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चुनावी जीत के बाद MP में सियासी गतिविधियां बढ़ीं, जल्द होगा कैबिनेट विस्तार

 भोपाल बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद अब मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. बंगाल, असम और पुडुचेरी में बीजेपी के पक्ष में आए चुनाव परिणामों ने उस प्रक्रिया को फिर से गति देने के संकेत दिए हैं, जो चुनावों के चलते कुछ समय के लिए थम गई थी. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई वाली सरकार में इस साल कैबिनेट विस्तार और फेरबदल संभव है।  पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों के बयानों और बॉडी लैंग्वेज ने संगठन को असहज किया है. सार्वजनिक मतभेद और बयानबाजी ने इन संकेतों को और स्पष्ट किया. इसी को देखते हुए मंत्रियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट अब पार्टी हाईकमान के पास है. मंत्रियों के कामकाज और संगठन के साथ समन्वय की समीक्षा की गई है, और माना जा रहा है कि इन्हीं आधारों पर मंत्रिमंडल में फेरबदल के फैसले लिए जा सकते हैं।  राजनीतिक दृष्टि से यह फेरबदल अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच चुकी है. मोहन सरकार के करीब ढाई साल पूरे हो चुके हैं और अगले ढाई साल चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होंगे. ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है और समय रहते संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करना चाहती है।  कराया गया है मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन दरअसल, पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों के बयानों और बॉडी लैंग्वेज ने संगठन को असहज किया है. सार्वजनिक मतभेद और बयानबाजी ने इन संकेतों को और स्पष्ट कर दिया था. यही वजह है कि मंत्रियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट अब हाईकमान के पास है. मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन कराया गया है. संगठन ने जो समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए थे, उनकी भी परीक्षा अब इस फेरबदल में होगी. राजनीतिक तौर पर यह फेरबदल बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार अपने कार्यकाल के मध्य बिंदु पर लगभग पहुंच चुकी है यानी मोहन सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं. अगले ढाई साल पूरी तरह चुनावी मोड में होंगे. ऐसे में पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही और मान कर चल रही है कि कैबिनेट में फेरबदल या विस्तार का यही सही समय है।  कैबिनेट में विस्तार करने की गुंजाइश अभी बाकी संख्या के लिहाज से भी देखा जाए तो कैबिनेट में विस्तार करने की गुंजाइश अभी बाकी है. फिलहाल मोहन कैबिनेट में 31 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 35 हो सकती है यानी चार नए चेहरों की एंट्री करने की संभावना बाकी है. लेकिन सवाल यह है कि इसके साथ ही क्या मौजूदा मंत्रियों की विदाई होगी या बचे हुए चार खाली मंत्री पदों पर नियुक्तियां होंगी. सवाल इस बात का भी है कि क्या गुजरात की ही तर्ज पर यहां भी तो कहीं पूरी कैबिनेट को नहीं बदल दिया जाएगा? हालांकि इसकी संभावना यहां इसलिए कम है क्योंकि गुजरात के अलावा अन्य किसी राज्य में बीजेपी ने पूरी कैबिनेट को नहीं बदला. इसी साल मार्च में बीजेपी शासित उत्तराखंड में  पूरी कैबिनेट बदलने के बजाय, धामी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 5 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी।  संख्या के लिहाज से भी कैबिनेट विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है. फिलहाल मंत्रिमंडल में 31 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 35 हो सकती है. यानी चार नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नए मंत्रियों की एंट्री के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होगी या सिर्फ खाली पदों को भरा जाएगा. एक सवाल यह भी है कि क्या गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी पूरी कैबिनेट बदली जा सकती है।  हालांकि इसकी संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि बीजेपी ने गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में ऐसा कदम नहीं उठाया है. हाल ही में उत्तराखंड में भी कैबिनेट विस्तार के तहत नए चेहरों को शामिल किया गया, लेकिन पूरी कैबिनेट नहीं बदली गई. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 5 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी।  मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस भेंट को मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनावी नतीजों के बाद संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन साधने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ‘गुजरात मॉडल’ की तर्ज पर बदलाव की चर्चा सूत्रों के अनुसार, मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी बड़ा कदम उठाया जा सकता है। गुजरात में पूर्व में सभी मंत्रियों से इस्तीफा लेकर पूरी तरह नया मंत्रिमंडल गठित किया गया था। इसी तरह का प्रयोग मध्यप्रदेश में भी संभव माना जा रहा है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। आधिकारिक ऐलान का इंतजार फिलहाल सरकार की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन हालिया राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए आने वाले दिनों में बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

