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डॉ. बलजीत कौर ने जारी की 352 करोड़ की राशि, बुजुर्ग पेंशन के लिए बड़ा कदम

चंडीगढ़   सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री पंजाब डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के तहत बुजुर्ग पेंशन योजना के अंतर्गत 352 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बुजुर्गों की भलाई और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा हर महीने 23,51,338 से अधिक उम्रदराज लाभार्थियों को वक्त रहते पेंशन के रूप में आर्थिक सहायता मिलती रहे, इस मंतव्य को ध्यान में रखते हुए 4000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि कई बुजुर्गों के लिए यह पेंशन जीवन का महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रही है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतें पूरी कर आत्मनिर्भर जीवन जी पा रहे हैं। यह योजना सरकार द्वारा बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देने के उद्देश्य को दर्शाती है। मंत्री के अनुसार, 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुष और 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं, जिनकी वार्षिक आय 60,000 रुपये से अधिक नहीं है, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिन आवेदकों के पास 2.5 एकड़ तक सिंचित जमीन, या 5 एकड़ तक असिंचित (बारानी) जमीन, या पानी वाले क्षेत्र में 5 एकड़ तक जमीन (पति-पत्नी की संयुक्त जमीन सहित) है, वे भी इस योजना के लिए पात्र हैं। कैबिनेट मंत्री ने जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेंशन का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए और लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा किया जाए। उन्होंने नियमित निगरानी और फील्ड स्तर पर जांच करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र बुजुर्ग लाभ से वंचित न रहे और पारदर्शी तरीके से राशि लाभार्थियों तक पहुंचे। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग सम्मान, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के साथ जीवन व्यतीत कर सके।

महंगाई भत्ते में 4% बढ़ोतरी का अनुमान, आपकी मंथली सैलरी में ये बदलाव आएगा

  नई दिल्‍ली सरकारी कर्मचारियों को लंबे समय से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का इंतजार है. कर्मचारियों का कहना है कि हर साल मार्च-अप्रैल के दौरान जनवरी का बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जारी हो जाता है, लेकिन इस बार अभी तक महंगाई भत्ता नहीं आया है. लेकिन उम्‍मीद बनी हुई है. जल्‍द ही सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है।  अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं और अपनी सैलरी स्लिप पर नजर रखते हैं, तो महंगाई भत्ता (DA) में होने वाली अगली बढ़ोतरी आपके दिमाग में जरूर होगी. साथ ही ये बढ़ोतरी कितनी होगी, आंकड़े क्‍या कह रहे हैं और आपकी मंथली सैलरी में इजाफा कितना हो सकता है? यह सभी सवाल भी आपके दिमाग में चल रहे हैं, आइए जानते हैं।  कितनी हो सकती है बढ़ोतरी मौजूदा अनुमानों के अनुसार, आगामी महंगाई भत्ता (DA) में 2% से 4% की वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि कुल महंगाई भत्ता (DA) में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे पिछले कई सालों से चली आ रही इसकी स्थिर वृद्धि जारी रहेगी. यह बढ़ोतरी पहले महीने के दौरान थोड़ी लग सकती है, लेकिन सालाना आधार पर देखें तो यह एक बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।  कैसे तय होता है महंगाई भत्ता?  इस बढ़ोतरी का अनुमान मनमाने तरीके से नहीं लगाया जाता है, बल्कि सीपीआई आंकड़ों पर निर्भर करता है. कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स (CPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस एक तय नियम के आधार पर महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की जाती है. इस बार महंगाई स्थिर है, लेकिन थोड़ी धीमी गति से बढ़ रही है, इसलिए महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी एक सीम‍ित दायरे में रहने की संभावना है।  बैंकबाजार के सीईओ अदिल  शेट्टी इसे सरल शब्दों में समझाते हैं कि DA में संशोधन फॉर्मूला-आधारित होते हैं और CPI-IW के 12 महीने के एवरेज से जुड़े होते हैं. मौजूदा रुझान लगभग 2% से 4% की मामूली तेजी दिखा रहे हैं, जिससे कुल DA 60% या उससे थोड़ा ऊपर पहुंच जाएगा।  इससे आपकी सैलरी पर क्या असर पड़ेगा? महंगाई भत्ते में मामूली प्रतिशत की बढ़ोतरी भी आपकी सैलरी में इजाफा कर सकती है. 18,000 रुपये के मूल वेतन पर, DA से प्रति माह लगभग 360 से 540 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि 29,200 रुपये कमाने वाले व्यक्ति को लगभग 584 से 876 रुपये का लाभ हो सकता है।  इसके अलावा, 56,100 रुपये जैसे हाई सैलरी पर मंथली इजाफा 1,100 रुपये से अधिक हो सकती है. 2.5 लाख रुपये के मूल वेतन वाले सीनियर एम्‍प्‍लाई के लिए, लाभ हर महीने 5,000 रुपये से 7,500 रुपये तक हो सकती है. शेट्टी बताते हैं कि एक साल के दौरान, यह नियमित बढ़ोतरी बिना किसी भूमिका में बदलाव के आय में एक बड़ी उछाल दे सकती है।  महंगाई पर निर्भर  विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम आंकड़ा आने वाले महीनों में महंगाई के व्यवहार पर निर्भर करेगा. महंगाई भत्ता वृद्धि भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन यह अपना उद्देश्य पूरा करती रहेगी. समय के साथ, ये छोटी-छोटी बढ़ोतरी जुड़ती जाती हैं, जिससे ऐसे माहौल में एक स्थिर वित्तीय सुरक्षा मिलती है डेली यूज की लागत लगातार बढ़ती रहती हैं। 

पंथक मुद्दों पर सीएम मान की घेराबंदी, शिअद और सुखबीर बादल बने निशाने पर

अमृतसर  पंजाब की सियासत में इन दिनों एक पंथक मुद्दे पर खूब सियासत गरमाई हुई है। इस बार निशाने पर है शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल।  सुखबीर के एक बयान से शुरू हुए इस विवाद पर पंथक नेताओं के साथ-साथ अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी आक्रामक दिख रहे हैं जबकि सुखबीर बादल इसे अपने और अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बता रहे हैं। बादल का दावा है कि शिअद पंथ और गुरुघर की सेवा करने वाली पार्टी है। दरअसल, यह सियासत 2 दिसंबर 2024 के उस हुक्मनामे से जुड़ी है जिसे श्री अकाल तख्त ने सुखबीर बादल के खिलाफ जारी किया था। बेअदबी के एक मामले में बादल और शिअद की समूची लीडरशिप श्री अकाल तख्त के समक्ष पेश हुई थी और तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने बादल को तनखाहिया घोषित उन्हें धार्मिक सजा दी थी। 13 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भी सीएम ने इस मसले का जिक्र किया। विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे ज्ञानी रघुबीर सिंह ने भी बादल के इस बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। सीएम अब रैलियों के दौरान इस मुद्दे को खूब उछाल रहे हैं। सुखबीर बादल का दावा, उन्हें खत्म करने की साजिश सुखबीर बादल ने दावा किया था कि जिस दिन बहिबलकलां और बरगाड़ी की घटनाएं हुई थीं वे पंजाब से बाहर थे मगर यह विवाद खत्म करने के लिए उन्होंने सब कुछ अपनी झोली में पड़वा लिया था। बादल ने कहा था कि उन पर कई सियासी हमले हुए। कुछ लोग जो खुद को धार्मिक नेता कहते थे, वे उनकी सियासत को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक साजिश कर दी थी कि सजा के दौरान उन्हें श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर बिना सुरक्षा बैठने का हुक्म दिया गया। उन पर जानलेवा हमला हुआ मगर परमात्मा का हाथ उनके सिर पर था। फैसला साजिश थी, साबित करें बादल : ज्ञानी रघुबीर बादल के बयान पर श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि बादल का यह बयान श्री तख्त साहिब की पवित्रता का अपमान है। सजा किसी साजिश के तहत नहीं बल्कि बयानों पर आधारित थी। अकाली लीडरशिप ने अपने कामों को माना था। अपने कामों का इकबाल किया था और उन्हें रिवायती धार्मिक सेवा करने का मौका दिया गया था। सेवा करने के बावजूद सुखबीर बादल ने अपने कामों से इन्कार कर दिया है। बादल यदि श्री अकाल तख्त साहिब आकर यह साबित कर दें कि उस वक्त दिया फैसला एक साजिश का हिस्सा था तो वे सिख परंपराओं के अनुसार किसी भी धार्मिक सजा को स्वीकार करने को तैयार हैं। 2 दिसंबर 2024 का फैसला पंथक रिवायतों और कबूल किए हुए गुनाहों के मुताबिक था। अकाली दल बेअदबी के लिए दोषी है : मान इसी विवाद पर सीएम मान हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि शिअद श्री गुरु साहिब जी की बेअदबी के लिए दोषी है। इन नेताओं के पाप माफ नहीं किए जा सकते। ये अवसरवादी नेता हैं जो अपनी सुविधा और निजी सियासी हितों के अनुसार गिरगिट की तरह अपने रंग और रुख बदलते रहते हैं। जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं वे श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए और पूरी जनता के सामने अपना अपराध कबूल किया। हालांकि यह उनकी राजनीतिक इच्छाओं के अनुसार नहीं था इसलिए उन्होंने कुछ समय बाद यू-टर्न ले लिया और कहने लगे कि कुछ लोग केंद्रीय एजेंसियों के हाथों की कठपुतली बनकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। अब पूरे प्रदेशवासी इन नेताओं का असली चेहरा जान गए हैं।  

केंद्र ने पंजाब-चंडीगढ़ के किसानों को गेहूं खरीद के लिए दी विशेष छूट, राहत की खबर

चंडीगढ़  बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए बड़ा फैसला लेते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में गेहूं की खरीद के लिए विशेष छूट को मंजूरी दे दी है, जिससे किसानों को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा," अनियमित वर्षा के चलते गेहूं खरीद में छूट देने का अनुरोध 9 अप्रैल 2026 को प्राप्त हुआ था। इसके तुरंत बाद 10 अप्रैल को सभी जिलों में हालात का जायजा लेने के लिए टीमों को तैनात किया गया। प्रभावित किसानों को मिलेगी तुरंत राहत मैदानी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र (RMS) 2026–27 के तहत यह अहम फैसला लिया है। मंत्री ने बताया कि इस कदम से किसानों को मजबूरी में फसल बेचने (डिस्ट्रेस सेल) से बचाया जा सकेगा और उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि ये छूटें RMS 2026–27 की शुरुआत से ही लागू होंगी, जिससे प्रभावित किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। किसानों ने चक्का जाम का फैसला टाला केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में पत्र राज्य सरकार को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश आज से ही लागू हो जाएंगे। किसानों ने रेल का चक्का जाम करने की घोषणा की थी हालांकि बाद में उसे टाल दिया था। केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू ने भी सुबह ही इस संबंध में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने एफसीआई के जरिए राज्य सरकार को गेहूं खरीद के मानकों में बदलाव की जानकारी दे दी थी। केंद्र सरकार के पत्र के अनुसार गेहूं खरीद के मानकों में दी गई छूट 1. कलर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की सीमा पूरे पंजाब और चंडीगढ़ (यू.टी.) में 70% तक बढ़ा दी गई है। 2. सिकुड़े हुए एवं टूटे हुए दानों की सीमा, जो पहले 6% थी, उसे बढ़ाकर 15% तक कर दिया गया है। 3. क्षतिग्रस्त एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों का कुल प्रतिशत 6% से अधिक नहीं होगा। 4. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका अलग हिसाब रखा जाएगा। 5. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के भंडारण के दौरान गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की गिरावट के लिए पंजाब सरकार और चंडीगढ़ (यू.टी.) स्वयं जिम्मेदार होंगे। 6. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के स्टॉक का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। 7. इस छूट के कारण उत्पन्न किसी भी वित्तीय या परिचालन संबंधी प्रभाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

सिलेंडर की मारामारी, शादी समारोहों का मेन्यू तक घटा

नई दिल्ली शादियों का सीजन शुरू होते ही गैस सिलेंडर को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। जिन घरों में विवाह समारोह हैं उनके लिए सिलेंडर का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। एजेंसियों के चक्कर लगाने के बाद भी लोगों को व्यावसायिक सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। परेशान लोग पेट्रोलियम मंत्रालय तक शिकायत कर रहे हैं। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने से पहले एलपीजी की किल्लत नहीं थी। शादी या अन्य समारोह के लिए लोगों को व्यावसायिक सिलेंडर आसानी से मिल रहे थे। गैस एजेंसी संचालकों ने बताया कि लोग आकर शादी का कार्ड दिखाते थे और जरूरत के अनुसार व्यावसायिक सिलेंडर ले जाते थे। अब गैस कंपनियों की ओर से सख्ती कर दी गई है। मौजूदा समय में कनेक्शन धारकों को भी उनकी जरुरत का सत्यापन करने के बाद सिलेंडर दिए जा रहे हैं। किसी कनेक्शन धारक की औसत खपत अगर महीने में 10 सिलेंडर की है, तो उसे महज 6-7 सिलेंडर ही दिए जा रहे हैं। गैस एजेंसी संचालकों ने बताया कि शादी-समारोह के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर सिर्फ शादी के कार्ड के आधार पर उपलब्ध करा पाना अब संभव नहीं हो पा रहा है। सोशल मीडिया के जरिये मंत्रालय को बता रहे समस्या सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये अपनी शिकायतें गैस कंपनियों और मंत्रालय तक पहुंचा रहे हैं। किरण नाम के एक्स हैंडल से की गई शिकायत में बताया गया कि घर में शादी है, लेकिन गैस नहीं मिल रही है। ऐसे ही कई अन्य यूजर्स ने अपनी शिकायतें साझा की हैं। इन सभी शिकायतों पर उत्तर दिया गया है और गैस सिलेंडर दिलाने का प्रयास किया गया है। शादी के लिए सिलेंडर लेने के लिए लोग जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भी मदद ले रहे हैं। छापेमारी में 2027 सिलेंडर जब्त कालाबाजारी को रोकने के लिए दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों ने अब तक 540 स्थानों पर छापेमारी की है। इसमें 2027 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 44 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए विकास भवन स्थित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यहां पर शिकायत मिलने के बाद जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की टीमें भी गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सक्रिय हैं। सगाई-शादी में व्यंजनों की संख्या को कम करना पड़ा गैस सिलेंडर मिलने में हो रही परेशानी का असर अब शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों पर साफ नजर आने लगा है। गैस की कमी के चलते लोगों को अपने कार्यक्रमों में व्यंजनों की संख्या कम करनी पड़ रही है। जिससे आयोजनों का स्वाद और रंग दोनों फीके पड़ते जा रहे हैं। ज्योति नगर निवासी महेश शर्मा ने बताया कि उनके बड़े बेटे आलोक की शादी 23 अप्रैल को तय है। 21 अप्रैल को सगाई का कार्यक्रम रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले सगाई के लिए करीब 25 व्यंजनों का मेन्यू तय किया गया था, लेकिन गैस की किल्लत के चलते अब इसमें कटौती करनी पड़ी है। महेश ने बताया कि इस बदलाव के लिए वधू पक्ष से भी सहमति ली गई, जिसके बाद उन्होंने भी शादी के मुख्य कार्यक्रम में सात-आठ व्यंजन कम करने का फैसला किया है। दिल्ली के बजाय गांव से करना पड़ रहा आयोजन राजधानी में रहने वाले उत्तराखंड के कुछ लोग शादी समारोह को एलपीजी संकट की वजह से गांव से करने का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कैटरिंग संचालक अधिक रुपये की मांग कर रहे हैं। इससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आरके पुरम निवासी मोहित सिंह ने बताया कि उनकी बहन की शादी इस माह के आखिरी सप्ताह में है। काफी कोशिश के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे ही एलपीजी का संकट शुरू हुआ, वैसे ही कैटरिंग संचालक ने अधिक रुपये की मांग कर दी। साथ ही मेन्यू में भी कटौती की बात की थी। ऐसे में उन्होंने बीते माह ही शादी समारोह का आयोजन अपने गांव में करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि गांव में लकड़ी से खाना बनेगा, जिससे कोई परेशानी नहीं होगी। समारोह के लिए ऐसे मिल सकता है गैस सिलेंडर दिल्ली की एलपीजी डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि शादी के लिए व्यावसायिक गैस सिलेंडर लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब सिलेंडर तभी मिल पाएगा, जब डीलर्स के पास उपलब्धता होगी। सिलेंडर पाने के लिए शादी का कार्ड लेकर नजदीकी एलपीजी डीलर के कार्यालय जाकर वहां अस्थायी कनेक्शन लेना होगा। इसके बाद प्रत्येक सिलेंडर के लिए तय करीब 2500 रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करानी होगी। गैस की कीमत अलग से देनी होगी। अगर डीलर के पास व्यावसायिक सिलेंडर उपलब्ध है, तो वे कार्ड के आधार पर ही सिलेंडर दे देंगे। सिलेंडर लौटाने पर सिक्योरिटी की रकम वापस हो जाएगी।

सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई,15 लाख का इनामी शाहदेव मारा गया, जंगल में सर्च ऑपरेशन जारी

 हजारीबाग हजारीबाग जिले के पिपरवार-केरेडारी सीमावर्ती क्षेत्र स्थित खपिया जंगल में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और टीएसपीसी (TSPC) उग्रवादियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई. इस कार्रवाई में पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने संगठन के चार उग्रवादियों को मार गिराया है. मारे गए उग्रवादियों में संगठन का जोनल कमांडर और 15 लाख का इनामी उग्रवादी शाहदेव भी शामिल है, जिसकी लंबे समय से तलाश की जा रही थी. गुप्त सूचना पर कोबरा टीम का प्रहार दरअसल पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि टीएसपीसी के उग्रवादी किसी बड़ी साजिश के तहत खपिया कोटी झरना इलाके में जमा हुए हैं. इसके बाद कोबरा बटालियन और चतरा जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला. जैसे ही सुरक्षा बल जंगल के करीब पहुंचे, उग्रवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने मोर्चा लेते हुए चार उग्रवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया. खबर लिखे जाने तक पुलिस और नक्सलियों के बीच लगातार गोलीबारी जारी है. बताया जा रहा है कि मारे गए उग्रवादियों में शाहदेव की पत्नी नताशा भी शामिल है. टीएसपीसी संगठन की टूटी कमर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन से टीएसपीसी को तगड़ा झटका लगा है. सुरक्षा बलों के द्वारा चलाए जा रहे अभियानों से चाईबासा और चतरा के इलाकों में सक्रिय टीएसपीसी उग्रवादी संगठनों की कमर टूट गई है. कार्रवाई के दौरान उग्रवादियों द्वारा प्रयुक्त किये जाने वाले हथियार और गोला-बारूद भी भारी मात्रा में बरामद हुए हैं. जंगलों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन मुठभेड़ के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ उग्रवादी जंगल और पहाड़ियों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे हैं, जिनकी तलाश में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. पुलिस मुख्यालय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों का कहना है कि जब तक क्षेत्र उग्रवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा.

नूंह को मिलेगा स्टेडियम और आधुनिक सुविधाओं का तोहफा

नूंह हरियाणा के नूंह जिले को अब विकास के पंख लगेंगे। जिले की चार विकास परियोजनाओं के लिए बजट मंजूर किया गया है। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से ये योजनाएं लागू होंगी। इनमें स्टेडियम निर्माण सहित कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र में जिन योजनाओं को स्वीकृति मिली है, उनमें एक भव्य सभागार और संग्रहालय परिसर का निर्माण प्रमुख है। यह परिसर पुराने कार्यालयों वाली सड़क पर विकसित किया जाएगा, जिससे सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को एक आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए पलवल टी-पॉइंट के पास मेवात मॉडल स्कूल के नजदीक उपलब्ध भूमि पर स्टेडियम बनाया जाएगा। इससे युवाओं को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा। शहर की सड़कों के सौंदर्यीकरण के तहत पलवल टी-पॉइंट से झंडा चौक तक बीच की पट्टी को विकसित किया जाएगा। नगर परिषद कार्यालय भवन के विस्तार की योजना भी शामिल है। मौजूदा भवन के साथ नई इमारत बनाई जाएगी, जिससे प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुचारु ढंग से संचालित किया जा सकेगा और लोगों को सेवाएं आसानी से मिलेंगी। सोहना में जलभराव से राहत मिलेगी नगर परिषद ने शहर में बरसात के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नई योजना लागू करनी शुरू कर दी है। नई योजना के तहत अब विकास कार्यों के दौरान सड़कों को पक्का करने या दोबारा कंक्रीट डालने के साथ-साथ बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग से लाइन बिछाई जा रही है। यह लाइन सीवर सिस्टम की तर्ज पर गटर के रूप में तैयार की जा रही है, जिससे बारिश के पानी के साथ बहकर आने वाला कूड़ा-कचरा भी आसानी से निकल सके। इस व्यवस्था से पानी बिना रुके ढाल की दिशा में बह सकेगा और सड़कों पर जमा नहीं होगा। वार्ड-16 के पार्षद हरिश नंदा का कहना है कि इस योजना से भविष्य में जलभराव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। वहीं वार्ड-6 के पार्षद राकेश रोहिल्ला ने बताया कि नई निकासी लाइन बनने से सीवर पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा और पानी की निकासी तेजी से हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक बारिश के बाद जलभराव कम होने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता था। एसडीओ राजपाल खटाना ने कहा कि नई व्यवस्था के बाद बारिश रुकने के कुछ ही मिनटों में पानी की निकासी हो जाएगी।

महिलाओं को ई-वाहन प्रशिक्षण और ब्याज मुक्त लोन से आत्मनिर्भरता

गुरुग्राम अपने खुद के रोजगार का सपना देख रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। गुरुग्राम जिले में पिंक कैब योजना से दस हजार गरीब-शिक्षित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। योजना के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चलाने का विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद ई-कैब खरीदने के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण दिए जाएंगे। इससे महिलाएं न केवल स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी, बल्कि परिवहन क्षेत्र में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकेंगी। पिंक कैब योजना को लखपति दीदी से जोड़ा गया गुरुग्राम में जल्द ही पिंक कैब योजना शुरू कर महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की भावना बढ़ सके। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार देना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मान जनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है। महिलाओं को इलेक्ट्रिक वाहन चलाने के लिए बैंकों से ऋण मिलेंगे। ऋण पर पांच लाख तक क्रेडिट गारंटी और तीन लाख पर ब्याज में छूट होगी। पिंक कैब योजना को केंद्र सरकार की लखपति दीदी से जोड़ा गया है, ताकि महिलाएं नियमित आय स्रोत से जुड़ सकेंगी। गुरुग्राम में दस हजार से अधिक महिलाएं योजना से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है बैंकों को दिए गए निर्देश एडीसी सोनू भट्ट की ओर से सभी बैंकों को इस योजना को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए है। पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी। इसमें वाहन चलाने का प्रशिक्षण, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए दस लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण, सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था होगी। ऋण मुहैया कराने में बैंक से मदद मिलेगी जिला अग्रणी प्रबंधन विनोद कुमार बजाज ने कहा कि पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी और परिवहन क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। इसमें वाहन चलाने का प्रशिक्षण, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए दस लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण, स्वरोजगार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता, सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था होगी। इसमें बैंकों की ओर से ऋण मुहैया कराकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग रहेगा। एक साल में दस हजार महिलाओं को जोड़ा जाएगा। इसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ने की योजना है। रोजगार को बढ़ावा योजना के अंतर्गत महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। इससे उनमें आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ सके। इसका उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। बल्कि उन्हें सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है।

भाकियू का हंगामा: हापुड़ कूच के दौरान टोल प्लाजा पर टकराव, पुलिस पर हमला

  हाथरस पूर्व मंत्री द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन ने शुक्रवार को कई जिलों में भारी बवाल कर दिया। भाकियू कार्यकर्ताओं ने हाथरस में पुलिस के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की की और दरोगा के पैर पर गाड़ी चढ़ाई दी। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। हापुड़ कूच कर रहे कई कार्यकर्ताओं को अलीगढ़ के गभाना टोल प्लाजा पर रोका गया तो वहां भी कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद भी उन्हें रोका नहीं जा सका। सैकड़ों कार्यकर्ता दर्जनों गाड़ियों से टोल प्लाजा पार करके निकल गए। वहीं भाकियू के बवाल को देखते हुए हापुड़, बुलंदशहर में भारी तादाद में पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया है। कुछ दिन पहले एक ढाबे के शुभारंभ के दौरान पूर्व मंत्री मदन चौहान द्वारा किसान नेताओं पर अभद्र टिप्पणी की गई थी। जिसके विरोध में भाकियू ने पूर्व मंत्री के आवास के घेराव का ऐलान किया था। शुक्रवार को कई जिलों से भाकियू कार्यकर्ता पूर्व मंत्री का आवास घेरने के लिए प्रदर्शन करते हुए हापुड़ के लिए कूच कर गए। कार्यकर्ताओं का हुजूम दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ हापुड़ जा रहे कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिलों में रोक लिया गया। इसको लेकर हाथरस में एसपी सिटी एटा और भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित किसान पीछे हटने को तैयार नहीं थे। तनाव उस समय और बढ़ गया जब कार्यकर्ताओं ने पुलिस घेरा तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान एक गाड़ी कस्बा इंचार्ज के पैर पर चढ़ गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने सीओ की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। पूर्व मंत्री के आवास पर भारी पुलिस तैनात, सियासत गरमाई सलारपुर में हुई तीखी नोकझोंक के बाद भारतीय किसान यूनियन (भानु) और पूर्व मंत्री मदन चौहान के बीच का विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। पूर्व मंत्री के आवास के घेराव के ऐलान के बाद शुक्रवार को गढ़मुक्तेश्वर की सड़कों पर तनाव का माहौल पैदा हो गया। पूर्व मंत्री के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। टकराव की आशंका को देखते हुए जिले के कई थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद सलारपुर में हुई एक नोकझोंक के बाद शुरू हुआ, जिसने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। कार्यकर्ताओं में मदन चौहान की टिप्पणियों को लेकर गहरा रोष है। पूर्व मंत्री के खिलाफ धरना देने हरदोई, लखनऊ से गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे सैकड़ों किसान बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव चितौड़ा में स्थित एक ढाबे के शुभारंभ के दौरान पूर्व मंत्री मदन चौहान और भाकियू भानू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के बीच हुई नोकझोक ने बढ़ा रूप ले लिया है। सोशल मीडिया से शुरू हुए विवाद अब धरना प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर जहां पूर्व मंत्री ने अपने आवास पर हवन पूजन करने की बात कहीं है वहीं दूसरी और हापुड़ जनपद के अलावा भाकियू भानू गुट के पदाधिकारी लखनऊ, हरदोई, संभल, बदायूं आदि जनपद से गढ़ पहुंच गए है। हालांकि पुलिस ने किसान संगठन के कई नेताओं को नजर बंद कर लिया है, लेकिन बहारी जनपदों के किसान गढ़ में पहुंच गए है। इस को लेकर पुलिस का सिरदर्द बढ़ गया है। क्या था मामला गांव चितौड़ा निवासी कुछ युवकों ने यूपी 37 के नाम से एक ढाबे का संचालन किया है। उसके शुभारंभ कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता एंव पूर्व मंत्री मदन चौहान को भी कार्यक्रम में बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान होटल संचालन के लिए भानु प्रताप ने एक ब्यान दिया। दिए गए ब्यान में उन्होंने कहा कि यह ढाबा किसान यूनियन के पदाधिकारियों का है इसको खुब चलावें, खूब खांवे और भाजपा को हरावें का ब्यान दिया। इस ब्यान को सुनकर उनके पड़ोस में बैठे मदन चौहान भड़क गए। पूर्व मंत्री ने उनके ब्यान की निंदा की उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ब्यान देना काफी गलत है। इस दौरान पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष में जमकर नोकझोक हुई। एक वीडियो में तो मदन चौहन ने भानु प्रताप पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को गाली देने का आरोप लगाया। इस दौरान कार्यक्रम नोकझोक का अखाड़ा बन गया। मौके पर काफी भीड़ एकत्र हो गई। पूरे घटना क्रम की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग तरह तरह की चर्चा शुरू हो गई।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के आदेश पर नूनहेन्स कंपनी के खिलाफ अमानक बीज मामले में FIR दर्ज

धार / खरगोन मध्य प्रदेश के धार और खरगोन जिले के किसानों ने करेला फसल में हुए भारी नुकसान को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। किसानों ने बताया कि अमानक बीज और रोपे के कारण उनकी फसल बर्बाद हो गई, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों के अनुसार, उन्होंने नवंबर 2025 में विभिन्न नर्सरियों और कृषि सेवा केंद्रों से बीज और रोपे खरीदे थे। लेकिन बुआई के बाद फसल में सही उत्पादन नहीं हुआ। करेला के फल छोटे रह गए, पीले होकर गिरने लगे और उत्पादन में भारी गिरावट आई। इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा।  नुन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार बताया। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए और दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए धार जिले के मनावर थाने में संबंधित कंपनी नुन्हेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीज अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।  अमानक बीज की फरवरी 2026 में की थी शिकायत  जांच में प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया है कि किसानों को अमानक बीज और उन्हीं से तैयार रोपे प्रमाणित बताकर बेचे गए थे। इससे उनकी फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा। किसानों ने पहले भी फरवरी 2026 में इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद विभागीय जांच कराई गई थी। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ फसल खराब होने का मामला नहीं है, बल्कि किसानों की मेहनत, पूंजी और विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तरह की लापरवाही या धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा न जाए।   “रूबासटा” किस्म के अमानक बीज पर प्रतिबंध इसके साथ ही, करेला की “रूबासटा” किस्म के अमानक बीज पर प्रतिबंध लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसानों को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें न्याय मिलेगा और नुकसान की भरपाई के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई से किसानों में विश्वास बढ़ा है कि उनकी शिकायतों पर सरकार गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।