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भीषण गर्मी का असर, कई बांध सूखे के कगार पर; दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर

 नई दिल्ली  भीषण गर्मी और सूखे की बढ़ती आशंकाओं के बीच देश के सामने एक नई और गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, मई महीने की शुरुआत से लेकर अंत तक देश के मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर बेहद तेजी से नीचे आया है। महज 22 दिनों के भीतर इनमें पानी का स्टॉक 12% तक कम हो गया है, जिसके बाद अब कुल क्षमता का केवल 25% पानी ही शेष बचा है। देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के आखिरी हफ्ते तक कुल लाइव भंडारण घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर पर सिमट गया है। मई महीने में आई भारी गिरावट मई के शुरुआती सप्ताह में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद था, जो इनकी कुल क्षमता का 36.41% था। इसका सीधा अर्थ यह है कि कड़कती धूप और पानी की भारी मांग के कारण एक महीने के भीतर ही मुख्य जल स्रोतों से लगभग 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया है। मौसम विभाग ने पहले ही अल नीनो के प्रभाव के कारण सूखे की आशंका जताई है, जिसने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि वर्तमान स्टॉक पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन जिस रफ्तार से बांध खाली हो रहे हैं, वे आने वाले हफ्तों के लिए बड़ी चुनौती हैं। संकटग्रस्त बांधों की बढ़ती संख्या मई की शुरुआत में जब गर्मी का असर कम था, तब देश के 112 बांधों में पानी का स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में था। लेकिन जैसे-जैसे पारा चढ़ा, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। अत्यधिक गर्मी के कारण महीने के अंत तक कई जलाशय खाली हो चुके हैं, जिससे गंभीर संकट का सामना कर रहे बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। सतारा का कोयना बांध भी इस समय गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। पानी की किल्लत की सबसे भयावह और डरावनी तस्वीर दक्षिण भारतीय राज्यों में देखने को मिल रही है, जहां जल स्तर अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है। मई की शुरुआत में यहां के जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83% पानी बचा था, जो मई के अंतिम सप्ताह की रिपोर्ट में गिरकर मात्र 17.55% रह गया है। इसके कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पानी की किल्लत काफी बढ़ गई है। देश के कुछ हिस्सों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे बड़े जलाशय मई की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी तरह सूखे रहे और वहां पानी का स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया। बिजली उत्पादन पर संकट पानी की इस भारी कमी का सीधा असर देश के हाइड्रोपावर सेक्टर पर पड़ने की आशंका है। देश की 20 प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 8 में मई की शुरुआत में ही पानी का स्टॉक सामान्य से नीचे चला गया था, और अब 6 बड़े जलाशयों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो मध्य भारत में जल भंडारण 41.57% से घटकर 26.60% और पश्चिमी भारत में 42.36% से कम होकर 28.53% पर आ गया है, जबकि साबरमती जैसी छोटी नदी घाटियों में पानी का भारी अकाल साफ देखा जा सकता है। इस भीषण संकट के बीच अब सभी की निगाहें केवल आने वाले मानसून पर टिकी हैं।

ईरान की Maham-3 नेवल माइन पर विवाद, होर्मुज में अमेरिकी तलाशी अभियान तेज

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है. इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है. वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स… जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा. माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है. हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

महाराष्ट्र में बड़ा अपडेट: e-KYC सख्ती के बाद घटकर 1.66 करोड़ हुई लाभार्थियों की संख्या

