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आबकारी विभाग की धमाकेदार शुरुआत, अप्रैल में ₹931 करोड़ ज्यादा राजस्व हासिल

2026-27 की शुरुआत में ही आबकारी राजस्व में बड़ा उछाल, अप्रैल में ₹931 करोड़ अधिक प्राप्ति पारदर्शी सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग और लीकेज रोककर योगी सरकार ने की रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि 2016-17 में ₹14 हजार करोड़ तक सीमित था आबकारी राजस्व, अब ₹57 हजार करोड़ के पार ई-गवर्नेंस और ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम से मजबूत हुआ आबकारी ढांचा अवैध कारोबार और राजस्व रिसाव पर कार्रवाई का दिखा सीधा असर लखनऊ उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग ने 2026-27 वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल 2026 में विभाग को ₹5,251 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा ₹4,319.46 करोड़ था। यानी, गत वर्ष की तुलना में अप्रैल माह में ही ₹931.54 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि शराब बिक्री को प्रोत्साहित किए बिना पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और राजस्व लीकेज रोकने के लिए किए गए सख्त प्रशासनिक सुधारों का प्रत्यक्ष नतीजा है। उत्तर प्रदेश में आबकारी राजस्व का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2011-12 में प्रदेश को ₹8,139 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो 2016-17 तक बढ़कर ₹14,273 करोड़ पहुंचा। उस समय लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि प्रतिशत लगातार गिर रहा था और 2016-17 में यह केवल 74.15 प्रतिशत तक सिमट गया था। इससे यह संकेत मिलता था कि तत्कालीन सिस्टम में राजस्व रिसाव, अवैध कारोबार और निगरानी की गंभीर चुनौतियां मौजूद थीं। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद आबकारी विभाग में बड़े स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू किए गए। लाइसेंस प्रक्रिया में ई-टेंडरिंग, आपूर्ति श्रृंखला की डिजिटल ट्रैकिंग, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, बारकोड आधारित निगरानी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए गए। इसके साथ ही अवैध शराब कारोबार और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। इन सुधारों का असर जल्द ही राजस्व आंकड़ों में दिखाई देने लगा। वर्ष 2018-19 में पहली बार विभाग ने लक्ष्य से अधिक 104.03 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की और ₹23,928 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया। इसके बाद राजस्व संग्रह लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2021-22 में ₹36,321 करोड़, 2022-23 में ₹41,252 करोड़, 2024-25 में ₹52,573 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹57,722 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। यानी 2016-17 की तुलना में आबकारी राजस्व लगभग चार गुना तक पहुंच गया। आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि “सिस्टम करेक्शन मॉडल” का परिणाम है, जिसमें शराब बिक्री बढ़ाने के बजाय राजस्व लीकेज रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने पर जोर दिया गया। पहले जहां अधिकांश प्रक्रियाएं मैनुअल थीं और मानवीय हस्तक्षेप अधिक था, वहीं अब अधिकांश व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित हो चुकी है। इससे भ्रष्टाचार, अनियमितता और राजस्व हानि में उल्लेखनीय कमी आई है। जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश का आबकारी मॉडल अब केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा आधारित मॉनिटरिंग, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी प्रशासन का उदाहरण बनकर उभरा है। 2026-27 के शुरुआती आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश आबकारी राजस्व के नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है।

