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भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तार: आष्टा और सोनकच्छ तक, छह जिलों के 2500 गांव होंगे शामिल

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ इलाका भी शामिल होगा, जो भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाला बड़ा जंक्शन बनेगा। रिपोर्ट अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी गई है। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा।  छह जिलों की 30 तहसीलें शामिल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें लिया गया है। इटारसी को इस एरिया में नहीं जोड़ा गया है। इसमें शामिल प्रमुख तहसीलें और इलाके में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, दोराहा, इछावर, जावर, रेहटी, सीहोर, श्यामपुर, गोहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर, ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचौर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया, गुलाबगंज, विदिशा, डोलरिया, होशंगाबाद, माखन नगर आदि शामिल हैं।  इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया भी बढ़ेगा इंदौर विकास प्राधिकरण ने पहले सर्वे में 39 शहरों और 1786 गांवों को मिलाकर 9989 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल बताया था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब इसमें और इलाके जोड़े जा रहे हैं। नया क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। यह फायदा होगा दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाएं अब मिलकर बनाई जाएंगी। शहरों को जोड़ने, सड़क-बिजली-नल-पानी जैसी सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण या विभागों के बीच तकरार जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। केंद्र सरकार बड़े शहरों के विकास के लिए अलग से पैकेज देगी। ट्रिलियन प्लस आबादी वाले शहरों को विशेष फंड मिलेगा। दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को भी 5-5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी। 6 माह में तैयार होगी रिपोर्ट  बीडीए ने सभी शामिल इलाकों की पूरी जानकारी मांगी है। कृषि, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, उद्योग, पर्यटन, जल संसाधन समेत कई विभागों से जनसंख्या, उद्योग, लोगों की आय और रोजगार संबंधी आंकड़े मांगे गए हैं। रिपोर्ट तैयार करने में 6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद विस्तृत प्लानिंग शुरू होगी। इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो जाएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

CM योगी का बयान: घबराहट में सिलेंडर-ईंधन न खरीदें, अफवाहों से बचें, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोग बेवजह घबराकर रसोई गैस और ईंधन के लिए लाइन में लग रहे हैं, जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले एक गैस सिलेंडर एक महीने तक चलता था, लेकिन अब लोग 5-6 दिन में ही नया सिलेंडर लेने पहुंच रहे हैं, जो सही नहीं है।  उन्होंने साफ किया कि सरकार ने प्रदेश में व्यवस्था बनाई है कि गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी पहले की तरह जारी रहेगी. जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि एजेंसियां लोगों के घर तक सिलेंडर पहुंचाएं, इसलिए लाइन लगाने की जरूरत नहीं है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और अव्यवस्था पैदा करना चाहते हैं. ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है और अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब जरूरत हो तभी पेट्रोल और डीजल लेने जाएं, अनावश्यक खरीदारी से स्थिति बिगड़ती है।  उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में, खासकर मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता का माहौल है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो इसका असर हर व्यक्ति पर पड़ सकता है, इसलिए लोगों को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती के समय सरकार के साथ मिलकर चलना ही सच्ची राष्ट्र भक्ति है और देशहित में लिए गए फैसलों का समर्थन करना चाहिए।  बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के टॉप लीडरशिप की मौत हो गई. इसके बाद बड़े स्तर पर पश्चिम एशिया में जंग छिड़ गई. ईरान ने होर्मुज के रास्ते को बंद कर दिया. नतीजतन दुनिया के कई मुल्कों में ऊर्जा संकट गहरा गया. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित एशिया के मुल्क हो रहे हैं।   

सरकार का नया नियम: CCTV कैमरे से हो रही थी जासूसी, डेटा पाकिस्तान तक पहुंच रहा था

