "हम 22 अप्रैल, 2025 को बेरहमी से मारे गए अपने देश के लोगों को वापस नहीं ला सकते. लेकिन हम यह पक्का करने का पक्का इरादा कर सकते हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. ऑपरेशन सिंदूर, जो अभी रुका हुआ है, उसी इरादे की तरफ एक कोशिश है।  यह कहते हुए कि भारत जियो और जीने दो की सीधी-सादी सोच के साथ जीता है. उन्होंने कहा, "लेकिन, जब शांति की हमारी चाहत को कमजोरी समझ लिया जाता है, और हमारी चुप्पी को गैर-मौजूदगी समझ लिया जाता है, तो काम करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. जब हम काम करते हैं, तो कोई आधा-अधूरा तरीका नहीं होता. यह अहम होता है, यह जानलेवा होता है, और यह ऑपरेशन सिंदूर में बदल जाता है।  इससे पहले दिन में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर, हम अपने सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को सलाम करते हैं, जिनका साहस और समर्पण देश की सुरक्षा करता रहता है. ऑपरेशन के दौरान उनके कामों में बेमिसाल सटीकता, बिना रुकावट के तालमेल और सभी सेनाओं के बीच गहरा तालमेल दिखा, जिसने मॉडर्न मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए एक बेंचमार्क सेट किया।  मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर देश के पक्के इरादे और तैयारी का एक मजबूत निशान है, जो दिखाता है कि हमारी सेनाएं सबसे जरूरी समय पर मजबूती से काम करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।  उन्होंने आगे कहा कि यह आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में भारत की निरंतर प्रगति का भी प्रमाण है, जो लचीलेपन को मजबूत करते हुए क्षमता को बढ़ाता है। 

सिंधूर बरसी पर भारत का सख्त संदेश: आजादी के बाद पहली बार रोका रावी का पानी

नई दिल्‍ली  दशकों से रावी की लहरें अपनी ही मिट्टी को प्यासा छोड़कर सरहद पार उस मुल्क की ओर बह जाती थीं जिसने दोस्ती के बदले हमेशा दगा दिया. लेकिन अब वक्त बदल चुका है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर भारत ने पानी की एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दी है जिसने भूगोल और किस्मत दोनों को बदल कर रख दिया. शाहपुर कंडी बैराज के कपाट क्या खुले मानो हिमालय की गोद से निकला नीर भारत की संप्रभुता का शंखनाद करने लगा. पहली बार रावी का पानी अपनी पुरानी राह छोड़ पूरी ठसक के साथ कठुआ के उझ बैराज की ओर मुड़ गया. यह सिर्फ पानी का बहाव नहीं, पाकिस्तान के लिए एक सख्त संदेश है कि अब भारत के हक की एक बूंद भी मुफ्त में सीमा पार नहीं जाएगी. जहां कल तक जम्मू-कश्मीर की कंडी बेल्ट की धरती प्यास से चटक रही थी, वहां आज रावी की गर्जना किसानों के चेहरों पर मुस्कान और पाकिस्तान के हलक में खुश्की बनकर उतरी है।  आजादी के बाद पहली बार पाक नहीं जाएगा रावी का पानी पंजाब के पठानकोट जिले में बने शाहपुर कंडी डैम से एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है. पहली बार रावी नदी के पानी को उज्ह बैराज तक डायवर्ट करने का काम शुरू कर दिया गया है. आजादी के बाद यह पहला मौका है जब रावी नदी के पानी का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर और पंजाब में बड़े स्तर पर किया जाएगा।  भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग करते हुए दशकों के इंतजार के बाद रावी नदी का वह पानी जो अब तक बहकर पाकिस्तान चला जाता था, उसे पूरी तरह रोककर जम्मू-कश्मीर की प्यासी धरती की ओर मोड़ दिया गया है. शाहपुर कंडी बैराज परियोजना के पूरे होने के साथ ही रावी का पानी पहली बार कठुआ स्थित उझ बैराज तक पहुंच गया है. यह घटनाक्रम न केवल कृषि के लिहाज से क्रांतिकारी है बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत की एक बड़ी जीत मानी जा रही है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ के अवसर पर मिली यह सफलता भारत की जल सुरक्षा नीति को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है. कठुआ और सांबा के कंडी बेल्ट में आज दिवाली जैसा माहौल है क्योंकि अब यहां के खेतों को मानसून के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।  पंजाब में 5000 हैक्‍टेयर जमीन पर 12 महीने सिंचाई अब तक रावी नदी का अधिकांश पानी जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा से होकर पाकिस्तान चला जाता था, जबकि भारत के सीमावर्ती इलाकों के किसान सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहते थे. खासकर उज्ह बैराज में केवल बरसात के मौसम में 2 से 3 महीने तक ही पानी रहता था और उसके बाद बैराज लगभग सूख जाता था. लेकिन शाहपुर कंडी डैम बनने के बाद तस्वीर बदलनी शुरू हो गई है. डैम से उज्ह बैराज तक बनाई गई नई नहर के जरिए अब पानी पहुंचाया जा रहा है. इससे किसानों को लगभग पूरे साल सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।  इस परियोजना से पंजाब की करीब 5000 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का लाभ मिलेगा, जबकि जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की लगभग 32 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा फायदा पहुंचेगा. इसके साथ ही इस परियोजना से 206 मेगावाट बिजली उत्पादन भी किया जाएगा, जिससे ऊर्जा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।  पाकिस्‍तान जाने वाली सभी 6 नदियों के पानी का हो रहा इस्‍तेमाल पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने इंडस वॉटर ट्रीटी को “केप्ट इन एबेयंस” रखने का फैसला लिया, जिसके बाद अब भारत अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल रणनीतिक और विकासात्मक जरूरतों के अनुसार कर रहा है. अब केवल रावी, सतलुज और ब्यास ही नहीं बल्कि चिनाब, झेलम और इंडस नदी के पानी के उपयोग को लेकर भी भारत ने अपनी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. पहले भारत को इन नदियों पर काम करने के लिए कई शर्तों और पाकिस्तान के साथ सूचना साझा करने की प्रक्रिया का पालन करना पड़ता था लेकिन अब कई वर्षों से लंबित परियोजनाओं को मंजूरी देकर तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।  विकास की नई धारा · ऐतिहासिक उपलब्धि: शाहपुर कंडी बैराज से पानी का प्रवाह शुरू होने के बाद रावी का पानी पहली बार आधिकारिक तौर पर उझ बैराज तक पहुंचा है. · सिंचाई की बड़ी सौगात: इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर और पंजाब की लगभग 37,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी. · जम्मू-कश्मीर को मुख्य लाभ: कुल सिंचित भूमि में से 32,000 हेक्टेयर हिस्सा अकेले जम्मू-कश्मीर में आता है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी. · कंडी क्षेत्र का कायाकल्प: कठुआ और सांबा जिले के कंडी बेल्ट के किसान जो दशकों से पानी की किल्लत झेल रहे थे अब साल भर सिंचाई की सुविधा का लाभ उठा पाएंगे. · पाकिस्तान की मुश्किलें: भारत द्वारा अपने हिस्से का पानी रोकने से पाकिस्तान के कई इलाकों में जल संकट गहराने की आशंका है जो अब तक मुफ्त के पानी पर निर्भर थे. ऑपरेशन सिंदूर और जल कूटनीति भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि (1960) के प्रावधानों के तहत रावी, ब्यास और सतलुज के पानी पर अपने पूर्ण नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू किया है. शाहपुर कंडी परियोजना का पूरा होना भारत की उस दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है जहां उसने तय किया कि अपने हक की एक बूंद भी सीमा पार नहीं जाने दी जाएगी।  सामरिक दृष्टि से, यह परियोजना पाकिस्तान पर दबाव बनाने का एक सॉफ्ट पावर टूल भी है. पाकिस्तान जो अब तक रावी के सरप्‍लस पानी का उपयोग कर रहा था अब उसे अपनी कृषि नीतियों पर दोबारा से विचार करना होगा. वहीं भारत के लिए यह कदम खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा मील का पत्थर है। 

72 घंटे में भारत की जीत, अमेरिकी विशेषज्ञ ने साझा किया रणनीति का विश्लेषण

 नई दिल्ली अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कहा है कि भारत ने इस संघर्ष में रणनीतिक रूप से बड़ी जीत हासिल की. उन्होंने बताया कि 10 मई की सुबह तक भारत ने हवाई क्षेत्र में पूरी श्रेष्ठता बना ली थी, जबकि पाकिस्तान अपने हवाई ऑपरेशनों को जारी रखने में कमजोर हो चुका था।  यह नतीजा किसी एक हमले या छोटी लड़ाई का परिणाम नहीं था, बल्कि कई दिनों तक चली सावधानीपूर्वक योजना और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने की मुहिम का नतीजा था. मई 2025 में भारत ने 6-7 मई की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए।  जब पाकिस्तान ने भारत के शहरों और सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया, तब भारत ने भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मजबूत जवाब दिया. यह चार दिन का संघर्ष 10 मई को पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम के साथ खत्म हुआ. इस दौरान भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम और कई अन्य सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया।  