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जग वसंत वेसल ने 42 हजार टन LPG के साथ होर्मुज से गुजरात की ओर किया रवाना

 अहमदाबाद एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. 'जग वसंत' नाम का वेसल (टैंकर) कांडला पोर्ट पहुंच चुका है. यह होर्मुज के रास्ते गुजरात पहुंचा है. इस जहाज में 42 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा LPG गैस लाई गई है।  यह खेप ठीक उसी समय आई है जब दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई को लेकर काफी अनिश्चितता चल रही है. कांडला पोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि आज ही इस गैस को मिड-सी ट्रांसफर के जरिए उतारा जाएगा।  मिड-सी ट्रांसफर का मतलब है कि समुद्र में ही जहाज से गैस को दूसरे सिस्टम या पोर्ट की सुविधाओं तक पहुंचा दिया जाता है. इससे गैस तेजी से उतर जाती है, समय बचता है और सप्लाई भी जल्दी शुरू हो जाती है।  इस बड़ी खेप से देश में LPG गैस की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है. खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा सप्लाई को लेकर थोड़ी अस्थिरता बनी हुई है। कांडला पोर्ट भारत के सबसे बड़े ऊर्जा आयात बंदरगाहों में से एक है. यहां से LPG गैस देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जाती है. इस खेप के आने से आने वाले दिनों में घरेलू LPG सप्लाई को स्थिर और सुचारू रखने में मदद मिलेगी।  बता दें कि ईरान की ओर से कुछ ही मुल्कों को होर्मुज के रास्ते से जहाज लेकर जाने की अनुमति मिली है. भारत उन देशों में शामिल है जिसे ईरान ने रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है।  अब तक कितने टैंकर भारत पहुंचे? ईरान-अमेरिका तनाव से होर्मुज रास्ता बाधित होने के बावजूद भारत के चार महत्वपूर्ण तेल टैंकर सुरक्षित पहुंच चुके हैं. ईरान द्वारा विशेष अनुमति मिलने से ये जहाज पार हो सके।  MT शिवालिक (LPG) 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा, जबकि MT नंदा देवी (LPG) 17 मार्च को कांडला में उतरा. जग लाडकी (81,000 टन कच्चा तेल) 18 मार्च मुंद्रा आया. लाइबेरिया फ्लैग Shenlong सऊदी क्रूड लेकर 11 मार्च के आसपास मुंबई पहुंचा। युद्ध में क्या हैं ताजा अपडेट? युद्ध का 28 दिन बीत चुका है. शुक्रवार को अमेरिका-इजरायल का ईरान के साथ युद्ध का 29वां दिन है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह फिलहाल अगले दस दिनों तक ईरान के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं करेंगे। 

GST में बड़े घोटाले का खुलासा, यूपी में 200 करोड़ की चोरी; एसटीएफ ने आरोपी को गुजरात से पकड़ा

 लखनऊ उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने फर्जी फर्मों के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मामले में एसटीएफ ने गुजरात के अहमदाबाद से गैंग के अहम सदस्य मोहम्मद अल्ताफ सोजतवाला को पकड़ा है. यह नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और लंबे समय से संगठित तरीके से सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचा रहा था।  एसटीएफ के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी के पास से लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और नकदी बरामद हुई है. जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी अपने साथियों, जिनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट आकाश पीयूष सोनी समेत अन्य लोग शामिल हैं, इनके साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था।  इन फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे, जिससे वास्तविक कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) उपलब्ध कराया जाता और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जाती थी।  पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह लोगों को कमीशन और लालच देकर उनके पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज हासिल करता था. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियां खोलकर बैंक खातों के जरिए लेनदेन दिखाया जाता था. बाद में रकम को नकद या दूसरे माध्यमों से वापस कर दिया जाता था।  एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह गैंग गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में एक्टिव था. अलीगढ़ में दर्ज एक केस की जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।  फिलहाल एसटीएफ आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है. साथ ही गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। 

किसानों के हित में प्रदेश सरकार की निरंतर पहल: ऊर्जा मंत्री तोमर

प्रदेश सरकार किसानों के हित में निरंतर कर रही कार्य : ऊर्जा मंत्री तोमर म.प्र. नियामक आयोग द्वारा टैरिफ आदेश जारी भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि म.प्र. सरकार प्रदेश के किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। जैसे कि अटल कृषि ज्योति योजना के तहत 10 हॉर्स पावर तक के कृषि उपभोक्ताओं के बिलों पर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी विद्युत दरों पर सब्सिडी स्वीकृत की जाती है, जिसके अनुसार उपभोक्ता द्वारा दी जाने वाली राशि नियामक आयोग द्वारा जारी दरों की मात्र लगभग 7 प्रतिशत राशि ही जमा करना होती है जबकि म.प्र. सरकार कृषि उपभोक्ताओं के बिलों का लगभग 93 प्रतिशत राशि सब्सिडी के रूप में वहन करती है। इसके अतिरिक्त राज्य शासन की अटल गृह ज्योति योजना के तहत 150 यूनिट प्रति माह तक मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट पर मात्र 100 रूपये एवं अतिरिक्त 50 यूनिट पर वास्तविक दर से भुगतान करने का प्रावधान है। अतः घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट तक के बिल पर पूर्व के भांति अटल गृह ज्योति योजना के तहत मात्र 100 रुपये का ही भुगतान करना होगा जबकि 100 यूनिट खपत पर शहर के प्रत्येक घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ से शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में लगभग 600 रूपये वहन किये जायेंगे। इस प्रकार के घरेलू उपभोक्ता जिनको सरकार सब्सिडी प्रदान कर रही है उनकी संख्या पूरे प्रदेश में लगभग एक करोड़ है, जबकि प्रदेश में कुल लगभग 38 लाख कृषि उपभोक्ता हैं जो सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा लगभग 25 हजार 800 करोड़ सब्सिडी के रूप में वहन किये जा रहे है। उल्लेखनीय है कि आयोग के निर्देश पर एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा प्रत्येक माह एफ.पी.पी.ए.एस. (Fuel & Power Purchase Adjustment Surcharge) की दरें जारी की जाती है। विगत माह में यह दर (Minus) -1.71 प्रतिशत थी, जो कि इस माह में (Minus) – 0.63 प्रतिशत के आदेश भी जारी किये गये है। यह दरें आयोग द्वारा जारी ऊर्जा प्रभार पर लागू रहेंगी। अतः प्रत्येक उपभोक्ता श्रेणी पर लागू ऊर्जा प्रभार पर 0.63 प्रतिशत की कमी कर उपभोक्ताओं के बिलों की गणना की जायेगी । विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के मुख्य बिन्दु 1. विद्युत दरों में विगत वर्ष में लागू दरों की तुलना में वितरण कंपनियों द्वारा मांगी गयी 10.19 प्रतिशत वृद्धि के विरूद्ध मात्र 4.8 प्रतिशत की औसत दर वृद्धि की गई है। 2. मौसमी उपभोक्ताओं (एच.वी.4) तथा मेट्रो रेल (एच.वी.9): के टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं। 3. उच्च दाब घरेलू (HV-6), उच्च दाब कृषि (HV-5) एवं उच्च दाब मेट्रो श्रेणी के उपभोक्ताओं के न्यूनतम प्रभार समाप्त किये गये। इसके पूर्व विगत वर्षों में निम्न दाब घरेलू, गैर घरेलू, पब्लिक वॉटर वर्कस एवं स्ट्रीट लाईट, निम्न दाब औद्यौगिक, निम्न दाब कृषि एवं उच्च दाब मौसमी (SEASONAL) श्रेणी के उपभोक्ताओं पर न्यूनतम प्रभार समाप्त किये जा चुके हैं। 4. विगत वर्ष की भांति उपभोक्ताओं को मीटर रेट अथवा मीटरिंग चार्ज नहीं लगेंगे। 5. 10 किलो वॉट तक भार वाले ऐसे सभी उपभोक्ताओं, जहां स्मार्ट मीटर स्थापित हैं, को सौर घंटों (प्रातः 09:00 बजे से सायं 05:00 बजे) के मध्य उपयोग की गयी बिजली पर 20 प्रतिशत की छूट विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी जारी रहेगी। इन उपभोक्ताओं को शीर्ष मांग अवधि में कोई भी सरचार्ज देय नहीं रहेगा। 6. उच्च दाब उपभोक्ताओं जिन पर टीओडी दरें लागू हैं, पर रात्रिकालीन उपभोग (रात्रि 10 बजे में प्रातः 6 बजे तक) की छूट यथावत। 7. जो उपभोक्ता पर्यावरण के लिये जागरुक हैं और केवल रिन्यूएबल एनर्जी से ही बिजली जलाना चाहते हैं, वह 0.30/- रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त भुगतान कर ग्रीन एनर्जी से बिजली उपयोग कर सकते हैं। इन दरों में विगत वर्ष की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत की कमी। 8. नवीन तथा चालू उच्च दाब अतिरिक्त उच्च दाब उपभोक्ताओं के लिये उपलब्ध छूट/प्रोत्साहन की व्यवस्था आंशिक संशोधन के साथ यथावत। 9. उच्च दाब/अति उच्च दाब उपभोक्ताओं को अन्य छूट/प्रोत्साहन की व्यवस्था यथावत जारी रहेगी। 10. प्रीपेड उपभोक्ताओं को छूट प्रोत्साहन की व्यवस्था जारी रहेगी। 11. शीघ्र / ऑनलाईन भुगतान के लिए छूट / प्रोत्साहन की व्यवस्था जारी रहेगी। 12. खुली पहुँच (Open Access) उपभोक्ताओं के अतिरिक्त अधिभार में कमी। 13. विद्युत वितरण कंपनियों के लिए शोध एवं विकास (R&D) फंड की व्यवस्था। इससे तकनीकी हस्तक्षेप, संचालन दक्षता में सुधार एवं लागत में बचत का अध्ययन हो सकेगा। संपूर्ण टैरिफ आदेश आयोग की वेबसाइट www.mperc.in पर उपलब्ध है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वोत्तम

सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मिलता है मनुष्य का शरीर मुख्यमंत्री डॉ. यादव छिंदवाड़ा के सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सपत्नीक हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में यज्ञ का महत्व सर्वश्रेष्ठ है। यज्ञ के माध्यम से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन धन्य हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में बड़े पुण्य व देवताओं की कृपा से मनुष्य का शरीर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को छिंदवाड़ा के सिहोरा मॉल स्थित रामेश्वरम धाम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यज्ञ में सहभागी होकर व्यक्ति अपने जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करता है और यश, सुख तथा समृद्धि की कामना करता है। ऐसे आयोजनों से सनातन संस्कृति के प्रति आस्था मजबूत होती है और सात्विक भाव से जनता की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवद्गीता के उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपस्थित जनसमुदाय को नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और निडरता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि आज नवरात्रि के पावन पर्व पर हनुमान लोक का लोकार्पण भी हुआ है। उन्होंने कहा कि यह शरीर पंचतत्व से बना होता है जिसमें पांच कर्मेन्द्रियां और पांच ज्ञानेन्द्रियां होती है। इन दसों इंद्रियों से लगातार सात्विक भाव से कार्य करने पर सात्विक शक्ति उत्पन्न होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सपत्नीक सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल हुए और लगभग 3200 श्रद्धालुओं के साथ प्रदेश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में पूर्णाहुति दी। महायज्ञ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतविवेक जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा यज्ञ स्थल की परिक्रमा भी की। इसके साथ ही उन्होंने सिहोरामाल स्थित भगवान शंकर के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएं कीं। इस अवसर पर सांसद विवेक बंटी साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इस सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्रदेश को मिलता रहे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में नंबर वन कार्य हो रहे हैं।  

होर्मुज स्ट्रेट का संकट समाप्त, तेल-गैस वाले देशों का गठबंधन, अब बिना दिक्कत जलेंगे चूल्हे

 मुंबई  ईरान जंग ने एक बार फिर से फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीजल आदि) बेस्‍ड डेवलपमेंट मॉडल की खामियों को उजागर कर दिया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का तीन तिहाई आयात करता है. अरब देश एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत हैं. तेल के साथ ही गैस का भी आयात किया जाता है. इनसे ही भारत में गाड़ियां सड़कों पर सरपट भागती हैं और घरों में चूल्‍हे जलते हैं. ऐसे में खाड़ी देश में किसी भी तरह का संकट आने पर उसका सीधा असर भारत भी पड़ता है. अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान अटैक करने के बाद ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले होर्मुज स्‍ट्रेट पर भी इसका व्‍यापक असर पड़ा है. इससे तेल और गैस से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्‍य काफी अहम है, क्‍योंकि इसी रूट से तेल और गैस के अधिकांश शिपमेंट आते हैं ।  अब इस निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम और निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया गया है. भारत अगले 9 से 10 साल में नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड पावर कैपेसिटी को कुल उत्‍पादन का 60 फीसद करने का लक्ष्‍य रखा है. इस तरह फॉसिल फ्यूल यानी तेल आधारित ऊर्जा जरूरतों को तकरीबन एक तिहाई तक सीमित कर दिया जाएगा. ऐसे में यदि होर्मुज जैसे संकट की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्‍यादा असर नहीं पड़ेगा।  अब समझ‍िए कि होर्मुज स्‍ट्रेट पर निर्भरता आने वाले कुछ सालों में कैसे खत्‍म होगी. दरअसल, वैश्विक जलवायु संकट के बीच भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को और मजबूत करते हुए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) के तहत 2031-2035 अवधि के लिए देश के अपडेटेड राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी. इस नए लक्ष्य के तहत भारत ने 2005 के स्तर के मुकाबले अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी लाने और 2035 तक कुल बिजली क्षमता में 60% हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधनों से हासिल करने का लक्ष्य रखा है. यह कदम पेरिस एग्रीमेंट (Paris Agreement) के तहत भारत की जिम्मेदारियों का हिस्सा है और इसे देश की तीसरी NDC प्रस्तुति माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि यह लक्ष्य केवल महत्वाकांक्षी नहीं, बल्कि पहले से हासिल प्रगति पर आधारित है।  संकट से सीख, टार्गेट से आगे की बात सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत ने साल 2015 में तय किए गए अपने पूर्व NDC लक्ष्यों (33-35% उत्सर्जन तीव्रता में कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता) को समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया था. इसी आधार पर अब नए और अधिक कड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. अपडेटेड NDC समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों (CBDR-RC) के सिद्धांतों के अनुरूप है और ‘विकसित भारत 2047’ की व्यापक परिकल्पना को भी मजबूती देता है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता के बीच कई देश अपने जलवायु लक्ष्यों से पीछे हटते दिख रहे हैं. ऐसे समय में भारत का यह कदम वैश्विक मंच पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. ऊर्जा और जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस बार जलवायु महत्वाकांक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है. दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आकलनों के अनुसार 2035-36 तक भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता लगभग 70% तक पहुंच सकती है, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तौर पर 60% का ही लक्ष्य रखा है, जिससे यह लक्ष्य यथार्थवादी और विश्वसनीय बना रहे।  ऐसे बनेगी बात सरकार ने स्पष्ट किया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई मौजूदा और नई नीतियों का सहारा लिया जाएगा. इनमें ग्रीन एनर्जी का विस्तार (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) बैटरी स्टोरेज, स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाएं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके अलावा International Solar Alliance जैसे वैश्विक सहयोग मंच और राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना (NAPCC) के तहत चल रहे कार्यक्रम भी इन लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे. सरकार कार्बन कैप्चर तकनीकों और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. नई NDC केवल उत्सर्जन में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन उपायों पर भी खास ध्यान दिया गया है. इसमें तटीय सुरक्षा, ग्लेशियर निगरानी, हीट एक्शन प्लान और आपदा लचीलापन शामिल हैं. सरकार ने Lifestyle for Environment (LiFE) पहल के जरिए आम नागरिकों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल करने का लक्ष्य रखा है, ताकि रोजमर्रा की जीवनशैली में पर्यावरण अनुकूल बदलाव लाए जा सकें। 

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल गंगा संवर्धन अभियान में स्टॉप डैम और चेक डैम का मरम्मत व नवीनीकरण कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के किए जाएंगे कार्य वाटरशेड विकास के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट सहित 19 अन्य जल संरचनाओं का किया जाएगा निर्माण भोपाल  जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह महाअभि‍यान केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-अभियान के रूप में चल रहा है। इस वर्ष अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास के कार्यों को भी शामिल किया गया है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट तथा 19 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण एवं जल उपलब्धता में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा में विस्तार एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्‍त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत पूर्व में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। इससे न केवल इन संरचनाओं की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित होगी, बल्कि जल संरक्षण के पूर्व प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं सतत निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की निगरानी WMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे कार्यों की वास्तविक समय पर प्रगति का आंकलन संभव हो सकेगा। वाटरशेड विकास 1.0 के कार्यों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से कर उन्हें मनरेगा पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे उनके अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।  

एमपी में शराब नीलामी का 8वां राउंड शुरू, 1 अप्रैल की डेडलाइन, खाली पड़े ठेके और नया दांव

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले सभी शराब दुकानों को नीलाम करने की चुनौती से जूझ रहे आबकारी विभाग ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारी-भरकम ग्रुप में दुकानें न बिकने के कारण अब सरकार 'सिंगल शॉप' (एकल दुकान) मॉडल पर उतर आई है। यानी अब कोई भी छोटा ठेकेदार केवल एक दुकान के लिए भी बोली लगा सकेगा। भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में ठेकेदारों की बेरुखी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद बेस प्राइज (आरक्षित मूल्य) में भी 10% की कटौती कर दी गई है। क्या है सरकार की मजबूरी? शुरुआती राउंड में विभाग ने पिछले साल की तुलना में बेस प्राइज 20% बढ़ाकर रखा था, लेकिन ठेकेदारों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। आठवें राउंड की बिडिंग तक केवल 60% दुकानें ही नीलाम हो सकी हैं। भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, झाबुआ और नीमच जैसे जिलों में बड़ी संख्या में दुकानें अब भी नहीं बिकी हैं। सरकार को इस साल शराब से 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाना है, जो इस धीमी रफ्तार से खतरे में नजर आ रहा है। ऐसे समझें पूरा खेल: क्यों बदला नियम? पहले दुकानों को बड़े समूहों में नीलाम किया जा रहा था, जिससे छोटे ठेकेदार बाहर हो गए थे और बड़े सिंडिकेट मनमानी कीमत मांग रहे थे। अब एक दुकान-एक बोली के नियम से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। विभाग को उम्मीद है कि इस लचीलेपन से बचे हुए 40% ठेके भी 31 मार्च की रात तक उठ जाएंगे। एक्सपर्ट की राय क्या है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में शराब की खपत और ठेकेदारों के मुनाफे के गणित में अंतर आया है। सरकार का 20% इजाफा ठेकेदारों को भारी लग रहा था। अब 10% की कटौती और सिंगल शॉप मॉडल ही एकमात्र रास्ता बचा था ताकि 1 अप्रैल से दुकानें बंद न रहें।  

भोपाल मेट्रो को मिली हरी झंडी, प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम की शुरुआत, दिल्ली जैसी सुविधा मिलेगी

भोपाल  शहर में मेट्रो की धीमी रफ्तार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सुधार की दिशा में काम शुरू हो गया है। सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर दिया गया है। अभी मेट्रो एक ही ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मौजूदा समय में एक ट्रेन के बाद दूसरी ट्रेन आने में करीब 75 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में रोजाना सफर करने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। दरअसल, सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों तरफ चलाई जा रही है। यानी जो ट्रेन आगे जाती है, वही उसी ट्रैक से वापस लौटती है। अप ट्रैक तैयार तो है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के बिना उस पर संचालन संभव नहीं है। इसी कारण मेट्रो अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नलिंग सिस्टम लगने के बाद हालात बदल जाएंगे। दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेनें चल सकेंगी और उनके बीच का अंतर भी कम होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जानकार बताते हैं कि सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो सेवा के लिए बेहद जरूरी होता है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति, उनके बीच की दूरी और सुरक्षा को नियंत्रित करता है। इसके बिना मल्टी-ट्रैक संचालन संभव नहीं होता। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि काम पूरा होने के बाद सेफ्टी ट्रायल कराया जाएगा। इसके लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को बुलाया जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक भोपाल में भी लागू की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे मेट्रो सेवा ज्यादा भरोसेमंद और तेज होगी। अभी कम स्पीड और ज्यादा इंतजार के कारण यात्रियों की संख्या भी सीमित है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है। शहर के लोगों के लिए यह राहत की खबर है। अगर सब कुछ तय समय पर पूरा होता है, तो भोपाल मेट्रो आने वाले महीनों में ज्यादा सुविधाजनक और उपयोगी साबित हो सकती है। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। अप्रैल में फिर होगा सेफ्टी ट्रायल     सिग्नलिंग का काम पूरा होने के बाद मेट्रो प्रबंधन एक बार फिर कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) को निरीक्षण के लिए बुलाएगा।     जरूरी परीक्षण और सेफ्टी क्लियरेंस मिलने के बाद ही अप ट्रैक पर भी नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लगेगी भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी।

समाधान योजना से 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ: ऊर्जा मंत्री तोमर

समाधान योजना में 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में अब तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 420 करोड़ 93 लाख का सरचार्ज हुआ माफ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अभी तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1231 करोड़ 68 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 420 करोड़ 93 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 63 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 701 करोड़ 91 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 301 करोड़ 22 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 275 करोड़ 46 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 83 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 50 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 254 करोड़ 31 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 35 करोड़ 94 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

Harry Potter Web Series Teaser: हैरी पॉटर की जादुई दुनिया नए अंदाज में, पहली झलक हुई जारी

मुंबई  'हैरी पॉटर' एक ऐसी नोवल है, जिसे अधिकतर कई लोगों ने जाना और पढ़ा है. हैरी पॉटर की काल्पनिक दुनिया, जहां बच्चा-बच्चा जादू जानता है, उसे काफी पसंद किया गया है. जेके.रोलिंग ने इसपर सात किताबें लिखी हैं, जिसे फिल्मों के रूप में भी हमारे सामने पेश किया गया. 'हैरी पॉटर' फिल्म सीरीज काफी सफल भी रही और अब इसे वेब सीरीज के रूप लाया जा रहा है।  छोटे पर्दे पर दिखेगा हैरी पॉटर का जादू 'वॉर्नर ब्रदर्स' हैरी पॉटर की तिलिस्मी दुनिया को छोटे पर्दे पर लाने वाले हैं, जिसका पहला टीजर हमारे सामने आ चुका है. 'हैरी पॉटर एंड द फिलोसोफर्स स्टोन', 'हैरी पॉटर' सीरीज का पहला सीजन होगी, जो हैरी की शुरुआती दुनिया को हमारे सामने विस्तार से दिखाएगी. टीजर की शुरुआत फिल्म की ही तरह उसके स्कूल से होती है, जहां उसे बाकी बच्चे तंग करते हैं. यहां तक कि उसकी आंटी भी उसे कोसती है कि वो कोई खास बच्चा नहीं है।  इसके बाद हैरी की कहानी में बदलाव तब आता है जब उसे हॉगवर्ट्स स्कूल ऑफ विचक्राफ्ट एंड विजार्ड्री में भर्ती होने का लेटर आता है. आगे उसकी मुलाकात हैग्रिड से होती है, जो उसे हॉगवर्ट्स लेकर जाता है. इस टीजर ने कई 'हैरी पॉटर' फैंस की पुरानी यादों को ताजा करने का काम किया है. वो ये देखने के लिए काफी एक्साइटेड हैं कि 'हैरी पॉटर' सीरीज के पहले सीजन में फिल्म से अलग क्या खास होने वाला है. ये सीरीज दुनियाभर में क्रिसमस 2026 को स्ट्रीम होगी, जिसे इंडिया में उम्मीद है कि जियो हॉटस्टार पर देखा जा सकेगा।  क्या है नई 'हैरी पॉटर' सीरीज की कास्ट? 'हैरी पॉटर' फिल्म सीरीज की कास्ट आज भी लोगों के मन में कहीं ना कहीं बसी हुई है. उन्होंने जो छाप आज से करीब एक दशक पहले ऑडियंस के मन में छोड़ी थी, वो मिटाना आसान तो नहीं है. एमा वॉटसन, रुपर्ट ग्रिंट, डेनियल रेडक्लिफ की तिगड़ी आज भी हर किसी को याद है. मगर 'हैरी पॉटर' सीरीज की जो नई कास्ट सामने आई है, वो भी दमदार लग रही है. इस बार हैरी का किरदार डोमिनिक मैकलाफलिन निभाएंगे।  वहीं उसके दोस्त के रूप में अराबेला स्टैंटन, हरमाइन ग्रेंजर बनी हैं और अलास्टेयर स्टाउट रॉन वीजली का रोल प्ले कर रहे हैं. निक फ्रॉस्ट, इस सीरीज में रूबियस हैग्रिड बने हैं. एल्बस डंबलडोर के रोल में इस बार जॉन लिथगो नजर आएंगे।