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असम में NDA की बड़ी जीत: 102 सीटों के साथ फिर सत्ता में वापसी, हिमंता बिस्वा सरमा बने विधायक दल के नेता

गुवाहाटी असम में हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे. हिमंता बिस्वा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है.  गुवाहटी में आयोजित विधायक दल की बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक जेपी नड्डा ने हिमंता के नाम की घोषणा की. अब 12 मई को हिमंता बिस्वा सरमा का गुवाहटी में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. असम में विधायक दल के लिए आए 8 प्रस्ताव विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा- विधायक दल के नेता के लिए कुल 8 प्रस्ताव आए. पहला प्रस्ताव रंजीत कुमार दास, दूसरा प्रस्ताव विश्वजीत, तीसरा प्रस्ताव अंजता नियो, चौथा प्रस्ताव रामेश्वर तेली, पांचवां प्रस्ताव राजदीप राय, छठा प्रस्ताव अशोक सिंघल, सातवां प्रस्ताव पीयूष हजारिका, और आठवां प्रस्ताव चक्रधर गोगोई की तरह से आया. सभी 8 प्रस्तावों में केवल हिमंता का नाम जेपी नड्डा ने आगे कहा कि सभी 8 प्रस्तावों को हमारे दो-दो विधायकों ने समर्थन दिया है. हमारे एनडीए के सभी विधायक यहां उपस्थित है. अतुल बोरा ने भी अपना प्रस्ताव दिया है. सहयोगी दलों के नेता और विधायकों ने भी समर्थन दिया है. इन सभी प्रस्तावों में एक ही नाम है. हिमंता बिस्वा सरमा. ऐसे में हिमंता बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता चुना गया. असम में हिमंता ने पूरे चुनाव की बागडोर संभाली थी. 126 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले दम पर 82 सीटें जीती हैं. जबकि सहयोगी दलों को मिलकार 102 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की है.

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव: द्रविड़ दलों का 50 साल पुराना दबदबा खत्म, नई सत्ता की शुरुआत

 तमिलनाडु तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नया युग की शुरूआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के संस्थापक जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। यह राज्य में पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ पार्टी ने सरकार बनाई है। नई सरकार के गठन के साथ ही डीएमके और एआईएडीएमके का दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। विजय के साथ में  9 और मंत्रियों ने सपथ ली है। अब विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय के साथ जिन नौ मंत्रियों ने सपथ ली है आइये उनके बार में हम आपको बताते है। एन आनंद 61 साल के एन आनंद को लोग 'बुसी आनंद' के नाम से भी जानते हैं। वह विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। साल 2006 में वह पुडुचेरी से विधायक चुने गए थे। अब उन्होंने चेन्नई की टी नगर सीट से जीत हासिल की है। वह टीवीके के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पहले विजय रसिगर मंदरम के प्रमुख  के तौर पर काम कर चुके हैं। आधव अर्जुना बास्केटबॉल खिलाड़ी और बिजनेसमैन रहे आधव अर्जुना अब राजनीति में सक्रिय हैं। वह बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। वह वीसीके पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाई और चेन्नई की विल्लिवाक्कम सीट से जीत दर्ज की। राजमोहन अरुमुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म 'पुट चटनी' से मशहूर हुए राजमोहन ने युवाओं और नए वोटरों को पार्टी से जोड़ने में मदद की। प्रचार सचिव के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के जरिए पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाया। उनके मजाकिया अंदाज और रील्स को युवाओं ने काफी पसंद किया। सी टी आर निर्मल कुमार 44 साल के निर्मल कुमार टीवीके की डिजिटल रणनीति के मुख्य चेहरा हैं। उनके पास बीजेपी और एआईएडीएमके के सोशल मीडिया सेल में काम करने का अनुभव है। उन्होंने व्हाट्सएप और मीम नेटवर्क का एक बड़ा जाल तैयार किया, जिससे 2025 और 2026 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का दबदबा बना रहा। के जी अरुणराज पूर्व आईआरएस अधिकारी और डॉक्टर अरुणराज ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर टीवीके जॉइन की। वह पार्टी में प्रचार और नीति के महासचिव हैं। उन्होंने तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र में आयकर विभाग में सेवा दी है। उन्होंने तिरुचेंगोडु सीट से चुनाव जीता है। के ए सेंगोट्टैयन 50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव रखने वाले सेंगोट्टैयन पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वह एआईएडीएमके के दिग्गज नेता रहे हैं और नवंबर 2025 में टीवीके में शामिल हुए। उन्होंने गोबीचेट्टीपलयम सीट से नौवीं बार जीत हासिल की है। वह पार्टी की कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक हैं। कीर्तना एस कीर्तना एस विजय की कैबिनेट में फिलहाल इकलौती महिला मंत्री हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 22.6 लाख रुपये की संपत्ति और 12.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी सालाना कमाई 6.4 लाख रुपये है और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पी वेंकटरमणन 48 साल के वेंकटरमणन ने मायलापुर सीट से 70,070 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनके पास कुल 5.4 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 3.2 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है। केटी प्रभु पेशे से डेंटिस्ट डॉ. केटी प्रभु ने शिवगंगा की करैकुडी सीट से चुनाव जीता है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.4 करोड़ रुपये है। उनकी सालाना आय 54.6 लाख रुपये है और उन पर 3.3 करोड़ रुपये की देनदारी है।