IMF की वॉर्निंग: युद्ध से वैश्विक संकट गहरा, भविष्य और खराब होने का अंदेशा

  नई दिल्ली    अमेरिका और ईरान के बीच हमलों की खबर से एक बार फिर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की तमाम कोशिशें होर्मुज स्ट्रेट पर आकर फेल हो रही हैं. न तो डोनाल्ड ट्रंप Hormuz Strait पर पीछे हटने को तैयार हैं, न ही ईरान हथियार डालने के मूड में नजर आ रहा है।  मिडिल ईस्ट में गहराए इस तनाव को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने बड़ी चेतावनी दी है. आईएमएफ चीफ ने कहा है कि अगर ये युद्ध 2027 तक चला, तो इसके सबसे बुरे परिणाम देखने को मिलेंगे।  अनुमान से ज्यादा बुरे परिणाम आईएमएफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया में महंगाई पहले से ही बढ़ रही है. इस बीच मिडिल ईस्ट युद्ध एक और बड़ा संकट बनकर सामने आया है. IMF Chief क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच ये युद्ध 2027 तक खिंचता है और इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनुमान से कहीं ज्यादा बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  जॉर्जीवा ने आगे कहा कि US-Iran War को लेकर अब तक जो पूर्वानुमान जताए गए थे, वो धरे रहते जा रहे हैं. इसके साथ ही इनमें जाहिर किए गए ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में गिरानट के बाद इसके 3.1 फीसदी और महंगाई के 4.4 फीसदी रहने के अनुमान पीछे छूटते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर बीतते दिन के साथ ये अनुमान बेकार होते जा रहे हैं।  IMF Chief के मुताबिक, युद्ध का जारी रहना, तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक पर बने रहना और इसके चलते महंगाई के बढ़ते दबाव का साफ मतलब है कि हालात आगे खराब होने वाले हैं और आईएमएफ का आउटलुक अब आधार बन चुका है. इसमें कहा गया है कि 2026 में वैश्विक ग्रोथ 2.5 फीसदी तक गिर सकती है, जबकि महंगाई का बम फूट सकता है और ये 5.4 फीसदी पर पहुंच सकती है।  Hormuz बंद होने से बिगड़ेंगे हालात शेवरॉन (Chevron) के चेयरमैन और सीईओ माइक विर्थ ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति में भौतिक कमी दिखाई देने लगेगी, जिसके माध्यम से युद्ध से पहले वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता था. विर्थ के मुताबिक, लंबे समय तक युद्ध चला तो दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ने लगेंगी, सबसे पहले एशिया में बुरा असर देखने को मिलेगा।  IMF की हालात पर पैनी नजर क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा कि IMF इस संघर्ष के सप्लाई चेन पर पड़ने वाले धीमे असर पर बारीकी से नजर रख रहा है. इसके असर को देखें, तो खाद पहले से ही 30% से 40% महंगी हो चुकी है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम 3% से 6% तक बढ़ सकती हैं. सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि दूसरे बिजनेस भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।  उन्होंने आगे कहा, 'मैं जिस बात पर जोर देना चाहती हूं, वह यह है कि यह वाकई बहुत गंभीर मामला बनता जा रहा है. कई पॉलिसी मेकर्स अभी भी ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, मानो यह संकट कुछ ही महीनों में खत्म हो जाएगा. वे उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिससे तेल की डिमांड लगातार हाई पर बनी हुई है। 