अब हवा से बनेगा पीने का पानी, रेलवे और कॉलोनियों में शुरू होगी नई तकनीक

प्रयागराज  रेलवे अब पानी की कमी वाले क्षेत्रों में हवा से पीने का पानी तैयार करने वाली आधुनिक मशीनें लगाएगा। रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और रेलवे उपक्रमों को एटमॉस्फेरिक वाटर जेनरेटर (एडब्ल्यूजी) लगाने के निर्देश जारी किए हैं।रेलवे बोर्ड के निदेशक (पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन) अजय झा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि कई स्थानों पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अब भी बड़ी चुनौती है। एडब्ल्यूजी तकनीक वातावरण में मौजूद नमी से सीधे पीने योग्य पानी तैयार करती है। यह पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ समाधान है। इन मशीनों को पानी की कमी वाले रेलवे स्टेशन, अस्पताल, रेलवे कॉलोनी, कार्यालय, लेवल क्रॉसिंग और अन्य सेवा स्थलों पर लगाया जाएगा, जहां नियमित पेयजल आपूर्ति की जरूरत है। रेलवे बोर्ड ने पूर्व निर्देशों का हवाला देते हुए इस दिशा में आगे कार्रवाई करने को कहा है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक से पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। गर्मी और जल संकट वाले क्षेत्रों में यह पहल यात्रियों और कर्मचारियों के लिए राहत साबित हो सकती है। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे बोर्ड के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

गर्मी के सितम के बीच यूपी में अतिरिक्त बिजली सप्लाई, योगी सरकार का बड़ा दावा

प्रचंड गर्मी में योगी सरकार रोस्टर से ज्यादा कर रही बिजली आपूर्ति 26/27 मई की रात 2:37 बजे 30,337 मेगावाट सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति की गई गर्मी से देश बेहाल लेकिन योगी सरकार ने यूपी में बखूबी संभाली बिजली व्यवस्था विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में रहकर बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटीं   लखनऊ  उत्तर प्रदेश समेत लगभग पूरे देश में भीषण गर्मी अपने चरम पर है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे समय में योगी सरकार प्रदेशवासियों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। 26 मई को जहां 28,125 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई, वहीं सबसे अधिक 26/27 मई की रात 2:37 बजे 30,337 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई है। इस तरह प्रचंड गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बावजूद प्रदेश में रोस्टर से ज्यादा विद्युत आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को बड़ी राहत मिल रही है। महानगरों से लेकर गांव तक पहुंच रही विद्युत आपूर्ति योगी सरकार में जिला मुख्यालय, महानगर और तहसील क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 22.30 घंटे तक निर्बाध बिजली दी जा रही है। यही वजह है कि भीषण गर्मी के इस दौर में भी प्रदेश की बिजली व्यवस्था मजबूत और प्रभावी दिखाई दे रही है। योगी सरकार की प्राथमिकता साफ है कि प्रदेश के हर घर, हर गांव और हर शहर तक बिना बाधा के बिजली पहुंचे, ताकि जनता को गर्मी से राहत मिल सके और दैनिक जीवन प्रभावित न हो। रिकॉर्ड मांग के बीच भी नहीं डगमगाई बिजली व्यवस्था प्रदेश में लगातार बिजली आपूर्ति हो रही है। 26 मई की रात 7:52 बजे 28,125 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई थी। जबकि रात 10 बजे 27,515 मेगावाट और 12 बजे 26,984 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई थी। इसी क्रम में 26/27 मई की रात 1 बजे 28,043 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई। जबकि रात 2:37 बजे सबसे अधिक 30,337 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई है। 27 मई की सुबह 5 बजे 29,321 मेगावाट, सुबह 7 बजे 24,738 मेगावाट, सुबह 10 बजे 26,604 मेगावाट और 12 बजे 28,048 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई। इसी क्रम में 27 मई को दोपहर 1 बजे 28,488 मेगावाट और 2 बजे 28,790 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि योगी सरकार बिजली व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीर और प्रतिबद्ध है। फिलहाल विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में रहकर बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाने में जुटी हुई हैं। इससे साफ है कि योगी सरकार सिर्फ दावे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर तेज गति से काम भी कर रही है। उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने का प्रयासः निदेशक वितरण निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के हिसाब से ज्यादा बिजली आपूर्ति की जा रही है। निदेशक वितरण ने बताया कि हमारा प्रयास है कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिले। ऊर्जा विभाग की टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही हैं और बिजली व्यवस्था की मॉनिटरिंग उच्च स्तर पर की जा रही है। हालांकि 25 और 26 मई की रात आए तेज आंधी-तूफान ने कई जिलों की विद्युत व्यवस्था को प्रभावित किया था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बिजली विभाग की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभाला और युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया था।

हाईकोर्ट सख्त! गिरिबाला की बेल खारिज, CBI को गिरफ्तारी की खुली छूट

भोपाल  भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने बुधवार को कई घंटों की बहस के बाद देर रात आदेश जारी किया। जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। इसी के साथ अब CBI पूर्व जज गिरिबाला को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने हाईकोर्ट में ​अग्रिम जमानत निरस्त करने की याचिका लगाई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने भी पूर्व जज गिरिबाला पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। बुधवार को दिन में पौने तीन घंटे की बहस के बाद रिजर्व किया गया हाईकोर्ट का ऑर्डर गुरुवार को रात्रि एक बजे के बाद बाहर आया। दरअसल, कोर्ट ने बुधवार को शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ही साफ कर दिया था कि आदेश पारित करेंगे। हाईकोर्ट में बुधवार की सुनवाई में सीबीआई ने दोनों मामलों में पक्षकार बनाए जाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया था। मामला ट्विशा सिंह की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है। ट्विशा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई, 2026 को ट्विशा की मौत फांसी पर लटकी अवस्था में हुई। बाद में कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भोपाल ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे चुनौती दी गई। सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हाई कोर्ट ने कहा कि वाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 15 मई, 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए आदेश दिया। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। पूर्व जज को गिरफ्तार कर सकेगी CBI हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा सकेगा। मामले की जांच कर रही CBI उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। 12 मई की रात हुई थी ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। 24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। आरोपियों ने ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। आरोपी ने मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की, जो जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है। मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को पक्षकार बनाना जरूरी है। चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। इसी बिंदु को अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना और कहा कि इन परिस्थितियों में गहन जांच की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाए गए हैं कि सास और पति उस पर गर्भपात का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं। कोर्ट ने फैसले में क्या कहा? हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था। व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं आधारों पर अग्रिम जमानत दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और सबूतों की गहराई से जांच करने पर अलग तस्वीर सामने आती है। हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर क्या-क्या कहा ?     जमानत देना मामले की गंभीरता के हिसाब से सही नहीं था।     ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।     आरोपी पक्ष चोटों का सही जवाब नहीं दे पाया।     आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया।     मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश।     पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा भी चोटें मिलीं।     ये चोटें सिर्फ शव उतारने से नहीं हो सकतीं।     गवाहों ने गर्भपात का दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।     अग्रिम जमानत केवल खास हालात में दी जानी चाहिए। आखिर में क्या बोला हाईकोर्ट? अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी। इसी के साथ कोर्ट ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं। CBI और राज्य सरकार की दलीलें     गर्भावस्था के बाद पति और सास ने ट्विशा पर चरित्र को लेकर शक किया।     गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका उल्लेख व्हाट्सऐप चैट्स में है।     ट्विशा ने अपने परिवार को लगातार मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दी थी।     आरोपी … Read more

भोपाल मेट्रो ब्लू लाइन का रास्ता साफ, मालवीय नगर समेत कई इलाकों में तोड़फोड़ की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन की ब्लू लाइन के लिए अब न्यू मार्केट से लगे रोशनपुरा, मालवीय नगर में दुकानों की बड़ी तोड़फोड़ होगी। यहां दरवेश बर्तन भंडार की लाइन और इसके आसपास के क्षेत्र की दुकानों को नोटिस देकर आगाह किया गया है। अगले दो माह में यहां काम शुरू होगा। मेट्रो ट्रेन के इन नोटिस से पूरे क्षेत्र में लोगों में डर है। ये मेट्रो ट्रेन अफसरों से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। यहां सरकारी जमीन है और प्रोजेक्ट की डिजाइन में बदलाव कर दुकानों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। न्यू मार्केट और मालवीय नगर में स्टेशन की डिजाइन में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। छोटी बड़ी 15 दुकानें इससे प्रभावित होने की स्थिति है। रोशनपुरा मेट्रो स्टेशन कांग्रेस के जवाहर भवन के पास है। इसकी डिजाइन को लेकर कई आपत्तियां आईं। कुछ बड़े कॉम्प्लेक्स इसमें जा रहे थे, जिन्हें डिजाइन बदलकर बचाया गया। मालवीय नगर की ओर बड़ी संख्या में स्लम है। जहांगीराबाद बाजार और आवासीय क्षेत्र भी चिंता में मेट्रो की तोड़फोड़ से सिर्फ न्यू मार्केट मालवीय नगर ही नहीं, जहांगीराबाद बाजार से लेकर आवासीय क्षेत्र तक चिंता में है। यहां 600 मीटर लंबा हिस्सा मेट्रो के लिए तोड़ा जाएगा। इसमें कई बड़े व्यवसायिक भवन शामिल है। दुकानों के अंदर तक निशान लगाए हुए हैं। 20 मकान भी है, जिन्हें तोड़ा जाएगा। इसके लिए लोगों ने कलेक्ट्रेट से लेकर कोर्ट तक याचिका लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। रेलवे लाइन के किनारे से हटाई गईं 85 झुग्गिया जिला प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में छोला रेलवे लाइन के पास 85 झुग्गियों को हटाया गया। इन्हें हटाने के लिए रेलवे ने प्रक्रिया की थी। जिस जगह झुग्गियां बना ली थी वह रेलवे की जमीन है। यहां हाल में ही तेजी से जमीन पर कब्जा करने के लिए झुग्गियां बनाई जा रही थी। रेलवे ने जिला प्रशासन व नगर निगम की मदद से इन झुग्गियों को हटवाया। इस दौरान पुलिस बल उपस्थित रहा। रेलवे के लिए खतरा थी झुग्गियां गोविंदपुरा एसडीएम भुवन गुप्ता के अनुसार ये अभी नई झुग्गियां बनी थी। रेलवे की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। इसके साथ ही रेलवे यहां अपनी जमीन को संरक्षित करने फेंसिंग का काम शुरू करने वाला है। मौके पर प्रशासन व पुलिस बल सुबह ही पहुंच गया था। इन झुग्गियों में से अधिकतर में छोटी दुकानें संचालित की जा रही थी। ये लोग पास की ही कॉलोनी के थे। इन्हें हटाया गया। जमीन खाली कराई, अब रेलवे यहां फेंङ्क्षसग कर जमीन को संरक्षित करेगा।  

ऐतिहासिक भोजशाला में भक्तों की भारी भीड़, HC फैसले के बाद दर्शन को उमड़े लोग

धार  धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद यहां आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अभूतपूर्व वातावरण देखने को मिल रहा है। फैसले के बाद से भोजशाला में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि पिछले मात्र 11 दिनों में यहां दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच चुके हैं। विशेष बात यह है कि भोजशाला में अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दिल्ली सहित प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडेय ने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से शाम तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। अब तक यह स्थिति मुख्य रूप से मंगलवार तक सीमित रहती थी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद सप्ताह के हर दिन भोजशाला में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक नियमित पूजा-अर्चना और आरती का क्रम जारी है, जिससे पूरे परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण और अधिक सशक्त हुआ है। मुख्यमंत्री के प्रवास के बाद से लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के हालिया भोजशाला प्रवास के बाद लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं। श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को अब इस बात का इंतजार है कि यहां प्रस्तावित शोध संस्थान को किस स्वरूप में विकसित किया जाएगा तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भविष्य में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं के विस्तार की मांग भी तेज हो गई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोजशाला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा का गौरवशाली प्रतीक है। राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री भोजशाला आएंगी हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री का इंदौर-धार प्रवास 27 से 30 मई तक प्रस्तावित है। भोजशाला प्रकरण की कानूनी लड़ाई की सूत्रधार, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री इंदौर-धार प्रवास के दौरान भोजशाला में दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगी। रंजना अपने साथ लखनऊ के प्रसिद्ध महादेव मंदिर के तालाब से 108 कमल पुष्प मां वाग्देवी के चरणों में अर्पित करने के लिए ला रही हैं। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि अग्निहोत्री ने श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ी है।

डींगरपुर हिंसा: उम्रकैद की सजा पाए 6 दोषियों की अपील हाईकोर्ट में खारिज कराने के लिए पुलिस करेगी मजबूत पैरवी

डींगरपुर हिंसा: उम्रकैद की सजा पाए 6 दोषियों की अपील हाईकोर्ट में खारिज कराने के लिए पुलिस करेगी मजबूत पैरवी 28 मार्च 2026 को 16 दोषियों को मिली थी उम्रकैद और 55-55 हजार जुर्माने की सजा, सुरक्षा के मद्देनजर सभी सजायाफ्ता कैदी मुरादाबाद से बरेली जेल किए गए शिफ्ट एसएसपी सतपाल अंतिल का कड़ा रुख, किशोर न्याय बोर्ड में लंबित 6 आरोपियों पर भी 15 अगस्त से पहले कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी मुरादाबाद,  साल 2011 में मैनाठेर के डींगरपुर में हुए बहुचर्चित बवाल और तत्कालीन डीएम-डीआईजी पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बीते 28 मार्च 2026 को अदालत द्वारा 16 दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद और 55-55 हजार रुपये के जुर्माने की सजा के खिलाफ 6 दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपनी सजा और जुर्माना कम करने की अपील दायर की है। इसके जवाब में मुरादाबाद पुलिस ने भी अपराधियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस नीति' के तहत इन जघन्य अपराधियों की अपील का पुरजोर विरोध किया जाएगा। जिला प्रशासन, शासन स्तर पर बेहतरीन तालमेल के साथ हाईकोर्ट में इस मामले की दमदार पैरवी करेगा, ताकि यह अपील सिरे से खारिज हो सके। इस बीच, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी 16 दोषियों को मुरादाबाद जेल से बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया है। साथ ही, किशोर न्याय बोर्ड में लंबित 6 अन्य आरोपियों के मामले में भी 15 अगस्त से पहले कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी से अपील खारिज कराने की रणनीति एसएसपी सतपाल अंतिल ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन इस जघन्य अपराध के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। छह आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर सजा और जुर्माना कम करने की गुहार लगाई है, लेकिन उनकी इस अपील को हाईकोर्ट में खारिज करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। प्रशासन ने शासन स्तर पर अभियोजन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है। पुलिस का एकमात्र लक्ष्य यह है कि उच्च न्यायालय में सरकार और पीड़ितों का पक्ष इतने दमदार तरीके से रखा जाए कि अदालत का 28 मार्च का ऐतिहासिक फैसला बरकरार रहे और दोषियों की अपील पहली ही सुनवाई में खारिज हो जाए। 15 अगस्त तक बाकी 6 आरोपियों पर भी शिकंजा इस प्रकरण में पुलिस की सक्रियता केवल सजायाफ्ता कैदियों तक सीमित नहीं है। घटना के समय नाबालिग रहे छह अन्य अभियुक्त, जिनका मामला वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है, उन पर भी प्रशासन की नजर है। प्रशासन ने तय किया है कि आगामी 15 अगस्त से पहले-पहले कोर्ट के माध्यम से इन छह आरोपियों के खिलाफ भी उचित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि 15 साल पुरानी इस घटना में संपूर्ण न्याय की प्रक्रिया अपने मुकाम तक पहुंच सके। सुरक्षा के मद्देनजर बरेली जेल शिफ्ट हुए दोषी अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरती है। मुरादाबाद जेल में किसी भी तरह के संभावित गठजोड़, स्थानीय दबदबे या कानून व्यवस्था की स्थिति को टालने के लिए सभी दोषियों को मुरादाबाद से हटाकर बरेली सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। इन दोषियों में मंजूर अहमद, अली, हाशिम, फिरोज, कमरुल, नाजिम, मुजीब, यूनुस, रिजवान, अम्बरीश, कासिम, मोबीन, परवेज आलम, मुजीब, तहजीब आलम और जाने आलम शामिल हैं, जिन पर अदालत ने भारी जुर्माना भी लगाया है। अफवाहों से भड़की थी हिंसा और 15 साल का इंतजार जुलाई 2011 में मैनाठेर थाने में एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 6 जुलाई को 'कुरान फाड़ने' की झूठी अफवाह फैलाकर सुनियोजित हिंसा भड़काई गई थी। उग्र भीड़ ने तत्कालीन जिलाधिकारी राजशेखर और डीआईजी/एसएसपी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला किया, 23वीं वाहिनी पीएसी की गाड़ी फूंक दी और डींगरपुर चौकी से सरकारी कारतूस लूट लिए थे। इस मामले में कुल 33 लोग नामजद थे, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार की सख्ती और पुलिस के वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन के दम पर 15 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद एडीजे-02 (मुरादाबाद) की अदालत ने 28 मार्च 2026 को अपना यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषियों को उनके किए की सजा दी थी।

TMC में टूट की आहट? BJP का दावा- 80 में से 50 विधायक बदल सकते हैं पाला

कलकत्ता णमूल कांग्रेस में जल्द ही बड़ी टूट हो सकती है। भारतीय जनता पार्टी सांसद का दावा है कि आधे से ज्यादा टीएमसी सांसद पार्टी बदलने के लिए तैयार हैं। वहीं, करीब 20 सांसद भी टीएमसी का साथ छोड़ सकते हैं। हालांकि, टीएमसी ने अब तक इसे लेकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। 4 मई को घोषित नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 80 विधायक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा सांसद सौमित्र खान ने बुधवार को दावा किया है कि करीब 50 विधायक टीएमसी से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसी ही स्थिति 20 सांसदों की है। भाजपा सांसद का दावा है कि अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सहमति देता है, तो ये नेता पार्टी बदलकर भाजपा में आने के लिए तैयार हैं। हालांकि, अब तक भाजपा आलाकमान की तरफ से इसे लेकर घोषणा नहीं की गई है। खत्म हो जाएगी टीएमसी भाजपा सांसद का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो टीएमसी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व एक बार कह देता है, तो टीएमसी पार्टी ही नहीं बचेगी। सभी लोग आने के लिए तैयार हैं। करीब 50 विधायक पार्टी से नाखुश हैं और 20 सांसद शामिल होने के लिए तैयार हैं।' अटकलें हैं कि मॉनसून सत्र के आसपास टीएमसी सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। संकट में टीएमसी? खास बात है कि खान की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब 100 से ज्यादा पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, कहा जा रहा है कि काकोली घोष दस्तीदार और फिरहाद हाकिम जैसे पार्टी के बड़े चेहरे नेतृत्व से खफा हैं। हालांकि, विधायक हाकिम ने खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन दस्तीदार नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। उनके बेटे ने संभावनाएं जताई थीं कि वह सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं। 20 सांसद बदल सकते हैं पाला संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि 12 टीएमसी सांसदों ने भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी कर ली है। इसके अलावा दल बदलने की तैयारी कर रहे सांसदों की लिस्ट में 5 से 6 नाम और हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि ये सांसद कौन होंगे और कब तक दल बदल की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से ज्यादा सांसदों से चर्चा चल रही है और आंकड़ा 20 तक पहुंच सकता है। तृणमूल के दो विधायकों की शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से मुलाकात की और इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां मौजूद थे। चुनावी हार के बाद विपक्षी दल के भीतर बदलते समीकरणों के बीच यह घटनाक्रम नई अटकलों को जन्म दे रहा है।  यह मुलाकात आधिकारिक तौर पर 'शिष्टाचार भेंट' बताई गई लेकिन यह दिल्ली स्थित पुराने बंग भवन में ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु की हालिया मुलाकात के कुछ ही दिन बाद हुई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की चुनाव बाद की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में नए समीकरण उभरने की अटकलें तेज हो गई हैं।

EPFO का बड़ा बदलाव! अब ATM से निकाल पाएंगे PF का पैसा, जानिए कब और कैसे मिलेगा फायदा

 नई दिल्ली PF अमाउंट अब ATM से निकलेगा, पिछले काफी समय से इसकी चर्चा हो रही है. अगर ATM से पीएफ के पैसे निकलेंगे लगेंगे, तो एक नौकरीपेशा लोगों की इससे जुड़ी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। दरअसल, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान बड़ा ऐलान कर दिया है, उन्होंने कहा कि अगले महीने यानी जून से आप अपना PF अमाउंट UPI का इस्तेमाल कर ATM से निकाल पाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को पूरी तरह से डिजिटाइज किया जा रहा है, जिससे PF निकालना और भी आसान हो जाएगा, सरकार का लक्ष्य है कि पीएफ खाताधारकों को अपना ही पैसा निकालने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और न ही लंबे-चौड़े फॉर्म भरने पड़ें। ATM और UPI से निकाल सकेंगे पैसे मनसुख मांडविया ने बताया कि एक नया सिस्टम सुनिश्चित किया गया है, जिसके तहत खाताधारक अपने कुल पीएफ फंड का 25% हिस्सा जमा रखकर बाकी 75% पैसा एटीएम (ATM) या यूपीआई (UPI) के जरिए जब चाहें तब निकाल सकेंगे. यह सुविधा अगले महीने से लागू करने की तैयारी है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि EPFO 2.0 और ऑटोमैटिक क्लेम प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिससे क्लेम सेटलमेंट पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, पहले जो 10-12 कॉलम के फॉर्म भरने पड़ते थे, उस पेचीदा सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। WhatsApp चैटबॉट की सुविधा उन्होंने कहा कि पीएफ से जुड़ी जानकारियों को और आसान बनाने के लिए इसे WhatsApp चैटबॉट से जोड़ा जा रहा है. खाताधारक सिर्फ व्हाट्सऐप पर मैसेज करके अपने अकाउंट बैलेंस, ब्याज अमाउंट और बीमारी या शादी के लिए फंड विड्रॉल की पात्रता जैसी सारी जानकारियां तुरंत हासिल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि मैसेज से लोग ये भी जान पाएंगे कि वो अभी कितना अमाउंट निकाल सकते हैं, पहले कब-कब निकाले थे, ये सारा व्हाट्सऐप पर मैसेज से कर्मचारियों को मिल जाएगा. पूरा सिस्टम डिजिटल में तब्दील हो जाएगा। कैसे निकलेगा ATM से पैसा? एटीएम और यूपीआई से पैसे निकालने की इस सुविधा को आधार से लिंक किया जाएगा, आपकी पहचान पूरी तरह डिजिटल तरीके से (आधार वेरिफिकेशन के जरिए) प्रमाणित होगी, जिससे बिना किसी कागजी कार्रवाई के तुरंत पैसा ट्रांसफर हो सकेगा। हालांकि अगर फटाफट यानी ATM से तुरंत पैसे निकलने लगेंगे तो फिर अधिकतर लोगों के PF अकाउंट खाली हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें जब जरूरत होगी, तब पीएफ के पैसे निकाल लेंगे. इसपर एक्सपर्ट्स भी चिंता जता रहे हैं. जब पैसा निकालना इतना आसान हो जाएगा तो स्वाभाविक रूप से लोगों में इसे खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे रिटायरमेंट फंड समय से पहले खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खुली छूट नहीं बनाया है. केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि आप चाहकर भी अपना पूरा PF अकाउंट खाली नहीं कर सकते हैं, कुल जमा राशि का 25% हिस्सा हमेशा पीएफ अकाउंट में लॉक रहेगा. आप केवल ऊपरी 75% हिस्से का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। बता दें, पीएफ पर मिलने वाला चक्रवृद्धि ब्याज तब सबसे ज्यादा फायदा देता है जब पैसे को लंबे समय तक छुआ न जाए, बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाला अंतिम फंड बहुत छोटा हो जाएगा।

वैभव ने मचाया कोहराम, जोफ्रा ने बरपाया कहर… SRH IPL से बाहर

 मुल्लांपुर मुल्लांपुर में बुधवार रात IPL 2026 के एल‍िम‍िनेटर (Eliminator) मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को 47 रन से हराकर क्वाल‍िफायर-2 (Qualifier-2) में जगह बना ली. इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे 15 साल के वैभव सूर्यवंशी और तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर. एक ने बल्ले से तूफान मचाया, तो दूसरे ने गेंद से SRH की कमर तोड़ दी। राजस्थान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 243 रन बनाए. जवाब में हैदराबाद की पूरी टीम 19.2 ओवर में 196 रन पर ऑलआउट हो गई. अब राजस्थान का सामना शुक्रवार को गुजरात टाइटन्स से होगा. इस मैच का विजेता फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से भिड़ेगा। पूरे मुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी की रही. 15 साल के इस बल्लेबाज ने सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन ठोक दिए. उनकी पारी में 12 छक्के और 5 चौके शामिल रहे. वह IPL इतिहास का सबसे तेज शतक लगाने से सिर्फ 3 रन दूर रह गए. क्रिस गेल का 30 गेंदों में शतक का रिकॉर्ड टूटते-टूटते बचा। वैभव ने शुरुआत से ही पैट कमिंस और SRH के गेंदबाजों पर हमला बोल दिया. फुल लेंथ गेंदों को सीधे साइट स्क्रीन के पार पहुंचाया, जबकि शॉर्ट गेंदों पर भी जमकर रन बटोरे. उनकी बल्लेबाजी इतनी आक्रामक थी कि SRH कप्तान कमिंस लगातार फील्ड बदलते और रणनीति बनाते नजर आए, लेकिन कोई तरीका काम नहीं आया। इस सीजन में वैभव सूर्यवंशी ने छक्कों का नया रिकॉर्ड भी बना दिया. उन्होंने IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा 65 छक्के लगाने का कारनामा किया. इससे पहले यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने 2012 में 59 छक्के लगाए थे। वैभव ने सिर्फ 16 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लग रहा था कि वह T20 क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने के अपने सपने को भी सच कर सकते हैं. हालांकि आठवें ओवर में प्रफुल हिंगे की गेंद पर थर्ड मैन पर कैच आउट होकर वह इतिहास रचने से चूक गए. आउट होने के बाद उनका धीमे कदमों से पवेलियन लौटना उनकी निराशा साफ दिखा रहा था। दूसरे छोर पर यशस्वी जायसवाल 29 रन बनाकर संघर्ष करते दिखे. वहीं ध्रुव जुरेल ने सिर्फ 21 गेंदों में 50 रन की शानदार पारी खेली. राजस्थान एक समय 13 ओवर में 2 विकेट पर 180 रन बनाकर 260 के पार जाता दिख रहा था, लेकिन आखिरी 5 ओवर में SRH ने वापसी की. उस दौरान राजस्थान ने 36 रन के भीतर 5 विकेट गंवा दिए। हैदराबाद की ओर से प्रफुल हिंगे ने 3 विकेट लिए, हालांकि उन्होंने 4 ओवर में 54 रन भी दिए. शिवांग कुमार ने यशस्वी जायसवाल का विकेट लेकर प्रभावित किया. दूसरी तरफ कमिंस का दिन बेहद खराब रहा. उन्होंने 4 ओवर में बिना विकेट लिए 64 रन लुटा दिए. साकिब हुसैन ने 3 ओवर में 49 रन दिए, जबकि ईशान मलिंगा भी महंगे साबित हुए। 244 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत बेहद खराब रही. जोफ्रा आर्चर ने पावरप्ले में ही मैच राजस्थान की तरफ मोड़ दिया. उन्होंने पहले अभिषेक शर्मा को बाउंसर पर फंसाया, फिर ईशान किशन को कवर पर कैच कराया. ट्रैविस हेड ने उनकी रफ्तार के खिलाफ जगह बनाकर खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद सीधे स्टंप्स में जा लगी। आर्चर की तेज रफ्तार गेंदबाजी के सामने SRH का विस्फोटक टॉप ऑर्डर टिक नहीं पाया. पांचवें ओवर तक टीम 57 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी थी. इसके बाद हैदराबाद कभी मुकाबले में वापसी नहीं कर सका और आखिरकार 196 रन पर ढेर हो गया। राजस्थान के लिए यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि पूरे सीजन में टीम की लड़ाई और वापसी की कहानी भी बन गई. अब टीम की नजर Qualifier-2 जीतकर फाइनल में पहुंचने पर होगी. क्वाल‍िफायर 2 मुकाबला 29 मई को गुजरात के ख‍िलाफ होना है।