कनाडा भेजे जा रहे थे 89 हथियार, अमेरिकी एजेंसियों ने पकड़ा बड़ा तस्करी नेटवर्क

नई दिल्ली संयुक्त राज्य अमेरिका से कनाडा में 89 हथियार की तस्करी के प्रयास में एक पाकिस्तानी नागरिक सहित तीन लोगों पर अमेरिका में आरोप तय किए गए हैं। इन बरामद हथियारों में से कम से कम 17 हथियार चोरी के बताए जा रहे हैं। दक्षिणी न्यूयॉर्क जिले के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह गिरफ्तारियां गुरुवार को स्टेट रूट 90 पर न्यूयॉर्क स्टेट पुलिस द्वारा की गई एक वाहन चेकिंग के दौरान हुईं। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान वाहन में सवार लोगों के असंगत और गोलमोल जवाबों से पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद वाहन की तलाशी ली गई। अधिकारियों ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया, जिसमें कार की पिछली सीट के नीचे छिपाए गए कई अतिरिक्त हथियार भी शामिल थे। फर्जी दस्तावेज वाले आरोपियों की पहचान आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय कनाडाई नागरिक मलिक ब्रोमफील्ड, 25 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक फैजान अली और 22 वर्षीय कमाल सलमान के रूप में हुई है। तीनों को बाद में व्हाइट प्लेन्स में संघीय मजिस्ट्रेट जज के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि फैजान अली के पास किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया एक एक्सपायर पाकिस्तानी राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट मौजूद था। 15 साल तक की हो सकती है जेल आरोपियों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें अमेरिका से हथियारों की तस्करी, हथियारों का बिना लाइसेंस व्यापार, चोरी के हथियारों का अंतरराज्यीय परिवहन और आग्नेयास्त्रों को अवैध रूप से अपने पास रखना शामिल है। इसके अलावा, मलिक ब्रोमफील्ड पर एक विदेशी नागरिक द्वारा अवैध रूप से हथियार रखने का अतिरिक्त आरोप भी लगाया गया है। अभियोजकों के अनुसार, इन आरोपों के तहत 5 से 15 साल तक की अधिकतम वैधानिक जेल की सजा का प्रावधान है, हालांकि अंतिम सजा का निर्धारण अदालत द्वारा किया जाएगा। इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक घोषणा अमेरिकी अटॉर्नी जे क्लेटन, एफबीआई के असिस्टेंट डायरेक्टर इन चार्ज जेम्स सी. बार्नकल जूनियर और एटीएफ (ATF) के स्पेशल एजेंट इन चार्ज ब्रायन डिगिरोलामो ने की। क्या है पूरा मामला? अमेरिकी अटॉर्नी क्लेटन ने कहा कि जैसा कि आरोप है, प्रतिवादियों को देश से बाहर तस्करी करने के लिए 80 से अधिक बंदूकों को ले जाते हुए पकड़ा गया है, जिनमें शॉर्ट-बैरल राइफलें और चोरी के हथियार शामिल हैं। वहीं, बार्नकल ने कहा कि दो विदेशी नागरिकों सहित इन आरोपियों ने कथित तौर पर हथियारों को कनाडा ले जाने का प्रयास करके सार्वजनिक सुरक्षा को भारी खतरे में डाला है। डिगिरोलामो ने अवैध हथियारों की तस्करी से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी कड़ी चेतावनी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस जांच में एनवाईएसपी ट्रूप एफ कम्युनिटी स्टेबिलाइजेशन यूनिट, एफबीआई की न्यूयॉर्क हडसन वैली सेफ स्ट्रीट्स टास्क फोर्स और शराब, तंबाकू, आग्नेयास्त्र व विस्फोटक ब्यूरो का संयुक्त प्रयास शामिल था।