नई दिल्ली भारत सरकार CCTV कैमरों को लेकर सख्त हो गई है.  देश में सीसीटीवी कैमरों को लेकर बड़ा खतरा सामने आया है. अब यह सिर्फ निगरानी का मामला नहीं रहा, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा बन गया है।  हाल ही में जांच एजेंसियों ने एक नेटवर्क पकड़ा है, जिसमें सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्ड डेटा पाकिस्तान भेजा जा रहा था. कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है. सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की है।  CCTV की सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. कंपनियों को अगाह कर दिया गया है कि जो मार्केट में सीसीटीव कैमरे बेचे जा रहे हैं उसमे स्टैंडर्ड फॉलो किए जाएं. सरकार ने ये भी कहा है कि सराकरी डिपार्टमेंट क्राटेरिया मैच ना करने वाली कंपनियों से सीसीटीवी नहीं खरीदें।  भारत में कमजोर है सीसीटीवी की सिक्योरिटी! यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पहले से ही विदेशी सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम पर सवाल उठते रहे हैं. खासकर चीनी डिवाइस को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इंटरनेट से जुड़े कैमरों को दूर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता है और डेटा बाहर भेजा जा सकता है।  अब सवाल ये है कि क्या भारत में लगे सीसीटीवी कैमरे सुरक्षित हैं. जवाब थोड़ा चिंता बढ़ाने वाला है. साइबर रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में हजारों सीसीटीवी कैमरे खुले इंटरनेट पर एक्सपोज्ड हैं और उनमें बेसिक सिक्योरिटी की कमी है. ऐसे कैमरे हैकिंग और डेटा लीक के लिए आसान टारगेट बन जाते हैं।  CERT-In और दूसरी साइबर एजेंसियों ने भी कई बार चेतावनी दी है कि IP कैमरों में सिक्योरिटी खामियां पाई जाती हैं. डिफॉल्ट पासवर्ड, कमजोर सॉफ्टवेयर और अपडेट की कमी सबसे बड़ी वजह है. ऐसे डिवाइस को इंटरनेट पर स्कैन करके हैक किया जा सकता है।  दूर से हैक हो सकते हैं कैमरे एजेंसियों का कहना है कि हैकर्स इन कैमरों को बॉटनेट में बदल सकते हैं. यानी हजारों कैमरे एक साथ कंट्रोल किए जा सकते हैं. Cyber Swachhta Kendra के तहत भी ऐसे खतरों को लेकर अलर्ट जारी किया जाता है।  इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. PIB की प्रेस रिलीज में सीसीटीवी को लेकर बड़े फैसले बताए गए हैं. सरकार ने कहा है कि अब सीसीटीवी के लिए सख्त सिक्योरिटी नियम लागू होंगे. हर डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी जानकारी देनी होगी।  इसमें चिप, फर्मवेयर और सोर्स तक की डिटेल शामिल होगी. ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई संदिग्ध सोर्स तो नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी कैमरे में बैकडोर नहीं होना चाहिए. यानी ऐसा कोई रास्ता नहीं होना चाहिए जिससे डेटा बाहर भेजा जा सके।  सीसीटीवी खरीदने से पहले जरूर देखें सर्टिफिकेशन हर सीसीटीवी कैमरे को सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा. यह टेस्टिंग सिर्फ सरकारी मान्यता प्राप्त लैब में होगी. बिना टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के कोई भी कैमरा भारत में नहीं बिक सकेगा।  सरकारी विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं. वे सिर्फ उन्हीं कैमरों को खरीदेंगे जो इन नियमों को फॉलो करते हैं. साथ ही सभी मंत्रालयों को अपने CCTV सिस्टम की सिक्योरिटी जांचने के निर्देश दिए गए हैं।  चीनी सीसीटीवी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर बेचती हैं कई भारतीय कंपनियां चिंता वाली बात ये है कि देश में करोड़ों सीसीटीवी कैमरे पब्लिक प्लेस पर लगे हैं. सीसीटीवी की सिक्योरिटी पर काफी समय से उतना ध्यान नहीं दिया गया. हैकर्स या क्रिमिनल्स समय समय पर सीसीटीवी हैक करके सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं. भले ही सरकार ने नए खरीद पर सख्ती लगाई है, लेकिन उन पुराने कैमरों का क्या?  दरअसल सीसीटीवी की सिक्योरिटी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनें पर टिकी होती है. कंपनियां आम तौर पर चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग करके भारत में बेचती हैं. उनके पास अपना सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन तक नहीं होता है. इसके लिए भी वो चीनी सॉफ्टवेयर पर भरोसा करती हैं. ऐसे में बैकडोर एंट्री यानी हैकिंग के चासेस बढ़ जाते हैं।  भारत में सीसीटीवी कैमरे बेचने वाली कंपनियों पर सरकार को शिकंजा कसना होगा. खास तौर पर ऐसी कंपनियां जो चीन से कैमरा इंपोर्ट करके अपनी ब्रांडिंग के साथ बेचते हैं और सॉफ्टवेयर तक अपना नहीं बनाते हैं. इस तरह के चीनी कैमरे सस्ते मिलते हैं और सर्विस कॉस्ट भी कम होती है. इसलिए ये बाजार में सबसे सस्ते और ज्यादा एवेलेबल होते हैं।  दिलचस्प ये है कि कई भारतीय ब्रांड चीनी कैमरों पर अपना स्टिकर लगा कर, सॉफ्टवेयर या फर्मवेयर में थोडे़ बदलाव करके ऑनलाइन-ऑफलान धड़ल्ले से बेच रही हैं. सोचिए आप घर के अंदर इन कैमरों को लगाते हैं और वो फुटेज चीनी हैकर्स को मिल रहा हो? CP Plus ने क्या कहा? इस बीच इंडस्ट्री ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया है. CP PLUS के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य खेमका ने कहा, 'भारत ने सीसीटीवी सिक्योरिटी के लिए सख्त नियम लागू करके बड़ा कदम उठाया है. जब कई देश अभी भी कमजोरियों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने लीडरशिप दिखाई है' हमारे हिसाब से यह बहुत अहम कदम है. हार्डवेयर की पूरी जानकारी, सिक्योरिटी टेस्टिंग और सरकारी जांच जैसे नियम CCTV सिस्टम को डिजाइन से ही सुरक्षित बनाएंगे. इससे आम लोगों और संस्थानों का भरोसा भी बढ़ेगा।  एक जैसी राष्ट्रीय पॉलिसी से पूरा सिस्टम स्टैंडर्ड बनेगा. हर कैमरा एक ही नियम पर चलेगा. इससे कमजोर कड़ी खत्म होगी और साइबर खतरे कम होंगे. इंडस्ट्री भी इसके लिए तैयार है. सैकड़ों सर्टिफाइड मॉडल पहले ही बाजार में आ चुके हैं।  अब जब AI, IoT और क्लाउड के साथ सर्विलांस आगे बढ़ रहा है, तो सिक्योरिटी सबसे जरूरी है. यह कदम भारत को ग्लोबल लेवल पर मजबूत बनाएगा और सुरक्षित सर्विलांस का भविष्य तय करेगा। 

भोपाल में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों में तेजी, सात दिनों में 4,399 रजिस्ट्रियां, 96.61 करोड़ रुपये का कारोबार

भोपाल  जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 740 स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि होना लगभग तय है। इसका प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति ने केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया है, जिस पर गुरुवार को बैठक भी आयोजित की गई है। ऐसे में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि का असर प्रॉपर्टी के कारोबार में दिखाई देने लगा है। नवरात्र के शुभ मुहूर्त और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यालयों में जमकर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। जानकारी के अनुसार आईएसबीटी, परी बाजार और बैरसिया में स्थित पंजीयन कार्यालयों में सुबह 10 से देर रात तक दस्तावेज रजिस्टर्ड करने का काम तेजी से किया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुए नवरात्र के साथ अब तक सात दिन में करीब चार हजार 399 रिकॉर्ड रजिस्ट्रियां हुई हैं, जिनसे लगभग 96.61 करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है। कार्यालयों में बुधवार को भी बड़ी संख्या में लोग जमीन, मकान, प्लॉट और रीसेल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ काम रात करीब आठ बजे तक चलता रहा, इस दौरान एक दिन में रिकॉर्ड 820 रजिस्ट्रियों के साथ 19.23 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रॉपर्टी के खरीदारों की संख्या बढ़ते देख विभाग ने कार्यालय का समय बढ़ाते हुए सात बजे कर दिया है और प्रति सब रजिस्ट्रार को 65 स्लॉट कर दिए हैं। ऐसे में अब एक दिन में 13 सब रजिस्ट्रार 800 रजिस्ट्रियां कर सकेंगे। 31 मार्च तक जारी रहेगा रजिस्ट्रियों का सिलसिला वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास पहुंच चुका है। बोर्ड प्रस्ताव को पास कर देता है तो जिले के 740 स्थानों पर औसत 12 प्रतिशत वृद्धि होगी। वहीं अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पर 30 प्रतिशत से लेकर 150 प्रतिशत तक प्रापर्टी की दरें बढ़ जाएंगी। ऐसे में वर्तमान दरों पर रजिस्ट्री करवाने के लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रियों का सिलसिला जारी रहेगा। सात दिन में हुईं रजिस्ट्रियां और राजस्व दिन रजिस्ट्री राजस्व गुरुवार65307 शुक्रवार5925.54 शनिवार3172.50 रविवार377 09 सोमवार58541 मंगलवार 67812.40 बुधवार82019.23 कुल 4,39996.61 (नोट- राशि करोड़ों रुपये में) संपदा टू सॉफ्टवेयर से मिल रही रफ्तार वरिष्ठ जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा ने बताया कि संपदा टू सॉफ्टवेयर बेहतर तरीके से काम कर रहा है। सब रजिस्ट्रार तय समय पर लोगों की रजिस्ट्रियां कर रहे हैं, ऐसे में प्रति आधा घंटे में एक दर्जन रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। इसके जरिए लोग आसानी से स्लॉट भी बुक कर पा रहे हैं।

एमपी में 7 दिन में व्हाट्सएप पर बर्थ सर्टिफिकेट, नया डिजिटल मॉडल होगा फायदेमंद

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार अब आम लोगों को बड़ी सुविधा देने जा रही है। बचपन से लेकर स्कूल, नौकरी और सरकारी कार्यों तक के लिए जरूरी माना जाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है जन्म प्रमाण पत्र। जिसे लेने के लिए बच्चों के माता पिता या अन्य परिजनों को कई बार लगातार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। यहां तक कि लंबी लाइन में इंतजार भी करना होता है। लेकिन अब इस पूरी झंझट को खत्म करने और इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार यह नई सुविधा करने जा रही है। इसके तहत अब 7 दिन में आपके व्हाट्सएप (Whatsapp) मोबाइल नंबर पर बच्चे का जन्मप्रमाण पत्र (Birth Certificate) आ जाएगा। प्रदेश भर में लागू होगा नया डिजिटल मॉडल यह नया डिजिटल मॉडल (MP New Digital Model) प्रदेश भर में लागू करने की तैयारी है। मॉडल लागू होते ही करोड़ों परिवार इसका लाभ ले सकेंगे। इन्हें घर बैठे ही अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र मिल जाएगा। वह भी केवल 7 दिन में बता दें कि वर्तमान में यह सुविधा (Whatsapp) केवल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ही चल रही है। वहां इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अब सरकार ने इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने का फैसला लिया है। क्या होंगे फायदे? -जन्म प्रमाण पत्र बनाने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। -परिजनों को अस्पताल जाकर बार-बार फॉलो-अप करने या लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पडे़गी। -जन्म के 7 दिन के अंदर प्रमाण पत्र वॉट्सएप पर ही उपलब्ध हो जाएगा। -यह प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी। सबसे ज्यादा राहत इन्हें इस नये डिजिटल मॉडल की पहल (Birth Certificate on whatsapp) से खासकर नवजात शिशु के माता-पिता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। क्यों कि अभी तक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन्हें कई बार अस्पताल जाना पड़ता था और प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। नया मॉडल इस परेशानी को पूरी तरह खत्म कर देगा। डिजिटल इंडिया की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया में एक और महत्वपूर्ण प्रयास है। नया मॉडल लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया और अधिक सुगम और आसान हो जाएगी।

बड़े तालाब में अतिक्रमण का खुलासा, 300 से ज्यादा बंगलों और होटलों पर लाल निशान, कार्रवाई जल्द

 भोपाल  शहर की लाइफ लाइन बड़े तालाब की सीमाओं को चिह्नित करने के लिए पिछले महीने सीमांकन की कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके तहत संत हिरदाराम नगर और टीटीनगर वृत्त के राजस्व अमले ने सीमांकन करते हुए एफटीएल से 50 मीटर दायरे में कोठी, बंगले, फार्म हाउस, होटल सहित 300 से अधिक निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन सभी पर राजस्व अमले ने लाल निशान लगाकर निर्माणकर्ताओं को नोटिस देकर दस्तावेज पेश करने का समय तक दिया था। इसको लेकर तहसीलदारों ने अतिक्रमणों की रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही एसडीएम द्वारा कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ही इन पर बुलडोजर चलाने का फैसला लिया जाएगा। सोमवार को हुई समय सीमा बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बड़े तालाब की सीमा में हुए अतिक्रमणों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। जानकारी के अनुसार, संत हिरदराम नगर वृत्त के राजस्व अमले ने टीएंडसीपी, नगर निगम व वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में 25 फरवरी से वीआईपी रोड पर सीमांकन शुरू करवाया था। इस दौरान वीआइपी रोड पर शासकीय बंगला, निजी इमारत, कोचिंग सेंटर, खानूगांव में मैरिज गार्डन, लान, झुग्गी, आर्मी का खेल परिसर, डेयरी, हलालपुर में मैरिज गार्डन, स्टील फैक्ट्री, बोरवन, बेहटा सहित अन्य में करीब 150 झुग्गियां 50 मीटर दायरे में चिह्नित की गई थी। इसी तरह टीटीनगर वृत्त के राजस्व अमले ने प्रेमपुरा, सूरज नगर, गौरा, सेवनियां गौड़, बिशनखेड़ी सहित अन्य क्षेत्र में बड़े तालाब की सीमाओं को चिह्नित करने सीमांकन कराया गया था। इस दौरान आलीशान कोठी, बंगले, फार्म हाउस, होटल, रेस्टोरेंट सहित 100 से अधिक निर्माण मिले थे। दोनों ही वृत्त के तहसीलदारों ने चिह्नित निर्माण के आधार पर नाम सहित रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें निजी व शासकीय दोनों ही भूमि 50 मीटर दायरे में स्थित हैं। अब दस्तावेज के आधार पर किया जाएगा फैसला तहसीलदारों ने दोनों वृत्त की रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को सौंप दी है, अब जल्द ही कलेक्टर के साथ होने वाली बैठक में वह रिपोर्ट पेश करेंगे। सभी निर्माणकर्ताओं को दस्तावेज पेश करने का समय दिया था, लेकिन अधिकांश ने अनुमति संबंधी दस्तावेज नहीं दिए हैं। ऐसे में जल्द ही जिला प्रशासन, नगर निगम के साथ मिलकर अतिक्रमणों को तोड़ने की बड़ी कार्रवाई कर सकता है।     बड़े तालाब के एफटीएल से 50 मीटर दायरे में सीमांकन की कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है। राजस्व अमले ने अतिक्रमण चिह्नित किए हैं, जिनके निर्माण हैं उन्हें दस्तावेज पेश करने का समय दिया गया था। अब जल्द ही अतिक्रमण हटाने और तालाब को संरक्षित करने की कार्रवाई की जाएगी। कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे बनेगा कोटा-इटावा के बीच, NHAI 3 जिलों की जमीन लेकर देगा दो गुना पैसा

 भोपाल  कोटा से इटावा के बीच 404 कि.मी लंबे अटल प्रोग्रेस-वे अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाने की योजना है। राज्य शासन से संकेत मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित 90 गांवों की पूर्व में चिह्नित की गई जमीन का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांव भी इसमें शामिल हैं, जिनके सत्यापन होना है। तीन साल पहले चिन्हित की गई जमीनों का दोबारा सत्यापन कराने के पीछे कारण ये है कि, इस गैप के दौरान किसानों ने अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीनों को कहीं बेच तो नहीं दिया। सत्यापन के बाद जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों के नाम उनके गांव और रकबा प्रकाशित किया जाएगा। दावे-आपत्ति पूरी होते ही खातों ट्रांसफर होगा पैसा दावे-आपत्ति के बाद किसानों के बैंक खातों में उनसे ली गई जमीन का पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट 90 गांव से होकर गुजरेगा। इसमें सबलगढ़ के 11 गांव, जौरा के 29 गांव, मुरैना के 15 गांव, अंबाह के 10 गांव, पोरसा के 25 गांव की जमीन शामिल हैं। नए रूट अलाइनमेंट के विरोध के बाद रोकी गई थी कार्रवाई 6 साल पहले 2020 में जब इस प्रोजेक्ट का सर्वे किया गया तो किसानों की जमीन का अधिग्रहण किए जाने के लिए उनकी सूची तैयार की गई थी। भूमि अधिग्रहण होता उससे पहले केंद्र सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट अलाइनमेंट चेंड कर दिया। लेकिन, नए रूट अलाइनमेंट के बाद किसानों में असंतोष दिखने लगा, क्योंकि नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की ज्यादा जमीनें जा रही थी। इस दौरान सबलगढ़ से पोरसा के बीच किसानों में कड़ा विरोध भी देखने को मिला, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई अप्रैल 2023 में तत्काल प्रभाव से रुकवा दी। 3 साल बाद धरातल पर आया प्रोजेक्ट इसके बाद 3 साल ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन अब एक बार फिर ये धरातल पर आया है। केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 हजार 645 करोड़ रुपए लागत के अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा मिलेगा इसमें अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण किसानों को उनकी जमीन लेने के बदले कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा। पुराने रूट अलाइनमेंट में कम जाएगी किसानों की जमीन अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराए जाने की दशा में 90 गांव के 2089 किसानों की महज 488.01 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बची वहीं, अगर नए रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण होता तो 96 गांव के 14137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जाती। अंतर साफ स्पष्ट है कि पुराने रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे बनाने से 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही है, जो आजीवन उनकी केती के इस्तेमाल में आती रहेगी। फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर मप्र किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा देने के आदेश मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से करने चाहिए। किसान दो गुना मुआवजा में तो अपनी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए कतई नहीं देंगे। आंदोलन पहले भी हुआ था और अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान। मध्य प्रदेश में एंट्री श्योपुर से होगी कोटा से 78 किलोमीटर दूरी के बाद प्रोग्रेस-वे की श्योपुर से प्रदेश में एंट्री होगी। श्योपुर के 48 गांव से ये हाइवे गुजरेगा। यहां के छीताखेड़ी, जालेरा, जुवाड़, सिरसोद, जैनी समेत 26 गांव ऐसे हैं, जो कि बीहड़ क्षेत्र में मौजूद हैं या उससे बिल्कुल सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अच्छे पहुंच मार्ग भी अभी नहीं हैं। 43 गांव चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं श्योपुर के बाद मुरैना के सबलगढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा से होते हुए 90 गांव से ये हाईवे जुड़ेगा। जिनमें 43 गांव ऐसे हैं जो कि चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं या उसमें ही मौजूद हैं। यहां गढुला, बंथर, अटार, गरजा, डंडोली, गूंज, रछेड़, धोर्रा समेत अन्य गांव बीहड़ के कारण विकास की मुख्य धारा से आज भी पिछड़े हुए हैं। पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा मुरैना के पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा। यहां के 25 गांव से होते हुए इसे उप्र के इटावा से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में प्रोग्रेस वे भिंड शहर से सटे बरही और रानीपुरा गांव से गुजरेगा। इसके बाद अटेर क्षेत्र के 23 गांव से प्रोग्रेस-वे गुजरना है। भिंड के 13 गांव ऐसे हैं जो बीहड़ में मौजूद हैं या उससे सटे हुए। 3 राज्यों को कवर कर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से मिलेगा अटल प्रोग्रेस-वे अटल प्रोग्रेस-वे को राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक ले जाया जाएगा। 404 किलोमीटर लंबा ये प्रोग्रेस वे राजस्थान में कोटा के सीमाल्या गांव से शुरू होगा और फिर श्योपुर, मुरैना से भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा। वहां इटावा के ननवा गांव से प्रोग्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। पूरे मार्ग में करीब 150 गांव प्रोग्रेस-वे से कवर होंगे और इमनें से 85 गांव ऐसे हैं जो चंबल के बीहड़ कहलाते हैं या उन बीहड़ों से सटे हैं।

क्या नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने वाले हैं? ताबड़तोड़ परियोजनाओं के उद्घाटन के बीच खरमास का इंतजार

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने  केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।   नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?  नीतीश कुमार 21 साल बाद दिल्ली करेंगे कूच नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे।   नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।  नीतीश कुमार कब देंगे सीएम पद से इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा।  प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है।  नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।   नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था. इसीलिए कहा जा रहा है कि नीतीश 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं, तो संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं बन पाएंगे. इसलिए उनका एमएलसी पद से इस्तीफा की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक गजट ही जारी नहीं हुआ है तो वो एक साथ दोनों पद पर बने हुए हैं।  खरमास के बाद क्या छोड़ें सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की पीछे कहीं खरमास वजह तो नहीं है, जिसके चलते वो किसी नए सफर की तरफ अपने कदम नहीं बढ़ा रहे. खरमास का महीना 13 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इसके बाद 14 अप्रैल की सुबह से सभी मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे. बीजेपी नया और शुभ काम खरमास के महीने में नहीं करती है. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी को फौरन अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना है, जिसके चलते ही खरमास खत्म होने का इतंजार किया जा रहा है।  बिहार के पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए हैं और नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं. इसके चलते ही माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से खरमास खत्म होने के साथ ही इस्तीफा दे देंगे ताकि दूसरे दिन बीजेपी बिहार में सरकार गठन कर लगे।  बिहार में सरकार गठन का क्या होगा फॉर्मूला नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है तो पहली बार होगा जब बीजेपी का अपना सीएम होगा. बीजेपी से कई नेताओं के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगी है. सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक के नाम चर्चा में है. देखना है कि बीजेपी किसे सीएम बनाती है।  बिहार में बीजेपी का सीएम बनता है तो फिर जेडीयू से बिहार में डिप्टी सीएम पद मिलेगा. सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी के किसी सीनियर लीडर को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. बीजेपी से 15 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

1 अप्रैल से देश में होंगे 5 बड़े बदलाव: LPG, ATM, PAN और अन्य, हर नागरिक पर होगा प्रभाव

नई दिल्ली नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों और टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे। PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी। HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है। क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा। अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा। कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा। नया आयकर अधिनियम 2025 लागू 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। क्या है इसका सीधा असर? इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

पिछलग्गू BJP ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कैसे बनाई चुनौती, जानें उनकी रणनीति

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच दो-तरफा मुकाबला देखा जा रहा है. 2021 के चुनाव के बाद राज्य में इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच सीधी टक्कर दिख रही है. लंबे समय तक पश्चिम बंगाल में राज करने वाले वामदल और कांग्रेस की ताकत जहां लगातार सिमटती जा रही है, वहीं उस खाली हुए स्पेस को बीजेपी भरती दिख रही है. कभी टीएमसी के साथ गठबंधन में सहयोगी रही बीजेपी मौजूदा वक्त में उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बन चुकी है।  पिछले कुछ सालों में, भारतीय जनता पार्टी साइडलाइन से हटकर पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरी है. बीजेपी ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को चुनौती देने की सबसे मज़बूत उम्मीद बन चुकी है. 2016 में सिर्फ़ तीन विधानसभा सीटें जीतने से लेकर 2021 के चुनाव में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष के तौर पर उभरने तक, BJP ने राज्य में काफ़ी बढ़त बनाई है. बंगाली बोलने वाले राज्य में नेशनल पार्टी की बढ़त लोगों को अचंभित कर रही है।  बंगाल में लगातार बढ़ रहा बीजेपी का वोट शेयर 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के एक भी उम्मीदवार नहीं जीते थे. उस चुनाव में पूरे राज्य में केवल चार फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी ने 18 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. 2016 में, उसे लगभग 10 फीसदी वोट के साथ तीन विधानसभा सीटें मिली थीं. 2021 में 77 सीटों और 38 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर तक पहुंची. इसके साथ ही बीजेपी ने दिखा दिया कि वह बंगाल जैसे राज्य में भी मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकती है. बेहद कुछ सालों में ही बीजेपी ने लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस की जगह ले ली, जो दशकों से बंगाल की राजनीति पर हावी थे. इस तरह बीजेपी राज्य की मुख्य विपक्षी ताकत बन गई।  2021 में, BJP के लिए एक अहम पल तब आया जब नंदीग्राम में मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी की जीत हुई. सुवेंदु, जो कभी ममता के करीबी थे, 1,956 वोटों के बहुत कम अंतर से जीते. यह मुकाबला एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बदल गया था जब CM ने खुद अधिकारी को उनके घरेलू मैदान पर चुनौती देने का फैसला किया, जिससे यह नतीजा पार्टी के लिए एक सिंबॉलिक जीत बन गया।  उत्तर बंगाल के जरिए बीजेपी ने मजबूत की पकड़ BJP की बढ़त ज़्यादातर स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में केंद्रित रही है. उत्तर बंगाल, जिसमें दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और मालदा और दिनाजपुर के कुछ हिस्से में 54 विधानसभा क्षेत्र हैं, पार्टी का गढ़ बन गया है. दार्जिलिंग हिल्स में, BJP ने दार्जिलिंग, कुर्सेओंग और माटीगारा-नक्सलबाड़ी जैसी सीटों पर दबदबा बनाया, जिससे उसे गोरखा समुदाय का समर्थन मिला. डुआर्स और तराई बेल्ट – जिसमें जलपाईगुड़ी, राजगंज, डाबग्राम-फूलबाड़ी, माल, अलीपुरद्वार और कुमारग्राम शामिल हैं- में आदिवासी और राजबंशी वोटरों का दबदबा है, जबकि सिलीगुड़ी जैसे शहरी केंद्र भी BJP की तरफ झुके हुए हैं।  2021 में, BJP ने अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसने कूचबिहार की नौ में से सात सीटें जीतीं. जलपाईगुड़ी में, BJP ने सात में से चार सीटें और हिल्स की छह में से पांच सीटें जीतीं, जिसमें सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग टाउन शामिल हैं, जबकि कलिम्पोंग एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।  2019 के लोकसभा चुनावों ने न केवल बीजेपी को केंद्र में अब तक का सबसे बड़ा जनादेश दिया, बल्कि राज्य में पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया. बीजेपी ने 18 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं, जो टीएमसी की 22 सीटों से पीछे थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ 2 सीटें ही जीत पाई. 2019 के लोकसभा चुनावों में भी BJP ने नॉर्थ बंगाल की 8 में से 7 पार्लियामेंट्री सीटें जीतीं. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में, BJP ने 12 सीटें जीतीं, जबकि TMC ने 29 सीटों के साथ दबदबा बनाया।  BJP की बढ़ती पकड़ के पीछे की रणनीति क्या है?       राज्य में BJP की बढ़त कई वजहों से हो सकती है. 2014 से, पार्टी ने RSS के सपोर्ट वाले एक मज़बूत ज़मीनी नेटवर्क के ज़रिए अपनी ऑर्गनाइज़ेशनल पहुंच को मज़बूत किया है. इसने पहचान की राजनीति का कामयाबी से फ़ायदा उठाया, राजबंशी, आदिवासी और शहरी समुदायों के बीच हिंदू वोटों को मज़बूत किया, साथ ही तृणमूल के ख़िलाफ़ क्षेत्रीय शिकायतों को भी सामने लाया।      पिछले कुछ सालों में टीएमसी और कांग्रेस के कई बड़े नेता भी बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे बंगाल में पार्टी की लीडरशिप का दबदबा बढ़ा.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दूसरे सीनियर नेताओं के बार-बार दौरों से भी पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की उपलब्धता बढ़ी, जिससे क्रेडिबिलिटी और वोटर अपील बढ़ी।      साथ ही, तृणमूल की कमज़ोरियों, जिसमें कथित कुशासन और एंटी-इनकंबेंसी भावना शामिल है. खासकर नॉर्थ बंगाल में BJP को पूरे राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका दिया।