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NEET घोटाले की जांच में नया मोड़: सीहोर से जुड़ा निकला मास्टमाइंड शुभम का कनेक्शन

सीहोर NEET 2026 पेपर लीक मामले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का कनेक्शन सामने आया है. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉक्टर शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो कभी सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी में बीएएमएस का छात्र रह चुका है. इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश तक जुड़े होने की आशंका पर भी जांच कर रही हैं।  3 मई को हुई थी शुभम की गिरफ्तारी जानकारी के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने 3 मई 2026 को शुभम खैरनार को हिरासत में लिया था. तब से उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शुभम का सीहोर की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से संबंध रहा है. इसके बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी से भी संपर्क कर आरोपी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और गतिविधियों की जानकारी जुटाई।  सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शुभम किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था और क्या उसने मेडिकल शिक्षा संस्थानों के माध्यम से किसी तरह का संपर्क या नेटवर्क तैयार किया था. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि पेपर लीक से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ उसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।  हालांकि इस पूरे मामले में श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने आरोपी शुभम खैरनार से खुद को अलग कर लिया है. यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी ने स्पष्ट कहा कि शुभम ने वर्ष 2021 में बीएएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश जरूर लिया था, लेकिन प्रवेश के बाद वह कभी नियमित रूप से यूनिवर्सिटी नहीं आया. कुलपति के मुताबिक उसने न तो किसी परीक्षा में हिस्सा लिया और न ही किसी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भागीदारी की।  यूनिवर्सिटी का दावा, कभी क्लास में नहीं आया था आरोपी यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आरोपी का संस्थान से केवल नाममात्र का संबंध था और उसका कैंपस गतिविधियों से कोई जुड़ाव नहीं रहा. इसके बावजूद पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी की भूमिका केवल सीमित थी या वह बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा था।  गौरतलब है कि NEET 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें बड़ी रकम के लेनदेन के जरिए अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए।  अब सीहोर कनेक्शन सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है. राजस्थान पुलिस आरोपी शुभम खैरनार से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और शैक्षणिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

वीआईपी कल्चर छोड़ बस में सफर: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारियों ने अपनाई सादगी

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाओ' अपील और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने काम करने का तरीका भी बदल दिया है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही बस में बैठकर सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच प्रशासन का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, कमिश्नर – अधिकारी निरिक्षण के लिए अलग वाहन नहीं बल्कि ट्रेवलर से पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, आशीष सिंह ने मितव्ययिता के नियमों के अनुरूप, अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में यात्रा करके सिंहस्थ से संबंधित कार्यों का नियमित निरीक्षण शुरू किया। इससे पहले, अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करते थे। नियमित दौरे के हिस्से के रूप में, व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और नए घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्गों के विकास की निगरानी करने हेतु गौ घाट से अन्य घाटों तक निरीक्षण किए गए। सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं। अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती 15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे। अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है। रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। टीम भावना भी मजबूत होगी मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया। सिंहस्थ के लिए इतना बजट है प्रस्तावित बता दें कि, आगामी सिंहस्थ के लिए, ₹3,060 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। कंठल चौराहे से सती गेट तक सड़क चौड़ीकरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। निर्माण कार्य की समय सीमा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य 2027 तक, यानी सिंहस्थ आयोजन से 6 महीने पहले ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि आखिरी समय में कोई समस्या न हो। 90 प्रवेश द्वारों से जुड़ेगा घाट क्षेत्र शिप्रा नदी के बाएं तट पर निर्मित हो रहे 14.5 किमी लंबे नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु 65 प्रवेश-निर्गम मार्ग चिन्हित किए गए हैं। कुल 90 प्रवेश द्वारों को एप्रोच मार्गों और पार्किंग से जोड़ा जाएगा।  

PSEB 12वीं में बेटियों का जलवा: मानसा-लुधियाना की छात्राओं ने हासिल किए पूरे नंबर

चंडीगढ़    पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने बुधवार को 12वीं कक्षा के वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए। बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि इस वर्ष भी मेरिट सूची में छात्राओं का दबदबा रहा। खास बात यह रही कि राज्य में पहले तीन स्थान हासिल करने वाली सभी छात्राओं ने 500 में से 500 अंक प्राप्त कर इतिहास रच दिया। बोर्ड चेयरमैन ने बताया कि इन छात्राओं ने पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिसके चलते उन्हें खेल कोटे के अतिरिक्त अंक भी मिले। पहला स्थान हासिल करने वाली सुपनीत कौर मानसा जिले के गांव उभा की रहने वाली हैं। वह शूटिंग खिलाड़ी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं। दूसरे स्थान पर रहीं सुहानी चौहान बेसबॉल खिलाड़ी हैं और पंजाब स्तर की प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं। तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली देवांसी सॉफ्टबॉल खिलाड़ी हैं और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर चुकी हैं। मानसा और लुधियाना में खुशी का माहौल नतीजों के बाद मानसा के गांव उभा में सुपनीत कौर की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है। वहीं, लुधियाना के दो स्कूलों की छात्राओं ने राज्य मेरिट सूची में दूसरा और तीसरा स्थान हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने छात्राओं की इस शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। परिणामों ने एक बार फिर साबित किया कि पंजाब की बेटियां शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। रिजल्ट कैसे देखें     आधिकारिक वेबसाइट pseb.ac.in पर जाएं।     होमपेज पर, PSEB कक्षा 12वीं रिजल्ट 2026 लिंक पर क्लिक करें।     अपना रोल नंबर और जन्म तिथि डालें, और सबमिट बटन दबाएं।     रिजल्ट सेव और डाउनलोड कर लें।  

CHB हाउसिंग पर बड़ा फैसला: चुनिंदा बदलावों को मंजूरी देने की सिफारिश, दोबारा सर्वे शुरू

चंडीगढ़  चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के मकानों में किए गए बदलावों और अतिरिक्त निर्माणों की समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी शहर के 65 हजार से ज्यादा CHB मकानों में हुए नीड बेस्ड चेंजेज की जांच करेगी।  2023 में लाई गई थी पॉलिसी CHB मकानों में लंबे समय से लोग अपनी जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त कमरे, बालकनी कवर, किचन एक्सटेंशन और अन्य निर्माण कर रहे हैं। इन बदलावों को लेकर लगातार विवाद बना हुआ था। इसके बाद 2023 में प्रशासन ने नीड बेस्ड चेंजेज पॉलिसी लागू की थी, ताकि कुछ निर्माणों को नियमों के तहत मंजूरी दी जा सके। हालांकि, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों और मकान मालिकों का कहना है कि यह पॉलिसी पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी और इसमें कई तरह की तकनीकी शर्तें रखी गईं, जिनके कारण लोगों को राहत नहीं मिल सकी। सेक्टर-41 और 45 में कार्रवाई के बाद भड़का विवाद मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब हाल ही में CHB ने सेक्टर-41 और सेक्टर-45 में अवैध एक्सटेंशन और निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए। कई राजनीतिक दलों ने भी प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और लोगों के पक्ष में बयान दिए। निवासियों का कहना था कि वर्षों से बने निर्माणों को अचानक अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है, जबकि प्रशासन पहले इस पर चुप था। लोगों ने वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू करने की मांग भी उठाई, ताकि जुर्माना लेकर निर्माण नियमित किए जा सकें। किन बदलावों को मिलेगी मंजूरी, कमेटी करेगी फैसला नई कमेटी यह तय करेगी कि किन बदलावों को नियमित किया जा सकता है और कौन से निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ हैं। प्रशासन फिलहाल सभी निर्माणों को नियमित करने के पक्ष में नहीं है। माना जा रहा है कि केवल चुनिंदा बदलावों को ही मंजूरी देने की सिफारिश की जा सकती है। CHB के अधिकारियों का कहना है कि मकानों की मूल संरचना और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ निवासी चाहते हैं कि कई साल पुराने निर्माणों को मानवीय आधार पर राहत दी जाए। शहर में हजारों परिवार प्रभावित CHB कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवार इस फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन आगे की नीति और कार्रवाई तय करेगा। फिलहाल शहर में इस मुद्दे को लेकर लोगों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।  

लंबित मामलों पर SC की कड़ी टिप्पणी, इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा- सभी कैदियों और केसों का हिसाब दीजिए

