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अमेरिकी प्लेन का कतर में रहस्यमयी गायब होना, होर्मुज स्ट्रेट में चेतावनी जारी

वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी वायुसेना का KC-135 स्ट्रैटो टैंकर अचानक सुर्खियों में आ गया है. हवा में फ्यूल भरने की क्षमता के कारण फ्लाइंग गैस स्टेशन कहे जाने वाला ये विमान उड़ान के दौरान इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद रडार से गायब हो गया. इसके बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।  फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, बोइंग KC-135 ने कतर के पास 7700 स्क्वॉक कोड टेलिकास्ट किया यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी संकेत होता है. इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब विमान किसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहा हो. इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया. माना जा रहा है कि उस समय यह किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था।  आखिरी लोकेशन और संभावित वजहें रिपोर्ट के मुताबिक विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और कतर की दिशा में मुड़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर सिग्नल खो दिया. यह भी कहा जा रहा है कि विमान उस समय खाड़ी के ऊपर एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था. 7700 कोड कई वजहों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे तकनीकी खराबी, आग लगना, मेडिकल इमरजेंसी या किसी बाहरी खतरे का सामना किया होगा।  रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ट्रांसपॉन्डर कोड 7700 जारी करने के बाद विमान नीचे उतर रहा था और अपना कोर्स बदलकर कतर की ओर मुड़ रहा था. तभी अचानक रडार से लापता हो गया. ये घटना खाड़ी में हवा में ईंधन भरने के अभियान के दौरान विमान द्वारा रास्ता बदलने और ऊंचाई कम करने के बाद हुई. हालांकि, अमेरिकी एयरफोर्स ने इस घटना को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।  शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि विमान में कितने चालक दल के सदस्य सवार थे. अमेरिकी वायु सेना के आंकड़ों के अनुसार, इस विमान को आमतौर पर एक ही चालक दल का सदस्य संचालित करता है और इसमें एक कार्गो डेक होता है, जिसमें यात्री भी बैठ सकते हैं. ट्रांसपॉन्डर सिग्नल गायब होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, अभी तक मलबे, डिस्ट्रेस कॉल, बचाव अभियान या समुद्री अलर्ट की कोई पुष्टि नहीं हुई है।  बता दें कि 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद से ईरान ने इस क्षेत्र में लक्षित हमलों में कई अमेरिकी सैन्य विमानों को मार गिराने का दावा किया था।  एक घंटे बाद पूरी तरह गायब गल्फ न्यूज़ के अनुसार, इमरजेंसी कोड दिखने के लगभग एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया. हालांकि, सिर्फ सिग्नल खो जाना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ाता है. अब तक किसी मलबे, संकट संदेश (distress call), रेस्क्यू ऑपरेशन या समुद्री अलर्ट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. विमान में कितने क्रू मेंबर थे, यह भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि आमतौर पर KC-135 सीमित क्रू के साथ ऑपरेट किया जाता है।  क्यों अहम है यह मामला? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ग्लोबल ऑयल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है. इस इलाके में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ सकता है. ऐसे में KC-135 का अचानक गायब होना सुरक्षा और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