भारत की रणनीति कैसे काम की अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर जॉन स्पेंसर अब मैडिसन पॉलिसी फोरम में वॉर स्टडीज के चेयर और अर्बन वारफेयर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर विस्तार से बताया कि भारत ने कैसे पाकिस्तान की हवाई रक्षा को कमजोर किया. उन्होंने कहा कि 8 मई को भारत ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा ठिकानों पर हमले किए, जिनमें चूनियां और पासरूर में अर्ली वार्निंग रडार और कम से कम एक HQ-9 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी शामिल थी. 9 मई को भी और हमले किए गए।  ये हमले ज्यादातर लॉइटरिंग मुनिशन से किए गए. इनका मकसद था कि पाकिस्तान के रडार और मिसाइल सिस्टम को लगातार दबाव में रखा जाए, चाहे वे पहले हमलों से बचे हों या नई जगह पर तैनात किए गए हों. स्पेंसर ने लिखा कि इन हमलों से पाकिस्तान की देखने, कॉर्डिनेशन करने और जवाब देने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई. हवाई युद्ध में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे पहले कि लड़ाकू विमान आमने-सामने आएं, दुश्मन की रक्षा प्रणाली ही ध्वस्त हो जाती है।  S-400 ने बदला खेल, पाकिस्तानी विमानों पर हालत खराब हो गई स्पेंसर ने एक और महत्वपूर्ण बात बताई. भारत की S-400 मिसाइल सिस्टम ने एक हाई वैल्यू एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को करीब 300 किलोमीटर दूर से निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान एयर फोर्स को यह सोचना पड़ा कि वे कहां और कैसे अपने विमानों को उड़ा सकते हैं. इस वजह से पाकिस्तानी विमानों का ऑपरेशन क्षेत्र सीमित हो गया. उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ी।  स्पेंसर ने माना कि शुरू के कुछ घंटों में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय विमानों को गिराने में सफलता हासिल की. यह शुरुआती सफलता पाकिस्तान के लिए प्रचार का अच्छा मौका बनी, लेकिन स्पेंसर कहते हैं कि छोटी-मोटी सफलता पूरे अभियान की जीत नहीं तय करती।  पाकिस्तान ने बाद में सैकड़ों ड्रोन, CM-400एकेजी मिसाइलें, फतेह और हत्फ रॉकेट दागे, लेकिन भारत की एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें रोक लिया. भारत ने अपनी स्वदेशी आईएसीसीसीएस (Integrated Air Command, Control and Communication System) और आकाशतीर प्रणाली का इस्तेमाल किया, जिसने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम कर दिया।  आधुनिक युद्ध: सिर्फ विमान नहीं, पूरा सिस्टम लड़ता है जॉन स्पेंसर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाकू विमान एक-दूसरे से नहीं लड़ते. इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कमांड नेटवर्क और एकीकृत सिस्टम बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारत के पास बड़े पैमाने, गहराई और बेहतर एकीकरण था. इसी वजह से भारत शुरुआती झटके को सहन कर सका और फिर अपना ऑपरेशनल टेम्पो पाकिस्तान पर थोप दिया।  दूसरी ओर पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन से मिले हथियारों पर निर्भर था. शुरुआत में इनसे कुछ सफलता मिली, लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान की महत्वपूर्ण नोड्स को नष्ट कर दिया तो पाकिस्तान लड़ने लायक नहीं बचा।  रणनीतिक जीत भारत की ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिखाया कि अच्छी योजना, स्वदेशी तकनीक और मजबूत एकीकरण से छोटी-मोटी शुरुआती असफलताओं को भी पलटकर बड़ी जीत हासिल की जा सकती है. जॉन स्पेंसर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने हवाई श्रेष्ठता हासिल कर पाकिस्तान को ऑपरेशन करने लायक ही नहीं छोड़ा. यह संघर्ष दिखाता है कि भविष्य के युद्धों में सिस्टम की मजबूती और निरंतर दबाव कितना निर्णायक साबित होता है। 

विजय की सरकार तो बनेगी, मगर चलाने में RBI की मदद जरूरी, समझिए कैसे