प्रयागराज  सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 35 साल से लंबित एक आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। यह मामला कुंभ मेला ड्यूटी के दौरान पुलिस मेस में खाने को लेकर हुए विवाद से जुड़ा था। पुलिसकर्मी को राहत देने के साथ ही, शीर्ष अदालत ने यूपी में पेंडिंग मुकदमों, जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल) और जमानत मिलने में हो रही देरी के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से राज्य की अदालतों में लंबित मामलों का पूरा विस्तृत डेटा तलब किया है। '35 साल का समय बहुत लंबा, त्वरित न्याय मौलिक अधिकार' बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने 29 अप्रैल के अपने फैसले में यूपी पुलिस के कांस्टेबल कैलाश चंद्र कापड़ी (आरोपी) की अपील को स्वीकार कर लिया। कापड़ी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 1991 से उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मारपीट और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों के लिए 35 साल तक मुकदमा चलना बिना किसी औचित्य के है। अदालत ने कहा, "मारपीट और धमकी के मुकदमे के लिए 35 साल बहुत लंबा समय है। त्वरित न्याय संविधान के अनुच्छेद 21 का अनिवार्य हिस्सा है। बेंच ने कहा कि इतनी लंबी कार्यवाही आरोपी के त्वरित सुनवाई और निष्पक्ष प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन है। खाने को लेकर हुआ था विवाद, 5 पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई थी FIR यह मामला 1989 का है। कुंभ मेला ड्यूटी पर तैनात पांच पुलिस कांस्टेबलों पर आरोप था कि उन्होंने इलाहाबाद के जीआरपी रामबाग पुलिस स्टेशन की मेस (भोजनालय) में खाने के विवाद के बाद एक अन्य कांस्टेबल के साथ मारपीट की थी। एफआईआर में कापड़ी समेत पांच कांस्टेबलों को आरोपी बनाया गया था। इन पर दंगा करने (धारा 147), जानबूझकर चोट पहुंचाने (धारा 323), और जानबूझकर अपमान करने (धारा 504) के साथ-साथ रेलवे अधिनियम की धारा 120 के तहत मामला दर्ज किया गया था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला इलाहाबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (रेलवे) की अदालत में पहुंचा था। सुनवाई के दौरान दो सह-आरोपियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को 2023 में इसलिए बरी कर दिया गया क्योंकि अभियोजन पक्ष किसी भी गवाह को पेश करने में विफल रहा। इसके बाद कापड़ी ने कार्यवाही रद्द करने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इलाहाबाद हाई कोर्ट से मांगा पेंडिंग केसों का विस्तृत डेटा सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल एक आरोपी को राहत देने से इस फैसले का व्यापक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। अदालती सिस्टम की बड़ी खामियों को संज्ञान में लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 13 जुलाई तक एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को 'पार्ट-हर्ड' (आंशिक रूप से सुना गया) माना है। सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामे में निम्नलिखित जानकारियां मांगी हैं: लंबित मुकदमे और कैदी: ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC), चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) और सेशन कोर्ट में पेंडिंग कुल केस, ये केस कितने पुराने हैं और विचाराधीन कैदियों की जेल में बिताई गई अवधि क्या है। अदालती बाधाएं: मुकदमों के मौजूदा स्टेटस और कोर्ट की कार्यवाही आगे बढ़ाने में आ रही अड़चनों की जानकारी। जजों की स्थिति: राज्य में JMFC, CJM और सेशन जजों की स्वीकृत संख्या, मौजूदा वर्किंग स्ट्रेंथ और खाली पदों की रिपोर्ट। भर्ती प्रस्ताव: जजों के रिक्त पदों को भरने के लिए हाई कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए पेंडिंग प्रस्तावों की स्थिति। जमानत अर्जियों पर भी मांगी गई सख्त रिपोर्ट शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष लंबित जमानत अर्जियों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी मांगी है:     30 अप्रैल 2026 तक पेंडिंग जमानत अर्जियों का साल-वार आंकड़ा।     क्या पेंडिंग जमानत अर्जियों को विचाराधीन कैदियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि के आधार पर बांटा जा सकता है?     ऐसे मामलों की संख्या जहां विचाराधीन कैदियों ने 10 साल से अधिक, 8-10 साल, 6-8 साल, 4-6 साल, 2-4 साल, 1-2 साल और 0-1 साल का समय जेल में बिताया है।     क्या पुराने जमानत मामलों और लंबे समय से जेल में बंद कैदियों के मामलों को प्राथमिकता देने का कोई सिस्टम मौजूद है?     ऐसे कैदियों की संख्या जो 5 साल से ज्यादा समय से हिरासत में हैं, लेकिन उनकी जमानत अर्जी न तो दाखिल हुई है और न ही उस पर फैसला हुआ है।