महाराष्ट्र महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह योजना आगे भी जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल e-KYC की समयसीमा को आगे बढ़ाने या नए लाभार्थियों को जोड़ने की कोई योजना नहीं है। सरकार द्वारा चलाए गए एक सत्यापन अभियान के बाद लाभार्थियों की सूची में 80 लाख नाम काट दिए गए हैं। योजना के शुरुआती दौर में लाभार्थियों की संख्या 2.46 करोड़ थी, जो अब घटकर 1.66 करोड़ रह गई है। दस्तावेजों के सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए चलाई गई e-KYC मुहिम 30 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। जिन महिलाओं की e-KYC अधूरी रह गई थी, उनकी अपीलों के बावजूद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तारीख को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सरकार के पास e-KYC की समयसीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। लाभार्थियों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके अलावा वर्तमान में नए लाभार्थियों को जोड़ने का भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।" क्यों कटे 80 लाख महिलाओं के नाम? आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूची से 80 लाख नामों का कम होना अपात्र आवेदकों को बाहर निकालने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का परिणाम है। अधिकारियों ने नाम हटाए जाने के पीछे कई कारण बताए हैं। तय समयसीमा तक e-KYC पूरा न करना या रिकॉर्ड अपडेट न कर पाना, दस्तावेजों का अधूरा या गलत होना, योजना की तय पात्रता और आय मानदंडों को पूरा न कर पाना और व्यक्तिगत जानकारी में गड़बड़ी होना। अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने नवंबर 2025 से दस्तावेज अपडेट करने की समयसीमा को कई बार बढ़ाया था और 30 अप्रैल को अंतिम तारीख घोषित किया गया था। महिलाओं में नाराजगी सूची से नाम हटाए जाने के कारण प्रभावित महिलाओं को बड़ा वित्तीय झटका लगा है। पुणे जिले की रहने वाली माया वाघमारे ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, "मैंने अपने दस्तावेज जमा किए थे और मुझे आश्वासन दिया गया था कि सिस्टम अपडेट हो जाएगा। लेकिन मेरा नाम ही हटा दिया गया। वह मासिक सहायता मेरे घर के खर्चों के लिए बहुत जरूरी थी।" एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि कई महिलाओं को लग रहा था कि सरकार पहले की तरह इस बार भी तारीख आगे बढ़ा देगी। इस लापरवाही के कारण अब उनकी मासिक किस्तें अचानक रुक गई हैं। विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई यह स्पष्टीकरण उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के उन आश्वासनों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि इस योजना को बंद कर दिया जाएगा। शिंदे ने हाल ही में दोहराया कि सरकार महिलाओं और किसानों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और इस पहल के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। साल 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई 'लाड़की बहिन योजना' के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है। महायुति सरकार की इस बेहद महत्वपूर्ण योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय बोझ आता है।

दक्षिणी लेबनान में तनाव चरम पर, इजरायली सेना ने रणनीतिक पहाड़ी पर किया कब्जा

लेबनान इजरायली सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में रणनीतिक रूप से अहम पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है जिसके शीर्ष पर ब्यूफोर्ट किला स्थित है। इस फोर्ट पर लगभग 44 साल बाद इजरायली झंडा लहराया है। यह 26 वर्ष से अधिक समय में लेबनान में इजराइली सेना का सबसे भीतर किया गया कब्जा है। इजराइली सेना ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। बताया गया कि इजइराली सेना ने नबातियेह शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर आसपास के गांवों में कई दिन तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद कब्जा किया। इजराइली सैनिकों ने इन गांवों के दुर्गम इलाके में हिजबुल्ला सदस्यों से लड़ाई लड़ी किले पर कब्जा करना मार्च की शुरुआत में इजराइल-हिजबुल्ला के बीच ताजा युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब 1948 में इजराइल के गठन के बाद से युद्ध की स्थिति में रहे दोनों देश वाशिंगटन में सीधी वार्ता कर रहे हैं। इजरायल की यह कार्रवाई 17 अप्रैल से लागू नाममात्र के संघर्षविराम के बावजूद हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अगले दौर की वार्ता दो और तीन जून को अमेरिकी विदेश मंत्रालय में होनी है। इजरायली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अवीचाय अद्राई ने 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा की जिसमें इजराइली सैनिक किले के बाहर चलते दिख रहे हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा कि सैनिकों ने किले पर इजरायल का ध्वज फहरा दिया है। इससे पहले 1982 में इजराइली सैनिकों ने इस किले पर कब्जा किया था और 2000 में लेबनान से वापसी तक इस पर उनका कब्जा रहा था। इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने कुछ दिन पहले ब्यूफोर्ट रिज और उससे आगे दक्षिण में सुलुकी घाटी में अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य हिजबुल्ला के ढांचे को नष्ट करना और 'इजराइली नागरिकों के लिए प्रत्यक्ष खतरों' को दूर करना था। बयान में कहा गया कि सेना जरूरत पड़ने पर अपने 'अभियान का विस्तार करने' के लिए तैयार है। हाल के दिनों में इजरायल ने लेबनान में अपने अभियानों का दायरा बढ़ा दिया है। इसने वास्तविक सीमा रेखा की तरह काम करने वाली लितानी नदी के पार सैनिक भेजे हैं और दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से से निवासियों को हटने को कहा है।

टिकाऊ और सुरक्षित करेंसी की ओर बढ़ रहा भारत, कागजी नोटों की जगह पॉलीमर नोट संभव

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक देश में फटे-पुराने नोटों की समस्या को समाप्त करने और बार-बार नोट छापने पर आने वाली भारी लागत को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी मुद्रा के स्थान पर प्लास्टिक से बने नोट जारी करने की योजना पर विचार कर रहा है। वित्तीय बाजार और आम जनता के लिए इस बदलाव के फायदे और चुनौतियां दोनों ही काफी महत्वपूर्ण हैं। क्या हैं प्लास्टिक नोट? प्लास्टिक नोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक पदार्थ से तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक सूती धागे से बने कागजी नोटों की तुलना में ये बेहद लचीले, हल्के और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। मौजूदा समय में चलने वाले कागजी नोट बहुत जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और पानी या पसीने के संपर्क में आते ही खराब हो जाते हैं। इस वजह से केंद्रीय बैंक को हर साल पुराने नोटों को बदलने और नए नोटों की छपाई पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने पड़ते हैं। प्लास्टिक नोट आने से इस बार-बार होने वाले खर्च में बहुत बड़ी बचत होगी। प्लास्टिक करेंसी के मुख्य लाभ इन नोटों का सबसे बड़ा गुण इनका टिकाऊपन है। पॉलीमर से बने ये नोट सामान्य कागजी नोटों के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये पूरी तरह से वॉटरप्रूफ होते हैं, जिसके कारण ये पानी, गंदगी या पसीने से सुरक्षित रहते हैं और मुड़ने या फटने से बचे रहते हैं। इसके अलावा, इनकी सतह गैर-छिद्रपूर्ण होती है, जिसके कारण इन पर धूल, मिट्टी या बैक्टीरिया आसानी से नहीं चिपकते। इस वजह से ये नोट इस्तेमाल करने में कहीं अधिक स्वच्छ और हाइजीनिक रहते हैं। जाली नोटों के धंधे पर लगेगी लगाम प्लास्टिक नोटों को बाजार में उतारने का एक बड़ा फायदा नकली मुद्रा पर रोक लगाना भी है। इन नोटों में सुरक्षा के ऐसे आधुनिक उपाय शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना जालसाजों के लिए लगभग असंभव होगा। इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, विशेष होलोग्राम और कई अन्य एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स शामिल होते हैं, जिससे जाली नोटों के कारोबार को पूरी तरह ठप किया जा सकता है। नई तकनीक के रास्ते में मौजूद चुनौतियां फायदों के बावजूद इस नई व्यवस्था को लागू करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। शुरुआत में प्लास्टिक नोटों को छापने का खर्च सामान्य कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसके अतिरिक्त, ये नोट थोड़े चिकने होते हैं, जिससे हाथ से गिनते समय इनके फिसलने की समस्या हो सकती है। अत्यधिक तापमान या तेज गर्मी में इनके सिकुड़ने की आशंका भी बनी रहती है। सबसे बड़ी चुनौती देश भर के एटीएम नेटवर्क को लेकर है, क्योंकि इन नोटों के हिसाब से सभी मशीनों को अपग्रेड करना पड़ेगा। दुनिया भर में प्लास्टिक नोटों का चलन वैश्विक स्तर पर देखें तो प्लास्टिक करेंसी का प्रयोग कोई नया प्रयोग नहीं है। वर्तमान में दुनिया के 60 से भी अधिक देशों में आंशिक या पूर्ण रूप से प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक को सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनाया था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और रोमानिया जैसे कई बड़े देशों ने भी अपनी अर्थव्यवस्था में इसे शामिल किया है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई, भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 8 संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली  शहजाद भट्टी हाल के महीनों में ये नाम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में बार-बार सामने आया है। इसका कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध है। कभी पाकिस्तान के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचाने जाने वाले भट्टी को अब एजेंसियां एक ऐसे डिजिटल नेटवर्क के पीछे का मुख्य चेहरा बता रही हैं, जिसका कथित तौर पर गैंगस्टर मॉड्यूल, युवाओं के कट्टरपंथीकरण, हथियारों की तस्करी और भारत में अशांति फैलाने की साजिश से जुड़ाव है। आरोपियों के पास से हथियार और चोरी की बाइक बरामद शनिवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भट्टी के मॉड्यूल से जुड़े आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर पूरे देश में बड़े हमलों की योजना बना रहे थे। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपियों के पास से पाकिस्तान में बने चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्तौल, 24 जिंदा कारतूस, एक चोरी की मोटरसाइकिल और एक चोरी का स्कूटर बरामद किया गया है। आरोपियों में उत्तर प्रदेश से विजय उर्फ शूटर (23), झारखंड से नीतीश पासवान (23), महाराष्ट्र से तौकीर रिजवान अहमद शेख (27) और साजिद मेहबूब शेख उर्फ अरबाज खान (27), पंजाब से हरविंदर सिंह (28), गगनदीप सिंह (28) और मंजीत सिंह (23) और नेपाली नागरिक अनग कामी लामा (66) शामिल हैं। यूपी एटीएस और एसटीएफ ने भी चार गुर्गों को किया गिरफ्तार इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी एक संयुक्त अभियान चलाया और भट्टी-आबिद जट्ट मॉड्यूल से जुड़े चार गुर्गों को गिरफ्तार किया। भट्टी इस समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), उत्तर प्रदेश एटीएस, उत्तराखंड एसटीएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों सहित कई एजेंसियों के लिए टॉप टारगेटों में से एक है। इन्फ्लुएंसर से कैसे बना क्रिमिनल नेटवर्क का सरगना? शाहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है। जहां एक ओर वह सोशल मीडिया पर खुद को एक व्यवसायी, समाज-सेवक और धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणीकार के तौर पर पेश करता है, वहीं दूसरी ओर एजेंसियों का कहना है कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करता है। पाकिस्तानी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में उसके खिलाफ चोरी और डकैती सहित कई मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे। लगभग 2015 में वह पाकिस्तान से भागकर दुबई चला गया, जहां उसने डेयरी के कारोबार शुरू किए। उस दौरान बताया जाता है कि वह बलूचिस्तान के फारूक खोखर गिरोह के संपर्क में आया और उसका एक प्रमुख सदस्य बन गया। भट्टी ने "333" नाम से अपनी ऑनलाइन पहचान बनाना भी शुरू कर दिया था, जिसके तहत वह भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक मुद्दों और इन्फ्लुएंसर्स के बीच के विवादों पर वीडियो बनाता था। उसे बड़ी संख्या में फॉलोअर्स मिले, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि यह लोकप्रियता असल में एक बड़े नेटवर्क को खड़ा करने के लिए एक आड़ का काम कर रही थी। आईएसआई से लिंक का आरोप भारतीय एजेंसियों का दावा है कि भट्टी अकेले काम नहीं कर रहा है, बल्कि उसका संबंध पाकिस्तान की आईएसआई से है और उसे आबिद जट्ट, अजमल गुर्जर और यावर खान जैसे हैंडलर्स का समर्थन मिला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए काम करता है। आरोप है कि यह भारत में कमजोर युवाओं की पहचान करता है, प्राइवेट मैसेजिंग के जरिए उनसे बातचीत शुरू करता है और फिर वीडियो कॉल के जरिए उन्हें भट्टी से जोड़ता है। खबरों के अनुसार, इन लोगों को पैसों और सोशल मीडिया पर शोहरत दिलाने के वादों के जरिए, साथ ही हथियारों वाले वीडियो और विदेश में बसने के मौकों का लालच देकर फंसाया जाता है। शुरुआत में उन्हें छोटे-मोटे काम सौंपे जाते हैं जैसे कि किसी जगह की तस्वीरें या वीडियो शेयर करना और धीरे-धीरे उन्हें इस नेटवर्क के जाल में और भी गहराई तक खींच लिया जाता है। पूरे भारत में बड़ी कार्रवाई जारी नेटवर्क के सामने आने के बाद एजेंसियों ने मई के पहले हफ्ते में देशव्यापी स्तर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया। 48 घंटे तक चले इस अभियान में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को शामिल किया गया। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि एजेंसियां 500 से ज्यादा मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रैक कर रही हैं। पंजाब के सीमावर्ती जिलों से 40 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। हरियाणा एसटीएफ ने करीब 90 युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की। दिल्ली में 20 से ज्यादा लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जहां उनमें से कुछ को समझाया-बुझाया गया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट करने को कहा गया। कुल मिलाकर, इस अभियान के तहत 481 संदिग्धों और अपराधियों को हिरासत में लिया गया। तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के लिंक्स जांच में भट्टी के 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) नामक एक समूह से कथित संबंधों का भी खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए लोगों ने दिल्ली पुलिस को बताया कि उन्हें दिल्ली और फरीदाबाद की दीवारों पर 'TTH' लिखने का निर्देश दिया गया था। उन्हें इसके नीचे "S" अक्षर लिखने का भी निर्देश दिया गया था, कथित तौर पर भट्टी की संलिप्तता का संकेत देने के लिए। एजेंसियों का कहना है कि इस गतिविधि को पाकिस्तान से मिली फंडिंग का समर्थन प्राप्त था। पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की साजिश    