लेनिन की मूर्ति हुई क्षतिग्रस्त, TMC कार्यालय पर कांग्रेस का अधिकार—बंगाल में बढ़ा उबाल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान आरोपियों ने नारेबाजी भी की। पुलिस के अनुसार आरोपियों की अभी पहचान नहीं हो सकती है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। रात के अंधेरे में तोड़फोड़ यह घटना श्रीपत सिंह कॉलेज के सामने स्थित जियागंज-अजीमगंज नगर पालिका के वार्ड नंबर 2 में मंगलवार रात करीब 10:30 बजे हुई। इस घटना का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें कुछ लोग मूर्ति को नुकसान पहुंचाते हुए नजर आ रहे हैं, वीडियो में लोग जय श्री राम के नारे लगाते हुए भी दिख रहे हैं। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार, जब पुलिस को घटना की सूचना मिली तो मौके पर जियागंज थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उससे पहले ही घटना में शामिल लोग वहां से फरार हो गए। पुलिस ने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। तोड़ी गई लेनिन की प्रतिमा पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के जियागंज में एक घटना सामने आई है, जहां लेनिन की दशकों पुरानी प्रतिमा को तोड़ दिया गया. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को गिराया और उसकी जगह दूसरी प्रतिमा लगाने की योजना बनाई. तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इस तोड़फोड़ में बीजेपी समर्थकों का हाथ है।  वहीं, बीजेपी का कहना है कि इस घटना में उसके कार्यकर्ताओं या समर्थकों की कोई भूमिका नहीं थी. पार्टी का दावा है कि चुनाव के बाद के जश्न के दौरान वहां अलग-अलग समूहों के लोग मौजूद थे, और हो सकता है कि किसी अज्ञात शख्स ने यह हरकत की हो।  कांग्रेस ने नदिया में टीएमसी कार्यालय परकब्ज़ा कर लिया है. यह घटना नदिया जिले के करीमपुर 2 ब्लॉक की नतिडांगा ग्राम पंचायत में हुई. कांग्रेस का कहना है कि यह दफ्तर पहले उसी का था, टीएमसी ने इस पर कब्जा कर लिया था TMC दफ्तर पर बुलडोजर मंगलवार रात को मध्य कोलकाता में उस वक्त तनाव फैल गया, जब बुलडोजरों के साथ आए लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर ऐतिहासिक हॉग मार्केट इलाके के पास तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक दफ़्तर को निशाना बनाया. इस घटना से दुकानदारों में दहशत फैल गई और उन्हें अपनी दुकानें अचानक बंद करनी पड़ीं।  टीएमसी का न्यू मार्केट में यूनियन दफ़्तर लोगों का मुख्य निशाना था और उसे पूरी तरह से ढहा दिया गया. इलाके में हुई तोड़-फोड़ और अफरा-तफरी की तस्वीरें तेज़ी से फैल गईं, जिससे स्थानीय दुकानदारों की चिंता और बढ़ गई. कोलकाता के सबसे व्यस्त कारोबारी केंद्रों में से एक में जब हालात बिगड़ने लगे, तो घबराए हुए व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और वहां से भाग निकले।  न्यू मार्केट इलाके में हिंसा और बुलडोजर एक्शन को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्र ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कोलकाता का ऐतिहासिक न्यू मार्केट. बंगाली परिवर्तन का आनंद ले रहे हैं।  TMC के सीनियर लीडर डेरेक ओ'ब्रायन ने यह भी आरोप लगाया कि यह तोड़फोड़ सरकारी निगरानी में की गई. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मध्य कोलकाता में न्यू मार्केट के पास पुलिस की अनुमति से जीत के जश्न के हिस्से के तौर पर मीट की दुकानों को गिराने के लिए एक बुलडोजर लाया गया. CAPF के जवान आस-पास खड़े थे.” उन्होंने आगे कहा, “यही है बीजेपी. दुनिया इन तस्वीरों को देखे।  टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने लिखा, "जगतबल्लभपुर में TMC पार्टी के दफ़्तर को कथित तौर पर बीजेपी के उपद्रवियों ने आग लगा दी है. यह उस स्थिति का एक चिंताजनक आईना है, जिसे झेलने के लिए अब बंगाल के लोग मजबूर हैं।  'बीजेपी का परिवर्तन बुलडोजर के साथ…' ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को बीजेपी पर मध्य कोलकाता में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया. पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने न्यू मार्केट इलाके के पास दुकानों और एक पार्टी दफ़्तर में तोड़फोड़ की।  सोशल मीडिया पर जारी एक कड़े बयान में टीएमसी ने दावा किया कि 'बीजेपी समर्थकों की भीड़' ने जमकर उत्पात मचाया. टीएमसी ने इस घटना को 'खुली गुंडागर्दी और अराजकता' करार दिया है. पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हिंसा में स्थानीय कारोबारियों और तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर को निशाना बनाया गया, जिससे व्यापारियों में दहशत फैल गई।  टीएमसी ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी के सीनियर नेता पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई ऐसी हरकतों को बढ़ावा दे रहे हैं. इन नेताओं में नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी शामिल हैं. बढ़ते तनाव पर चेतावनी देते हुए टीएमसी ने कहा कि यह घटना एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है, जिसे पार्टी ने 'बुलडोजर की राजनीति' का नाम दिया है।  TMC और BJP वर्कर की हत्या बंगाल में जारी हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने बताया कि मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को दिन में बीरभूम के नानूर में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई।  वहीं, मंगलवार शाम न्यू टाउन इलाके में जीत के जुलूस के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की मौत हो गई।  चुनाव आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश… निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद किसी भी किस्म की और किसी के भी हिंसा फैलाने … Read more