करोंद में आग का तांडव: बिल्डिंग से उठीं ऊंची लपटें, AC और फर्नीचर जलकर खाक

भोपाल भोपाल के करोंद इलाके में बुधवार को अचानक आग लग गई। जानकारी के अनुसार, आग चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में लगी, जहां KFC आउटलेट और इलेक्ट्रॉनिक शोरूम मौजूद हैं। आग की ऊंची लपटें और काला धुआं देखकर इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।  बताया जा रहा है कि, आग बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर में लगी। इसके चलते फर्नीचर भी जल गया।  राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन इस आग के चलते आर्थिक नुकसान जरूर हुआ है। इसका आंकलन किया जाएगा। बड़ा हादसा टला आग लगते ही फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया। पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। नगर-निगम की दमकल गाड़ी भी मौके पर पहुंची थी। गनीमत रही कि, बिल्डिंग में ज्यादा लोग मौजूद नहीं थे। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन अब हादसे की जांच कर रहा है। आग की वजह से इलाके में हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी के माहौल के बीच आग पर काबू पाया गया। इससे कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपए का नुकसान हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के दौरान बिल्डिंग में भीड़ नहीं थी। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन नुकसान का आंकलन लगा रहा है। क्रोमा के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के जनरेटर से भड़की आग नगर निगम के फायर प्रभारी सौरभ पटेल ने बताया कि बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम है। इसके पास में रखे जनरेटर में आग लगी थी। इस वजह से कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी थी, वहां पर केएफसी का आउटलेट भी है। हालांकि, उसे नुकसान नहीं पहुंचा। 20 मिनट में काबू में आई आग की वजह जनरेटर में शार्ट सर्किट होने को बताया जा रहा है। आग लगने की जानकारी मिलते ही पास में पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड पहुंची और उसे बुझाने लगी। इसी दौरान नगर निगम की दमकल भी आ गई। दोनों ने मिलकर आग को काबू में लिया। इस वजह से आग ज्यादा नहीं फैली। बिल्डिंग के सामने लगी भीड़ करोंद में पीपुल्स हॉस्पिटल के सामने स्थित यह बिल्डिंग है। अचानक लगी आग से इलाके में हड़कंप मच गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और दूर तक फैलता काला धुआं देखकर इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। इससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। जनरेटर में लगी थी आग नगर निगम के फायर प्रभारी के अनुसार, बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम था। इसके पास रखे जनरेटर में आग लगी थी। इसके चलते कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी वहीं केएफसी का आउटलेट है लेकिन इसे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है। करोंद इलाके में यह बिल्डिंग पीपुल्स हॉस्पिटल के बिलकुल सामने है। आग की ऊंची लपटें दूर से ही देखी जा सकती थीं। आग लगाने की सूचना मिलने पर आसपास के लोग भी पहुंचे। निशातपुरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को संभाला।

भोपाल रीजन में CBSE 12वीं का रिजल्ट जारी, इतने फीसदी स्टूडेंट्स ने मारी बाजी

भोपाल  सीबीएससी 12वीं के लिए बुधवार का बड़ा दिन है। सीबीएससी ने 12वीं का रिजल्ट घोषित कर दिया है। यह रिजल्ट बोर्ड की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। इसे उमंग एप पर भी देखा जा सकता है। भोपाल रीजन के 79.43 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं। मध्यप्रदेश के स्टूडेंट्स का इंतजार बुधवार को खत्म हो गया। सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। जैसा कि पहले ही उम्मीद की जा रही थी कि मई के दूसरे सप्ताह तक यानी 15 मई से पहले रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। पत्रिका ने भी दूसरे सप्ताह में रिजल्ट जारी होने की खबरें प्रकाशित की थी। मध्यप्रदेश से 80 हजार 454 स्टूडेंट्स 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से भोपाल जिले के 9 हजार 399 स्टूडेंट शामिल हैं। भोपाल रीजन 19वें स्थान पर क्षेत्रवार प्रतिशत देखें तो देश में पहले नंबर पर त्रिवेंद्रम रहा, जहां का रिजल्ट 95.62 प्रतिशत रहा। वहीं भोपाल 79.43 प्रतिशत के साथ 19वें नंबर पर रहा। सीबीएसई बोर्ड के भोपाल रीजन में 79.43 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं।  12वीं का रिजल्ट 85.20 प्रतिशत रहा देशभर में CBSE के रिजल्ट की बात करें तो 12वीं का कुल परिणाम 85.20 प्रतिशत रहा। इसमें लड़कियों का पास परसेंट 88.86% और लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 82.13% रहा। यानी लड़कियों ने लड़कों की तुलना में 6.73% बेहतर प्रदर्शन किया है। इस बार भी लड़कियों ने बाजी मार ली। सीबीएसई 12वीं पर एक नजर देशभर के 17 हजार से अधिक स्टूडेंट्स 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाए हैं। इस साल कुल 85.20 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं। लड़कियों का प्रदर्शन 88.86 प्रतिशत रहा। लड़कों का प्रदर्शन 82.13 प्रतिशत रहा। आधिकारिक वेबसाइट पर देखें रिजल्ट स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट cbse.gov.in और cbseresults.nic.in पर देख सकते हैं। वहीं स्कोरकार्ड के लिए डिजिलॉकर और उमंग एप पर भी देखा जा सकता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपना एडमिट कार्ड (Roll Number, School Code और Admit Card ID) निकालकर रखें। कैसा था 2025 में 12वीं का रिजल्ट CBSE 12th Results: पिछले साल 2025 की बात करें तो 12वीं की परीक्षा में मध्य प्रदेश का रिजल्ट 82.46 प्रतिशत था। मध्यप्रदेश से कुल 74,502 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से लड़कों की संख्या 38,974 और लड़कियों की संख्या 35,528 थी। एमपी में 12वीं तक सीबीएसई के कुल 1252 स्कूल हैं और कुल 475 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे। 13वें नंबर पर था भोपाल रीजन इससे पहले 2023 की बात करें तो 12वीं का रिजल्ट 83.54 प्रतिशत था और भोपाल 12वें नबर पर था। उस समय भोपाल 12वीं के 12 हजार स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक: बिहार में महंगाई भत्ता बढ़ा, कई बड़े फैसले मंजूर

