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BJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की अपील, बंगाल में 3 चरणों में मतदान कराने की मांग

बंगाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की फुल बेंच अभी बंगाल के दौरे पर है और चुनाव से जुड़ी तैयारियों का जायजा ले रही है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर कभी भी चुनाव तारीखों का ऐलान हो सकता है. इस बीच राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर चुनाव को 3 चरणों में ही कराए जाने की मांग की है. बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज सोमवार को कोलकाता में चुनाव आयोग की फुल बेंच से मुलाकात की और यह मांग की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 3 चरणों से ज्यादा चरणों में नहीं कराया जाना चाहिए. पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि आयोग को पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं होने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए. BJP ने चुनाव आयोग से चुनावी प्रक्रिया को बहुत ही कम समय में खत्म कराने की अपील की. पार्टी ने कहा, “हमारी पहली मांग है कि चुनाव एक, दो या ज्यादा से ज्यादा 3 चरणों में कराई जाए. 7 या 8 चरणों में चुनाव कराने की कोई जरूरत नहीं है.” विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सुरक्षा माहौल को लेकर गहरी चिंता जताते हुए BJP प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को अपनी 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ अन्य चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के साथ आज सोमवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर की पार्टियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि चुनाव कराने को लेकर उनकी चिंताओं और सुझावों को सुना जा सके. BJP नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त से मिलने वाले 3 सदस्यीय पार्टी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, ने बताया कि पार्टी ने आयोग से विधानसभा चुनाव अधिक से अधिक 3 चरणों में कराने की अपील की है. उन्होंने कहा, “हमने एक, 2 या 3 चरणों में चुनाव की मांग की थी, लेकिन इससे ज्यादा चरणों में नहीं हो.” BJP के नेता शिशिर बाजोरिया, जो प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी थे, ने कहा, “मैंने अपनी आंखों से देखा कि रूट मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण इलाकों कराए जा रहे हैं. ये मुख्य सड़कों पर किए जा रहे हैं जहां कोई लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं. इस तरह राज्य पुलिस सेंट्रल फ़ोर्स को काम करने के लिए मजबूर कर रही है.”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से सुरक्षा की गारंटी वाले टीके का लाभ लेने का किया आहवान