अमित शाह तय करेंगे बंगाल का सीएम, ये नेता हैं संभावित दावेदार

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में 15 साल के बाद सत्ता परिवर्तन हो गया है और बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख भी फाइनल हो गई है. सूबे के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनने जा रही है. ऐसे में सभी की मन में एक ही सवाल है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता की कमान सौंपी जाएगी।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद बंगाल के पर्यवेक्षक के तौर पर आज गुरुवार शाम कोलकाता पहुंच रहे हैं. इस दौरान वो बीजेपी विधायकों के साथ बातचीत कर मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे. मुख्यमंत्री की रेस में कई नेताओं के नाम चल रहे हैं, जिसमें ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे है।  बंगाल में सीएम की रेस में शुभेंदु अधिकारी ही नहीं बल्कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से लेकर दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉलऔर सुकांत मजूमदार जैसे आधा दर्जन नेताओं के नाम शामिल है. ऐसे में सवाल उठता है कि अमित शाह के सियासी क्राइटेरिया में कौन नेता फिट बैठेगा?  बंगाल सीएम के लिए शाह की क्राइटेरिया? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले फेज की वोटिंग के बाद ही अमित शाह ने संकेत दे दिए थे कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा? कोलकाता में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान अमित शाह से पूछा गया था कि बीजेपी सत्ता में आती है तो बंगाल में कौन मुख्यमंत्री होगा. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा था कि जो भी होगा बंगाल की धरती का बेटा है, बंगाल में पढ़ा-लिखा है, बंगाली बोलता है और बीजेपी का कार्यकर्ता है, वही मुख्यमंत्री होगा? अमित शाह ने कहा था कि मैं बंगाल के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि अगला मुख्यमंत्री कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो बंगाल में पैदा हुआ और पढ़ा-लिखा हो, और बंगाली अच्छी तरह बोलता हो. इस तरह से अमित शाह ने बीजेपी के सीएम बनाने की क्राइटेरिया बता दी थी. अब बीजेपी सत्ता में आई है तो उस लिहाज से नए मुख्यमंत्री का चयन होगा, जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए खुद पर्यवेक्षक के तौर पर कोलकाता जा रहे हैं, जहां विधायकों से बातचीत करके नए सीएम के नाम का ऐलान करेंगे?  शुभेंदु अधिकारी बनेंगे अमित शाह की पसंद अमित शाह के क्राइटेरिया में शुभेंदु अधिकारी सबसे फिट बैठते हैं. भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर शुभेंदु अधिकारी ने अपनी ताकत साबित की है. बंगाल से दिल्ली तक के सियासी कॉरिडोर में सबसे ज्यादा चर्चा शुभेंदु की हो रही है. सुवेंदु अधिकारी ने 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराया था और विपक्ष के नेता बने थे और इस बार उन्होंने नंदीग्राम से जीतने के साथ-साथ भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15,000 से ज्यादा वोटों से मात दी है. ऐसे में सुवेंदु अधिकारी के नाम को नजरअंदाज करना मुश्किल है।  शुभेंदु अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के क्राइटेरिया में भी फिट बैठ रहे हैं. बंगाल में जन्म लिए हैं और बंगाल में पढ़े लिखे हैं. यही नहीं बीजेपी में आए हुए भी उन्हें छह साल हो गए  हैं. अमित शाह को ऐसे नेता पसंद आते हैं, जो 'आक्रामक' होनेके साथ प्रशासन पर मजबूत पकड़ रखता हो. शुभेंदु के पास मंत्री रहने का भी अनुभव है और वे राज्य के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं.'हिंदुत्व' और 'विकास' के समन्वय के लिए वे शाह की पहली पसंद हो सकते हैं।  समिक भट्टाचार्य कहीं छुपे रुस्तम न साबित हों? पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी जहां नैचुरल दावेदार हैं तो वहीं उनके बाद समिक भट्टाचार्य का नाम है. समिक भट्टाचार्य एक ऐसा नाम हैं,जिन्हें बीजेपी का 'बौद्धिक चेहरा'माना जाता है. चुनाव नतीजों के बाद जब अमित शाह कोलकाता में मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन कर रहे हैं, तो समिक भट्टाचार्य का नाम 'डार्क हॉर्स' (छुपा-रुस्तम) के रूप में तेजी से उभरा है. संघ और बीजेपी दोनों की पसंद माने जाते हैं।  समिक भट्टाचार्य के पास बंगाली-शिक्षिक मिडिल-क्लास और सभी ग्रुप्स के बीच कोऑर्डिनेशन बनाए रखने की क्षमता है. भट्टाचार्य पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से एक अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने शाह और सुनील बंसल मार्गदर्शन में पार्टी के पुराने नेताओं को एक साथ रखकर कमल खिलाने में कामयाब रहे.समिक में बंगालियों और बंगाली कल्चर को रिप्रेजेंट करने की काबिलियत है. अमित शाह ये भी जानते हैं कि बंगाल की सत्ता चलाने के लिए केवल आक्रामकता काफी नहीं है,बल्कि बंगाल के प्रबुद्ध समाज (इंटेलिजेंटिया) को साथ लेना भी जरूरी है।  दिलीप घोष बीजेपी के'जमीनी योद्धा' और कैडर की पसंद बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी सीएम की रेस में है. बंगाल में बीजेपी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में दिलीप घोष का अहम रोल रहा है. वे 'खालिस बंगाली' अंदाज में बात करते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. अमित शाह को ऐसा व्यक्ति पसंद है जो मुश्किल वक्त में पार्टी के साथ खड़ा रहा हो. हालांकि, दिलीप घोष की बेबाक बयानबाजी कभी-कभी अनुशासन के आड़े आती है, लेकिन उनकी 'फाइटिंग स्पिरिट' उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।  सुकांत मजूमदार 'संगठन'और 'शालीनता' का मेल पश्चिम बंगाल में सीएम की रेस में अमित शाह किसी ऐसे चेहरे की तलाश में हैं, जो विवादों से दूर रहे और संगठन के साथ तालमेल बिठा सके, तो सुकांत मजूमदार रेस में आगे हैं. वे पढ़े-लिखे हैं (प्रोफेसर रहे हैं) और पश्चिम बंगाल के भद्रलोक समाज में उनकी अच्छी छवि है. सुकांत एक 'लो-प्रोफाइल' लेकिन मेहनती नेता हैं, जो संघ (RSS) और पार्टी के बीच सेतु का काम कर सकते हैं. बीजेपी अपने फैसले से अक्सर चौंकाती रही है।  अग्निमित्रा पॉल 'महिला शक्ति' और नया प्रयोग बीजेपी पश्चिम बंगाल में 'महिला मुख्यमंत्री' का कार्ड खेलते हैं, तो अग्निमित्रा पॉल बड़ी दावेदार होंगी. दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बनी है. बंगाल में उन्होंने महिला सुरक्षा और 'आरजी कर' जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को पुरजोर तरीके से घेरा है. बंगाल में 'नारी शक्ति' ने बीजेपी को वोट दिया है. ममता बनर्जी के जवाब में एक महिला मुख्यमंत्री देना शाह की 'मास्टरस्ट्रोक' वाली राजनीति का हिस्सा हो सकता है।  उत्पल महाराज को बंगाल का योगी कहा जाता है? पश्चिम बंगाल में एक नाम और भी चर्चा में है, जो उत्पल महाराज है. उन्हें बंगाल का योगी … Read more

मध्य प्रदेश के नौरादेही टाइगर रिजर्व में अनोखी पहल, एक्स-आर्मी मैन संभालेंगे वन्यजीव सुरक्षा

सागर  मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व की बात करें, तो ये तीन जिलों में फैला हुआ है. नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण को टाइगर रिजर्व में तब्दील तो कर दिया गया है. लेकिन 2 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी आज यहां पर वही फील्ड स्टाफ काम कर रहा है. जो नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य के समय पर कर रहा था. जबकि नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य का क्षेत्रफल आज के टाइगर रिजर्व से आधा भी नहीं था. ऐसे में टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की संख्या और आने वाले मेहमान चीतों की सुरक्षा की चिंता लाजिमी है।  वहीं पिछले दिनों में कुछ ऐसे घटनाक्रम भी सामने आए हैं. जो वन अपराधियों के बेलगाम हौसले की तरफ इशारा करते हैं. ऐसी स्थिति में वन अपराध जैसे लकड़ी तस्करी और वन्यजीवों के शिकार के साथ-साथ बाघों और आने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन ने भूतपूर्व सैनिकों की मदद लेना शुरू किया है. टाइगर रिजर्व की सुरक्षा की कमान वनरक्षक तो संभाली रहे हैं. वहीं अब एक्स आर्मी मैन वन रक्षकों के कंधे से कंधे मिलाकर वन और वन्यजीव की सुरक्षा करेंगे।  वन्यजीवों की सुरक्षा और वन अपराध चिंता का विषय नौरादेही टाइगर रिजर्व की बात करें, तो इसका कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर है. यह सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले तक फैला हुआ है. यहां बाघों का कुनबा 30 पहुंच गया है. चीता प्रोजेक्ट के तहत इसे मध्य प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के तौर पर विकसित किया जा रहा है. जुलाई में यहां चीता छोड़े जाना प्रस्तावित है. ऐसे में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ यहां की बेशकीमती वनसंपदा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है।  वन्यप्राणियों की सुरक्षा पूर्व सैनिकों के जिम्मे  राष्ट्रीय बाघ संरक्षण योजना में 2018 में शामिल किए जाने और यहां चीतों के तीसरा घर बनाने का फैसला केंद्र और राज्य सरकार ने तो कर लिया. लेकिन सुरक्षा और प्रबंधन की दृष्टि से यहां वन अमले की पदस्थापना आज तक नहीं की गयी है. ये जब वन्यजीव अभ्यारण्य था, वहीं वन अमला आज भी यहां सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहा है. यहां या तो श्रमिक या आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लिया जा सकता है. ऐसे में वन अपराध रोकना और वनसंपदा की सुरक्षा के लिए प्रबंधन एक्स आर्मी मैन की तैनाती की गयी है. जो वन अमले के साथ सुरक्षा का दायित्व भी संभाल रहे हैं।  क्या कहना है प्रबंधन का नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह कहते हैं कि, ''पहली बात तो ये कोई नया प्रयोग नहीं है, मध्य प्रदेश के दूसरे टाइगर रिजर्व और जब नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य हुआ करता था. तब भी यहां एक्स आर्मी मैन जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के जरिए नियुक्त किए गए थे और वो वनकर्मियों के साथ कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर वन्यप्राणी क्षेत्र की सुरक्षा में अपना योगदान दे रहे हैं. ये बात कोई छिपी नहीं है कि हमारी सेना और सेना के जवानों का एक अनुशासन है और काम करने का अपना तरीका है।  जब हम उनके साथ जुड़कर वनकर्मी काम करते हैं, तो उनका अनुशासन और दक्षता का स्तर ऊपर होता है. सेना की दक्षता है, वो हमारे क्षेत्र में मेहनत के साथ जुटती है तो अपराधी तत्व डिफेंस में आ जाते हैं. वो जानते हैं कि कोई भी तरह का अपराध करेंगे, तो सेना के लोग छोड़ेगे नहीं. हमारी वन और वन्यप्राणी सुरक्षा मजबूत होती है. पूर्व में हम पेंच, कान्हा और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ये प्रयोग हो चुका है। 

विजय ने खेली दोहरी रणनीति, TVK के हाथ में लड्डू; अंदरखाने क्या हो रहा है

चेन्नई तमिलनाडु चुनाव के नतीजे आ गए. अब सरकार कैसे गठित हो, इसकी कवायद है. विधानसभा नतीजों ने तमिलनाडु में सरकार गठन की प्रक्रिया को फंसा दिया है. तमिलनाडु चुनाव रिजल्ट में किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है टीवीके. जी हां, यह थलापति विजय की पार्टी है. एक्टर से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. अब यह सरकार बनाने को रेडी है. मगर नंबर गेम में टीवीके फंस गई है. अब तमिलनाडु में गठबंधन वाली सरकार ही एकमात्र विकल्प है. इस स्थिति को देखते हुए थलापति विजय ने डबल चाल चल दी है. हकीकत तो यह है कि टीवीके के दोनों हाथ में लड्डू है. चलिए जानते हैं तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर अंदरखाने क्या बातचीत हो रही।  दरअसल, तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर पेच फंसा हुआ है. तमिलनाडु में अब ऐसी चीज होने जा रही है, जो उसने दशकों से नहीं देखी थी. जी हां, एक गठबंधन सरकार. एक्टर विजय की पार्टी टीवीके पहली बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरी. पहली बार में ही एक्टर विजय ने अपना लोहा मनवा दिया. उसकी आंधी ऐसी चली कि डीएमके और एआईएडीएमको को समझ नहीं आया कि ये कैसा सियासी तूफान आया. जब तक समझ पाते तब तक टीवीके शतक मार चुकी थी।  टीवीके को बहुमत नहीं, फिर भी दोनों हाथ में लड्डू जी हां, तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK ने चुनाव में 108 सीटें जीतीं. उसने सत्ताधारी DMK को काफी पीछे छोड़ दिया, जो 59 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही. हालांकि, 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत से टीवीके दूर रह गई. विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटे हैं. टीवीके के पास 10 सीटों की कमी है. इसलिए अब लोगों का ध्यान जश्न से हटकर गठबंधन बनाने पर चला गया है. अब विजय 10 सीटों के उपाय में लगे हैं ताकि किसी तरह सरकार गठन हो सके. फिलहाल, टीवीके के पास दोनों हाथ में लड्डू है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हो या एआईएडीएमके दोनों एक्टर विजय को सपोर्ट दे सकते हैं. टीवीके की दोनों से बातचीत कर रही है।  थलापति विजय की किससे बातचीत जी हां, कांग्रेस और AIADMK…दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने मंगलवार को कहा कि थलापति विजय ने सरकार बनाने में समर्थन के लिए उनकी पार्टियों से संपर्क किया. कांग्रेस तो पहले ही इशारा कर चुकी है कि वह टीवीके को सरकार बनाने में मदद कर सकती है. इससे पहले मंगलवार सुबह को विजय अपनी पार्टी के दफ़्तर पहुंचे थे और नए चुने गए विधायकों के साथ बैठक की थी. तब से ही गठबंधन बनाने की योजनाएं बन रही हैं।  कांग्रेस और एआईएडीएमके दोनों विकल्प इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों ने बताया कि एक प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर दोनों पार्टियां गठबंधन करने का फैसला करती हैं तो टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को दो कैबिनेट पद दिए जा सकते हैं. कांग्रेस ने पांच सीटें जीती हैं. इस व्यवस्था के लिए दूसरे छोटे दलों के समर्थन की भी जरूरत होगी, ताकि विधानसभा में इस गुट के पास बहुमत हो सके. हालांकि, बाद में सूत्रों ने बताया कि कई छोटे दलों की हिचकिचाहट की वजह से TVK अब AIADMK के साथ गठबंधन करने पर विचार कर रही है. यहां बताना जरूरी है कि AIADMK के पास 47 सीटें हैं।  कांग्रेस सपोर्ट को रेडी शाम होते-होते कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य कांग्रेस इकाई को विजय के समर्थन के अनुरोध पर अंतिम फ़ैसला लेने का निर्देश दिया गया है. वेणुगोपाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के बाद कहा कि टीवीके के अध्यक्ष थलापति विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से समर्थन मांगा है. कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से फैसला करने को कहा है. वहीं दूसरी ओर लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन की पत्नी लीमा रोज मार्टिन ने बताया कि विजय की पार्टी और AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच बातचीत चल रही है।  अगर गठबंधन हुआ तो सहयोगी को क्या मिलेगा? वहीं, टीवीके के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है. टीवीके का कहना है कि कांग्रेस ने गठबंधन पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है. अभी तक CPI, CPM, VCK और IUML का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं है. सूत्रों के अनुसार टीवीके का जिसके साथ गठबंधन होगा, उस दल को चार से छह मंत्री पद देने की योजना है. ऐसा करने के पीछे दो मुख्य मकसद हैं. पहला सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल जुटाना और दूसरा- शासन-प्रशासन के क्षेत्र में अपने अनुभव की कमी की भरपाई करना। 

भारत-वियतनाम रिश्तों में मजबूती, 13 समझौते और जल्द ही UPI का फास्ट पेमेंट सिस्टम से कनेक्शन

नई दिल्ली  वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के भारत दौरे को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में गति देने वाला माना जा रहा है. भारत और वियतनाम अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों के बीच बुधवार को 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।  पीएम मोदी ने बताया कि हमारी साझा विरासत को जीवंत रखने के लिए, हम वियतनाम के प्राचीन चम्पा सभ्यता के मी सॉन और न्हान टवर मंदिरों का पुनर्निमाण कर रहे हैं. अब हम चम्पा सभ्यता की मनुस्क्रिप्ट को भी डिजिटलाइज करेंगे, और इस अमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करेंगे।  मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत के लिए दोनों देशों का नजरिया एक जैसा है और दोनों पक्ष कानून के राज, शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देते रहेंगे. ऐसा समझा जाता है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में चीन की बढ़ती मिलिट्री ताकत पर भी चर्चा हुई।  लाम, एक उच्च स्तर प्रतिनिधिमंडल के साथ, मंगलवार को भारत की अपनी तीन दिन की यात्रा पर निकले. इस महीने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह देश की उनकी पहली सरकारी यात्रा है।  पीएम मोदी ने अपने मीडिया स्टेटमेंट में कहा कि भारत और वियतनाम ने रिश्तों को बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है।  मोदी ने कहा, "वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और विज़न ओशन का एक अहम स्तंभ है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी, हम एक जैसी सोच रखते हैं." उन्होंने कहा, "हमारे मजबूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग के जरिए, हम कानून के राज, शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देते रहेंगे।  प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वियतनाम के सहयोग से आसियान (Association of Southeast Asian Nations) के साथ अपने संबंधों को और बढ़ाएगा. उन्होंने कहा कि वित्तीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए हमने दोनों देशों के सेंट्रल बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।  उन्होंने कहा कि भारत का यूपीआई और वियतनाम का फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द ही जुड़ जाएगा. अपनी बात में लैम ने कहा कि दोनों पक्ष राजनीतिक विश्वास को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए।  पिछले साल, दोनों पक्षों ने सबमरीन सर्च, रेस्क्यू और व्यवस्था के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए एक आशय का पत्र (LoI) पर भी हस्ताक्षर किया। 

असम में 12 मई को होगी शपथ ग्रहण समारोह, पीएम मोदी की उपस्थिति तय; नया CM चयन की तारीख का खुलासा

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की और उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। फिलहाल वह नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभार संभालेंगे। जानकारी मिल रही है कि नई सरकार का शपथ समारोह 12 मई को होगा और इस आयोजन में पीएम नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के तमाम सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि लगातार तीसरी बार हिमंत बिस्वा सरमा को ही मुख्यमंत्री का पद मिलने की संभावना है। हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद एक फिर से राज्य की जनता का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि असम के लोगों ने हमारी सरकार पर भरोसा जताया है। उन्होंने पीएम मोदी के प्रति अपना समर्थन जताया है। जनता चाहती है कि असम में विकास की गंगा बह रही है, वह जारी रहे। असम के सीएम को लेकर जब हिमंत बिस्वा सरमा से पूछा गया तो उन्होंने अपने बारे में कुछ भी नहीं कहा। उनका कहना था कि राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक होगी। इस मीटिंग में ही असम के नए मुख्यमंत्री का चुनवा किया जाएगा। भाजपा इससे पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में भी नेतृत्व को लेकर चौंका चुका है। ऐसे में हिमंत बिस्वा सरमा रिपीट होंगे या नहीं। इसे लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है। हालांकि सीएम हिमंत ही रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हिमंत बिस्वा सरमा की पिछले दो कार्यकालों में एक सख्त नेता की छवि बनी है। इसके अलावा हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर भी उन्हें देखा जा रहा है। बांग्लादेशी घुसपैठियों का मसला हो या फिर आबादी के संतुलन का विषय हो। हिमंत बिस्वा सरमा ने हमेशा सख्ती के साथ बात रखी है। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज कर पाना मुश्किल है। असम में यदि भाजपा ने लगातार तीसरी बार सफलता हासिल की है तो उसका श्रेय भी एक हद तक हिमंत बिस्वा सरमा को ही दिया जा रहा है। बंगाल में 9 मई को शपथ समारोह, कई नामों पर कयास बता दें कि बंगाल में 9 मई को ही शपथ समारोह होना है और शुक्रवार को मुख्यमंत्री चुनने के लिए विधायक दल की मीटिंग होगी। बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के अलावा समिक भट्टाचार्य, दिलीप घोष समेत कई नेताओं को रेस में माना जा रहा है। यहां तक कि रूपा गांगुली और अग्निमित्रा पॉल जैसी महिला नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं।

कांग्रेस ने किया ऐलान: किसानों के समर्थन में कल 7 स्थानों पर हाईवे जाम, दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद

भोपाल  मप्र में कल गुरुवार 7 मई को कांग्रेस बड़े आंदोलन की तैयारी में है। पार्टी प्रदेशभर में 7 अलग-अलग स्थानों पर नेशनल हाईवे जाम करेगी। आंदोलन का नेतृत्व वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने घोषित किया। बुधवार को भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि खरीदी के शुरुआती 14 दिनों में सिर्फ 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, पंजीयन पर्ची अपलोड और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कांग्रेस के इस आंदोलन से 11 जिलों के करीब 747 किलोमीटर क्षेत्र में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। पार्टी ने इसे किसानों के हित में बड़ा आंदोलन बताया है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसानों को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। किसानों को कई दिनों तक ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि किसान मजबूरी में 1800 से 2022 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को गेहूं बेच रहे हैं। कांग्रेस की मांगें पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है। मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है। राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी। राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था। जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

सरकार देगी मुफ्त ट्रेनिंग, भोजन और आवास के साथ स्टाइपेंड भी: राज्यमंत्री गौर

फ्री ट्रेनिंग में रहना-खाना मुफ्त, स्टाइपेंड भी देगी सरकार : राज्यमंत्री गौर सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए 11 मई तक करें ऑफलाइन आवेदन, भोपाल मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सेना, पुलिस, होमगार्ड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए निशुल्क ट्रेनिंग देने जा रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' में उन्हें 45 दिन का निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस योजना से प्रदेश के 4000 ओबीसी युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का लाभ लेने के लिए 11 मई की शाम 6 बजे तक आवेदन किए जा सकते हैं। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के ओबीसी वर्ग के युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प को साकार करते हुए सैन्य बलों में भर्ती की निःशुल्क कोचिंग के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026' युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक सौगात है। उन्होंने प्रदेश के ओबीसी वर्ग के प्रतिभावान युवक-युवतियों से इस योजना में बढ़-चढ़कर आवेदन करने की अपील की है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन और निःशुल्क रखी गई है। उम्मीदवार, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट  ( www.bcwelfare.mp.gov.in)  से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, 20 चयनित जिलों में स्थित पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के 'सहायक संचालक कार्यालयों' से भी निःशुल्क आवेदन फॉर्म प्राप्त किए जा सकते हैं। इन फॉर्म को सही तरीके से भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ 11 मई या उससे पहले इन्हीं कार्यालयों में जमा करना होगा। योजना के लिए कौन पात्र होगा? आवेदन करने के लिए युवा का मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना और अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमीलेयर) श्रेणी में आना अनिवार्य है। आवेदक का न्यूनतम 12वीं कक्षा पास होना जरूरी है। शारीरिक मापदंड के तहत पुरुषों की न्यूनतम ऊंचाई 168 सेंटीमीटर और महिलाओं की 155 सेंटी मीटर होनी चाहिए। साथ ही, आवेदक के पैरों के तलवे चपटे (फ्लैट फुट) नहीं होने चाहिए और 'सावधान' की मुद्रा में खड़े होने पर दोनों घुटने आपस में टकराने (नॉक नीज़) नहीं चाहिए। आवेदन यदि 4000 से अधिक प्राप्त होते हैं, तो चयन 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों (मेरिट) के आधार पर किया जाएगा। अंक समान होने की स्थिति में अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रेनिंग के दौरान मिलेंगी कई सुविधाएं चयनित युवाओं को ट्रेनिंग के दौरान कई शानदार सुविधाएं निशुल्क दी जाएंगी। प्रशिक्षणार्थियों को 45 दिन के आवासीय प्रशिक्षण में नाश्ता, दोनों समय का भोजन और अध्ययन सामग्री विभाग की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण अवधि में जेब खर्च के लिए पुरुष अभ्यर्थियों को 1,000 रुपए प्रतिमाह और महिला अभ्यर्थियों को 1,100 रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाएगा। योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कुल 4000 सीटों में से 35 प्रतिशत सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। ट्रेनिंग प्रोग्राम को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाया गया है। इसमें युवाओं को हर दिन लगभग 4 घंटे सैद्धांतिक विषयों की तैयारी कराई जाएगी। इसके अलावा, सुबह और शाम मिलाकर प्रतिदिन 3 घंटे दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद और गोला फेंक जैसी शारीरिक ट्रेनिंग दी जाएगी। शुरुआत में यह ट्रेनिंग प्रदेश के 20 जिलों (भोपाल, रायसेन, इंदौर, खंडवा, उज्जैन, मंदसौर, सागर, टीकमगढ़, जबलपुर, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, गुना, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सतना, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना और भिंड) के 40 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इन केंद्रों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी।

अंधेरे से उजाले की ओर: कृष्णा और अनिता के जीवन में सुशासन ने जगाई नई उम्मीद

अंधेरे से उजाले की ओर- कृष्णा और अनिता के जीवन में सुशासन ने भरी उम्मीद की रोशनी रायपुर, जब हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो शारीरिक बाधाएं भी प्रगति का रास्ता नहीं रोक सकतीं। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम गोविंदपुर (सरगड़ी) में रहने वाले कृष्णा पहाड़ी कोरवा और उनकी पत्नी अनिता की कहानी आज सुशासन और संवेदनशीलता की जीवंत मिसाल बन चुकी है। विशेष पिछड़ी जनजाति से ताल्लुक रखने वाला यह दंपति दृष्टिबाधित है, लेकिन आज इनके चेहरे की मुस्कान सरकार की अंतिम व्यक्ति तक विकास की प्रतिबद्धता को बयां कर रही है। प्रधानमंत्री के हाथों मिली खुशियों की चाबी        कृष्णा और अनिता के परिवार के जीवन का सबसे ऐतिहासिक मोड़ राज्य स्थापना की रजत जयंती (2025) के अवसर पर आया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने हाथों से कृष्णा को प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्मित पक्के घर की चाबी सौंपी। यह मात्र एक कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि वर्षों के अभाव और असुरक्षा के बाद मिला वह सम्मान था, जिसकी इस दंपति ने कल्पना की थी। अपनी मेहनत और शासकीय अनुदान के मेल से इन्होंने न केवल घर बनाया, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षित बुनियाद भी रखी। मनरेगा- आत्मनिर्भरता की नई इबारत       पक्के घर के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन के लिए महात्मा गांधी नरेगा (डळछत्म्ळ।) इस परिवार का सबसे बड़ा संबल बना। दृष्टिबाधित होने के बावजूद कृष्णा और अनिता ने हार नहीं मानी। वे मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों को पानी पिलाने का कार्य करते हैं। वर्ष 2024-25 में 86 दिनों का रोजगार और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 14 दिनों का काम मिलने से उन्हें दैनिक जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। कृष्णा और अनिता के लिए सुशासन का अर्थ केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अवसर और भविष्य की एक नई किरण है। योजनाओं के सुरक्षा कवच और बदला जीवन        शासन की बहुआयामी योजनाओं ने इस परिवार के इर्द-गिर्द सुरक्षा का एक घेरा तैयार कर दिया है। अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन की उपलब्धता, आयुष्मान भारत कार्ड के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी मिली, जिससे इलाज की चिंता खत्म हुई और दिव्यांग पेंशन के माध्यम से निरंतर वित्तीय सहायता के साथ सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हुआ।          'अंधेरे से उजाले की ओर' कृष्णा और अनिता के जीवन में सुशासन  के सकारात्मक प्रभाव की एक प्रतीकात्मक कहानी है, जो दर्शाती है कि कैसे सरकारी योजनाएं, पारदर्शिता और जवाबदेही आम नागरिकों का जीवन बदल सकती हैं।