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अधयक्षता में बुधवार को बिहार कैबिनेट की अहम बैठक हुई है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। इस बैठक में कुल 19 एजेंडों पर मुहर लगी है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री के अलावा कैबिनेट के लगभग सभी मंत्री मौजूद थे। करीब 40 मिनट तक यह बैठक चली है। सम्राट सरकार ने बिहार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। बिहार में कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढोतरी की गई है। राज्य सरकार बाजार से 72 हजार करोड़ का ऋण लेगी। सप्तम केंद्रीय पुनरीक्षित वेतन संरचना के तहत अब कर्मियों को 58% के बजाय 60% डीए मिलेगा। वहीं, छठे वेतनमान वालों का भत्ता 257% से बढ़ाकर 262% और पांचवें वेतनमान वालों का 474% से बढ़ाकर 483% कर दिया गया है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू होगी। कैबिनेट के बैठक में वित्त विभाग से जुड़े कुछ अन्य एजेंडों पर भी मुहर लगाई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार द्वारा 64,141.2820 करोड़ रुपये बाजार ऋण सहित कुल 72,901.3907 करोड़ रुपये के ऋण उगाही को स्वीकृति प्रदान की गई है। कैबिनेट की बैठक में बिहार के 05 जिलों पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान जिले में पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के कुल 05 पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई है। बिहार में उद्योग को बढ़ावा देने से जुड़े कुछ अहम फैसले भी कैबिनेट की बैठक में लिए गए हैं। वैशाली जिले में 100 एकड़ जमीन पर राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण को मंजूरी प्रदान की गई है। NIFTEM कैंपस की स्थापना से युवाओं को उच्च गुणवत्ता की तकनीकि शिक्षा और कौशल हासिल होगी। औद्योगिक विकास की दिशा में पटना के बिहटा में डेयरी प्लांट को भी मंजूरी दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहन योजना से प्रदूषण घटाने और रोजगार बढ़ाने पर जोर सरकार ने मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना को मंजूरी दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य वाहनजनित प्रदूषण कम करना और वर्ष 2030 तक नए वाहनों की कुल बिक्री में कम-से-कम 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। यह वैश्विक “ईवी 30एट30” अभियान को भी सहयोग देगा। सरकार का मानना है कि योजना से लोगों में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति स्वीकार्यता बढ़ेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधा उपलब्ध होगी और वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2023 में संशोधन राज्य सरकार ने बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2023 की कई धाराओं में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत इलेक्ट्रिक मालवाहक तिपहिया वाणिज्यिक वाहन, दोपहिया तथा महिलाओं के लिए चारपहिया गैर-वाणिज्यिक वाहनों की खरीद और निबंधन पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में भेजी जाएगी। सरकार के अनुसार, महिलाओं को इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन राशि दिए जाने से उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। वहीं मालवाहक इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। चार्जिंग स्टेशन लगाने पर बढ़ी सहायता राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि अधिक संख्या में चार्जर लगाने पर बढ़ी हुई दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत भी अनुदान मिल सकेगा। इससे राज्य में चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होगा। बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन को गति राज्य सरकार ने बिहार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” के तहत सिंगापुर की संस्था “ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क” का चयन किया गया है। सरकार के अनुसार, इस संस्था की मदद से राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास और नवाचार को मजबूत किया जाएगा। पांच महीने का उन्नत एआई प्रमाणन कार्यक्रम चलेगा ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिजिटल फाइनेंस और लाइनक्स फाउंडेशन के सहयोग से पांच महीने का उन्नत एआई प्रमाणन कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत अगले पांच वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित सहित अन्य विषयों के सात हजार विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र शामिल होंगे। स्टार्टअप और शोधकर्ताओं को मिलेगा तकनीकी मंच सरकार के अनुसार आर्यभट्ट टेक्नोलॉजी ऑब्जर्वेटरी नाम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम तकनीक आधारित डिजिटल मंच तैयार किया जाएगा। इससे 100 से अधिक स्टार्टअप को लाभ मिलेगा।इस मंच के जरिए उद्यमियों, छात्रों, शोधकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों को एआई तथा मशीन लर्निंग आधारित तकनीकी सुविधाएं, डाटा पाइपलाइन, बड़े भाषा मॉडल गेटवे और क्लाउड आधारित विकास मंच उपलब्ध कराया जाएगा। वैश्विक मंचों पर बिहार को मिलेगी पहचान ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के 12 अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से बिहार को वैश्विक निवेशकों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माताओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इनमें सिंगापुर फिनटेक फेस्टिवल, प्वाइंट जीरो फोरम ज्यूरिख, ब्लैक स्वान सम्मेलन और बैंकॉक डिजिटल फाइनेंस फोरम जैसे बड़े आयोजन शामिल हैं।