स्वस्थ नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला राज्य सरकार लाड़ली बहनों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के साथ महिलाओं को बना रही है सशक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी नवरात्रि पर्व एवं गुड़ी पड़वा की दीं मंगलकामनाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में माताओं-बहनों के स्वास्थ्य की चिंता करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सर्वाइकल कैंसर बेटियों की जिंदगी में सबसे कठिन समय होता है। मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर एचवीपी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। इसमें 14 वर्ष से अधिक आयु की बेटियों को 4 हजार रुपए मूल्य का यह टीका नि:शुल्क लगाया जा रहा है। वैक्सीन का एक टीका गर्भाशय एवं ग्रीवा कैंसर के प्रति भविष्य में बेटियों को जीवनभर की सुरक्षा की गारंटी देगा और उन्हें गंभीर रोग से बचाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्‍चरल एंड इंर्फोमेशन सेंटर में महिलाओं के लिए आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि बहनें और बेटियां सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण का लाभ लेकर टीका अवश्य लगवा लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीका लगवा चुकी बेटियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। साथ ही जबलपुर में 37 करोड़ रूपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहनों से लेकर लाड़ली लक्ष्मी बेटियों तक निरंतर जनकल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ा रही है। लाड़ली बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार योजना की राशि को निरंतर बढ़ा रही है। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को अब 1500 रुपए की राशि हर माह उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। राज्य सरकार ने बहनों को रोजगारपरक उद्योगों में काम करने पर 5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि अलग से देने का निर्णय लिया है। प्रदेश में लैंगिग असमानता को खत्म करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। स्थानीय निकायों के चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। बेटियां सेना से लेकर हर क्षेत्र में आगे बढ़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अशोकनगर जिले में करीला धाम पहुंचकर माता जानकी और उनके पुत्र लव-कुश का आशीर्वाद प्राप्त किया और सभी प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने जबलपुर को दी 37 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में 10.51 करोड़ लागत से आधुनिक जनपद भवन का भूमि-पूजन और 27.16 करोड़ लागत से नवनिर्मित गीता भवन सहित 3 अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 21 स्वास्थ्य एवं उप स्वास्थ्य केंद्र और सोलर ट्रैफिक सिस्टम शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कार धानी जबलपुर की छटा देश में सबसे अलग है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को आगामी नवरात्रि पर्व एवं गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं दीं। नेत्र दिव्‍यांग बालिकाओं का किया सम्‍मान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी टीकाकरण पूर्ण कर चुकी बालिकाओं जिया सेन और अंशी विश्वकर्मा को प्रतीकात्मक रूप से प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने नेत्रहीन कन्या विद्यालय जबलपुर की बालिकाओं से भेंट कर उनका सम्‍मान भी किया। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने लखपति दीदी आरती चौधरी और सीता गोंड को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। पूर्व मंत्री श्री अजय बिश्नोई ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी देश का नेतृत्व करते हुए हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू कर रहे हैं। बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए शुरू की गई टीकाकरण की यह योजना मील का पत्थर सिद्ध होगी। देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने में माताओं-बहनों का पूर्ण सहयोग सरकार को मिल रहा है। प्रदेश की आंगनवाड़ी एवं हेल्थ वर्कर्स की सहायता से विभिन्न प्रकार के कैंसर की पहचान करने के लिए आमजन को जागरुक किया जा सकता है। कार्यक्रम में विधायक श्री संतोष बरकड़े सहित जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता, लाड़ली बहनें एवं बड़ी संख्या में बेटियां उपस्थित थीं।  

भजनलाल शर्मा की पहल: समाज के हर वर्ग के लिए सुरक्षा की दीवार

जयपुर राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में कई महत्वपूर्ण और प्रभावी निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं को निरंतर सुदृढ़ किया गया है, जिससे प्रदेश के लाखों जरूरतमंद नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिला है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील और प्रभावी नेतृत्व वाली राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के अनुरूप सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि में चरणबद्ध तरीके से वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 में पेंशन राशि 1000 रुपये प्रतिमाह थी, जिसे बढ़ाकर 1150 रुपये किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में इसे 1250 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। जनवरी 2026 में इसे बढ़ाकर 1300 रुपये प्रतिमाह किया गया और अब राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 1450 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इस प्रकार विगत दो वर्षों में पेंशन राशि में 450 रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 91 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिल रहा लाभ प्रदेश में वर्तमान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 91 लाख से अधिक लाभार्थियों को नियमित पेंशन प्रदान की जा रही है। इनमें वृद्धजन, विधवा एवं एकल नारी, विशेष योग्यजन (दिव्यांगजन) तथा लघु एवं सीमांत कृषक शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्यूनतम आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें। जनवरी 2026 की पेंशन के बिल भी तैयार कर ईसीएस के लिए भेज दिए गए हैं, जिससे जल्द ही यह राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा हो जाएगी। डीबीटी से पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने पेंशन भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली को अपनाया है। इसके तहत पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के जनाधार पंजीकृत बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है। इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी बनी है और लाभार्थियों को समय पर पेंशन राशि प्राप्त हो रही है। तकनीक आधारित पारदर्शी पेंशन प्रणाली राज्य सरकार ने पेंशन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ते हुए इसे सरल और नागरिक-अनुकूल बनाया है। पेंशन से जुड़ी संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन और पेपरलेस किया गया है। जनआधार आधारित सत्यापित डेटा के माध्यम से आवेदन, स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिससे पात्र व्यक्ति स्वयं, मोबाइल ऐप या ई-मित्र केंद्र के माध्यम से आसानी से आवेदन कर सकते हैं। सत्यापन प्रक्रिया को बनाया सरल यह शर्मा की ही दूरदर्शी सोच है कि पेंशन लाभार्थियों के वार्षिक सत्यापन की प्रक्रिया को भी निरंतर सरल बनाया गया है। लाभार्थी बायोमेट्रिक, प्रमाणीकरण, मोबाइल ऐप तथा ओटीपी आधारित प्रणाली के माध्यम से अपना सत्यापन करवा सकते हैं। यदि किसी कारणवश बायोमेट्रिक सत्यापन संभव नहीं हो पाता, तो संबंधित अधिकारी के समक्ष दस्तावेजों के सत्यापन के बाद स्वयं अथवा संबंधित पेंशन स्वीकृतिकर्ता अधिकारी के आधार पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी के माध्यम से भी सत्यापन किया जा सकता है। बैंकिंग तकनीकी समस्याओं के समाधान के प्रयास बैंकों के विलय के कारण आईएफएससी कोड बदलने से कुछ लाभार्थियों की पेंशन अस्थायी रूप से लंबित हो गई थी। राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए विशेष प्रयास किए हैं और अधिकांश लाभार्थियों की पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जा चुका है। भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए बैंकिंग संस्थाओं और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पेंशन पोर्टल पर बैंक वितरण संबंधी डाटा अद्यतन करने की प्रक्रिया पर भी कार्य किया गया है। कमजोर वर्गों को मिल रहा सम्मान और सुरक्षा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करना भी है। केंद्र तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं मिलकर इस उद्देश्य को साकार कर रही हैं। अंत्योदय की भावना को सशक्त करता निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज में अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन में लगातार वृद्धि और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था इस प्रतिबद्धता को मजबूत बनाती है। पेंशन राशि में हुई यह वृद्धि प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए आर्थिक स्थिरता, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन रही है।

लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं, विधानसभा में मिला प्रमाण पत्र

रायपुर  छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी नेताम निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुई हैं। सोमवार को दोनों नेत्री प्रमाण पत्र लेने विधानसभा पहुंचीं। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद दोनों सांसदों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की खुशी साझा की और गले मिलकर बधाई दी। इस मौके पर कई जनप्रतिनिधि और समर्थक भी मौजूद रहे, जिन्होंने दोनों नेताओं को शुभकामनाएं दीं। बता दें कि राज्यसभा चुनाव में नामांकन वापसी के बाद दोनों उम्मीदवार निर्विरोध चुनी गईं। इसके बाद आज उन्होंने विधानसभा पहुंचकर आधिकारिक तौर पर अपना निर्वाचन प्रमाण पत्र प्राप्त किया। दोनों सांसदों ने इस अवसर पर पार्टी नेतृत्व और प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे राज्य और जनता के हितों को राज्यसभा में मजबूती से उठाने का काम करेंगी। पहली बार दोनों पार्टी से महिला उम्मीदवार ऐसा पहला संयोग बना है जब राज्यसभा चुनाव के लिए पहली बार दोनों पार्टियों ने महिला को उम्मीदवार बनाया। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती हैं। फिलहाल पांच से अब तीन सांसद महिला होंगी। हालांकि कांग्रेस की रंजीता रंजन का कार्यकाल मई में खत्म हो जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ में अब तक पांच में से चार सांसद कांग्रेस के थे, लेकिन अब बीजेपी की संख्या बढ़ेगी। बीजेपी के सदन में दो सदस्य हो जाएंगे, जबकि कांग्रेस के तीन सदस्य रहेंगे। दोनों ही पार्टियों ने इस बार जातिगत और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी बनाए हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दोनों को नहीं दिया था मौका छत्तीसगढ़ में अनोखा समीकरण बना है कि दोनों ही महिला नेता जिन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है वह 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदार थी, लेकिन पार्टी ने दोनों को मौका नहीं दिया था। अब राज्यसभा के लिए भेजकर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है। फूलोदेवी नेताम बस्तर से आती हैं और कांग्रेस का बड़ा महिला चेहरा मानी जाती हैं। वह लगातार दूसरी बार राज्यसभा के लिए भेजी जा रही हैं। वह छत्तीसगढ़ में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वहीं बीजेपी की लक्ष्मी वर्मा पार्टी में लंबे समय से प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रही थी। वह रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रही हैं, जबकि अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए भेजा है।

चूल्हा-चौका के साथ ई-रिक्शा की स्टेयरिंग थाम पूनम बनीं आत्मनिर्भर

हिसार. महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हर चुनौती का सामना कर सकती हैं। जब घर की जिम्मेदारियां कंधों पर बढ़ती है तो महिलाएं चूल्हा-चौका संभालने के साथ-साथ रोजी-रोटी के लिए नए रास्ते भी तलाश लेती हैं। समाज की परंपराओं को पीछे छोड़ आजाद नगर निवासी पूनम भी पति और बच्चों का सहारा बनने के लिए ई-रिक्शा का स्टेयरिंग संभाल रही है। पूनम पिछले दो वर्षों से ई-रिक्शा चला रही है। उसने बताया कि जब घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई तो उन्होंने पति के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। शुरुआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई लोग ताना मारते थे कि यह महिलाओं का काम नहीं है। सिटी बसें चलने से घटा है ई-रिक्शा का काम पूनम ने बताया कि शहर में सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद आटो और ई-रिक्शा चालकों के काम में काफी कमी आई है। कई सवारियां बसों में चली जाती हैं। जिससे रिक्शा चालकों की आमदनी प्रभावित हो रही है। कई बार सवारियों को लेकर चालकों के बीच विवाद भी हो जाता है। उनका कहना है कि दिनभर मेहनत करने के बाद भी कई बार पर्याप्त आमदनी नहीं हो पाती। क्यों उठाना पड़ा यह कदम पूनम ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। पति की आमदनी से बढ़ती महंगाई में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। दो बच्चों की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण उसने भी कमाने का निर्णय लेना पड़ा। पढ़ी-लिखी नहीं होने के कारण कोई नौकरी नहीं मिली, इसलिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। यह भी बताया कि वह किराये के मकान में अपने परिवार के साथ रहती है, आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर घर का किराया देना भी मुश्किल हो गया था। इसलिए उसे पति की मदद के लिए यह कदम उठाना पड़ा। कई बार आ जाती मारपीट की नौबत पूनम ने बताया कि आज भी कई बार अन्य रिक्शा चालकों के साथ विवाद की स्थिति बन जाती है। कुछ मामलों में तो मारपीट तक की नौबत आ जाती है, लेकिन परिवार की जरूरतों को देखते हुए वह हर चुनौती का सामना कर रही है।

‘लामितिये–2026’: भारत और सेशेल्स ने किया संयुक्त सैन्य अभ्यास

नई दिल्ली भारत की सशस्त्र सेनाओं का एक संयुक्त दल हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स पहुंच गया है। यहां यह भारतीय सैन्य दल सेशेल्स रक्षा बलों के साथ एक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘लामितिये–2026’ में भाग ले रहा है। यह सैन्य अभ्यास 9 मार्च से 20 मार्च तक सेशेल्स की रक्षा अकादमी में आयोजित किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान भारत और सेशेल्स के सैनिक संयुक्त रूप से प्रशिक्षण लेंगे, विभिन्न मिलिटरी मिशनों की योजनाएं बनाएंगे और अलग-अलग सामरिक गतिविधियों को अंजाम देंगे। इसमें अर्ध-शहरी वातावरण में संभावित खतरों को निष्क्रिय करने के लिए कई प्रकार की युद्धक कार्रवाई की जाएंगी। इसके साथ ही नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीक के उपयोग का अभ्यास भी किया जाएगा। ‘लामितिये’ शब्द क्रियोल भाषा का है, जिसका अर्थ मित्रता होता है। यह अभ्यास हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है और वर्ष 2001 से नियमित रूप से सेशेल्स में आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष यह इस महत्वपूर्ण अभ्यास का ग्यारहवां संस्करण है। भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर दोनों पक्षों का मुख्य फोकस है। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से इस अभ्यास का आयोजन किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार का अभ्यास विशेष महत्व रखता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पहली बार भारत की तीनों सेनाएं शामिल हो रही हैं। यहां पहुंचे भारतीय सैन्य दल में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान शामिल हैं। ये सभी एक साथ इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय सैन्य दल में मुख्य रूप से असम रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना का युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिकंड’ तथा भारतीय वायु सेना का भारी परिवहन विमान ‘सी–130’ भी इस अभ्यास में भाग ले रहा है। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय, सहयोग और संयुक्त कार्य क्षमता को मजबूत बनाना है। अभ्यास के दौरान विशेष रूप से अर्ध-शहरी क्षेत्रों में होने वाले अभियानों से जुड़े प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा शांति स्थापना से जुड़े अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने का भी प्रयास किया जाएगा। करीब बारह दिनों तक चलने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में मैदानी प्रशिक्षण, सामरिक चर्चा, अध्ययन उदाहरण, व्याख्यान और प्रदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभ्यास के अंतिम चरण में दो दिनों का अंतिम संयुक्त अभ्यास किया जाएगा, जिसमें अब तक सीखे गए सभी कौशलों और रणनीतियों का परीक्षण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, समझ और सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे सैनिकों को एक-दूसरे के अनुभव, कौशल और श्रेष्ठ सैन्य तरीकों को साझा करने का अवसर मिलता है। भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से घनिष्ठ रक्षा संबंध रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत बनाने के लिए दोनों देश समय-समय पर इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करते रहे हैं। ‘लामितिये–2026’ अभ्यास भी दोनों देशों के सैन्य संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘ना दंगा, ना फसाद, बिहार का CM सिर्फ चिराग’ वाले लगे पोस्टर

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बाद बिहार की राजनीति में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसी बीच एनडीए के भीतर से ही एक नई राजनीतिक मांग सामने आई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने चिराग पासवान को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई है। बीजेपी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर पटना में बीजेपी कार्यालय के बाहर चिराग पासवान के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पोस्टर में लिखा गया है-'ना दंगा, ना फसाद हो, बिहार का CM सिर्फ चिराग हो।' पोस्टर में ‘स्वर्ण काल’ की बात पोस्टर में चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की खुलकर अपील की गई है। इसमें लिखा गया है- 'सजाओ इनके सर पर ताज, तभी आएगा बिहार में स्वर्ण काल।' इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि चिराग के नेतृत्व में बिहार में नई शुरुआत हो सकती है। ‘मोदी के हनुमान’ का भी जिक्र पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया गया है। इसमें लिखा गया है- 'मोदी जी का मिला अपने हनुमान को आशीर्वाद, चिराग होंगे बिहार के नए सरताज।' इससे चिराग को एनडीए के मजबूत नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। युवा मुख्यमंत्री की मांग पोस्टर में यह भी लिखा गया है कि 'बिहार मांगे चिराग, वक्त अब आ गया है युवा मुख्यमंत्री बनाने का।' इसके साथ ही यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अगर एनडीए की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री का चेहरा चिराग पासवान होना चाहिए। एलजेपी (रामविलास) नेता ने लगवाए पोस्टर बताया जा रहा है कि ये पोस्टर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पटना जिला अध्यक्ष इमाम गजाली की ओर से लगवाए गए हैं। पोस्टर सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में इस मांग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सांसद अरुण भारती भी जता चुके हैं इच्छा इससे पहले एलजेपी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती भी चिराग पासवान को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की इच्छा जता चुके हैं। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री को लेकर अंतिम फैसला एनडीए के शीर्ष नेता मिलकर करेंगे। कार्यकर्ताओं की भी बड़ी भूमिका की मांग अरुण भारती ने कहा था कि व्यक्तिगत तौर पर वह अपने नेता चिराग पासवान को बिहार के बड़े नेता और राज्य के मुखिया के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के कई जिलों में कार्यकर्ताओं की मांग है कि आने वाले समय में चिराग पासवान को बड़ी जिम्मेदारी दी जाए।

Fitness Industry में मातम! अचानक निधन से टूटे फैंस और परिवार

फिटनेस और स्वास्थ्य जगत को एक बड़ा झटका लगा है। 36 वर्षीय फिटनेस इन्फ्लुएंसर और विज्ञान-आधारित पोषण विशेषज्ञ स्टेफ़नी बटरमोर का अचानक निधन हो गया है। उनकी मृत्यु की पुष्टि उनके मंगेतर और यूट्यूबर जेफ निपर्ड ने की है। अभी तक मौत के कारण का पता नहीं चल पाया है। स्टेफ़नी बटरमोर सोशल मीडिया पर अपनी सकारात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली फिटनेस सामग्री के लिए जानी जाती थीं। हालांकि उन्होंने इंटरनेट की दुनिया से दूरी बनाकर अपने व्यक्तिगत और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया था। मई 2024 में उन्होंने अपने सोशल मीडिया ब्रेक का ऐलान करते हुए गंभीर चिंता (Anxiety) से जूझने की बात स्वीकार की थी। उनकी आखिरी सार्वजनिक पोस्ट में, स्टेफ़नी ने चिंता को "अपंग करने वाली" बताया और साझा किया कि कैसे यह उनके लिए सांस लेना या घर छोड़ना भी मुश्किल बना देती थी। इसके बाद उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य में सुधार और शांति पाने के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाई। हालांकि स्टेफ़नी ने ऑनलाइन उपस्थिति कम कर दी थी, वह अपने पेशेवर और अकादमिक जीवन में सक्रिय रहीं। पैथोलॉजी और सेल बायोलॉजी में पीएचडी धारक के रूप में, उन्होंने कैंसर अनुसंधान पर काम जारी रखा। उनका निधन 6 मार्च, 2026 को हुआ। स्टेफ़नी और जेफ निपर्ड का रिश्ता लगभग 10 वर्षों तक चला। दोनों की पहली मुलाकात 2016 में सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। प्रारंभ में जेफ ने उनसे ऑनलाइन संपर्क किया और जल्द ही दोनों के बीच प्यार हो गया। हालांकि स्टेफ़नी फ्लोरिडा और जेफ कनाडा में रहते थे, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से मिलने से पहले घंटों फोन पर बातचीत करते थे। उनकी पहली डेट कथित तौर पर जिम वर्कआउट थी, जो उनके साझा फिटनेस और विज्ञान प्रेम को दर्शाती है। फिटनेस समुदाय और उनके अनुयायियों के लिए यह अचानक निधन एक बड़ा सदमा है।

गर्मी में टैनिंग से परेशान? बाहर निकलने से पहले अपनाएं ये आसान टिप्स, सिर्फ सनस्क्रीन काफी नहीं

मार्च का महीना अभी शुरू ही हुआ है और अभी से तेज धूप निकलनी शुरु हो गई है. तापमान धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. ऐसे में लोगों ने भी सनस्क्रीन लगाना शुरु कर दिया है. लेकिन क्या धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना ही काफी है? दरअसल, कुछ लोगों को लगता है कि सिर्फ सनस्क्रीन लगाने से वो अपनी त्वचा को धूप की तेज किरणों से बचा लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. आज के समय में बढ़ती गर्मी, तेज यूवी किरणें, धूल-मिट्टी और प्रदूषण हमारी त्वचा पर गहरा असर डालते हैं. ऐसे में सिर्फ एक प्रोडक्ट पर निर्भर रहना स्किन के लिए पूरी सुरक्षा नहीं देता. अगर स्किन की सही तरीके से देखभाल न की जाए तो टैनिंग, सनबर्न, पिग्मेंटेशन, ड्राइनेस और समय से पहले झुर्रियां जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं. ऐसे में धूप से त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ सनस्क्रीन लगाना ही काफी नहीं है. सही स्किनकेयर रूटीन, पर्याप्त हाइड्रेशन और फिजिकल प्रोटेक्शन के साथ ही त्वचा को पूरी तरह सुरक्षित और हेल्दी रखा जा सकता है. आइए जानते हैं कैसे. चेहरे को अच्छे से क्लीन करें धूप में निकलने से पहले सबसे पहला स्टेप है चेहरे को साफ करना. रात भर में त्वचा पर ऑयल और गंदगी जमा हो जाती है. इसलिए बाहर निकलने से पहले माइल्ड फेस वॉश से चेहरा धोना जरूरी है, ताकि स्किन साफ रहे और आगे लगाए जाने वाले प्रोडक्ट्स बेहतर तरीके से काम कर सकें. टोनर का इस्तेमाल करें चेहरा साफ करने के बाद टोनर लगाना फायदेमंद होता है. टोनर त्वचा के पोर्स को टाइट करता है और स्किन का pH बैलेंस बनाए रखता है. इससे त्वचा तरोताजा महसूस करती है और धूप से होने वाले नुकसान से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होती है. मॉइश्चराइज़र लगाना न भूलें कई लोग गर्मियों में मॉइश्चराइज़र लगाना छोड़ देते हैं, लेकिन यह सही नहीं है. हल्का और वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइज़र त्वचा को हाइड्रेट रखता है, और धूप की वजह से होने वाली ड्राइनेस से बचाता है. सनस्क्रीन सही तरीके से लगाएं सनस्क्रीन जरूर लगाएं, लेकिन सही मात्रा और सही SPF का चुनाव भी जरूरी है. बाहर निकलने से लगभग 15–20 मिनट पहले SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं और जरूरत पड़ने पर हर 2–3 घंटे में दोबारा लगाएं. सन प्रोटेक्शन एक्सेसरीज का इस्तेमाल करें सिर्फ स्किनकेयर प्रोडक्ट्स ही नहीं, बल्कि सनग्लासेस, कैप, स्कार्फ या छाता भी धूप से बचाव में मदद करते हैं. ये चीजें यूवी किरणों से सीधे संपर्क को कम करती हैं. शरीर को हाइड्रेट रखें गर्मियों में त्वचा को हेल्दी रखने के लिए भरपूर पानी पीना भी बहुत जरूरी है. इससे शरीर डिटॉक्स होता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है.

खड़गे ने संसद में जताई चिंता, ऊर्जा सुरक्षा पर असर

नई दिल्ली राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को एशिया के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में तेजी से बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह हालात केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साथ ही भारत की वैश्विक छवि और सामर्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत जरूरतें पश्चिम एशिया से होने वाले आयात से पूरी करता है। यदि उस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो उसका सीधा असर हमारे देश की आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। खड़गे ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से कहा, "मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे यह मुद्दा उठाने का अवसर दिया।" खड़गे ने कहा कि वह नियम 176 के तहत तहत उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति का अनुरोध करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एशिया के उस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है। हाल की घटनाओं में कुछ भारतीय नागरिकों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी भी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। भारत हर साल लगभग 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का तेल आयात करता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और परिवारों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। इस बीच बाद सभापति द्वारा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बैठ जाने के लिए कहा गया। सभापति ने खड़गे को बाद में बोलने का अवसर देने की बात कही और कहा कि फिलहाल विदेश मंत्री एस जयशंकर सदन में अपनी बात रखने जा रहे हैं। इस बार विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच एस जयशंकर ने अपनी बात रखी। लेकिन विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे इसके उपरांत विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी सांसद इस मुद्दे पर सदन में अपनी बात रखना चाहते थे। सभापति ने मल्लिकार्जुन खड़गे को शुरुआत में बोलने का अवसर दिया और इसके बाद उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री द्वारा इस संदर्भ में आधिकारिक जानकारी दे रहे हैं। विदेश मंत्री द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद वह खड़गे को बोलने का अवसर देंगे। लेकिन विपक्ष इसके लिए राजी नहीं हुआ और सदन में विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे।