samacharsecretary.com

बालेन का बड़ा कदम: ओली पर एक्शन, Gen-Z आंदोलन में फायरिंग को लेकर उठा विवाद

काठमांडू  नेपाल की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा भूचाल आया है. सुबह-सुबह नेपाल पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के घर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. उनके साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है. यह गिरफ्तारी पिछले साल सितंबर 2025 में हुए जेन-जी आंदोलन में दर्जनों युवाओं की मौत से जुड़ी जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई है।  सितंबर 2025 में नेपाल के युवा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे. 8 सितंबर को जब प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में संसद घेरी तो पुलिस ने गोलियां चला दीं. पहले ही दिन 19 युवाओं की मौत हो गई और कुल मिलाकर 70 से 77 लोग मारे गए, हजारों घायल हुए।  उस वक्त देश के प्रधानमंत्री ओली ही थे. युवाओं का आरोप है कि ओली और उनके गृह मंत्री ने फायरिंग का आदेश दिया. आंदोलन इतना तेज हुआ कि 9 सितंबर को ओली को इस्तीफा देना पड़ा. बाद में बनी जांच आयोग ने ओली को इन मौतों का जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमे की सिफारिश की।  गिरफ्तारी के बाद अस्पताल ले जाए गए ओली, भक्तपुर के घर से हुई थी गिरफ्तारी नेपाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को काठमांडू के डिस्ट्रिक्ट पुलिस रेंज से मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया है. पुलिस ने उन्हें भक्तपुर के गुंडू स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया था।  काठमांडू पोस्ट के मुताबिक ओली को सितंबर 2025 के जेन-जी आंदोलन के कथित दमन से जुड़े गैर-इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है।  चुनाव में भी मिली करारी हार ओली को मार्च 2026 के आम चुनाव में भी बड़ा झटका लग चुका था. रैपर से नेता बने बालेन शाह ने ओली को उनके ही गृह क्षेत्र झापा-5 में बुरी तरह हरा दिया. बालेन को 68 हजार से ज्यादा वोट मिले जबकि ओली महज 18 हजार वोट ही पा सके. बालेन शाह अब नेपाल के नए प्रधानमंत्री बन चुके हैं।  कौन हैं केपी शर्मा ओली? 22 फरवरी 1952 को जन्मे ओली नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के चेयरमैन हैं और चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. 1970 के दशक में राजतंत्र के खिलाफ काम करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था और वे 14 साल जेल में रहे. जेल से निकलकर वे नेपाल की मुख्यधारा की राजनीति में आए और देश के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक बन गए।  50 साल से ज्यादा का राजनीतिक सफर जेल से शुरू हुआ था और आज एक बार फिर जेल पर जाकर खत्म हो रहा है. यह घटना नेपाल में युवाओं की बढ़ती ताकत और पुरानी राजनीति के अंत की ओर इशारा करती है। 

शाह की कड़ी चेतावनी: गलत इरादे से भारत आए तो US-यूक्रेनी नागरिकों को नहीं बख्शेंगे