चेन्नई  थलपति विजय की पार्टी टीवीके तमिलनाडु में सरकार बनाने की स्थिति में है. ऐसे में अब विजय ने चुनावी घोषणापत्र में जो वादे किए थे, उसपर निगाहें टिक गई हैं. इनमें से सबसे अहम है सोना बांटने वाला वादा. थलापति विजय ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हर नवजात बच्‍चे को सोने की अंगुठी और दुल्‍हनों को 8 ग्राम सोना और सिल्‍क की साड़ी देने का वादा किया था. अब विजय प्रदेश में सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि थलापति विजय इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां से लाएंगे. बता दें कि तमिलनाडु में हर साल लाखों बच्‍चे जन्‍म लेते हैं और लाखों की तादाद में शादियां होती हैं. यदि गरीबी रेखा से नीचे वाले सिद्धांत पर भी चला जाए तो भी दोनों को मिलाकर लाखों की तादाद में लाभार्थी होंगे. इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, बल्कि विजय को इसके लिए आरबीआई से भी मदद लेनी पड़ सकती है।  थलापति विजय ने सरकार बनने पर जिन कल्‍याणकारी योजनाओं को लागू करने का वादा किया है, यदि उसपर अमल किया गया तो तमिलनाडु सरकार का वेलफेयर बिल (कल्‍याणकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च) 52 फीसद तक बढ़ सकता है. इस मद में फिलहाल 65000 करोड़ रुपया खर्च होता है जो बढ़कर 1 लाख करोड़ के आसपास पहुंच जाएगा. अब सोना देने के वादे के आर्थिक पहलू पर बात करते हैं. दरअसल, TVK ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग देने के लिए एक अहम वादा किया है. पार्टी ने सालाना 5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों की दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और एक सिल्क साड़ी देने का आश्वासन दिया है. मौजूदा 22 कैरेट सोने की कीमत करीब 14,000 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से केवल सोने की कीमत ही लगभग 1.12 लाख रुपये प्रति लाभार्थी बैठती है. तमिलनाडु में हर साल 4 से 5 लाख शादियां होती हैं. एक आकलन के अनुसार, 60 फीसद परिवार विजय की स्‍कीम के तहत फिट बैठते हैं. ऐसे में हर साल लगभग 2.7 लाख दुल्हन सोने की हकदार हो सकती हैं. इस तरह सिर्फ दुल्‍हनों को 8 ग्राम सोना देने में 3000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का खर्च आने का अनुमान है।  नवजात को भी गोल्‍ड रिंग देने का वादा इतना ही नहीं, थलापति विजय ने प्रदेश में पैदा होने वाले हर नवजात को गोल्‍ड रिंग देने का वादा किया है. 2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की आबादी करीब 7.21 करोड़ है. राज्य में जन्म दर फिलहाल देश में सबसे कम चल है. साल 2025 में करीब 7.8 लाख बच्चों ने जन्म लिया. विजय की योजना के मुताबिक, हर नवजात को सोने की अंगूठी दी जाएगी. अब अगर हम मान लें कि इसमें से 60 प्रतिशत बच्चे उन परिवारों में पैदा होते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो भी हर साल करीब 4.7 लाख बच्चों को यह अंगूठी देनी होगी. भले ही एक छोटी अंगूठी की कीमत करीब 5,000 रुपये के आसपास हो, लेकिन जब इसे लाखों बच्चों से गुणा करते हैं, तो यह अकेले 235 करोड़ रुपये का सालाना खर्च बन जाता है।  BI से लेनी पड़ सकती है अनुमति दोनों गोल्‍ड स्‍कीम को मिला दिया जाए तो थलापति विजय को बड़ी मात्रा में सोने की जरूरत होगी. बता दें कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना खरीदने के लिए कुछ नियम कायदे हैं. यदि दुल्‍हनों को दिए जाने वाले सोने की बात की जाए तो नई सरकार को 8 ग्राम के हिसाब से 2160000 ग्राम यानी हर साल 2160 किलो गोल्‍ड की जरूरत होगी. बच्‍चों को गोल्‍ड रिंग देने की स्‍कीम में मात्रा का उल्‍लेख नहीं है. यदि उसे भी जोड़ दिया जाए तो सैकड़ों किलो का और ईजाफा होगा. ऐसे में थलापति विजय आरबीआई की मदद के बिना इस वादे को पूरा नहीं कर पाएंगे।  वेलफेयर बिल पहुंच जाएगा सातवें आसमान पर फिल्म स्टार से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की शानदार चुनावी जीत के बाद अब घोषणापत्र में किए गए बड़े वादों पर चर्चा तेज हो गई है. पार्टी ने महिलाओं के मुखिया वाले परिवारों को हर महीने ₹2,500 देने, हर परिवार को साल में छह मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और 10 लाख बेरोजगार ग्रेजुएट्स को ₹4,000 मासिक भत्ता देने जैसे कई बड़े ऐलान किए हैं. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि इन योजनाओं पर राज्य सरकार का सालाना खर्च करीब ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. यह राशि 2025-26 में DMK सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी पर खर्च किए गए ₹65,000 करोड़ से लगभग 52% अधिक है. अगर राज्य के कुल राजस्व से तुलना करें, तो यह खर्च तमिलनाडु के 2025-26 के बजट में अनुमानित ₹3.31 लाख करोड़ के राजस्व का करीब एक तिहाई होगा।