samacharsecretary.com

अब तय! दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कब खुलेगा? पूरी जानकारी—टोल चार्ज से रूट तक

नई दिल्ली दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर सफर का इंतजार अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। दिल्ली के अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से देहरादून तक 213 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस फरवरी के पहले हफ्ते के बाद कभी भी ट्रैफिक के लिए खुल सकता है। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच सड़क यात्रा 3 घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाएगी। 11000 करोड़ रुपये की लागत से हुआ 3 राज्यों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसेव अब करीब-करीब तैयार है। इस कॉरिडोर पर अब बस कुछ ही काम बाकी बचा है। छोटे-छोटे हिस्सों को फाइनल किया जा रहा है, स्ट्रक्चर को ठीक किया जा रहा है और पिट स्टॉप को जल्दी-जल्दी तैयार किया जा रहा है ताकि यात्रियों को चाय, पानी और टॉयलेट मिल सकें। अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से लोनी तक इस रोड को गाड़ियों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन फिनिशिंग का काम जारी होने से उससे आगे अभी ट्रैफिक को जाने की इजाजत नहीं दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब लगभग पूरा हो गया है, बस कुछ छोटा-मोटा काम ही बाकी है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अनुसार कॉरिडोर लगभग तैयार है। एनएचएआई अधिकारियों ने कहा कि सभी चार चरणों में औसत फिजिकल प्रोग्रेस 99% से ज्यादा है और बचा हुआ काम कुछ ही दिनों में पूरा होने वाला है। एनएचएआई के एक अधिकारी ने बताया कि मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे 334B पर 8 किमी इंटरचेंज पर कुछ छोटा-मोटा काम बचा हुआ है, जो अगले 10 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे स्पीड लिमिट और टोल चार्ज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे खुलने के बाद दिल्ली से देहरादून तक कार से यात्रा में तीन घंटे से भी कम समय लगेगा। इस रूट पर चार टोल प्लाजा बनाए गए हैं। फास्टैग सालाना पास के जरिये यात्री सिर्फ 60 रुपये में एक साइड की यात्रा पूरी कर सकते हैं। सालाना पास नहीं होने पर उन्हें लगभग 500 रुपये टोल चुकाना होगा। कारों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट 100 किमी प्रति घंटा और बस एवं ट्रकों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय की गई है। चार फेज में बनाया गया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे फेज- I (31.6 KM) : अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक, यह ब्राउनफील्ड स्ट्रेच मौजूदा सड़क को सर्विस रोड के साथ छह-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर में बदलता है। फेज-II (120 KM): बागपत से सहारनपुर बाईपास तक यह पूरी तरह से ग्रीनफील्ड सेक्शन है। फेज-III (42 KM): सहारनपुर बाईपास से उत्तराखंड में गणेशपुर तक यह स्ट्रेच पूरी तरह से तैयार है। फेज-IV (20 KM): गणेशपुर से देहरादून तक इस सेक्शन में ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड दोनों हिस्से शामिल हैं और यह सबसे बड़ी चुनौती थी।  

अब कैश नहीं चलेगा! इतने रुपए से अधिक की रजिस्ट्री फीस ऑनलाइन जमा करने का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया को और पारदर्शी व सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब 20 हजार रुपये से अधिक की रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन जमा कराई जाएगी। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने नया आदेश जारी कर दिया है।   सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में नकद लेनदेन को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आमजन को सहूलियत प्रदान करना है। ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था लागू होने से समय की बचत होगी और रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ कम होगी। महानिरीक्षक निबंधन ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित कार्यालय इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। नई व्यवस्था से जमीन-मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और डिजिटल होगी। यह व्यवस्था सोमवार से लागू हो गई है। पहले चरण मे आजमगढ़, बाराबंकी, रायबरेली, सुल्तानपुर, सीतापुर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, बुलंदशहर, बरेली, अमरोहा, कानपुर नगर, फतेहपुर, देवरिया, चित्रकूट, बागपत, कासगंज, एटा, रामपुर, इटावा, महोबा, हरदोई, बस्ती, अंबेडकरनगर, जौनपुर, कौशांबी, भदोही, महाराजगंज, बहराइच और मऊ में यह व्यवस्था लागू होगी। सैनिक को आवास विकास की योजनाओं में छूट वहीं सशस्त्र सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के सेवारत व सेवानिवृत्त कार्मिकों को नववर्ष पर बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना के तहत फ्लैट बुकिंग पर उन्हें अतिरिक्त छूट देने का निर्णय लिया है। परिषद की 274वीं बैठक में लिए गए फैसले के बाद अब सैनिकों को फ्लैट बुकिंग पर अधिकतम 20 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा। यह सुविधा परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन मोड में शुरू कर दी गई है। वर्तमान में परिषद लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद और आगरा में रिक्त रेडी टू मूव फ्लैट्स का आवंटन कर रही है। आम नागरिकों को जहां एकमुश्त भुगतान पर 15 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं अब सशस्त्र व अर्धसैनिक बलों के कार्मिकों के लिए यह छूट बढ़ा दी गई है। आवंटन तिथि से 60 दिनों के भीतर पूर्ण भुगतान करने पर 20 प्रतिशत, 61 से 90 दिनों में भुगतान पर 15 प्रतिशत तथा 91 से 120 दिनों के भीतर भुगतान करने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। योजना की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित है।  

रायपुर में आईपीएल आयोजन की पहल: मुख्यमंत्री साय को आरसीबी का विशेष आमंत्रण

रायपुर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ओर से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को टीम का आधिकारिक जर्सी भेंट कर रायपुर में प्रस्तावित आईपीएल मैच के आयोजन के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर आरसीबी के वाइस प्रेसिडेंट राजेश मेनन तथा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के संयुक्त सचिव प्रभतेज सिंह भाटिया उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों से युवाओं में खेल के प्रति उत्साह बढ़ेगा, खेल अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी और राज्य को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल और युवा प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रस्ताव रायपुर को एक उभरते हुए स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

देश में सबसे ज्यादा 45 आरवीएसएफ केंद्र यूपी में संचालित, इसके बाद हरियाणा और राजस्थान

लखनऊ,  प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वाहन स्क्रैपिंग में यूपी देश का नंबर एक राज्य है। भारत सरकार के सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय के डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार राज्य में दिंसबर 2025 तक लगभग 94,094 वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं जो देश में स्क्रैप वाहनों की कुल संख्या का लगभग 42 प्रतिशत है। इस मामले में यूपी के बाद हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र का नंबर आता है। पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग की नीति न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यूपी में हो रहा है सर्वाधिक आरवीएसएफ केंद्रों का संचालन डैश बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक पूरे भारत में लगभग 3.94 लाख वाहन स्क्रैप हो चुके हैं जिनमें 1.65 लाख सरकारी और 2.29 लाख निजी/व्यावसायिक वाहन हैं। देश में रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसेलिटी (आरवीएसएफ) केंद्रों के मामले में भी यूपी सबसे आगे है। सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत प्रदेश में अब तक 84 आरवीएसएफ केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 45 केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनमें वाहनों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट करने से न केवल सड़कों पर प्रदूषण का स्तर कम हुआ है, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। आरवीएसएफ केंद्रों की संख्या के मामले में हरियाणा दूसरे स्थान पर है और उसके बाद राजस्थान और गुजरात का स्थान है। पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा केंद्र सरकार की पुराने और अधिक प्रदूषण करने वाले वाहनों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्क्रैप करने की नीति वर्तमान में देश के 21 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। लेकिन इस मामले में यूपी की सक्रियता बेजोड़ है, जहां परिवहन विभाग स्क्रैपिंग का संचालन और निगरानी सीधे तौर पर करता है। परिवहन विभाग की यह नीति पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है।

गोरक्षपीठाधीश्वर गुरुवार तड़के अर्पित करेंगे गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी

लाखों की संख्या में जुटेंगे श्रद्धालु, खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंगलवार रात से ही श्रद्धालुओं ने डाला डेरा खिचड़ी मेला की हर व्यवस्था पर खुद नजर बनाए हुए हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरुवार तड़के (15 जनवरी) को ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करेंगे। हालांकि बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार रात (13 जनवरी) से ही शुरू हो गया। तमाम श्रद्धालु बुधवार को भी खिचड़ी चढ़ाएंगे जबकि गुरुवार को यहां आस्था का जनसमुद्र दिखेगा। समूची प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर खिचड़ी चढ़ाने की यह अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। मान्यता है कि महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। अरुणोदय काल में मकर संक्रान्ति का महापर्व गुरुवार को मनाया जायेगा। इस दिन उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों का शंखनाद गुरुवार भोर में ही हो जाएगा। सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करेंगे। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और जनसामान्य की आस्था, खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाएगी। मंदिर व प्रशासन की ओर से खिचड़ी महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री खुद सभी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मकर संक्रांति पर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर पूरी तरह तैयार है। समूचा मंदिर क्षेत्र सतरंगी रोशनी में नहाया हुआ है। यहां श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया है। मंदिर प्रबंधन की तरफ से उनके ठहरने और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। प्रशासन की तरफ से रैन बसेरों में भी पूरी व्यवस्था की गई है।

एआई से पूरी तरह बदल जाएगी गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर: डॉ. पिंकी जोवल

– उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन एआई एक्सपर्ट ने रखे अपने विचार – बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो मजबूत बनेंगी देश की स्वास्थ्य सेवाएं – एआई के जरिये शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का फर्क काफी हद तक किया जा सकता है कम   लखनऊ,  स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को लेकर होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन मंगलवार को एआई एक्सपर्ट ने अपने विचार रखे। एक्सपर्ट बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो वह देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना सकती है। खासतौर पर शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच जो फर्क है, उसे एआई के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है। एआई का असली फायदा तब जब फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि एआई का असली फायदा तब मिलेगा, जब यह फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर ही गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। अगर तकनीक इनकी मदद करे, तो इलाज समय पर और बेहतर हो सकता है। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर को बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से डॉक्टरों की सलाह मिल सके। उन्होंने कहा कि करीब 1.80 लाख आशा कार्यकता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ ऑफिसर प्रदेश और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कर्मचारी गांव और कस्बों में लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। एआई आधारित टूल्स ऐसे होने चाहिए, जो इनके रोजमर्रा के काम को आसान बनाएं, न की बोझ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआई का सही इस्तेमाल कर दूरस्थ इलाकों में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं। एआई को सफल बनाने के लिए विभागों में तालमेल जरूरी विभिन्न सत्रों में एआई समाधानों की बात हुई।  जो पहले से ही मैदान में काम कर रहे हैं, उनका मकसद है बीमारी को शुरू में ही पहचानना और मरीज को सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचाना। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को सफल बनाने के लिए विभागों के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों को भी मिलकर काम करना होगा। नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक, हर स्तर पर सहयोग होगा, तभी एआई का सही फायदा मिलेगा। इससे गांव स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक, हर जगह एक जैसी और बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी। मरीज की सहमति के बिना एआई बेस्ड डाटा का न हो इस्तेमाल पैनल में शामिल एआई एक्सपर्ट ने कहा कि जब देश की करीब आधी आबादी महिलाएं और बच्चे हैं, तब उनके स्वास्थ्य डाटा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मरीज की सहमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता और भरोसा ही किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होती है। अगर लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वे नई तकनीक को अपनाएंगे। एआई की मदद से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। एआई आधारित सिस्टम गर्भवती महिलाओं में खतरे के संकेत पहले ही पहचान सकता है। इससे आशा कार्यकर्ता समय रहते महिला को अस्पताल तक पहुंचा सकती हैं। गांव स्तर पर जल्दी पहचान और सही रेफरल से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।     कार्यक्रम में अरविंद कुमार महानिदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, प्रो. आर के सिंह एसजीपीजीआई, डॉ. संजय सूद सी-डैक, मोहाली, प्रो. श्री राम गणपति और कर्नल समीर कंवर डीजी, पाथ आदि विशेषज्ञ शामिल हुए।

योगी सरकार की पहल से रफ्तार पकड़ रही मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में 94 नई इकाइयां स्थापित ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश, 2,586 युवाओं को मिला रोजगार 10 लाख रुपये तक बैंक ऋण और ब्याज अनुदान से बढ़ा आत्मनिर्भरता का मार्ग लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण रोजगार और ग्रामीण औद्योगिकीकरण सबसे ऊपर है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय गति से आगे बढ़ रही है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक योजना के अंतर्गत 94 इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिसके तहत ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश संभव हुआ है। इसके माध्यम से 2,586 युवाओं को रोजगार दिलाने में सफलता मिली है। यह आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष में योजना ने मजबूत प्रगति दर्ज की है और शेष अवधि में लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। योग्य बेरोजगार युवाओं को 10 लाख रुपये तक का ऋण इस योजना ने गांवों में उद्योग स्थापित कराकर स्थानीय युवाओं को उनके ही घर के पास रोजगार उपलब्ध कराने का रास्ता खोला है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित एवं तकनीकी योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों को 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योगी सरकार ने उद्यमियों के लिए ब्याज सब्सिडी की बड़ी सुविधा दी है, जिसमें सामान्य वर्ग के उद्यमियों के लिए 4% से ऊपर का ब्याज सरकार देती है, जबकि आरक्षित वर्ग के उद्यमियों का पूरा ब्याज सरकार वहन करती है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से चयन योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला उद्यमी पात्र हैं। चयन प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से की जाती है। सामान्य वर्ग को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत, जबकि आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में और अधिक युवाओं को इस योजना से जोड़कर स्व-रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। योगी सरकार का ग्रामीण विकास मॉडल योगी सरकार ग्रामीण विकास को केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि ग्रामीण उद्योगों का नेटवर्क विकसित कर रही है। पारंपरिक कारीगरों व हस्तशिल्पकारों को सशक्त बना रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजन हो रहा है। सरकार का मानना है कि “गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा।” इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है।

बस्तर के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

नक्सल उन्मूलन के साथ विकास के रोडमैप पर हुई व्यापक चर्चा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा के निर्देश कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस रायपुर छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल हो रही है। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा फिर कभी सिर न उठा सके और इसके लिए बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर अंचल के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बस्तर का सर्वांगीण और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों के लिए बस्तर के विकास का एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर मिशन मोड में उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने तथा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र गति से विस्तार अत्यंत आवश्यक है, ताकि दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचे और शासन-प्रशासन पर लोगों का भरोसा सुदृढ़ हो। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्वस्फूर्त जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए सतही जल स्रोतों से आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने, शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण तथा दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार कार्ड निर्माण, बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। पर्यटन विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने होम-स्टे को प्रोत्साहन देने, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत चिन्हित स्थलों के विकास, बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर के निर्माण तथा युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को प्रशिक्षण दिए जाने के पहल की विशेष रूप से सराहना की। बैठक में वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण, शिक्षा के क्षेत्र में भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति, नवोदय एवं पीएमश्री स्कूलों का विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा, सिंचाई परियोजनाएँ, आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी संचालन, ग्रामीण बस योजना तथा रोजगार और आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्ययोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र, संतुलित और टिकाऊ विकास को नई गति मिल सके। बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस., समस्त विभागीय सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

लालू के ‘लाल’ को NDA का न्योता! विजय सिन्हा के भोज में दिखे तेज प्रताप यादव

पटना मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की सियासत गर्माई हुई है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पटना स्थित आवास पर मंगलवार को आयोजित दही-चूड़ा भोज में सियासी जमावड़ा देखने को मिला। पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी सिन्हा के भोज में पहुंचे, जो राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र रहा। वहीं, तेज प्रताप को एनडीए से न्योता भी मिलने लगा है। नीतीश सरकार के दो मंत्रियों ने इस मौके पर कहा कि अगर वे एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है।   डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इसमें सूबे के कई नेताओं को न्योता दिया गया था। सिन्हा के भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत अन्य मंत्री, विधायक समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, इसमें चर्चा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की रही। क्या बोले विजय सिन्हा और तेज प्रताप पत्रकारों से बातचीत में विजय सिन्हा ने कहा कि ‘एक बिहारी सब पर भारी’ का भाव जगाना है। तेज प्रताप की एनडीए में एंट्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में पता चल जाएगा। वहीं, जेजेडी चीफ ने भी इस पर कहा, “पता चल जाएगा, अभी क्यों बताना है।” तेज प्रताप ने कहा कि दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण दिया गया था। हम अपना धर्म निभाने आए हैं। नेता लोग मिलते जुलते रहते हैं राजनीति अलग है। तेज प्रताप को एनडीए में आने का न्योता? रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश सरकार में मंत्री एवं हम सुप्रीमो जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा कि तेज प्रताप यादव एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है। हालांकि, यह उनकी मर्जी के ऊपर निर्भर करता है। मंत्री रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप के एनडीए में आने पर उनका स्वागत करने की बात कही। दरअसल, लालू परिवार और आरजेडी से बेदखल होने के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई थी। उन्होंने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे। हालांकि, जेजेडी एक भी सीट नहीं जीत पाई। चुनाव के बाद तेज प्रताप ने नीतीश सरकार को अपना नैतिक समर्थन दे दिया। इसके बाद से उनकी एनडीए नेताओं से नजदीकी की चर्चा चलती रही है। अब तेज प्रताप के भोज पर निगाहें तेज प्रताप यादव ने भी बुधवार को दही-चूड़ा भोज रखा है। पिछले दिनों वे विजय सिन्हा को निमंत्रण देने उनके आवास पर भी पहुंचे थे। उन्होंने एनडीए और महागठबंधन के कई नेताओं को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया है। उनके यहां कौन-कौन नेता पहुंचते हैं। ऐसे में सबकी निगाहें उनके भोज पर टिक गई हैं।  

डिजिटल शिक्षा से छात्राओं को संबल, योगी सरकार के अभियान को नई उड़ान

समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू, दो बालिका विद्यालयों को दिए गए टैबलेट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोरखपुर और महाराजगंज के सर्वोदय बालिका विद्यालयों से पहल की शुरुआत लखनऊ, छात्राओं के समावेशी विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में मदद फाउंडेशन के सहयोग से समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हर बालिका विद्यालय को 20–20 टैबलेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके तहत कार्यक्रम में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय, गोरखपुर और महाराजगंज जनपदों के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट प्रदान किए गए। प्रत्येक विद्यालय को 20–20 टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसकी सफलता के आधार पर अन्य विद्यालयों में टैबलेट वितरण का दायरा बढ़ाया जाएगा। ‘डिजिटल शिक्षा समय की अनिवार्य आवश्यकता’ इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि उपस्थित रहे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज समय की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्राओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनेंगी। उन्होंने इस पहल को बालिकाओं के सशक्तिकरण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ एवं डिजिटल इंडिया की भावना के अनुरूप बताया। योगी सरकार का शिक्षा व महिला सशक्तिकरण मॉडल कार्यक्रम में बताया गया कि योगी सरकार द्वारा स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट, टैबलेट व डिजिटल उपकरण कौशल व करियर उन्मुख प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को नई तकनीक से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि बालिकाएं केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें। मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि ने समाज कल्याण विभाग के साथ इस सहयोग को सामाजिक उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, जे. राम सहित विभागीय अधिकारी एवं मदद फाउंडेशन की टीम उपस्थित रही।