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  स्पष्ट किया कि हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिकों से भारत को कोई खतरा नहीं था। उन्होंने बताया कि ये लोग आतंकी प्रशिक्षण के लिए भारत का इस्तेमाल केवल म्यांमार पहुंचने के एक 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में कर रहे थे। विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और उनकी मंशा हाल ही में NIA ने कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से एक समूह को गिरफ्तार किया था, जिसमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री ने बताया कि यह समूह मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाने की फिराक में था। म्यांमार में मौजूद विद्रोही गुटों के शिविरों का इस्तेमाल यूक्रेनी नागरिकों को आतंकी प्रशिक्षण देने के लिए किया जाना था। कैसे पकड़े गए? विदेशी नागरिकों को मिजोरम में प्रवेश करने के लिए 'एडवांस परमिट' (अग्रिम अनुमति) की आवश्यकता होती है। इन लोगों ने यह परमिट नहीं लिया था, जिसके कारण ये सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में आ गए। भारत सरकार का कड़ा रुख यह पहली बार है जब सरकार के किसी शीर्ष अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि इस समूह का मुख्य लक्ष्य म्यांमार था और भारत महज उनके रास्ते का एक पड़ाव था। अमित शाह ने कहा- इनसे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था। लेकिन हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि कोई भी विदेशी नागरिक किसी भी गलत काम या इरादे से भारत आता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट ने 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों की रिमांड 10 दिन और बढ़ाई इस बीच नई दिल्ली की एक विशेष एनआईए अदालत ने म्यांमार के हथियारबंद गुटों और प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही समूहों को कथित तौर पर हथियार, ड्रोन और ट्रेनिंग मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार 7 विदेशी नागरिकों की कस्टडी 10 दिनों के लिए बढ़ा दी है। जांच एजेंसी एनआईए ने कुल 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 3 यूक्रेनी नागरिक दिल्ली से, 3 लखनऊ से और 1 अमेरिकी नागरिक कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के नाम हैं।     मैथ्यू आरोन वान डाइक (अमेरिकी नागरिक)     हुरबा पेट्रो (यूक्रेनी नागरिक)     सिल्वियाक तारास (यूक्रेनी नागरिक)     इवान सुकमानोवस्की (यूक्रेनी नागरिक)     स्टीफंकिव मैरियन (यूक्रेनी नागरिक)     होनचारुक मक्सिम (यूक्रेनी नागरिक)     कामिन्स्की विक्टर (यूक्रेनी नागरिक) क्या हैं मुख्य आरोप? जांच एजेंसी का आरोप है कि ये विदेशी नागरिक वैध वीजा पर भारत आए और फिर संरक्षित क्षेत्र 'मिजोरम' में प्रवेश कर गए। वहां से उन्होंने म्यांमार में घुसपैठ की और जातीय विद्रोही गुटों से संपर्क साधा। इन पर आरोप है कि इन्होंने म्यांमार में ट्रेनिंग ली और फिर वहां के विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दी। ये गुट भारत के प्रतिबंधित विद्रोही समूहों से जुड़े हुए हैं। साथ ही, आरोप है कि वे भारत के रास्ते यूरोप से भारी मात्रा में 'ड्रोन' की खेप लेकर आए थे। इन पर आतंकी हार्डवेयर, हथियार सप्लाई करने और एके-47 (AK-47) राइफल ले जाने वाले अज्ञात आतंकवादियों से सीधे संपर्क में होने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ यूएपीए (UAPA) की धारा 18 (आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में हुई सुनवाई और दलीलें सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए, विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष इन आरोपियों को एनआईए मुख्यालय में ही पेश किया गया। जांच एजेंसी ने अदालत से 10 दिन की अतिरिक्त कस्टडी की मांग करते हुए बताया कि मामले की पूछताछ के दौरान कुछ और संदिग्ध भारतीयों और विदेशियों के नाम सामने आए हैं। उनके आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले इन पहलुओं की गहराई से जांच के लिए रिमांड की आवश्यकता है। इससे पहले 11 दिन की रिमांड देते हुए अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां एफआईआर में राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराधों का कोई जिक्र न हो। यानी इस मामले में सीधे तौर पर यूएपीए की धारा 18 लागू होती है। एनआईए की दलीलों से सहमत होते हुए जज प्रशांत शर्मा ने सातों आरोपियों की कस्टडी 10 दिन और बढ़ा दी है। नक्सलवाद के खात्मे पर सरकार की रणनीति जब गृह मंत्री से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च, 2026 की समय सीमा के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि यह हार या जीत का विषय नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य हमलों और बम विस्फोटों पर पूरी तरह से रोक लगाना है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद पर काफी हद तक लगाम लगाई गई है। अब तिरुपति-पशुपतिनाथ कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले सभी आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से पहुंच रहे हैं।

ममता बनर्जी चुनाव आयोग के निशाने पर, CRPF जवानों को धमकाने का आरोप, रिपोर्ट मांगी

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य में सियासी सरगर्मियां और चुनावी हिंसा को लेकर तनाव तेज हो गया है। चुनाव आयोग (ECI) ने सख्त कदम उठाते हुए जहां एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक भाषण पर रिपोर्ट तलब की है, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्य में घोर लापरवाही के आरोप में एक पुलिस इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है। ममता बनर्जी के भाषण पर रिपोर्ट तलब भारत के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया भाषण को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। यह भाषण दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी स्थित नंदप्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल मैदान में एक जनसभा के दौरान दिया गया था। क्या है आरोप? चुनाव आयोग का दावा है कि भाषण के वीडियो में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कथित तौर पर सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों को धमकाती नजर आ रही हैं। उन्होंने सभी महिलाओं और लड़कियों से मतदान केंद्रों पर मौजूद रहने को कहा और यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए घरेलू रसोई के उपकरणों का इस्तेमाल करें। बासंती पुलिस स्टेशन के प्रभारी निलंबित इस बीच चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए बासंती पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर अविजित पॉल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 26 मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के बासंती बाजार (बरुईपुर पुलिस जिला) इलाके में हुई हिंसक घटना के बाद की गई है। इस हिंसा में पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे। यह हिंसा तब भड़की थी, जब बासंती विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार का चुनाव प्रचार चल रहा था। चुनाव आयोग का बयान आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पूर्व सूचना होने के बावजूद इंस्पेक्टर अविजित पॉल पर्याप्त पुलिस व्यवस्था करने में पूरी तरह विफल रहे। पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की उपलब्धता के बावजूद, उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए CAPF की मांग नहीं की, जो उनकी ओर से गंभीर लापरवाही और ड्यूटी में कोताही को दर्शाता है। भाजपा सांसद का टीएमसी पर हमला इस हिंसक घटना की कड़ी निंदा करते हुए भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने शुक्रवार को "जिहादियों" और गुंडों पर सुनियोजित हमले का आरोप लगाया। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए देब ने दावा किया कि बड़ी संख्या में ज्ञात हमलावरों ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमला किया। जब पुलिस और सुरक्षा बलों ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो उन पर भी हमला किया गया। टीएमसी पर आरोप: उन्होंने राज्य में हिंसा का माहौल बनाने के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "बड़ी संख्या में जिहादियों ने, जिनके नाम पहचाने जा चुके हैं, हमारे कार्यकर्ताओं पर हमला किया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में जो गुंडों और जिहादियों का साम्राज्य खड़ा किया गया है, वही इस घटना का मुख्य कारण है, जो बासंती बाजार में देखने को मिला।" गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य में दो चरणों में- 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होना है। दोनों चरणों के वोटों की गिनती 4 मई को निर्धारित की गई है।

कश्मीर में ईरान के नाम पर ₹18 करोड़ चंदा जुटाने की कोशिश, सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों के फंडिंग का डर

श्रीनगर  कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में चंदा जुटाने का सिलसिला तेजी से बढ़ा है. आधिकारिक अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 17.91 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं. इसमें लगभग 85 प्रतिशत योगदान शिया समुदाय के लोगों का बताया जा रहा है. सबसे ज्यादा 9.5 करोड़ रुपये बडगाम जिले से जुटाए गए हैं।  इस बढ़ते चंदे को देखते हुए भारत स्थित ईरानी दूतावास ने एक नया बैंक खाता जारी किया है, जिसमें लोग सीधे पैसे जमा कर सकते हैं. इसके साथ ही यूपीआई आधारित भुगतान की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे आने वाले दिनों में चंदे की राशि और बढ़ने की संभावना है. यह अभियान जकात और सदक़ा जैसे धार्मिक दायित्वों के तहत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है।  कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में करोड़ों रुपए का चंदा जुटाया गया है। इससे देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक 17.91 करोड़ रुपए चंदा जुटाया गया है। इनमें से 85% राशि शिया समुदाय ने दान की है। कश्मीर का बड़गाम शिया बहुल इलाका है। यहां से करीब 9.5 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। यह फंडरेजिंग अभियान जकात और सदका के जरिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है। कश्मीर में ईरान के लिए तेजी से जुट रहा चंदा हालांकि खुफिया एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. अधिकारियों को आशंका है कि इस चंदे का कुछ हिस्सा गलत हाथों में जा सकता है या उसका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. एजेंसियों का मानना है कि लोगों की भावना सच्ची है, लेकिन कई बिचौलिये और संदिग्ध संगठन नकद और अन्य रूपों में चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, जो संभव है कि असली जगह तक न पहुंचे।  सूत्रों के अनुसार, लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे सीधे दूतावास में ही दान करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे. खुफिया अधिकारियों ने पहले के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ मामलों में चंदा इकट्ठा करने के नाम पर धन का दुरुपयोग हुआ है।  ईरानी दूतावास ने खोला विशेष बैंक अकाउंट इस चंदा को इकट्ठा करने के लिए ईरान के दूतावास ने एक विशेष बैंक अकाउंट खोला है, जिसमें UPI के जरिए भुगतान किया जा सकता है। यह कदम चंदे की प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि चंदा जितना इकट्ठा हो रहा है, उसकी राशि और बढ़ने की भी संभावनाएं हैं। साथ ही, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे दूतावास के आधिकारिक माध्यमों से ही चंदा भेजें ताकि पारदर्शिता बनी रहे। खुफिया एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले पर गौर कर रही हैं। उनका कहना है कि चंदा जुटाने के इस अभियान का कुछ हिस्सा गलत हाथों में जा सकता है। अधिकारियों ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि लोगों की भावना तो सही हो सकती है, लेकिन बिचौलिये और बिना सत्यापन वाले संगठनों के कारण पारदर्शिता में कमी आ सकती है। धार्मिक नेताओं के आर्थिक संबंधों की जांच जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि कुछ शिया धार्मिक नेता और संगठन ईरान से आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना पर्याप्त निगरानी के, इस प्रकार के फंड का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों या अन्य उद्देश्यों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। अतः सुरक्षा एजेंसियों ने फंड की निगरानी को और मजबूत करने की योजना बनाई है। Kashmiri Muslim: अधिकारियों की चिंता का बढ़ना अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है कि यदि इस चंदे का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया, तो इसके दुरुपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। पहले भी चैरिटी के नाम पर जुटाए गए फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में मामला गंभीर हो सकता है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां अब स्थिति को और गंभीरता से ले रही हैं, ताकि चंदे की राशि का उपयोग सही दिशा में हो सके। समाज में चर्चा का विषय बना मामला यह मामला कश्मीर में बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। समाज के विभिन्न वर्गों में इस चंदा जुटाने के अभियान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। खासकर धार्मिक समुदाय इसके प्रति गंभीरता दिखा रहा है। लेकिन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं कि वे इस मामले को किस प्रकार नियंत्रित करेंगे। ईरानी दूतावास ने जारी किया नया बैंक अकाउंट और UPI सुविधा जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ शिया धार्मिक नेताओं और संगठनों को ईरान से आर्थिक सहायता मिलती है. इन फंड्स के जरिए कई गतिविधियां चलाई जाती हैं. अधिकारियों का कहना है कि बिना निगरानी के इस तरह का फंड फ्लो आगे चलकर राजनीतिक या अन्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।  इसके अलावा, घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी भी सामने आई है. नकद, आभूषण और अन्य सामान के रूप में लिए जा रहे दान के सही हिसाब और सुरक्षित उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की स्थिति में निगरानी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है. लोगों से अपील की गई है कि वो सतर्क रहें और सिर्फ विश्वसनीय माध्यमों से ही दान करें। 