सुपर फास्ट! चीन ने 1000 की स्पीड वाली ट्रेन का सफल परीक्षण किया

बीजिंग  सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो चीन की 1000 किलोमीटर प्रति घंटे से चलने वाली ट्रेन का है. जी हां, चीन 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेन पर काम कर रहा है और अब चीन ने इसका परीक्षण किया है. सोशल पर दावा किया जा रहा है चीन ने इस खास ट्रेन का एडवांस स्टेड परीक्षण किया है।  ये ट्रेन मैग्नेटिक लेविटेशन वाली वैक्यूम ट्यूब के अंदर 1000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है. इससे 200 किलोमीटर की दूर कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये ट्रेन कितनी खास है और चीन का ये खास प्रोजेक्ट कैसा है? सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है,  उसमें ट्रेन की वैक्यूम ट्यूब को दिखाया जा रहा है और इस ट्रेन के बारे में बताया जा रहा है कि ये कितनी तेज है. ये कई मायनों में एयरप्लेन से भी तेज साबित हो सकती है।  ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, ये अल्ट्रा हाई स्पीड लॉ वैक्यूम ट्यूब माग्लेव ट्रांसपोर्ट सिस्टम है. इस ट्रेन सिस्टम की हाई स्पीड 1000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. बताया जा रहा है कि जब ये ट्रेन चलेगी तो बीजिंग से शंघाई का सफर सिर्फ 90 मिनट में हो जाएगा, जो करीब 1200 किलोमीटर है।  4000 तक स्पीड ले जाने पर काम अगर भारत के शहरों से हिसाब से लगाया जाए तो दिल्ली से पटना तक की दूरी करीब 1 घंटे में पूरी हो सकती है. इस ट्रेन की खास बात ये है कि इतनी तेज चलने के बाद भी इस हाईस्पीड ट्रेन में पैसेंजर अपने स्मार्टफोन पर अल्ट्रा-हाई-डेफिनिशन वीडियो देख सकते हैं या ऑनलाइन गेम का आनंद ले सकते हैं. इतनी तेज स्पीड होने के बाद भी इसमें 5 जी इंटरनेट भी चलेगा. इसके साथ ही चीन का ये प्लान भी है कि इस ट्रेन की स्पीड को 4000 तक भी किया जाएगा।  ये ट्रेन ट्यूब के अंदर चलेगी. चीन की 1000 किमी/घंटा की रफ्तार वाली मैगलेव ट्रेन के 2027-2035 के बीच चालू होने की संभावना है. कुछ साल पहले चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CASIC) ने इस मैग्लेव ट्रेन का परीक्षण शांसी स्थित टेस्ट जोन में किया था।  यहां पर दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के अंदर वैक्यूम क्रिएट करके ट्रेन को चलाया गया था. अब चीन इस ट्रेन को बड़े शहरों के बीच चलाने की कोशिश कर रहा है. उत्तर चीन के शांसी प्रांत के डाटोंग शहर में इस ट्रेन के लिए सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव टेस्ट लाइन बनाई गई है।  इससे पहले भी चीन हाई स्पीड ट्रेन के मामले में काफी तरक्की कर चुका है और 600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली बुलेट ट्रेन चला रहा है। 