तमिलनाडु में नए दौर की शुरुआत: विजय का पहला आदेश बना चर्चा का केंद्र

तमिलनाडु  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में रविवार को शपथ लेने के बाद विजय ने अपने पहले आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, नशीली दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे अहम फैसले शामिल हैं। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले आधिकारिक आदेश में (टीवीके) के प्रमुख विजय ने राज्य में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। इसके साथ ही, नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक हेल्पलाइन के साथ विशेष बल के गठन का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों पर रहेगा। विजय ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसानों और मछुआरों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सब कुछ अच्छा होगा। भाषण से जीता जनता का दिल विजय ने अपने जोशीले और भावुक भाषण की शुरुआत अपने चिर-परिचित तमिल वाक्यांश एन नेंजिल कुदियिरुक्कुम से की। वह अपने अभिनय करियर के दौरान भी अक्सर प्रशंसकों को संबोधित करने के लिए इस वाक्य का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह वीडियो भी देखें अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक सहायक निर्देशक का बेटा अब मुख्यमंत्री बन गया है। मैं गरीबी और भूख को करीब से जानता हूं, मैं किसी शाही परिवार से नहीं आता। मैंने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया है और कई लोगों ने मुझे अपमानित भी किया। मैं आपके बेटे, आपके भाई जैसा हूं। आपने मुझे अपने दिल में जगह दी है और मुझे स्वीकार किया है। विपक्ष पर साधा निशाना जनता से झूठे वादे न करने का आश्वासन देते हुए विजय ने पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि DMK सरकार ने राज्य का खजाना पूरी तरह खाली कर दिया है और हमने 10 लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज के साथ सत्ता संभाली है। हम जनता के पैसे से एक फूटी कौड़ी भी नहीं लेंगे और न ही किसी को राज्य को लूटने की इजाजत देंगे। राज्य में वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के एक नए युग की शुरुआत का वादा करते हुए, मुख्यमंत्री विजय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रवीण चक्रवर्ती, वामपंथी नेता एम.ए. बेबी सहित अपने सभी राजनीतिक सहयोगियों का उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन ने ली हमलों की जिम्मेदारी, राजधानी बामको पर भी मंडराया खतरा

नई दिल्ली माली से जिहादी हमलों की खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ दिनों में हुए अलग-अलग हमलों में कम से कम 70 लोग मारे गए हैं। हालांकि, कुछ स्थानीय अधिकारियों का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 80 से अधिक हो सकती है। इन हमलों की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़े संगठन जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (JNIM) ने ली है। संगठन ने शुक्रवार को कई हमले किए। इससे पहले बुधवार को गांवों पर हुए छापों में कम से कम 30 लोगों की जान चली गई थी। माली के सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, JNIM उन गांवों को निशाना बना रहा है जिन्होंने स्थानीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। इस त्रासदी के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, एक स्थानीय युवा नेता ने सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "हमारे दिलों से खून बह रहा है। पास में सेना की टुकड़ियों के होने और बार-बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया।" जेल पर हमला यह हिंसा उस घटना के बाद और तेज हुई है, जिसमें हथियारबंद लड़ाकों ने राजधानी बामको से लगभग 60 किमी दूर स्थित केनीरोबा सेंट्रल जेल पर हमला बोल दिया था। यह एक नवनिर्मित जेल है जिसमें लगभग 2,500 कैदी बंद हैं। इनमें कम से कम 72 ऐसे कैदी शामिल हैं जिन्हें माली अधिकारियों ने अत्यधिक खतरनाक श्रेणी में रखा है। बामको की घेराबंदी की धमकी हालात तब और चिंताजनक हो गए जब JNIM ने पिछले हफ्ते घोषणा की कि वह राजधानी बामको की ओर जाने वाली सड़कों पर चेकपॉइंट स्थापित कर शहर की पूर्ण घेराबंदी करने का इरादा रखता है। सैन्य स्थिति और गठबंधन माली की सेना के कमांडर जिब्रिला मैगा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि खतरा अभी भी मौजूद है। 25-26 अप्रैल से हमलों में तेजी आई है, जब JNIM ने कथित तौर पर तुआरेग-बहुल अजावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) के साथ हाथ मिला लिया। अप्रैल में हुए बड़े हमलों में माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा मारे गए थे और इसके बाद माली के नेतृत्व के साथ खड़े रूसी सैनिकों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी शहर किडल से पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा था। फिलहाल, माली की सेना का दावा है कि वह विद्रोहियों की गतिविधियों को बाधित करने के लिए सक्रिय रूप से अभियान चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत और बढ़ती मौतें सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।

टॉप 10 बंदरगाहों में चीन का दबदबा, भारत की मौजूदगी गायब

नई दिल्ली  आज समुद्री बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रोजमर्रा के सामान तक इन्हीं के जरिए दुनिया भर में पहुंचते हैं. वैश्विक समुद्री व्यापार के मोर्चे पर एक चौंकाने वाली तस्वीर उभर रही है. जो भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. साल 2024 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों की सूची में चीन ने एकतरफा दबदबा बना लिया है. खास बात यह है कि दुनिया के सबसे बिजी पोर्ट्स की टॉप 20 लिस्‍ट में भारत का एक भी बंदरगाह शामिल नहीं है।  विजुएल कैपिटेलिस्‍ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दुनिया भर के बंदरगाहों ने कुल 743 मिलियन शिपिंग कंटेनरों (TEUs) की प्रोसेसिंग की. इस कुल ट्रैफिक का आधे से ज्यादा हिस्सा केवल शीर्ष 20 बंदरगाहों से होकर गुजरा. इन 20 बंदरगाहों में सबसे ज्‍यादा नाम चाइनीज पोर्ट्स के हैं। दुनिया के 10 सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से 7 अकेले चीन के पास हैं. वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक में चीन की हिस्सेदारी 40% से भी अधिक हो चुकी है. दुनिया के सबसे बिजी 20 बंदरगाहों की सूची में शंघाई बंदरगाह 51.5 मिलियन TEUs की प्रोसेसिंग के शीर्ष पर है। सिंगापुर बंदरगाह ने 2024 में 41.1 मिलियन TEUs का प्रबंधन कर दूसरा स्‍थान हासिल किया. यह शंघाई की तुलना में 10 मिलियन से भी कम है. तीसरे स्थान पर चीन का निंगबो-झोउशान पोर्ट है, जिसने 39.3 मिलियन TEUs का ट्रैफिक संभाला. यानी टॉप 3 में से दो पायदान केवल चीन के पास हैं।  चीन का शेनझेन 33.4 मिलियन TEUs के साथ चौथे और क़िंगदाओ पोर्ट 30.9 मिलियन TEUs के साथ पांचवें स्थान पर काबिज है. छठे नंबर पर भी चीन का ही ग्वांगझोउ बंदरगाह है, जिसने 26.1 मिलियन TEUs का व्यापार संभाला। सातवें स्थान पर दक्षिण कोरिया का बुसान पोर्ट जरूर आता है, लेकिन आठवें स्थान पर फिर से चीन का तियानजिन बंदरगाह 23.3 मिलियन TEUs के साथ अपनी जगह पक्की कर चुका है. मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों ने भी इस शीर्ष सूची में अपनी जगह बनाई है, लेकिन उनकी संख्या चीन के मुकाबले नगण्य है।  संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का जेबेल अली बंदरगाह 15.5 मिलियन TEUs के साथ नौवें और मलेशिया का पोर्ट क्लांग 14.6 मिलियन TEUs के साथ दसवें स्थान पर है।  इन देशों की मौजूदगी के बावजूद, पहले से दसवें पायदान तक चीन की सात बंदरगाहों की मौजूदगी वैश्विक समुद्री मार्ग पर उसके 'कब्जे' को ही बयां करती है।  यूरोप के गौरव माने जाने वाले बंदरगाह भी अब एशियाई बंदरगाहों की तुलना में काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं. नीदरलैंड का रॉटरडैम पोर्ट 13.8 मिलियन TEUs के साथ 11वें स्थान पर है, जबकि इसके ठीक बाद चीन का हांगकांग बंदरगाह 13.7 मिलियन TEUs के साथ 12वें स्थान पर मौजूद है. बेल्जियम का एंटवर्प-ब्रुग्स पोर्ट 13.5 मिलियन TEUs के साथ 13वें पायदान स्‍थान पर है।  चीन का शियामेन बंदरगाह 12.3 मिलियन TEUs के साथ 14वें स्थान पर है. मलेशिया का तंजुंग पेलेपास पोर्ट भी इतने ही ट्रैफिक के साथ बराबरी पर खड़ा है. अमेरिका, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करता है, उसका लॉस एंजेलिस बंदरगाह मात्र 10.3 मिलियन TEUs के साथ 16वें स्थान पर है।  मोरक्को के टैंगर-मेड पोर्ट ने 10.2 मिलियन TEUs के साथ टॉप पोर्ट्स की सूची में 17वें स्थान पर काबिज है. इसके ठीक बाद फिर से चीन का ताइकांग बंदरगाह 9.7 मिलियन TEUs के साथ 18वें पायदान पर खड़ा है. अमेरिका का लॉन्ग बीच पोर्ट 9.6 मिलियन TEUs के साथ 19वें और और थाईलैंड का लैम चाबांग बंदरगाह 20वें स्थान पर हैं।  भारत के किसी भी बंदरगाह का नाम टॉप 20 की सूची में शामिल न होना यह दर्शाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के मामले में अभी हमें एक लंबी दूरी तय करनी है.  भारत अपने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण पर काम कर रहा है, लेकिन चीन जिस गति से समंदर पर अपनी बादशाहत कायम कर चुका है, उससे मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती होगी।  

सर्वे में खुलासा: ऑफिस रोमांस में 40% लोग बेवफाई करते हैं

  नई दिल्ली ऑफिस रोमांस अब सिर्फ फिल्मों की कहानी नहीं रह गया है. एक ऐसी जगह, जहां हर शख्स अपने दिन के करीब 9 घंटे बिताता है, वहां किसी से लगाव होना आम बात मानी जाती है. लेकिन हाल ही में सामने आया एक सर्वे वाकई चौंकाने वाला है।  फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 60 फीसदी से ज्यादा लोग अपने वर्कप्लेस पर किसी न किसी रोमांटिक रिश्ते में रह चुके हैं. लंबे ऑफिस घंटे, रोजाना साथ काम करना और प्रोफेशनल प्रेशर को समझने वाला साथी मिलने की वजह से कई लोग अपने ही ऑफिस में पार्टनर ढूंढ लेते हैं. फोर्ब्स का ये सर्वे वायरल है, लोग इस पर अपना-अपना अनुभव भी बता रहे हैं।  सर्वे के मुताबिक, 65 फीसदी लोगों ने कहा कि 'कंफर्टेबल फील' होना ऑफिस रिलेशनशिप की सबसे बड़ी वजह है. वहीं 61 फीसदी लोगों का कहना था कि ऑफिस के बाहर नए लोगों से मिलने का समय ही नहीं मिलता. दिलचस्प बात यह रही कि सिर्फ 38 फीसदी लोगों ने माना कि ऑफिस रोमांस से काम मजेदार बनता है, यानी ज्यादातर लोगों के लिए भावनात्मक समझ ज्यादा अहम है।  सबसे ज्यादा ब्रेकअप का डर हालांकि, इन रिश्तों का असर सिर्फ पर्सनल लाइफ तक सीमित नहीं रहता. कई लोगों ने माना कि ब्रेकअप का डर ऑफिस रिलेशनशिप में ज्यादा होता है, क्योंकि रोजाना उसी व्यक्ति का सामना करना पड़ सकता है. लगभग 54 फीसदी लोगों ने कहा कि ऑफिस में डेटिंग से उनका वर्क-लाइफ बैलेंस प्रभावित हुआ।  सर्वे में यह भी सामने आया कि ऑफिस रोमांस जल्दी छिप नहीं पाता. आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि रिलेशनशिप सामने आने के बाद सहकर्मियों का व्यवहार बदल गया. करीब 60 फीसदी लोगों ने माना कि ऑफिस अफेयर अक्सर गॉसिप का विषय बन जाते हैं।  ऑफिस रिलेशनशिप में 40 फीसदी लोगों ने पार्टनर को दिया धोखा रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह था कि ऑफिस में रिलेशनशिप रखने वाले 40 फीसदी लोगों ने माना कि उन्होंने अपने पार्टनर को किसी सहकर्मी के साथ चीट किया. वहीं 43 फीसदी लोग ऐसे भी थे जिन्होंने आखिरकार अपने ऑफिस पार्टनर से शादी कर ली।  सर्वे के अनुसार, कई कंपनियां अब ऑफिस रोमांस को पूरी तरह गलत मानने के बजाय उसे मैनेज करने की कोशिश कर रही हैं. करीब 62 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने रिश्ते की जानकारी HR को दी थी। 