10 हजार सैनिक तैयार, अमेरिका और ईरान के बीच खेला जा रहा है डबल गेम? ट्रंप की रणनीति पर सवाल

तेहरान  ईरान-अमेरिका के बीच जंग चल रही है. इसी बीच अब अमेरिका की रणनीति सवालों के घेरे में आ गई है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ बातचीत ‘बहुत अच्छी’ चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका चुपचाप जमीनी युद्ध की तैयारी भी तेज कर रहा है. यानी अमेरिका ईरान के साथ डबल गेम खेलने में लगा है. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि, व्हाइट हाउस और पेंटागन मिडिल ईस्ट में कम से कम 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं. अगर यह फैसला होता है, तो यह सीधे संकेत होगा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. पहले यह खबर आई थी कि अमेरिका खर्ग आइलैंड पर अटैक की तैयारी में है।  एक तरफ बातचीत, दूसरी तरफ धमकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सैन्य तैयारी ऐसे समय पर हो रही है जब ट्रंप ने ईरान को 10 दिन की मोहलत दी है और ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक दिए हैं. ट्रंप का कहना है कि बातचीत जारी है और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये के जरिए ईरान को बातचीत के लिए 15 पॉइंट का प्रस्ताव भेजा था. इसमें जंग खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी गई हैं. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान बातचीत में दिलचस्पी दिखा रहा है, लेकिन अब तक उसने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. वहीं ईरान ने कहा है कि वह इनमें से किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है।  फाइनल हमले की तैयारी कर रहा अमेरिका? लेकिन इसी बीच पेंटागन की तैयारियां कुछ और कहानी बता रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ‘फाइनल ब्लो’ यानी आखिरी बड़े हमले की योजना भी तैयार कर रहा है, जिसमें जमीनी सेना और बड़े स्तर पर बमबारी शामिल हो सकती है. इतना ही नहीं, आने वाले दिनों में और भी सैनिक, फाइटर जेट स्क्वाड्रन और मरीन यूनिट्स मिडिल ईस्ट भेजे जाने वाले हैं. 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को भी तैनाती के लिए तैयार रखा गया है. यही वजह है कि ईरान को इस पूरे डिप्लोमैटिक प्रोसेस पर शक हो रहा है. ईरान को डर है कि अमेरिका बातचीत का इस्तेमाल सिर्फ समय बर्बाद करने के लिए कर रहा है ताकि सैन्य तैयारी मजबूत की जा सके।   

ATM से पैसे निकालने के नियम बदलने जा रहे हैं, 1 अप्रैल से होगी महंगी प्रक्रिया

नई दिल्‍ली अगर आप भी ATM कैश निकालते हैं तो अब आपको ज्‍यादा चार्ज देना पड़ सकता है, क्‍योंकि कई बैंक ATM से निकासी के नियम में बदलाव कर रहे हैं, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगा. यह बदलाव डेबिट कार्ड और क्‍यूआर कोड के जरिए एटीएम से कैश निकालने की सीमा, ट्रांजेक्‍शन चार्ज और यूज करने के तरीके में बदलाव किया गया है. आइए जानते हैं अब आपको UPI और डेबिट कार्ड के जरिए एटीएम से कैश निकालने पर क्‍या-क्‍या बदलाव देखना पड़ेगा।  फ्री UPI ट्रांजेक्‍शन लिमिट  HDFC बैंक की ओर से एक खास बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब UPI बेस्‍ड ATM से किए गए कैश विड्रॉल को मंथली फ्री ट्रांजेक्‍शन लिमिट में गिना जाएगा. पहले इन ट्रांजेक्‍शन को अलग से गिना जाता था. नए नियम के तहत अब HDFC बैंक के अलावा, अन्‍य एटीएम से 5 ट्रांजेक्‍शन ही मुफ्त होगा. महानगरों में अन्‍य बैंकों के ATM पर 3 ट्रांजेक्‍शन फ्री होगा. अन्‍य शहरों में 5 ट्रांजेक्‍शन फ्री होगा।  मुफ्त कोटा समाप्‍त होता है और आप कार्ड या यूपीाआई किसी से भी एटीएम के जरिए पैसे निकालते हैं तो आकपेा हर लेनदेन पर 23 रुपये का चार्ज लागू होगा. इसमें टैक्‍स को शामिल नहीं किया गया है. इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक ने एक समय नियम लागू किया है जिसके अनुसार शाम 7:30 बजे के बाद किए गए एटीएम लेनदेन को अगले दिन के लेनदेन के रूप में गिना जाएगा. महीने के अंतिम दिन, ऐसे लेनदेन अगले महीने के कोटे में शामिल कर लिए जाएंगे।  डेब‍िट कार्ड पर क्‍या बदला नियम पंजाब नेशनल बैंक PNB ने कुछ डेबिट कार्डों के लिए डेली विड्रॉल लिमिट में बदलाव किया है. 1 अप्रैल से, चुनिंदा कार्डों के लिए मैक्सिमम डेली विड्रॉल लिमिट ₹1 लाख से घटाकर ₹50,000 कर दी गई है. कार्ड की कैटेगरी के आधार पर पैसे निकालने की सीमा ₹50,000 से ₹75,000 के बीच हो सकती है।  लेनदेन नियमों का अपडेट बंधन बैंक के एटीएम पर ग्राहकों को प्रति माह 5 निःशुल्क वित्तीय लेनदेन करने की अनुमति होगी. अन्य बैंकों के एटीएम पर, महानगरों में 3 निःशुल्क लेनदेन और बाकी शहरों में 5 निःशुल्क लेनदेन की अनुमति होगी. पहले की व्‍यवस्‍थाओं के विपरीत अन्‍य बैंकों के एटीएम पर फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल दोनों तरह के ट्रांजेक्‍शन (बैलेंस की भी जानकारी लेना) फ्री लिमिट गिने जाएंगे।  लिमिट पार होने के बाद क्‍या होगा?      वित्तीय लेनदेन: ₹23 प्रति लेनदेन     गैर-वित्तीय लेनदेन: ₹10 प्रति लेनदेन     अगर अकाउंट में पर्याप्‍त पैसा नहीं है और लेनदेन विफल होने पर ₹25 का जुर्माना लगेगा.  व्यक्तिगत बैंकों में बदलाव के अलावा, पूरे बैंकिंग सिस्टम में एटीएम शुल्क में व्यापक संशोधन किया गया है.     फ्री लिमिट के बाद लगने वाला शुल्क ₹21 से बढ़कर ₹23 प्रति लेनदेन हो गया है.      वित्तीय लेनदेन: ₹19     गैर-वित्तीय लेनदेन: ₹7 कस्‍टमर्स पर क्‍या होगा असर ये बदलाव देखने में मामूली लग सकते हैं, लेकिन इनका असर नियमित बैंकिंग आदतों पर पड़ सकता है. अगर आप बार-बार पैसे निकालते हैं तो आपको ज्‍यादा चार्ज चुकाना पड़ सकता है. शुल्क से बचने के लिए ग्राहकों को उपयोग पर अधिक बारीकी से नज़र रखने की आवश्यकता हो सकती है।  डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव बैंक ग्राहकों को यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल विकल्पों की ओर प्रोत्साहित कर रहे हैं. एटीएम के बढ़ते उपयोग शुल्क और लेन-देन की गिनती में विस्तार के कारण, कई उपयोगकर्ता एटीएम जाना कम कर सकते हैं और डिजिटल माध्यमों पर अधिक निर्भर हो सकते हैं. भारत में वर्तमान में 2.5 लाख से अधिक एटीएम हैं, लेकिन डिजिटल भुगतान के बढ़ने के साथ-साथ उपयोग के रुझान में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। 

India-Russia Talks: ईरान युद्ध ने दिया भारत-रूस को मौका, US को भी होगी बड़ी डील की जानकारी

 नई दिल्ली युद्ध ने कई समीकरण बदल दिए हैं, अमेरिकी बैन के कारण भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था. लेकिन अब युद्ध ने मिडिल-ईस्ट से तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है. जिसके बाद भारत अब अधिक से अधिक कच्चा तेल रूस से खरीदने पर विचार कर रहा है, ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।  न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस संकट ने भारत को एक बार फिर रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने का मौका दे दिया है और भारत ने अपना कदम बढ़ा दिया है।  दरअसल, मिडिल-ईस्ट में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रूट बाधित हो गया है. यह मार्ग दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन रास्तों में से एक है, और भारत जैसे देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस संकट के चलते वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे भारत के सामने भी ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।  LNG को लेकर रूस से बातचीत शुरू  बता दें, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है. लेकिन फिलहाल सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं. ऐसे में भारत अब रूस को एक वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लायर के रूप में देख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस के बीच लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) को लेकर एक बड़ी डील पर बातचीत शुरू हो चुकी है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हो रही है. सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूसी एलएनजी खरीदने के संदर्भ में अमेरिका को जानकारी दे दी है।  इतना ही नहीं, भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 40% तक ले जाने पर विचार कर रहा है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात जनवरी 2026 के स्तर से दोगुना होकर कम से कम 40% तक पहुंच सकता है. रूस पहले से ही भारत को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता रहा है, जो मौजूदा महंगाई और ऊर्जा संकट के दौर में भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।  अमेरिका को चुभ सकता  है रूस-भारत का करीब आना गौरतलब है कि रूसी तेल खरीदने को लेकर  ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा था, जिसके बाद अमेरिका ने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ थोप दिया था. यही नहीं, जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया तो, उस समय उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसके बाद टैरिफ में छूट दी गई।  लेकिन अब में मिडिल-ईस्ट में जिस तरह के हालात हैं, उसे देखते हुए भारत अब अमेरिका से विशेष छूट मांग रहा है, ताकि वह रूस से ऊर्जा खरीद जारी रख सके. इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा भू-राजनीतिक पहलू भी है. क्योंकि भारत और रूस फिर से करीब आने वाला है, जो कि अमेरिका को चुभ सकता है. रूस भी इस अवसर का फायदा उठाते हुए भारत के साथ अपने रिश्ते को और गहरा करने की कोशिश कर रहा है।  वैसे भी भारत और रूस एनर्जी के अलावा बिजली, एविएशन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार अब रुपये और रूबल में भी किया जा रहा है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश हो रही है। 

हिमस्खलन से मची तबाही: श्रीनगर-लेह मार्ग पर 6 लोगों की मौत, बचाव कार्य तेज

 श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर और लेह हाईवे पर जोजिला दर्रे के पास भीषण हिमस्खलन हुआ है। एवलांच के कारण छह लोगों की मौत हो गई है और कई वाहन बर्फ और मलबे के नीचे दबे हैं। मौके पर पुलिस प्रशासन द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को जोजिला दर्रे पर हिमस्खलन की चपेट में आने से छह लोगों की जान चली गई, वहीं कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं। घटना के तुरंत बाद बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे और शवों को निकालने और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान जारी है और सड़क को यातायात के लिए बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स प्लेटफार्म पर लिखा, ''ज़ोजी ला में हिमस्खलन की दुर्भाग्यपूर्ण खबर मिली है। मैंने कारगिल के डीसी और एसएसपी को तत्काल घटनास्थल का दौरा करने और राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। आपदा राहत बलों और बीआरओ सहित सभी सरकारी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मैं व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नजर रख रहा हूं।'' मिली जानकारी के अनुसार, सीमा सड़क संगठन (BRO) और एसडीआरएफ ने लोगों को रेस्क्यू करने के लिए संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया है। यहां कम से कम 15 वाहन आंशिक रूप से बर्फ के मलबे में दबे हैं। लोगों को निकालने का काम जारी है। इस समय लेह-श्रीनगर मार्ग बाधित है।  

ईरान ने बदल दिया अपना टारगेट, अमेरिका को चोट पहुँचाने के लिए दिया नया अल्टीमेटम

तेहरान  अमेरिका ने जंग में भले ही थमने का ऐलान कर दिया है लेकिन बावजूद इसके ईरान ने जंग में रुकने का अपनी ओर से कोई संकेत नहीं दिया है. ईरान ने कहा है कि अब पश्चिम एशिया के जिन जिन होटलों में अमेरिकी सैनिक ठहरे हैं उन्हें टारगेट किया जाएगा. ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि पूरे क्षेत्र में जिन होटलों में अमेरिकी सैनिक ठहरे हुए हैं, वे युद्ध में उसके निशाने पर होंगे. और एक एक पर हमला किया जाएगा. ईरान ने पश्चिम एशिया के देशों के होटल मालिकों को अल्टीमेटम दिया है कि वे अपने होटल में अमेरिकी सैनिकों को न रहने दें।   ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी सैनिकों पर खाड़ी सहयोग परिषद देशों के लोगों को 'मानव ढाल' के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "इस युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक GCC में अपने मिलिट्री बेस छोड़कर होटलों और दफ़्तरों में छिपने के लिए भाग गए।  उन्होंने इस क्षेत्र के होटलों से अपील की कि वे उन्हें बुकिंग न दें. फार्स न्यूज एजेंसी ने कुछ अनाम सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने इस क्षेत्र के होटलों को सकर संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में सख्त चेतावनी जी है।  क्या हम हाथ धरे बैठे रहें ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफ़ज़ल शेकरची ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "जब सभी अमेरिकी फोर्स किसी होटल में जाते हैं, तो हमारे नजरिए से वह होटल 'अमेरिकी' बन जाता है." "क्या हमें बस हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए और अमेरिकियों को हम पर हमला करने देना चाहिए? जब हम जवाब देंगे, तो जाहिर है हमें वहीं हमला करना होगा जहां वे मौजूद हैं।  सीरिया, लेबनान, जिबूती को अल्टीमेटम एजेंसी ने आगे बताया कि ईरान की सेना ने सीरिया, लेबनान और जिबूती में भी अमेरिकी सेना को इसी तरह की जगहों का इस्तेमाल करते हुए पहचाना है. ईरान अपने पड़ोसी देशों पर अमेरिकी सेना को अपनी जमीन से हमले करने की इजाजत देने का आरोप लगाता रहा है, किन खाड़ी देशों ने इन आरोपों को बार-बार नकारा है.उन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि वे अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं होने देंगे।  ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को "अल्टीमेटम" जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों को ठहराने से वे हमारे लिए टारगेट बन सकते हैं।  रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने पूरे क्षेत्र में सिविलियन इलाकों में अपनी उपस्थिति स्थापित कर ली है, जिसमें बेरूत के पुराने हवाई अड्डे के पास एक लॉजिस्टिक्स बेस और दमिश्क के रिपब्लिक पैलेस, फोर सीजन्स और शेरेटन होटल शामिल है. खबरों के अनुसार, अमेरिकी मरीन को इस सप्ताह इस्तांबुल और सोफिया होते हुए जिबूती अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानांतरित किया गया है।  ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 83वीं लहर इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4" की 83वीं लहर शुरू की है, जिसमें इजरायली सैन्य ठिकानों और अमेरिका से जुड़ी केंद्रों को निशाना बनाया गया है।  IRGC ने दावा किया कि उसने अशदोद में तेल भंडारण स्थलों, मोदीन में सैन्य ठिकानों और खुफिया जानकारी से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए हैं।  उसने अल धाफरा, अल उदीद, अली अल सलेम और शेख ईसा सहित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमलों की जानकारी दी, जिसमें ईंधन डिपो, विमान हैंगर, ड्रोन और पैट्रियट सिस्टम के रखरखाव स्थलों को निशाना बनाया गया।  खबरों के अनुसार इस ऑपरेशन में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों, मल्टी-वॉरहेड सिस्टम और लोइटरिंग अटैक ड्रोन का मिला-जुला इस्तेमाल किया गया. IRGC ने कहा कि यह हमला उसकी नौसेना और एयरोस्पेस बलों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था और ये ऑपरेशन जारी रहेंगे। 

जयशंकर का बड़ा कदम: होर्मुज संकट के बीच दुनिया के पावरफुल देशों को किया परेशानी में, चीन की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली  ईरान में चल रहे युद्ध ने तमाम मिथकों को तोड़ने के साथ ही UN की कमजोरियों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है. संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में वेस्‍ट एशिया में अस्थिरता लाने वालों के खिलाफ एक मुकम्‍मल निंदा प्रस्‍ताव तक पारित नहीं किया जा सका. इस बात पर भी विचार नहीं किया गया कि एक स्‍वतंत्र और संप्रभु राष्‍ट्र के खिलाफ एकतरफा सैन्‍य कार्रवाई कहां तक उचित है. इसके अलावा ग्‍लोबल पीस के लिए जिम्‍मेदार संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद होर्मुज स्‍ट्रेट जैसे समुद्री मार्ग को भी बाधित होने से नहीं बचा सका. ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में इन दिनों उथल-पुथल की स्थिति है. होर्मुज जलडमरूमध्‍य की समस्‍याओं ने इस तनाव को ग्‍लोबल एनर्जी क्राइसिस में तब्‍दील कर दिया है. जिन देशों का इस टकराव से कोई लेना-देना नहीं है, उन्‍हें भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की वजह से कई देशों में आपात स्थिति पैदा हो गई है. इतना सबकुछ हो रहा है, लेकिन संयुक्‍त राष्‍ट्र और निर्णय लेने वाली इसकी सर्वोच्‍च संस्‍था UNSC मूकदर्शक बना हुआ है. दुनिया अमेरिका, इजरायल और ईरान के ट्राएंगल में बुरी तरह से फंस गई है. एक तरह से ईरान जंग की बंधक बन चुकी है. ऐसे हालात में भारत ने एक बार फिर से UNSC में तत्‍काल सुधार की बात कही है. फ्रांस में इन दिनों G-7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इसमें हिस्‍सा ले रहे हैं. G-7 के मंच से जयशंकर ने UNSC में रिफॉर्म करने पर जोर दिया है. भारत लंबे समय से UNSC की स्‍थाई सदस्‍यता हासिल करने का दावा पेश करता आ रहा है. हालांकि, भारत के इस प्रयास को चीन पलीता लगाता रहा है।  एस जयशंकर ने फ्रांस में आयोजित G7 Foreign Ministers’ Meeting के दौरान वैश्विक शासन व्यवस् (Global Governance) था में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ढांचा वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप नहीं है और इसमें व्यापक बदलाव जरूरी हैं. फ्रांस में 26-27 मार्च को आयोजित इस बैठक में जयशंकर ने शांति स्थापना अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने, मानवीय सहायता आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और वैश्विक संकटों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर भी बल दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में ग्लोबल गवर्नेंस सुधार प्रमुख मुद्दा रहा. ईरान जंग और होर्मुज संकट को देखते हुए उनका यह स्‍टैंड अपने आप में बेहद महत्‍वपूर्ण है. अब दुनिया के सबसे पावरफुल देशों पर जिम्‍मेदारी है कि वे इस बाबत क्‍या करते हैं।  भारत फिर बना ग्‍लोबल साउथ की आवाज जयशंकर ने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों से जुड़े मुद्दों को उठाया, जिनमें ऊर्जा संकट, उर्वरक की कमी और खाद्य सुरक्षा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों से ही संभव है. भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है. वर्तमान में UNSC के पांच स्थाई सदस्य (China, France, Russia, United Kingdom और United States of America) को वीटो शक्ति प्राप्त है, जिसे लेकर लंबे समय से असंतुलन की आलोचना होती रही है।  वेस्‍ट एशिया क्राइसिस पर फोकस बैठक के दौरान वेस्ट एशिया संकट भी प्रमुख चर्चा का विषय रहा. Strait of Hormuz में तनाव के चलते वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है. यह मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति के लिए अहम है. हालिया घटनाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी गई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है. इस बैठक में जयशंकर वेस्ट एशिया की स्थिति पर समन्वित रणनीति बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित और खुला रह सके. भारत के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है।  G-7 काफी अहम G-7 में शामिल प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका) वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर समन्वय के लिए इस मंच का उपयोग करती हैं. इस बार भारत के अलावा सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया और ब्राजील को भी आमंत्रित किया गया है. बैठक के इतर जयशंकर अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक संकटों से निपटने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है।