कालाबन के तीखे मोड़ पर मौत का तांडव, डलहौजी घूमने आए दो परिवारों की यात्रा खत्म

हिमाचल चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र चुराह में साच पास मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में चालक और अन्य सात पर्यटकों की जान चली गई. हादसा साच पास से बैरागढ़ की ओर आते समय कालाबन के तीखा मोड़ के पास हुआ. जानकारी अनुसार बेंगलुरु से आए एक परिवार ने पर्यटन नगरी डलहौजी में एक टैक्सी वाहन बुक करवाई. दो परिवार साथ गए उन्होंने डलहौजी में दूसरे पर्यटक परिवार से टैक्सी शेयर कर पहाड़ों और बर्फ की सैर कर आनंद लेने की बात कही. जिस पर दूसरे परिवार ने भी हामी भरते हुए टैक्सी में सवार होकर शुक्रवार को बैरागढ़-किलाड़ मार्ग वाया साच जोत पर रवाना हो गए. इन पर्यटकों द्वारा बुक करवाई गई टैक्सी के वापस डलहौजी न लौटने पर टैक्सी मालिक को चिंता होने लगी. तीखा मोड़, खाई में गिरी गाड़ी उन्होंने जीपीएस के माध्यम से देखा कि कालावन के पास उनकी गाड़ी एक स्थान पर है और उसमें कोई हलचल नहीं हो रही थी. गाड़ी नंबर HP01C-2133 शुक्रवार, 29 मई को साच पास से बैरागढ़ की ओर आ रही थी. इसी दौरान कालाबन के तीखा मोड़ के समीप वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे की सूचना शनिवार को ओसीपी बैरागढ़ द्वारा दूरभाष के माध्यम से पुलिस थाना तीसा को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया. लेकिन हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई. मृतकों में कौन लोग शामिल? मृतकों की पहचान चालक विश्वास सल्होता पुत्र थोमस, निवासी मोहल्ला ज्वाला, मावा बनीखेत तथा कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के पर्यटकों अरविंद चंद्राकर, प्राची, दर्श, अकशद, पी.जी. कार्तिघायन, मनीमाला और नंदन के रूप में हुई है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा भेजा गया. पुलिस ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है. साच पास मार्ग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग की है.

जहरीली हवा और संकरी सुरंगों में फंसे खनिकों की तलाश, दुनिया भर के गोताखोर जुटे

नई दिल्ली  घुप अंधेरा, जहरीली हवा, कीचड़ से भरी सुरंगें और ऐसा पानी जिसमें हाथ तक दिखाई न दे। लाओस के शायसोम्बौन प्रांत की एक खतरनाक गुफा में फंसे खनिकों को बचाने के लिए पिछले 11 दिनों से दुनिया के कई देशों के एक्सपर्ट गोताखोर मौत से मुकाबला कर रहे हैं। यह ऑपरेशन अब 2018 के मशहूर थाईलैंड ‘थाम लुआंग’ गुफा बचाव अभियान से भी ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है। 21 मई को सोना और अन्य कीमती खनिज तलाशने गए सात ग्रामीण खनिक अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण गुफा में फंस गए। लगातार बारिश से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया और बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि एक खनिक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसने प्रशासन को सूचना दी। यही घटना बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी। 'कॉफी' जैसा गंदा पानी और दम घोंटने वाली हवा राहत अभियान में शामिल गोताखोरों के मुताबिक गुफा के भीतर का पानी इतना गंदा था कि दृश्यता लगभग शून्य थी। बचावकर्मियों ने इसे 'कॉफी-कलर्ड वॉटर' यानी कॉफी जैसा गाढ़ा और भूरा पानी बताया। गुफा की कई सुरंगें केवल 60 सेंटीमीटर चौड़ी थीं। तुलना करें तो एक बड़ी पिज्जा का व्यास करीब 50 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर उतारकर शरीर सिकोड़ते हुए अंदर बढ़ना पड़ा। इसके अलावा गुफा के भीतर चमगादड़ों की बीट से पैदा हुई हाइड्रोजन सल्फाइड गैस मौजूद थी, जिससे बेहोशी या दम घुटने का खतरा बना हुआ था। दुनिया भर के एक्सपर्ट जुटे शुरुआत में लाओस और थाईलैंड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हुए। टीम में फिनलैंड के मशहूर गुफा गोताखोर मिक्को पासी भी शामिल थे, जिन्होंने 2018 के थाई गुफा बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि पासी ने साफ कहा कि यह मिशन थाईलैंड ऑपरेशन से कहीं ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, यह प्राकृतिक गुफा नहीं बल्कि सालों से हाथों से खोदी गई अस्थिर खदान है। कई हिस्सों में मिट्टी कभी भी ढह सकती थी। संकरी सुरंगों में एक समय पर केवल एक गोताखोर ही निकल सकता था। पांचवें दिन तक सिर्फ सवाल ही सवाल शुरुआती दिनों में सबसे बड़ा सवाल था कि खनिक जीवित भी हैं या नहीं। अगर वे जिंदा हैं तो क्या उन्हें बाहर निकाला जा सकेगा? बचावकर्मियों को यह भी डर था कि जिन लोगों ने कभी डाइविंग उपकरण नहीं देखे, उन्हें ऑक्सीजन रेगुलेटर और सिलेंडर के सहारे बाढ़ भरी सुरंगों से कैसे निकाला जाएगा? गुफा के बाहर परिवारों का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और बच्चे लगातार प्रार्थना करते रहे। छठे दिन मिली पहली बड़ी सफलता 27 मई को अभियान में बड़ी सफलता मिली। पांच खनिक गुफा के भीतर प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर एक चट्टान पर बैठे मिले। वे भूखे, कमजोर और डिहाइड्रेटेड थे लेकिन होश में थे। एक खनिक ने कहा कि मां-पिता चिंता मत करो। मैं अभी मजबूत हूं। मैं घर वापस आऊंगा। थाई गोताखोर नोरासेद पलासिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब मदद पहुंच चुकी है। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स, खाना, पानी और थर्मल कंबल दिए गए। हर सेकंड मौत का खतरा खनिकों को बाहर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था। गोताखोरों को पूरी तरह अंधे पानी में केवल स्पर्श के सहारे रास्ता तय करना पड़ा। कई जगह ऑक्सीजन टैंक निकालकर शरीर को धक्का देकर सुरंग पार करनी पड़ी। घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा। इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी भी जारी कर दी थी। डर था कि दोबारा बारिश हुई तो गुफा पूरी तरह डूब सकती है। आखिरकार बाहर निकले चार खनिक पानी लगातार पंप करके बाहर निकाला गया। जलस्तर घटने के बाद चार खनिक खुद बाहर निकलने में सफल रहे। वे कीचड़ से लथपथ थे और बाहर आते ही जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई और थर्मल फॉइल कंबलों से ढका गया। ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर जोश रिचर्ड्स ने कहा कि मैं अंदर जाने के लिए वेटसूट पहन ही रहा था कि तभी वे खुद बाहर निकल आए। अभी भी दो खनिक लापता अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल के मुताबिक दो खनिक अब भी लापता हैं। जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे शायद गुफा में 500 मीटर और अंदर चले गए थे। थाई रेस्क्यू ग्रुप ‘मेट्टा थाम रेस्क्यू कलासिन’ के प्रमुख केंगकाज बोंगकावोंग ने कहा कि टीम अब और गहराई वाले हिस्से में खोज करेगी, लेकिन वह इलाका बेहद ज्यादा पानी से भरा और बेहद खतरनाक है। थाईलैंड और लाओस मिशन में बड़ा अंतर     लाओस मिशन                          थाईलैंड मिशन (2018)     7 खनिक फंसे                         13 बच्चे और कोच फंसे     5 मिले, 2 अब भी लापता             सभी सुरक्षित निकाले गए     अस्थिर सोने की खदान                प्राकृतिक गुफा     60 सेंटीमीटर तक संकरी सुरंगें       अपेक्षाकृत चौड़े रास्ते     जहरीली गैस का खतरा                गैस का बड़ा खतरा नहीं     आंशिक रूप से खुद बाहर निकले    पूरी तरह गोताखोरों पर निर्भर बचाव     प्रवेश द्वार से 300 मीटर दूर मिले    कई किलोमीटर अंदर फंसे थे दुनिया की नजर इस मिशन पर यह अभियान अब दुनिया के सबसे कठिन और खतरनाक गुफा बचाव अभियानों में गिना जा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और खतरा दोनों बढ़ रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर उन दो लापता खनिकों पर टिकी है, जिन तक पहुंचना शायद अब तक का सबसे मुश्किल चरण साबित हो सकता है।  

अंतरिम व्यापार समझौते की ओर बढ़े भारत-अमेरिका संबंध, टैरिफ और बाजार पहुंच पर फोकस

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, अब केवल इस डील पर ऑफिशियल मुहर लगनी बाकी है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी 1 जून से नई दिल्ली में चार दिनों तक बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर खास बातचीत भारत की तरफ से इस डील में नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करने वाले हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में कई अहम विषयों पर बातचीत होगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-     बाजार पहुंच (Market Access)     गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Measures)     सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा     निवेश प्रोत्साहन     आर्थिक सुरक्षा सहयोग     सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक साझेदारी दोनों देश पहले चरण के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यापक व्यापार समझौते के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा करेंगे। फरवरी में बनी थी ट्रेड डील की रूपरेखा भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय की थी। इसके तहत दोनों देशों ने चरणबद्ध तरीके से व्यापारिक बाधाएं कम करने और टैरिफ में राहत देने पर सहमति जताई थी। समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्कों में कटौती करने का आश्वासन दिया था। अमेरिका ने पहले भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया था, जिसे घटाकर 18% करने की बात कही गई थी। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क को भी हटाने और शेष शुल्क को 18% तक सीमित करने का प्रस्ताव था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण अमेरिका की घरेलू राजनीति और टैरिफ नीति में बदलाव के कारण वार्ताओं की दिशा प्रभावित हुई। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को चुनौती देने वाले मामले में फैसला सुनाया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% समान शुल्क लागू करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद फरवरी में प्रस्तावित भारत-अमेरिका वार्ता टल गई थी। ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन की यात्रा की और बात को आगे बढ़ाया। भारत की ओर से बड़े प्रस्ताव भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।     डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGs)     रेड सोरघम (पशु आहार)     ट्री नट्स     ताजे और प्रोसेस्ड फल     सोयाबीन तेल     वाइन और स्पिरिट्स इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।     ऊर्जा उत्पाद     विमान और विमान कलपुर्जे     बहुमूल्य धातुएं     प्रौद्योगिकी उत्पाद     कोकिंग कोल विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार का मौजूदा परिदृश्य अमेरिका वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर सामने आया। भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंच गया। अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 40.89 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सभी देशों पर समान 10% शुल्क लागू किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा का नया माहौल बन गया है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों अपने-अपने हितों के हिसाब से समझौते की शर्तों में बदलाव कर सकते हैं।  

चैंपियंस लीग जश्न बना बवाल: पेरिस की सड़कों पर हिंसा, थाने पर धावा और दुकानों में तोड़फोड़

पेरिस पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) के शनिवार को दूसरी बार चैंपियंस लीग खिताब जीतने के बाद देर रात जश्न के दौरान हिंसा भड़क गई। लोगों के एक समूह ने फ्रांस की राजधानी में एक थाने पर धावा बोलने की कोशिश की। पेरिस पुलिस ने हिंसा के इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है। पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) ने शनिवार को पुस्कास एरिना में खेले गए चैंपियंस लीग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में आर्सेनल को पेनाल्टी शूटआउट में मात देकर लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा का खिताब अपने नाम कर लिया। इस मामले में रविवार तड़के 416 लोगों को गिरफ्तार किया गया प्रशंसक मना रहे थे जश्न हंगरी के बुडापेस्ट में पीएसजी की जीत के बाद पेरिस में प्रशंसकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। प्रशंसक आर्क डी ट्रायम्फ के पास की सड़कों पर मार्च करते हुए निकले, कुछ लोगों ने पटाखे जलाए और गाड़ियों के हॉर्न बजाए। चैंप्स-एलिसी पर लगभग 20,000 लोग जमा हो गए और पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही। पेरिस पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि छोटे-छोटे समूहों ने विभिन्न स्थानों पर अशांति फैलाई। कुछ समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की। कारों में भी आग लगा दी गई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। लगातार दूसरे साल फुटबॉल के चलते हिंसा पुलिस ने बताया कि पॉश 8वें अरॉन्डिसमेंट इलाके में एक थाने पर धावा बोलने की कोशिश करने वालों को तितर-बितर कर दिया गया। पुलिस के अनुसार रात 10 बजे तक 45 लोगों को हिरासत में लिया गया। पेरिस के मुख्य रिंग रोड को कुछ देर के लिए भीड़ ने अवरुद्ध कर दिया जिसे बाद में पुलिस ने हटा दिया। पुलिस ने बताया कि एक बेकरी और एक रेस्तरां को नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने 16वें अरॉन्डिसमेंट में पीएसजी स्टेडियम के पास जमा हुए लगभग 1,000 लोगों को भी काबू में किया और साइकिलों से बने अवरोधों को हटाया। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा साल है जब फुटबॉल की वजह से हिंसा भड़की। इससे पहले 2025 में फ़्रांसीसी टीम की जीत के बाद हुए जश्न ने हिंसक रूप ले लिया था। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो सोशल मीडिया में वायरल तस्वीरों में पेरिस में सड़कों पर इलेक्ट्रिक बाइक जलती हुई और जश्न मनाने वालों को दुकानों के शीशे तोड़ते हुए देखा जा सकता है। पुलिस ने बताया कि इस अशांति के दौरान छह वाहन, दो दुकानें और एक बस स्टॉप क्षतिग्रस्त हो गए। फ़्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि रविवार तड़के 416 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पेरिस के 280 लोग शामिल हैं। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहाकि सात अधिकारी घायल हुए हैं और उन्होंने इस अशांति को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं बताया। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने सोशल मीडिया एक पर लिखा कि सिर्फ़ फ़्रांस में ही किसी फ़ुटबॉल क्लब की जीत दंगे भड़का देती है। उन्होंने कहाकि सिर्फ फ़्रांस में ही जीत की शाम को हर किसी को हिंसा का शिकार होने से बचने के लिए अपने घरों में बंद रहने पर मजबूर होना पड़ता है।