15 जून से शुरू होंगी इंडिगो की उड़ानें, लेकिन किराया सुनकर यात्रियों के उड़े होश

नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से कमर्शियल उड़ानों का आगाज़ 15 जून 2026 से होने जा रहा है। इंडिगो (IndiGo) इस नए एविएशन हब से अपनी सेवाएं शुरू करने वाली पहली एयरलाइन होगी। हालांकि, परिचालन शुरू होने से पहले ही यह एयरपोर्ट एक चौंकाने वाली वजह से चर्चा में है। जेवर एयरपोर्ट से कई प्रमुख रूटों का हवाई किराया दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट की तुलना में काफी अधिक पाया गया है। शुरुआत में इस एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए एक किफायती विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन मौजूदा कीमतों ने यात्रियों को हैरान कर दिया है। किराये में बड़ा अंतर: लखनऊ रूट सबसे महंगा इंडिगो के बुकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार, जेवर से कई घरेलू रूटों का किराया दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा है: लखनऊ: जेवर से लखनऊ का टिकट लगभग 5,401 रुपये है, जबकि IGI एयरपोर्ट से यह केवल 3,394 रुपये में उपलब्ध है (2,000 रुपये से ज्यादा का अंतर)। कोलकाता: जेवर से किराया 7,123 रुपये है, जबकि IGI से यह 5,894 रुपये और हिंडन से 5,930 रुपये के करीब है। नवी मुंबई: जेवर से 7,256 रुपये बनाम IGI से 6,760 रुपये। बेंगलुरु: जेवर से 8,979 रुपये बनाम IGI से 8,910 रुपये। हैदराबाद: जेवर से 6,198 रुपये बनाम IGI से 6,129 रुपये। टैक्सी का खर्च भी बढ़ाएगा बोझ     जेवर एयरपोर्ट की दूरी दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों से अधिक होने के कारण यात्रियों पर टैक्सी के किराये का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा।     नोएडा सेक्टर-18 से जेवर: लगभग 834 रुपये।     नोएडा सेक्टर-18 से IGI दिल्ली: लगभग 625 रुपये।     ग्रेटर नोएडा (परी चौक) से जेवर: लगभग 559 रुपये।     कई यात्रियों का मानना है कि वर्तमान में IGI एयरपोर्ट पहुंचना न केवल सस्ता है बल्कि अधिक सुविधाजनक भी है।     सरकार ने दी थी टैक्स में भारी छूट     हवाई किराये को कम रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने कई कदम उठाए थे:     हवाई ईंधन (ATF) पर वैट (VAT) को 25% से घटाकर मात्र 1% कर दिया गया।     शुरुआती तीन महीनों के लिए यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) में 25% तक की कटौती की गई।     इन भारी रियायतों के बावजूद, एयरलाइंस की ओर से अभी तक शुरुआती किराये में कोई बड़ी कटौती नहीं देखी गई है। दो चरणों में शुरू होंगी उड़ानें इंडिगो अपनी सेवाओं को चरणों में विस्तार देगी- पहला चरण (15 जून): बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, मुंबई, गोवा, लखनऊ, पटना, कोलकाता, चेन्नई, वाराणसी, जयपुर, देहरादून और चंडीगढ़ जैसे शहरों के लिए उड़ानें शुरू होंगी। दूसरा चरण (1 जुलाई): उड़ानों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जाएगी और सुबह से देर शाम तक सेवाएं उपलब्ध होंगी। चुनौतियां: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सड़क और सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी में सुधार नहीं होता और किराया प्रतिस्पर्धी नहीं बनता, तब तक यात्रियों को दिल्ली के बजाय जेवर एयरपोर्ट की ओर आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी

सालों से अटकी योजनाओं का होगा आरंभ, बंगाल में डबल इंजन सरकार की योजना

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन में भले अभी कुछ समय हो, लेकिन चुनाव परिणाम सामने आते ही केंद्र सरकार ने राज्य में सालों से अटकी केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन योजनाओं और परियोजनाओं की सूची मांगी है जो पिछले लगभग 12 सालों से ममता बनर्जी सरकार के विरोध, देरी या प्रशासनिक अड़चनों के कारण लंबित पड़ी थीं।  सूत्रों का कहना है कि इस पूरी कवायद की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सौंपी गई है. उन्होंने कई मंत्रालयों से ऐसी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है, जो पश्चिम बंगाल में बाधित रही हैं. मंत्रालयों ने संबंधित सूचनाएं भेजना भी शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार का उद्देश्य नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इन परियोजनाओं के रास्ते की बाधाएं दूर कर तेज गति से काम शुरू करना है।  पिछले एक दशक में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला. कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं या फिर उनके नाम बदलकर लागू किया गया. कई परियोजनाओं को जमीन आवंटन, प्रशासनिक अनुमति या अन्य कारणों से लंबे समय तक रोके रखा गया. अब केंद्र सरकार इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।  कई प्रमुख योजनाओं का मिलेगा लाभ सबसे प्रमुख योजना आयुष्मान भारत है जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से इनकार कर दिया था. इस योजना के तहत पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा मिलता है. ममता बनर्जी सरकार का कहना था कि राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना बेहतर है, केंद्र की 60:40 फंडिंग व्यवस्था और प्रधानमंत्री की तस्वीर वाले स्वरूप पर भी आपत्ति थी।  पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैं कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जाएगी।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. ममता सरकार अपनी ‘कृषक बंधु’ योजना को प्राथमिकता देती रही. हालांकि बाद में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर खींचतान जारी रही. अब केंद्र सरकार इसे पूरी क्षमता के साथ लागू कराने की तैयारी में है।  इसी तरह  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी एक्ट यानी मनरेगा के फंड को कथित अनियमितताओं के कारण केंद्र ने रोक दिया था. इसे लेकर राज्य सरकार ने केंद्र पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया था. अब केंद्र इसे नए ढांचे के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है।  प्रधानमंत्री आवास योजना नाम बदलकर ‘बांग्ला आवास योजना’ किए जाने और उसमें कथित अनियमितताओं के बाद 2022 से फंडिंग रुकी हुई थी. अब इस योजना को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।  केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पश्चिम बंगाल में काफी देर से लागू किया गया और आवंटित राशि का सीमित उपयोग हुआ. वहीं जल जीवन मिशन के तहत आवंटित फंड के बेहतर उपयोग और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया जाएगा।  शिक्षा क्षेत्र में पीएम श्री स्कूल नई शिक्षा एवं भाषा नीति और ‘उल्लास’ जैसी योजनाओं को लागू करने की तैयारी है. साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रुकी परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलने की संभावना है. नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत गंगा सफाई से जुड़े कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूमि उपलब्ध न होने के कारण वर्षों से लंबित हैं।  केंद्र सरकार कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुकी है कि पश्चिम बंगाल में जमीन नहीं मिलने से परियोजनाओं में देरी हुई. अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की तैयारी है।  इसी तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संवेदनशील क्षेत्रों में बॉर्डर फेंसिंग को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद रहा. केंद्र का आरोप था कि आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई. अब इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को छोड़कर पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी ‘बांग्ला शस्य बीमा’ योजना शुरू की थी. राज्य सरकार का तर्क था कि उसका मॉडल किसानों के लिए अधिक लाभकारी है, जबकि केंद्र ने इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बताया।  मृदा स्वास्थ्य कार्ड, और पीएम-प्रणाम जैसी योजनाओं को लागू करने की गति को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया।  केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि लंबे समय से रुकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा कर जमीन पर ‘डबल इंजन सरकार’ का असर दिखाया जाए. साथ ही केंद्रीय योजनाओं का दायरा बढ़ाकर लाभार्थियों की संख्या में विस्तार किया जाए, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। 

69000 बेसिक: 8th Pay Commission के बाद आपकी सैलरी में बदलाव का हाल

  नई दिल्‍ली आठवें वेतन आयोग की टीम आए दिन अलग-अलग राज्‍यों में बैठकें कर रही है और कर्मचारियों की समस्‍या और मांग जानना चाहती है, ताकि वह एक रिपोर्ट तैयार कर सके और उसे सरकार को सौंप सके. अभी तक कर्मचारियों की ओर से कुछ मांग रखी गई है, जिसके मुताबिक, मिनिमम बेसिक सैलरी 69000 रुपये और फिटमेंट फैक्‍टर 3.83 रखने की बात कही गई है।  8वें वेतन आयोग की टीम ने दिल्‍ली, पुणे और उत्तराखंड में बैठक पूरी की है. अब अगर 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की 3.83 फिटमेंट फैक्टर वाली मांग मान ली जाती है तो सिर्फ बड़े अधिकारियों की ही नहीं, बल्कि सरकारी चपरासी, क्लर्क, टीचर, रेलवे कर्मचारी से लेकर IAS अधिकारियों तक की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।  न्यूनतम बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर करीब 69000 रुपये तक पहुंच सकती है. साथ ही 30 साल में पांच बार प्रमोशन हो सकता है. महंगाई भत्ता और एचआर के अलावा, अन्‍य भत्तों में तीन गुना इजाफा हो सकता है. हालांकि, यहां एक सैलरी अनुमान लगाया गया है, जिसके तहत हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि किस लेवल के कर्मचारियों की कितनी सैलरी बढ़ सकती है?  आपकी कितनी बढ़ सकती है सैलरी?  8वें वेतन आयोग के तहत लेवल 1 में चपरासी और अटेंडेंट आते हैं. लेवल 2 में लोअर डिवीजन, लेवल 3 में कांस्‍टेबल और कुशल कर्मचारी आते हैं. लेवल 4 में ग्रेड डी स्‍टेनोग्राफर और यूनियर क्‍लर्क आते हैं, जिनकी मौजूदा सैलरी 25,500 रुपये है. अगर 3.83 रखा जाता है तो मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, सैलरी में बढ़ोतरी कुछ इस प्रकार हो सकती है।  संभावित नई बेसिक पे: लगभग 68,940 रुपये     लेवल-1: 18,000 रुपये  से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये     लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर लगभग 76,000 रुपये     लेवल-3: 21,700 रुपये  से बढ़कर लगभग 83,000 रुपये     लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर लगभग 97,000 रुपये     लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर लगभग 1.11 लाख रुपये मिड लेवल कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी      लेवल-6: 35,400 रुपये से बढ़कर लगभग 1.35 लाख रुपये     लेवल-7: 44,900 रुपये  से बढ़कर लगभग 1.72 लाख रुपये     लेवल-8: 47,600 रुपये से बढ़कर लगभग 1.82 लाख रुपये     लेवल-9: 53,100 रुपये से बढ़कर लगभग 2.03 लाख रुपये सीनियर अधिकारियों सैलरी कितनी बढ़ सकती है     लेवल-13: 1.23 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4.71 लाख रुपये     लेवल-14: 1.44 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 5.52 लाख रुपये     लेवल-15: 1.82 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 6.97 लाख रुपये     लेवल-18: 2.50 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 9.57 लाख रुपये