झारखंड में पेट्रोल-डीजल संकट गहराया, रांची और हाईवे पंपों पर सप्लाई ठप

रांची  राजधानी रांची सहित आसपास के इलाकों में पेट्रोल और डीजल की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। शहर के आधे से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने से आम लोगों के साथ-साथ ट्रक चालकों और लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल पूरी तरह खत्म हो चुका है, जबकि कुछ जगहों पर सीमित मात्रा में ही तेल दिया जा रहा है। रांची से हजारीबाग और उत्तर प्रदेश तक ट्रक चलाने वाले चालक एमडी लल्लू ने बताया कि झारखंड में स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन झारखंड में तीन डिपो होने के बावजूद हाईवे के अधिकांश पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं। उनका कहना है कि अब झारखंड की सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है और वाहन चालकों को गैलन में डीजल लेकर चलना पड़ सकता है। वहीं ट्रक चालक करण यादव ने बताया कि झारखंड से ओडिशा और अन्य राज्यों तक यात्रा के दौरान उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि हाईवे पर अधिकांश पेट्रोल पंप बंद थे, जिसके कारण उनका ट्रक चंदवे के पास बंद हो गया। बाद में एडवांस पैसे लेकर उन्होंने एक पेट्रोल पंप से मात्र दो हजार रुपये का डीजल प्राप्त किया। शहर के कई पंपों पर लंबी कतारें शहर में नामकुम से रिंग रोड, कोकर से नेवरी चौक और अरगोड़ा से दलादली चौक तक कई पेट्रोल पंपों पर मंगलवार को सप्लाई प्रभावित रही। नामकुम स्थित उरांव पेट्रोल पंप और कांटाटोली चौक के पास फ्रेंड्स पेट्रोल पंप पर पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की किल्लत बनी हुई है। मौलाना आजाद कॉलोनी के पास स्थित पेट्रोल पंप पर तेल भराने के लिए वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। शहर के अन्य पेट्रोल पंपों पर भी इसी तरह की स्थिति बनी रही। गैलन में तेल स्टोर करने लगे लोग ईंधन संकट की आशंका को देखते हुए लोग अब गैलन में भी पेट्रोल और डीजल स्टोर करने लगे हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि डिपो से नियमित आपूर्ति नहीं मिलने के कारण परेशानी बढ़ रही है। यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।  

बिजली सुधार: राजस्थान डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार, घाटा कम हुआ

जयपुर राजस्थान की बिजली वितरण कंपनियों (Rajasthan Discom) की आर्थिक सेहत में बड़ा सुधार देखने को मिला है. सालों से घाटे और कर्ज से जूझ रही इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी देनदारियों में 1352 करोड़ रुपये की कटौती की है. सरकार की सख्त निगरानी और बिजली बिलों की रिकॉर्ड वसूली ने इस मुश्किल लक्ष्य को आसान बना दिया. कैसे घटा कर्ज का भारी भरकम बोझ? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की तीनों डिस्कॉम पर साल 2024-25 में कुल 97,970 करोड़ रुपये का संयुक्त कर्ज था. बेहतर मैनेजमेंट के चलते अब यह घटकर 96,618 करोड़ रुपये रह गया है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देशन में विभाग ने न केवल खर्चों पर लगाम लगाई, बल्कि पुराने बकाये की वसूली पर भी जोर दिया. अजमेर और जयपुर डिस्कॉम ने किया टॉप कर्ज घटाने की इस दौड़ में अजमेर डिस्कॉम सबसे आगे रहा, जिसने अपनी देनदारियों में 935 करोड़ रुपये की कमी की. वहीं, जयपुर डिस्कॉम ने भी 644 करोड़ रुपये का कर्ज कम किया. हालांकि, जोधपुर डिस्कॉम के लिए चुनौतियां बरकरार हैं, जहां कर्ज 36,792 करोड़ से मामूली बढ़कर 37,019 करोड़ रुपये हो गया है. सस्ती ब्याज दरों का मिला सहारा राज्य सरकार ने डिस्कॉम को कर्ज के जाल से निकालने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) से हाथ मिलाया. यहां से डिस्कॉम को महज 8.75 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिला. ब्याज दरों में हुई 0.90% से 1.40% तक की इस कटौती ने महंगे पुराने कर्जों को खत्म करने में संजीवनी का काम किया. इतिहास में पहली बार 100% से ज्यादा वसूली इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि राजस्व वसूली रही. राजस्थान के इतिहास में पहली बार तीनों डिस्कॉम ने 100 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रह किया है:-     जयपुर डिस्कॉम: 102% वसूली     अजमेर डिस्कॉम: 100.23% वसूली     जोधपुर डिस्कॉम: 100.96% वसूली खराब मीटरों का समाधान और बचत जयपुर डिस्कॉम ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपने सभी सर्किलों में खराब पड़े बिजली मीटरों को बदल दिया है. इसका सीधा फायदा यह हुआ कि औसत बिलिंग (Average Billing) के मामलों में कमी आई और विभाग को करीब 1.9 करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई.