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श्रद्धालुओं को बड़ा झटका, खराब स्वास्थ्य के चलते प्रेमानंद महाराज ने रोकी पदयात्रा

वृंदावन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ने के चलते उनकी पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। साथ ही उनके एकांतिक दर्शन भी फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। जिसके बाद देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं में मायूसी छा गई। रविवार देर रात बड़ी संख्या में भक्त महाराजजी के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचे थे, लेकिन रोजाना की तरह तड़के 3 बजे प्रेमानंद महाराज पदयात्रा पर नहीं निकले। उनकी जगह आश्रम के शिष्य पहुंचे और लाउडस्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं को जानकारी दी। किडनी की बीमारी से जूझ रहे प्रेमानंद जी महाराज शिष्यों ने बताया कि महाराज जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए आज से पदयात्रा स्थगित की जा रही है। साथ ही भक्तों से सड़क किनारे भीड़ न लगाने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई। घोषणा के बाद श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए लौटना पड़ा। केली कुंज आश्रम के अनुसार संत प्रेमानंद महाराज पिछले 21 वर्षों से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य में अचानक आई परेशानी के कारण डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें आराम दिया जा रहा है। पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हालांकि आश्रम की ओर से यह नहीं बताया गया है कि पदयात्रा और दर्शन दोबारा कब शुरू होंगे। महाराजजी के दर्शन न होने से भक्त भावुक नजर आए। श्रद्धालु उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। बता दें कि संत प्रेमानंद महाराज रोजाना तड़के केली कुंज आश्रम से करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर सौभरी वन जाते हैं। उनकी पदयात्रा में शामिल होने और दर्शन पाने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार भक्त आते हैं। प्रेमानंद महाराज का जन्म यूपी के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। तीन भाई हैं जिसमें प्रेमानंद मंझले हैं। बचपन में प्रेमानंद जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वह बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। और कक्षा 8 तक पढ़ाई की है। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए। प्रेमानंद के शिष्य हैं कई कई सेलिब्रिटी आपको बता दें प्रेमानंद जी महाराज के बचपन का नाम अनिरुद्ध पांडेय हैं। 13 साल की उम्र में उन्होने संन्यास ले लिया था। यूट्यूब पर प्रेमानंद के 76 लाख, इंस्टाग्राम पर 2.4 करोड़ और फेसबुक पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर हैं। बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी प्रेमानंद के शिष्य हैं। जिनमें क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा, आशुतोष राणा, हेमा मालिनी, रतन राजपूत, मीका सिंह समेत कई लोग शामिल हैं।

रसोई में चूल्हा और सिंक पास-पास होने से बढ़ सकता है वास्तु दोष, जानें असर

वास्तु शास्त्र में रसोई घर को सेहत और समृद्धि का केंद्र माना जाता है.  यहां मौजूद हर चीज़ की अपनी एक ऊर्जा होती है. रसोई में सबसे महत्वपूर्ण दो ही चीज़ें हैं चूल्हा (अग्नि तत्व) और सिंक (जल तत्व). वास्तु के नियमों के अनुसार, आग और पानी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं.  अगर ये दोनों एक ही स्लैब पर पास-पास हों, तो घर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है. आजकल के छोटे फ्लैट्स और मॉड्यूलर किचन में जगह की कमी के कारण अक्सर सिंक और चूल्हा एक ही लाइन में होते हैं. आइए जानते हैं कि यह कैसे हमारे जीवन पर असर डालता है और बिना तोड़-फोड़ के इसे कैसे ठीक किया जा सकता है. तत्वों का टकराव: क्या होता है असर? जब आग और पानी एक ही स्लैब पर होते हैं, तो इसे तत्वों का संघर्ष कहा जाता है.  इसके मुख्य नुकसान ये हैं: रिश्तों में खटास: किचन में काम करने वालों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने लगता है और घर के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस होने लगती है. धन की हानि: अग्नि को लक्ष्मी का रूप माना जाता है. उसके ठीक बगल में बहता हुआ पानी यह संकेत देता है कि आपका कमाया हुआ पैसा बेकार की चीजों में पानी की तरह बह जाएगा. स्वास्थ्य समस्याएं: घर के लोगों की पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है और वे बार-बार बीमार पड़ सकते हैं. कैसे दूर करें यह वास्तु दोष? (आसान उपाय) अगर आपके किचन का डिज़ाइन ऐसा है जिसे बदला नहीं जा सकता, तो घबराएं नहीं.  इन आसान देसी जुगाड़ और वास्तु उपायों से आप इसके नकारात्मक असर को कम कर सकते हैं. बीच में रखें लकड़ी का बोर्ड: चूल्हे और सिंक के बीच में एक लकड़ी का चॉपिंग बोर्ड या लकड़ी का कोई स्टैंड रख दें.  वास्तु में लकड़ी को आग और पानी के बीच का संतुलन (एयर एलिमेंट) माना जाता है, जो दोनों की टक्कर को रोकता है. मनी प्लांट का उपयोग: सिंक और चूल्हे के बीच में एक छोटा सा मनी प्लांट या कोई भी हरा पौधा रख दें.  हरा रंग सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और अग्नि-जल के दोष को सोख लेता है. दूरी का ध्यान: कोशिश करें कि चूल्हा और सिंक कम से कम दो फीट की दूरी पर हों. अगर दूरी कम है, तो बीच में एक टाइल या कोई बाधा (Separator) खड़ी कर दें. गंगाजल या नमक का पानी: हफ्ते में एक बार किचन के स्लैब को समुद्री नमक मिले पानी से पोंछें. नमक नकारात्मक ऊर्जा को खींच लेता है. बर्तनों की सफाई: रात को कभी भी सिंक में गंदे बर्तन न छोड़ें. रात भर सिंक का खाली और साफ रहना किचन की ऊर्जा को शुद्ध रखता है. खास सलाह वास्तु शास्त्र सिर्फ नियम नहीं, बल्कि एक संतुलन है.  यदि आप अपने किचन को साफ-सुथरा रखते हैं और खाना बनाते समय मन को शांत रखते हैं, तो वास्तु दोषों का प्रभाव अपने आप कम हो जाता है. कोशिश करें कि खाना बनाते समय आपका चेहरा पूर्व दिशा (East) की तरफ हो, यह सबसे शुभ माना जाता है.

पंजाब पुलिस की बड़ी कामयाबी, गोल्डी बराड़ गैंग के चार शार्प शूटर दबोचे गए

जालंधर सीआईए स्टाफ जालंधर ने गैंगस्टरों के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के चार शूटरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से आठ अवैध पिस्टल, 45 कारतूस और एक सिल्वर रंग की स्विफ्ट कार बरामद की गई है।  पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर के निर्देशों पर सीआईए स्टाफ ने यह कार्रवाई की। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ युवक भारी हथियारों के साथ किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहे हैं। इसके बाद कैंट रोड और अर्बन एस्टेट फेज-2 इलाके में नाकाबंदी कर चारों आरोपियों को काबू किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुखवंत सिंह उर्फ सुख्खा शेखों, जुगराज सिंह, गुरप्रीत सिंह और नीरज के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी सुख्खा शेखों पर पहले से 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि अन्य आरोपियों पर भी कई केस चल रहे हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे गोल्डी बराड़ के इशारे पर पंजाब के अलग-अलग जिलों में फायरिंग, हत्या और फिरौती जैसी वारदातों को अंजाम देते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा ताकि इनके नेटवर्क और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जा सके। 

2034 तक खिंची डेडलाइन, दिल्ली को पानी सप्लाई की बड़ी योजना हुई प्रभावित

नई दिल्ली पानी की किल्लत से जूझ रही दिल्ली के लिए आगे की राह फिर मुश्किल भरी हो सकती है। राजधानी की प्यास बुझाने के लिए जिन तीन प्रमुख बांधों- लखवार, रेणुका और किशाऊ पर उम्मीदें टिकी थीं, उनका निर्माण कार्य पिछड़ने से दिल्ली की जलापूर्ति योजनाओं को झटका लगा है। विशेष रूप से लखवार बांध के 2031 तक पूरा होने की संभावना थी, अब काम 2034 तक खिंच गया है। दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में शहर में पानी की मांग लगभग 1250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) है, जबकि आपूर्ति केवल 1000 एमजीडी के आसपास ही हो पा रही है। इस 250 एमजीडी के अंतर को पाटने के लिए सरकार ने यमुना पर बनने वाले इन तीन बांधों के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश किया है। भविष्य का सारा वॉटर इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे नए ट्रीटमेंट प्लांट और पाइपलाइन नेटवर्क, इन्हीं बांधों से मिलने वाले पानी के भरोसे तैयार किया जा रहा है। किस डैम से दिल्ली को कितना मिलेगा पानी डैम     दिल्ली को मिलेगा पानी (MGD में) रेणुका     440 किशाऊ     372 लखवार     135 पानी मिलने की डेडलाइन अब तीन साल आगे बढ़ी योजना के मुताबिक, 2031 से लखवार बांध से दिल्ली को 135 एमजीडी पानी मिलना था, लेकिन इसकी डेडलाइन अब तीन साल आगे बढ़ा दी गई है। इसी तरह, रेणुका बांध से 2030 तक 440 एमजीडी पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इसके निर्माण को लेकर भी फिलहाल कोई ठोस अपडेट नहीं है। इसके अलावा, किशाऊ बांध से भविष्य में 372 एमजीडी पानी मिलना प्रस्तावित है। कुल मिलाकर इन तीनों परियोजनाओं से दिल्ली को 947 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलना है, जो शहर की बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों के लिए अनिवार्य है। बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर जल बोर्ड के अधिकारियों का साफ कहना है कि बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है। इस कमी को केवल ट्यूबवेल के जरिए पूरा करना नामुमकिन है। मानक के अनुसार, एक ट्यूबवेल घंटों चलने के बाद भी महज 0.01 एमजीडी पानी ही दे पाता है।  

धारीदार या चिकना तरबूजम,कौन सा ज्यादा मीठा और रसीला होता है? जानें सच

लाल और रसीले तरबूज गर्मियां आते ही बाजार में बिकने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें देखकर ही मुंह में पानी आने लगता है. गर्मियों में तो तरबूज सबसे ज्यादा मार्केट में देखने को मिलते हैं और लोग उनको काफी खाते भी हैं. लाल और रसीले के अलावा लोगों के मन में तरबूज खरीदते समय यह भी सवाल आता है कि हरा चिकना या धारीवाला यानी लाइनों वाले तरबूज में से कौन-सा खाना ज्यादा फायदेमंद होगा. धारीवाला और चिकना हरा तरबूज में से कौन ज्यादा मीठा और रसीला होता है, इसे लेकर लोगों के मन में काफी सवाल आते हैं. अगर आप भी इसी कन्फ्यूजन में रहते हैं, तो आइए आपकी इस उलझन का हल कर देते हैं. अगली बार जब भी आप तरबूज खरीदने जाएं तो बिना किसी झंझट के सही और लाल-रसीला तरबूज ही खरीदकर लाएंगे. दोनों तरबूज में क्या फर्क होता है? धारीदार तरबूज की बाहरी सतह पर हल्की और गहरी ग्रीन कलर री लाइन्स बनी होती है. वहीं बिना धारी वाले तरबूज का कलर डार्क ग्रीन कलर का होता है और वो चिकना होता है. यह असल में दोनों अलग-अलग किस्म के तरबूज होते हैं, लेकिन दोनों एक ही फैमिली से आते हैं. इन दोनों में सिर्फ इतना ही फर्क होता है कि इनका ऊपरी डिजाइन अलग होता है, टेस्ट में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है, सेहत के फायदे लगभग एक जैसे ही होते हैं. इतना ही नहीं इन दोनों तरह के तरबूज में पोषण लगभग बराबर मात्रा में मौजूद होते हैं. तरबूज में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी होता है, जो शरीर को गर्मी में हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें विटामिन C, विटामिन A,एंटीऑक्सीडेंट और लाइकोपीन पाए जाते हैं. लाइकोपीन के फायदे? लाइकोपीन दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, इसके साथ ही तरबूज कम कैलोरी वाला फल है. इसलिए यह उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होता है जो वेट लॉस कर रहे हैं. कौन सा तरबूज ज्यादा मीठा होता है? कई लोग मानते हैं कि धारीदार तरबूज ज्यादा मीठा होता है, जबकि बिना धारी वाला थोड़ा कम मीठा और सख्त हो सकता है. जबकि मिठास इस बात पर निर्भर करती है कि तरबूज कितना पका हुआ है और उसे कैसे उगाया गया है.यानी सिर्फ धारियों को देखकर यह फैसला नहीं किया जा सकता कि कौन सा तरबूज ज्यादा मीठा होगा. इसलिए दोनों ही तरबूज अच्छे हैं और गर्मी में बिना किसी झंझट के दोनों को आराम से आप खा सकते हैं. अच्छा तरबूज खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?     तरबूज में नीचे पीला धब्बा हो, जिसका मतलब फल प्राकृतिक तरीके से पका है.     तरबूज अपने आकार के हिसाब से भारी लगे     थपथपाने पर गहरी खोखली आवाज आए     कटे, दबे या नरम हिस्सों वाला तरबूज न लें  

हेरिटेज शिमला रेल कार का आधुनिक अवतार, इमरजेंसी में भी नहीं थमेगी सुरक्षा

कालका   वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कालका शिमला रेल मार्ग पर चलने वाली रेल मोटर कार का सफर और सुहाना और सुरक्षित होने जा रहा हैं। इंग्लैंड से 1927 में आई रेल कार में लगने वाले वैक्यूम ब्रेक सिस्टम को रेलवे ने कहा बाय-बाय कह दिया है। अब एयर ब्रेक सिस्टम का प्रयोग किया है। इसके ट्रायल भी सफल हो गए हैं। बस अब इस रेल कार को चलाने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से हरी झंडी का इंतजार हैं। पुराना ब्रेक सिस्टम आपात स्थिति में ज्यादा प्रभावी नहीं माना जाता था। रेलवे को नए प्रयोग की आवश्यता महसूस हुई। लंबे परीक्षण के बाद रेल कार में एयर ब्रेक सिस्टम को लगाया गया है, जोकि आपात स्थिति में ज्यादा प्रभारी होगी। इससे सैलानियों का सफर ज्यादा सुहाना होगा और सुरक्षित होगा। कालका-शिमला रेल मार्ग पर टाॅय ट्रेन की शुरुआत वर्ष 1903 में हुई थी और उस वक्त स्टीम इंजन इस ट्रेक पर चलते थे। टाॅय ट्रेन से शिमला तक पहुंचने में करीब साढ़े पांच घंटों का समय लगता है। अंग्रेजों ने इस मार्ग पर रेल सेवा को ज्यादा आरामदायक बनाने और समय की बचत के लिए वर्ष 1927 में रेल कार सेवा का प्रारंभ की थी। समय के साथ नैरो गेज पटरी पर रेल कार सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने लगी,जिससे रेल कार ने कम ही समय में देश और विदेशों में अपनी खास पहचान बनाई,जिसके चलते सैलानियों में रेल मोटर कार का जादू सिर चढ़कर बोलने लगा। रेल कार-टाॅय ट्रेन में अंतर टाॅय ट्रेन में छह डब्बे होते हैं। वर्तमान में रोजाना छह टाॅय ट्रेन कालका से शिमला जा रही है और उतनी ही वापस आ रही है। टाॅय ट्रेन शिमला तक जाने में 5.30 घंटे का समय लेती है। रेल कार में एक ही डिब्बा होता हैं। यानी ट्रेन ड्राइवर और यात्री एक साथ बैठते हैं। इसमें 12 व्यक्ति बैठ सकते हैं। ऑन डिमांड चलने वाली रेल कार चार घंटे में शिमला का सफर तय करती हैं। डेढ़ घंटे का समय बचता है। चार रेल मोटर कार वर्ष 1927 में शुरू हुई रेल कार सेवा अपनी तरह की एक खास सेवा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षो से यह रेलवे विभाग के लिए मानो मुसीबत भी बनी हुई है। रेल कार की रिपेयर के लिए पार्ट उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। तकनीकी खामियों के चलते रेल कार कार को ट्रैक पर चलाए रखना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। रेलवे विभाग के पास फिलहाल चार रेल मोटर कार है, जिसमें दो की हालत ज्यादा ठीक नहीं मानी जा सकती है, जिससे रेल कार को रेगुलर चलाने की बजाय आन डिमांड ही चलाया जा रहा है।  

Bigg Boss 17 फेम अनुराग डोभाल का छलका दर्द, 10 करोड़ की बाइक कलेक्शन बेचने का खुलासा

बिग बॉस 17' के कंटेस्टेंट रहे और फेमस यूट्यूबर अनुराग डोभाल बीते कुछ समय से किसी न किसी वजह से हेडलाइन्स में बने हुए हैं. परिवार संग अनबन और एक्सीडेंट के बाद अनुराग ने दोबारा से नई जिंदगी की शुरुआत की है. वो अपनी बिखरी जिंदगी को धीरे-धीरे पटरी पर ला रहे हैं. वो फिर से यूट्यूब पर एक्टिव हो गए हैं. अब उन्होंने फैंस संग एक बार फिर अपना दर्द बयां किया. मुश्किल में अनुराग ट्रैवल व्लॉगर अनुराग डोभाल अपने नए यूट्यूब व्लॉग में देहरादून की सड़कों पर सैर करते हुए दिखाई दिए. इस दौरान उन्होंने अपना खाली पड़ा हुआ गैराज भी फैंस को दिखाया. अपने गैराज को खाली देखकर अनुराग काफी इमोशनल होते हुए दिखाई दिए. अनुराग ने बताया कि उन्होंने अपनी करोड़ों का लग्जरी बाइक्स का कलेक्शन बेच दिया है. अनुराग ने बताया कि उनके बाइक कलेक्शन की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये थी. मगर उन्होंने इसी साल की शुरुआत में अपनी बाइक्स का कलेक्शन बेच दिया था.   अनुराग ने कहा- जो साम्राज्य खड़ा किया था, आज वो खाली पड़ा है. पिछले साल हमें अपनी ज्यादातर बाइकें बेचनी पड़ीं. हमारे पास अब सिर्फ दो बाइकें बची हैं. मैं आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. इसलिए मुझे अपनी बाइक्स बेचनी पड़ीं. मुझे पैसों की जरूरत थी. मुझे ही पता है कि उस वक्त मैंने कैसे सर्वाइव किया था. जब सारी बाइकें बिकीं तो काफी दुख हुआ. मैं व्लॉग बनाने की कंडीशन में नहीं था. इसलिए पहले इस बारे में बता नहीं पाया. गैराज की प्रॉपर्टी भी मेरे नाम पर नहीं है, इसलिए बिजली काट दी गई थी. रहने को नहीं है घर अनुराग ने आगे ये भी बताया कि वो रहने के लिए नई जगह की तलाश कर रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वो अपनी पुरानी सारी चीजें फिर से बनाने की कोशिश करेंगे. वहीं, कुछ वक्त पहले अनुराग ने बताया था कि बच्चे के जन्म के बाद उनके पत्नी रितिका संग मतभेद दूर हो गए हैं. अनुराग ने कहा कि वो अपने बच्चे के लिए सब कुछ नए सिरे से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.

निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार के तर्कों को नहीं मिली राहत

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट में आज पंचायत और निकाय चुनाव टालने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई टल गई. अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 26 मई को होगी. जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल, जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने आदेश दिए. गिर्राज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा और पुनीत सिंघवी ने पैरवी की. कोर्ट ने जताई नाराजगी इससे पहले 11 मई को हाई कोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने तय समय पर चुनाव नहीं कराने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है, और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है. कोर्ट को चुनाव में देरी की बताई वजह   कोर्ट में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई, जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए, और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है. कोर्ट ने जजमेंट रिजर्व रखा कोर्ट में सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है, जून में हीटवेव चलती है, जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है और ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा, लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. सुनवाई के बाद अदालत ने जजमेंट रिजर्व रख लिया है. 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिर्नेश थे हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने और 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन पूरा करने के निर्देश दिए थे. अब सरकार और चुनाव आयोग ने और समय मांगा है, जबकि इस मुद्दे पर अवमानना याचिका भी दायर है, जिस पर 18 मई को सुनवाई होगी.

करोड़ों की साइबर फ्रॉड चेन का भंडाफोड़, लुधियाना से 4 किंगपिन गिरफ्तार

लुधियाना. फिरोजपुर रोड पर दो साइबर ठगी सेंटरों पर रेड करने के बाद गिरफ्तार किए गए 132 आरोपितों से पूछताछ में कई अहम राजफाश हुए हैं। विदेश से होने वाली करोड़ों की ट्रांजेक्शन जिन बैंक खातों में की जाती थी, वे म्यूल अकाउंट्स हैं। पुलिस ने अभी तक 450 खातों को खंगाला है, जिनमें करोड़ों रुपये की ट्रांजेक्शन हुई है। अब पुलिस इन खातों की डिटेल्स को निकालने में जुटी है। वहीं, इस मामले में लुधियाना से दिल्ली और गुजरात गई पुलिस की टीमों ने चार किंगपिन गिरफ्तार किए हैं, जोकि इस ठगी के नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस उन्हें लुधियाना लाकर पूछताछ करेगी। गौरतलब है कि 13 मई को साइबर सेल और दो थानों की टीम ने दो साइबर ठगी सेंटरों पर रेड की थी। यहां से पुलिस ने 132 आरोपितों को गिरफ्तार किया था और उनसे 1.07 करोड़ रुपये, 229 मोबाइल, 98 लैपटाप और 19 गाड़ियां बरामद की थीं। आरोपित नार्थ अमेरिका और यूरोप के लोगों को स्पैम और हैकिंग का डर दिखाकर उनके खाते खाली कर देते थे। किराये पर लिए खातों में ट्रांसफर हुए करोड़ों मामले की शुरुआती जांच में पुलिस को 300 खाते मिले थे, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती रही, वैसे-वैसे खातों की संख्या भी बढ़ती गई। अब इन खातों की संख्या 450 हो गई है। ये सभी खाते लोगों के आईडी प्रूफ का प्रयोग करके खुलवाए गए हैं। इसके बदले में खाता देने वाले लोगों को पांच से 10 हजार रुपये किराये के तौर पर हर माह दिए जाते हैं। इन खातों का प्रयोग हवाला का पैसा घुमाने और ठगी के पैसे को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। ये खाते पंजाब, दिल्ली, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम से खुले हुए हैं। अब पुलिस इन खातों की डिटेल को खंगालने में जुटी है, क्योंकि इन खातों में ही चार से पांच करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन हो चुकी है। पुलिस अब इन खाता धारकों की भी पड़ताल कर रही है। आईटी कंपनी का हवाला देकर लेते थे ऑफिस स्पेस आरोपित जहां भी ऑफिस लेते थे, वहां ये कहा जाता था कि उन्होंने आईटी कंपनी का ऑफिस खोलना है, जोकि रात में ज्यादा काम करते हैं, क्योंकि उनकी डीलिंग विदेशी लोगों से होती है। इसलिए उनका ऑफिस 24 घंटे खुला रहता था। यहां दो से तीन शिफ्ट में काम होता था। किराया जितना उन्हें बिल्डिंग का मालिक कहता था, उससे ज्यादा ही देते थे। म्यूल अकाउंट कैसे इस्तेमाल होते हैं? किसी व्यक्ति से आनलाइन फ्राड किया जाता है। जैसे फर्जी काल, यूपीआइ फ्राड, निवेश स्कैम, लोन एप, ओटीपी स्कैम आदि। ठगी का पैसा सीधे अपराधी के खाते में नहीं जाता बल्कि कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता है। पैसा तेजी से आगे ट्रांसफर किया जाता है, ताकि पुलिस या बैंक ट्रैक न कर सकें। अंत में पैसा नकद निकाला जाता है, क्रिप्टो/सट्टेबाजी/हवाला आदि में भेज दिया जाता है। क्या है म्यूल अकाउंट? म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी चोरी या ठगी के पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने, छिपाने या सफेद दिखाने के लिए करते हैं। खाते का मालिक कई बार जानबूझकर शामिल होता है, और कई बार उसे पता भी नहीं होता कि अकाउंट अपराध में इस्तेमाल हो रहा है।

रेलवे का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड, बिलासपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में यात्रियों को झटका

राजनांदगांव. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत बिलासपुर-झारसुगुड़ा के बीच तीसरी एवं चौथी रेलवे लाइन का कार्य किया जा रहा है। जिससे ट्रेनें प्रभावित होगी। इसी क्रम में बिलासपुर से झारसुगुड़ा के बीच 206 किलोमीटर चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बिलासपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन के चांपा स्टेशन में चौथी लाइन से जोड़ने का कार्य 07 जून से 19 जून तक (विभिन्न तिथियों में) किया जायेगा। इस कार्य के लिए इन ट्रेनों का परिचालन अल्पकालिक बाधित रहेगा एवं इस कार्य के पूर्ण होते ही गाडियों की समयबद्धता एवं गति में तेजी आयेगी । इस कार्य के फलस्वरूप कुछ यात्री गाड़ियों का परिचालन प्रभावित रहेगा। प्रभावित होने पैसेंजर गाडियां – 19 जून 2026 तक गेवरारोड से चलने वाली 68745 गेवरारोड – रायपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी। 7 से 18 जून तक रायपुर से चलने वाली 68746 रायपुर-गेवरारोड मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी । 8 से 19 जून तक कोरबा से चलने वाली 58203 कोरबा-रायपुर पैसेंजर रद्द रहेगी। 7 से 18 जून तक रायपुर से चलने वाली 58204 रायपुर- कोरबा पैसेंजर रद्द रहेगी। 8 से 19 जून तक बिलासपुर व गेवरारोड से चलने वाली 68734/68733 बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी। 8 से 19 जून तक बिलासपुर बिलासपुर- कोरबा-बिलासपुर मेमू पैसेंजर व कोरबा से चलने वाली, 8732/68731 रद्द रहेगी।