घरों से विधानसभा तक का सफर: कलिता माझी बनी बीजेपी विधायक

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसी कहानी उभरी है, जो सिर्फ जीत-हार से कहीं आगे जाकर उम्मीद, संघर्ष और बदलाव की मिसाल बन गई. बीजेपी की कलिता माझी ने, तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्न लोहार को हराकर औसग्राम (SC) विधानसभा क्षेत्र संख्या 273 में जीत हासिल की है. कलिता माझी ने श्यामा प्रसन्न को 12,535 वोटों के अंतर से हराया।  कलिता माझी को कुल 107692 वोट मिले, जबकि श्यामा प्रसन्न को 95157 वोटों से ही संतुष्ट करना पड़ा. इसके अलावा सीपीआई (एम) के चंचल कुमार माझी को 16478, कांग्रेस के तापस बराल को 2082 और निर्दलीय उम्मीदवार निहार कुमार हाजरा को महज 994 वोट ही मिल सके।  बीजेपी सांसद पी. सी. मोहन ने ‘एक्स’ पर लिखा, “बीजेपी बंगाल की उम्मीदवार कलिता माझी, जो 4 घरों में घरेलू कामगार के तौर पर काम करती हैं और महीने के ₹2,500 कमाती हैं, ने औसग्राम निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है. यही बीजेपी की ताकत है, जहां एक आम नागरिक भी आगे बढ़ सकता है और एक सचमुच प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है।  औसग्राम सीट से बीजेपी उम्मीदवार कलिता माझी (Kalita Majhi) की जीत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत क्या होती है. चार घरों में घरेलू काम करके हर महीने महज 2,500 रुपये कमाने वाली कलिता माझी का सफर आसान नहीं रहा।  रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने कभी यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे विधानसभा तक पहुंचेंगी. लेकिन यही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है, जहां जमीन से जुड़ा एक साधारण नागरिक भी अपनी मेहनत और हौसले के दम पर इतिहास रच सकता है।  औसग्राम जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय से पारंपरिक राजनीति का असर रहा है, वहां कलिता माझी की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी मानी जा रही है. यह जीत उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। 

अग्नि-4 मिसाइल का परीक्षण हो सकता है बंगाल की खाड़ी में, NOTAM जारी

 नई दिल्ली भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी में लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है. यह चेतावनी 25 अप्रैल से 6 मई 2026 तक लागू रहेगी. NOTAM में करीब 3550 किलोमीटर लंबा खतरे का इलाका घोषित किया गया है।  रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान अग्नि-4 मिसाइल का परीक्षण किया जा सकता है. यह परीक्षण ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के आसपास होने जा रहा है, जिससे यह परीक्षण सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी देने वाला माना जा रहा है. अग्नि-4 मिसाइल की विशेषताएं  अग्नि-4 भारत की महत्वपूर्ण मिसाइलों में से एक है. यह एक Intermediate Range Ballistic Missile (IRBM) है।      रेंज: 3500 से 4000 किलोमीटर       वजन: लगभग 17 टन       लंबाई: करीब 20 मीटर       ईंधन: सॉलिड फ्यूल (ठोस ईंधन)       चरण: दो चरण वाली मिसाइल        वॉरहेड: 1000 किलोग्राम तक का परमाणु या पारंपरिक हथियार ले जा सकती है.       विशेषता: बेहद सटीक निशाना लगाने की क्षमता और मोबाइल लॉन्चर पर चलने वाली मिसाइल।  अग्नि-4 भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह रेल और सड़क दोनों जगहों से लॉन्च की जा सकती है, जिससे दुश्मन को इसे पहले से नष्ट करना बहुत मुश्किल होता है।  क्यों जारी किया गया NOTAM? NOTAM जारी करके भारत ने पायलटों और जहाजों को चेतावनी दी है कि वे तय क्षेत्र में न जाएं. यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में है, जो अग्नि-4 जैसी मिसाइल के परीक्षण के लिए उपयुक्त है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फ्लाइट पाथ और खतरे वाले क्षेत्र की दूरी अग्नि-4 की क्षमता से बिल्कुल मेल खाती है।  ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर परीक्षण का मतलब ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर किया गया था. अब ठीक एक साल बाद यह मिसाइल परीक्षण हो रहा है. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से वर्षगांठ से जोड़ा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण भारत की सैन्य तैयारियों और मजबूती का संदेश देगा।  भारत की मिसाइल क्षमता बढ़ रही है हाल के महीनों में भारत ने अपनी मिसाइलों के परीक्षण तेज कर दिए हैं. अग्नि सीरीज के अलावा K-4 (सबमरीन से लॉन्च होने वाली), हाइपरसोनिक मिसाइल LRAShM और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के 800 किलोमीटर रेंज वाले वर्जन का परीक्षण चल रहा है।  ब्रह्मोस का नया वर्जन 2027 तक भारतीय सेना में शामिल होने वाला है. इन सभी परीक्षणों से साफ है कि भारत अपनी रक्षा क्षमता को लगातार आधुनिक और मजबूत बना रहा है।  क्यों जरूरी है अग्नि-4 जैसी मिसाइल? अग्नि-4 चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है. यह मिसाइल भारत को क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस नीति को मजबूत करती है. ठोस ईंधन होने के कारण इसे जल्दी लॉन्च किया जा सकता है. दुश्मन के रडार से बचना भी आसान होता है।  बंगाल की खाड़ी में जारी NOTAM और अग्नि-4 का संभावित परीक्षण भारत की सैन्य ताकत और तैयारियों को दर्शाता है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर यह परीक्षण रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को बेहतर बना रहा है ताकि देश की सुरक्षा अटूट बनी रहे। 

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से सैलरी 283% तक बढ़ सकती है

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ी खबर है। नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह मांग मंजूर हो जाती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम मूल सैलरी और पेंशन में 283% तक का ऐतिहासिक उछाल आ सकता है। क्या है 3.83 फिटमेंट फैक्टर और इससे कितनी बढ़ेगी सैलरी? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था। अब JCM ने इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग रखी है। अगर मांग मान ली जाती है तो मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 × 3.83 = ₹68,940 हो जाएगा। वहीं, न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़कर ₹34,470 हो जाएगा। यानी सैलरी और पेंशन दोनों में 283% की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह सिर्फ कर्मचारियों की मांग है, अंतिम फैसला सरकार करेगी। क्या वाकई 283% बढ़ोतरी मिलेगी? हालांकि, 283% का आंकड़ा काफी चर्चा में है, लेकिन पिछले अनुभवों से समझा जा सकता है कि सरकार आमतौर पर कर्मचारियों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर तय करती है। एक्सपर्ट्स के अनुमान के अनुसार, सरकार 1.8 से 2.86 के बीच फिटमेंट फैक्टर लागू कर सकती है। ऐसे में असली बढ़ोतरी करीब 13% से 35% के बीच रहने की संभावना है, न कि 283%। फिर भी, यह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फायदा होगा। कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं? JCM ने सिर्फ सैलरी बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा है। उनकी अन्य प्रमुख मांगों में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली, वेतन स्तरों को घटाकर सिर्फ 7 लेवल करना, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) 30% करना, सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करना, और 30 साल की सेवा में कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करना शामिल है। इन मांगों पर सरकार का फैसला अभी बाकी है। कब बना 8वां वेतन आयोग और कब मिलेगा फायदा? 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी। 3 नवंबर 2025 को इसका औपचारिक गठन किया गया। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। उम्मीद है कि सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, भले ही औपचारिक लागू होने में देरी हो। संभावित तारीखों के अनुसार, कर्मचारियों को 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन मिलना शुरू हो जाएगा। 7वां और 8वां वेतन आयोग में तुलना अगर 7वें वेतन आयोग की बात करें, तो उसमें फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 और अधिकतम ₹2,50,000 था। वहीं 8वें वेतन आयोग के लिए प्रस्तावित 3.83 फैक्टर से न्यूनतम मूल वेतन ₹68,940 हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स अनुमान बताते हैं कि असली फैक्टर 2.86 के आसपास हो सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन करीब ₹51,480 बनता है। क्या पेंशनर्स को भी फायदा होगा? जी हां, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर समान रूप से लागू होंगी। जिस फिटमेंट फैक्टर से सक्रिय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, उसी फैक्टर से पेंशनभोगियों की पेंशन भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही, पिछली तारीख (1 जनवरी 2026) से एरियर भी दिया जाना संभव है।

नई सरकार के शपथ ग्रहण में 9 मई की तारीख क्यों है शुभ, BJP का फैसला

कोलकाता  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज पूर्वी भारत के उस अहम गढ़ में प्रवेश कर लिया. इस शानदार जीत के बाद बीजेपी ने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 9 मई की तारीख तय की है. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि बीजेपी ने इस दिन का चयन क्यों किया है. बताया जा रहा है कि बुधवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता आएंगे. वह यहां बीजेपी के जीते हुए विधायकों से बातचीत करेंगे जिसके बाद विधायक दल का नेता और बंगाल के नये मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा  बंगाल के लिए खास है 9 तारीख दरअसल, 9 मई को गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती होती है. बंगाल की संस्कृति से रविंद्र नाथ टैगोर के संगीत और साहित्य का क्या महत्व है यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान तृणूमल कांग्रेस और ममता बनर्जी यही आरोप लगाती रहीं कि बीजेपी सत्ता में आते ही बंगाल की संस्कृति से खिलवाड़ करेगी. ऐसे बीजेपी नई सरकार के गठन के लिए रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती का दिन चुना है, ताकि वह टीएमसी के आरोपों का जवाब दे सके कि बीजेपी बंगाल की सभ्यता और संस्कृति का कितना ख्याल करती है. पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने भी 9 मई की तारीख पर मुहर लगाई है  बंगाल में बीजेपी की जीत है खास पश्चिम बंगाल में भाजपा की यह निर्णायक जीत सिर्फ चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ममता बनर्जी के लंबे वर्चस्व को बड़ा झटका देते हुए राज्य की राजनीति को नया स्वरूप दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘जनता की शक्ति और सुशासन की जीत’ बताया. 2014 में सीमित उपस्थिति से शुरू हुई भाजपा की यात्रा 2019 में उभार, 2021 में चुनौतियों और अब 2026 में स्पष्ट जनादेश तक पहुंची है।  यह जीत राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की मजबूत होती राजनीतिक पकड़ को भी दर्शाती है. पार्टी ने अपनी रणनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा, घुसपैठ रोकने, सीमा बाड़बंदी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा, सीएए और यूसीसी जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी. साथ ही, कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास, महिलाओं की सुरक्षा और केंद्र की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।  प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह जैसे शीर्ष नेताओं के आक्रामक प्रचार ने सत्ता विरोधी लहर को मजबूत किया. हालांकि, जीत के बाद भाजपा के सामने ध्रुवीकृत समाज, क्षेत्रीय पहचान और तृणमूल कांग्रेस के मजबूत विपक्ष जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी।  इसके बावजूद, यह परिणाम एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है, जिसने भाजपा को चुनौती देने वाली पार्टी से सत्तारूढ़ शक्ति में बदल दिया है और बंगाल की राजनीति को नए दौर में पहुंचा दिया है। 

पाकिस्तानी नेता शाहीर सियालवी का ऐलान: सेना ने हाफिज सईद और मसूद अजहर के लिए लड़ा ऑपरेशन

लाहौर  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. अब इस ऑपरेशन के एक साल बाद पाकिस्तान से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान के एक नेता ने खुलेआम स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की सेना ने हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों के लिए लड़ाई लड़ी थी. यह बयान आतंकियों की एक बैठक में दिया गया, जिसने पाकिस्तान की असली नीति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।  क्या कहा पाक नेता ने? लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी नेता शाहीर सियालवी ने कहा… पहली बार पाकिस्तान की सेना ने हाफिज सईद और मसूद अजहर के लिए लड़ाई लड़ी. उन्होंने यह भी माना कि भारत ने 10 मई को मुरीदके (लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय) और बहावलपुर (जैश-ए-मोहम्मद का केंद्र) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. इन हमलों में कई आतंकवादी मारे गए थे।  पाकिस्तान ने बदली रणनीति सियालवी के अनुसार, हमलों के बाद पाकिस्तान ने दुनिया को गुमराह करने के लिए अपनी रणनीति बदल दी. आतंकियों के जनाजे की नमाज, मौलवी या मुफ्ती से नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के धार्मिक अधिकारी ने पढ़ाए. पाकिस्तानी सैनिक वर्दी पहनकर इन आतंकियों के शव लेकर निकले. इसका मकसद था दुनिया को यह दिखाना कि मारे गए आतंकी नहीं, बल्कि आजादी के लड़ाके थे।  आतंकियों की महफिल में खुलासा यह बयान लश्कर-ए-तैयबा के कार्यक्रम में दिया गया, जिसमें अमेरिका द्वारा घोषित आतंकी मुजम्मिल इकबाल हाशमी भी मौजूद था. इस बैठक में पाकिस्तान की सेना और आतंकियों के बीच गहरे संबंध साफ दिखाई दिए।  पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के अंदर लश्कर और जैश के मुख्य ठिकानों पर सटीक हमले किए थे. भारत का कहना था कि आतंकियों को सबक सिखाने के लिए जरूरी था।  इस खुलासे का मतलब यह बयान साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ दिखावा करता है. हकीकत में उसकी सेना कुछ खास आतंकी संगठनों और उनके सरगनाओं की खुलेआम मदद कर रही है. हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को पाकिस्तान अपनी सुरक्षा समझता है।  पाकिस्तान की यह नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके लिए शर्मनाक है. दुनिया के सामने उसकी दोहरी नीति को फिर से उजागर करती है. ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद पाकिस्तान के नेता का यह बयान भारत के लिए कोई नई बात नहीं है, लेकिन दुनिया के लिए यह सबूत है कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।  भारत लगातार कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंकियों का समर्थन करता है. अब खुद पाकिस्तान के लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। 

अमेरिका की ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ तैनाती के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक तनाव और गहराया

अबू धाबी/तेल अवीव  ईरान ने सोमवार शाम को संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की राजधानियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर मिडिल ईस्ट जंग के मुहाने पर पहुंच गया है। इन हमलों के बाद इजरायल के लिए खतरा बढ़ गया है। विश्लेषकों का कहना है इजरायल जल्द ही एक बार फिर ईरान के निशाने पर हो सकता है। विश्लेषक ईरान के हमलों को उसी तैयारी की पृष्ठभूमि में देखते हैं। यह हमले ऐसे समय में हुए जब अमेरिका ने अपने दो विध्वंसक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए फारस की खाड़ी में भेजा है। ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम की घोषणा की है, जो सोमवार को शुरू हुआ है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोलना है। इसके पहले अमेरिका ने युद्धविराम का इस्तेमाल करते हुए एक विशाल नौसैनिक, हवाई और जमीनी सेना तैयार कर ली है। ईरान को किस बात का खौफ? तेहरान समझ गया है कि अगर अमेरिका होर्मुज को कमर्शियल जहाजों के लिए आंशिक रूप से भी खोलने में कामयाब हो जाता है, तो ईरान बातचीत में अपनी मोलभाव करने की ताकत खो देगा। इसके अलावा उसे ऐसी शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी जो उसके शासन के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है। अमेरिका नेवी के विध्वसंक जहाज अब ईरानी तट और जहाजों के बीच खड़े हैं और उन पर होने वाले हर हमले का जवाब देने को तैयार हैं। इसमें मिसाइल-जैमर सिस्टम के साथ सेंट्रल कमांड के टोही विमान और ड्रोन तैनात किया है। ये विध्वंसक जहाजों के ऊपर गश्त करते हुए दुश्मन के हर लॉन्च का पता लगाते हैं और उस पर हमला करते हैं। अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने ईरान की छह स्पीडबोट्स को डुबो दिया है। UAE पर तेहरान ने क्यों किया हमला? ईरान समझता है कि ऐसे किसी भी टकराव में ईरान के सफल होने की संभावना नहीं है। यही कारण है कि तेहरान ने खाड़ी देशों पर पहले हमला करने का फैसला किया। सबसे पहले UAE को निशाना बनाया, जो खाड़ी देशों के बीच ईरान के विरोध का नेतृत्व करता है। तेहरान के पास UAE की तेल सुविधाओं और बंदरगाहों पर हमला करने की असीमित क्षमता मौजूद है। UAE में इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में UAE की मिसाइल और ड्रोन रक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर काम किया है। इनमें इजरायल के आयरन डोम और लेजर वेपन आयरन बीम की UAE में तैनाती अहम है। इसके बावजूद अमीरात का तेल उद्योग ईरान के हमले के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। इजरायली विश्लेषकों का कहना है कि UAE और ओमान पर किए गए हमले अभी बस एक शुरुआत हैं। तेहरान इस बात को समझता है कि अगर वह इस अभियान में हार जाता है और ईरान पर ट्रंप की घेराबंदी जारी रहती है, तो ईरान के इस्लामिक शासन के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगेगा।

5 राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की जीत का पैटर्न: ज्यादातर विजेता मुस्लिम उम्मीदवार

 नई दिल्ली हालिया विधानसभा चुनावों को लेकर सामने आए आंकड़ों में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है. असम, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस के जिन उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम नेताओं की रही।  असम में 19 सीटों में 18 पर जीत असम में कांग्रेस को मिली 19 सीटों में से 18 पर मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. पार्टी ने वहां 20 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 18 जीत गए, जबकि गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों में सिर्फ एक ही जीत सका. कांग्रेस के सहयोगी राइजर दल को भी 2 सीटें मिलीं, जिनमें एक मुस्लिम उम्मीदवार और दूसरी सीट अखिल गोगोई ने जीती।  केरल में 35 मुस्लिम विधायक केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में 35 मुस्लिम विधायक चुने गए, जिनमें से 30 कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन से हैं. इनमें 8 कांग्रेस और 22 इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के विधायक शामिल हैं।  पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को दो सीटें मिलीं और दोनों पर मुस्लिम उम्मीदवार जीते. यहां कांग्रेस ने 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया, जो तृणमूल कांग्रेस के 47 उम्मीदवारों से ज्यादा है. तमिलनाडु में कांग्रेस ने दो मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, जिनमें से एक जीतने में सफल रहा।  मुस्लिम उम्मीदवारों का जीत प्रतिशत 80 रहा सूत्रों का कहना है कि असम और केरल में कांग्रेस गठबंधन के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत दर करीब 80 फीसदी रही. वहीं, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल करते हुए 15 साल पुरानी टीएमसी सरकार को हटा दिया. असम में भी एनडीए तीसरी बार सरकार बनाने जा रहा है, जहां उसने 126 में से 102 सीटें जीतीं।  तमिलनाडु में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि केरल में 10 साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन फिर से सरकार बनाने जा रहा है।  केरल में भाजपा को तीन सीट केरल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तीन सीटें जीतकर राज्य में अपना सूखा खत्म किया, लेकिन कई सीटों पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही. मतगणना के बाद बीजेपी तिरुवल्ला, पालक्काड, मलमपुझा, अट्टिंगल, कासरगोड और मंजेश्वर सीटों पर दूसरे नंबर पर रही. तिरुवल्ला में पार्टी के नेता अनूप एंटनी को 43,078 वोट मिले और वह करीब 10 हजार वोटों से हार गए, लेकिन यहां पार्टी का वोट शेयर पहले से बढ़ा है।  पालक्काड में वरिष्ठ नेता शोभा सुरेंद्रन को कड़े मुकाबले में यूडीएफ के रमेश पिशारोड़ी से करीब 13 हजार वोटों से हार मिली, हालांकि यहां भी बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा. अट्टिंगल में पी. सुधीर दूसरे स्थान पर रहे और उन्होंने भी पार्टी का वोट शेयर बढ़ाया।  वहीं मलमपुझा, कासरगोड और मंजेश्वर में बीजेपी उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन इन सीटों पर पार्टी अपने वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी नहीं कर पाई. कुल मिलाकर, बीजेपी ने सीटें भले कम जीती हों, लेकिन कई क्षेत्रों में अपने जनाधार को मजबूत करने के संकेत दिए हैं।  चुनाव नतीजों के अनुसार, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 140 में से 102 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की, जबकि सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ को 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा।