samacharsecretary.com

श्रीकृष्ण ने पांडवों को क्यों भेजा था वन? कलियुग से जुड़ी 5 रहस्यमयी घटनाओं का क्या है राज

महाभारत केवल हिंदू धर्म का ही नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के लिए ज्ञान और जीवन दर्शन का एक महान ग्रंथ माना जाता है. इसमें जीवन से जुड़े लगभग हर विषय का वर्णन मिलता है. धर्म, न्याय, राजनीति, समाज, परिवार, युद्ध, ज्ञान और अध्यात्म जैसे अनेक विषयों पर महाभारत हमें सोचने और सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देता है. आज हम आपको महाभारत और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा एक ऐसा रोचक प्रसंग बताने जा रहे हैं, जिससे आज का मनुष्य भी बहुत कुछ सीख सकता है. इस कथा में पांचों पांडव वन में अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं और वहां उन्हें कुछ ऐसी विचित्र घटनाएं दिखाई देती हैं, जिनका अर्थ वे समझ नहीं पाते. बाद में भगवान श्रीकृष्ण इन घटनाओं का अर्थ बताते हैं और उन्हें कलयुग से जोड़कर समझाते हैं. तो आइए जानते हैं यह रोचक पौराणिक प्रसंग. श्रीकृष्ण ने पांडवों को वन में क्या देखने के लिए कहा? कथा के अनुसार, एक बार पांचों पांडव भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे. उन्होंने श्रीकृष्ण से कलयुग के बारे में जानने की इच्छा जताई. पांडवों ने पूछा कि आने वाले समय में संसार की स्थिति कैसी होगी और मनुष्यों का स्वभाव कैसा हो जाएगा. भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सीधे उत्तर देने के बजाय कहा कि वे पांचों अलग-अलग दिशाओं में वन में जाएं. वहां जो कुछ भी विचित्र दिखाई दे, उसे ध्यान से देखें और वापस आकर उन्हें बताएं. श्रीकृष्ण ने कहा कि वे उन घटनाओं का अर्थ समझाएंगे. भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांचों पांडव अलग-अलग दिशाओं में वन की ओर निकल पड़े. युधिष्ठिर ने देखा दो सूंड वाला हाथी सबसे पहले युधिष्ठिर वन में भ्रमण कर रहे थे. तभी उन्होंने एक बेहद विचित्र हाथी देखा. उस हाथी की दो सूंड थीं. यह दृश्य देखकर युधिष्ठिर आश्चर्यचकित रह गए. जब सभी पांडव वापस आए और उन्होंने श्रीकृष्ण को यह बात बताई तो श्रीकृष्ण ने इसका अर्थ समझाया. कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ेगी, जिनके मन में कुछ और होगा और उनके कर्म कुछ और होंगे. वे सामने से कुछ और कहेंगे, लेकिन भीतर से उनका उद्देश्य अलग होगा. ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का शोषण करने से भी पीछे नहीं हटेंगे. इस प्रसंग का संदेश यह है कि मनुष्य को केवल किसी के शब्दों पर नहीं, बल्कि उसके कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए. अर्जुन ने देखा वेद लिखे पंखों वाला पक्षी अर्जुन जब वन में भ्रमण कर रहे थे तो उन्होंने एक और आश्चर्यजनक दृश्य देखा. उन्होंने एक ऐसे पक्षी को देखा, जिसके पंखों पर वेदों जैसी पवित्र रचनाएं अंकित थीं, लेकिन वह पक्षी एक मृत शरीर का मांस खा रहा था. अर्जुन यह दृश्य देखकर हैरान रह गए. जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में कुछ लोग ज्ञान और धर्म की बड़ी-बड़ी बातें करेंगे, लेकिन उनका आचरण उनके शब्दों के विपरीत होगा. वे बाहर से विद्वान, धार्मिक और ज्ञानी दिखाई देंगे, लेकिन उनका मन धन, पद और स्वार्थ में लगा रहेगा. ऐसे लोगों के लिए धर्म और ज्ञान केवल दिखावा बनकर रह जाएगा. इस प्रसंग का संदेश है कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकों को पढ़ने से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण से दिखाई देता है. भीम ने देखा गाय अपने बछड़े को घायल कर रही है भीम वन में घूम रहे थे. उन्होंने देखा कि एक गाय ने बछड़े को जन्म दिया है. जन्म के बाद वह अपने बछड़े को अत्यधिक प्रेम से चाट रही है, लेकिन वह उसे इतना चाट रही है कि बछड़ा घायल होकर लहूलुहान हो गया. यह देखकर भीम भी आश्चर्यचकित रह गए. जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने बताया कि कलयुग में माता-पिता का अपने बच्चों के प्रति मोह कई बार इतना बढ़ जाएगा कि वे बच्चों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का अवसर ही नहीं देंगे. अत्यधिक प्रेम और मोह भी कई बार व्यक्ति के विकास में बाधा बन सकता है. माता-पिता का कर्तव्य केवल बच्चों को अपने पास बांधकर रखना नहीं, बल्कि उन्हें सही संस्कार देकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार करना भी है. इस प्रसंग का संदेश है कि प्रेम के साथ-साथ सही दिशा और स्वतंत्रता भी जरूरी है. सहदेव ने देखा सात कुओं के बीच एक खाली कुआं सहदेव वन में भ्रमण कर रहे थे. उन्होंने देखा कि आसपास के कई कुएं पानी से भरे हुए हैं, लेकिन उनके बीच स्थित एक गहरा कुआं पूरी तरह सूखा पड़ा है. यह दृश्य देखकर सहदेव हैरान रह गए. उन्होंने वापस जाकर भगवान श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा. कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में मनुष्य के पास धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी. लोग विवाह, उत्सव और अन्य आयोजनों में बड़ी मात्रा में धन खर्च करेंगे, लेकिन उनके आसपास कोई व्यक्ति भूखा या जरूरतमंद होगा तो कई लोग उसकी सहायता करने से पीछे हट जाएंगे. एक ओर ऐशो-आराम और भोग-विलास होगा, जबकि दूसरी ओर कई लोग मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे होंगे. इस प्रसंग का संदेश है कि मनुष्य को अपनी समृद्धि के साथ समाज और जरूरतमंद लोगों की भी चिंता करनी चाहिए. नकुल ने देखा विशाल चट्टान को एक छोटे पौधे ने रोक दिया नकुल वन में भ्रमण कर रहे थे. उन्होंने देखा कि पहाड़ से एक विशाल चट्टान तेजी से नीचे की ओर लुढ़क रही है. रास्ते में बड़े-बड़े वृक्ष आए, लेकिन वे उस चट्टान को रोक नहीं सके. कई बाधाओं को पार करती हुई वह चट्टान लगातार आगे बढ़ती रही. लेकिन जब वह एक छोटे से पौधे के पास पहुंची तो वह वहीं रुक गई. नकुल यह देखकर अत्यंत आश्चर्यचकित रह गए. जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इस घटना का अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने कहा कि कलयुग में मनुष्य का जीवन मोह, धन, अहंकार और सांसारिक इच्छाओं के प्रभाव में तेजी से नीचे की ओर जा सकता है. बड़ी-बड़ी शक्तियां और सांसारिक उपलब्धियां भी कई बार मनुष्य को सही मार्ग पर नहीं रोक पातीं. लेकिन ईश्वर की भक्ति, अच्छे कर्म और आध्यात्मिक चेतना जीवन की दिशा बदल सकती है. इस कथा का संदेश है कि मनुष्य … Read more

Bigg Boss 20: मनोज तिवारी की बेटी रीति की हुई एंट्री, सलमान ने दिलाई पापा की पुरानी ‘अंडे वाली’ लड़ाई याद

इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं. 6 सितंबर को टेलीविजन पर बिग बॉस के नए सीजन का आगाज होने वाला है. फैन्स सलमान खान के शो को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं. चर्चा थी कि शो में मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी शो में हिस्सा लेने वाली हैं. अब शो के प्रोमो से ये कंफर्म हो गया है. प्रोमो में मनोज तिवारी अपने बेटी को सपोर्ट करने शो पर पहुंचे, जहां सलमान खान ने उनकी जमकर खिंचाई की.    सलमान ने लिए मजे बिग बॉस 20 के प्रोमो ने फैन्स का ध्यान खींचा है. वीडियो में मनोज तिवारी अपना फेमस रिंकिया के पापा गाना स्टेज पर एंट्री लेते हैं. शो के होस्ट सलमान खान हंसकर उनका वेलकम करते हैं. सलमान उनसे कहते हैं कि ऐसा तो नहीं कि हमने ताथस्तु बोला और आपने सोचा कि बिग बॉस में 2-2 बार आ सकते हैं. मनोज तिवारी कहते हैं कि अपनी बेटी को आज बिग बॉस के दरवाजे छोड़ने आया हूं. मनोज तिवारी की बेटी रीति सिंगिंग करते हुए स्टेज पर आती हैं. सलमान उनसे कहते हैं कि घर में अंडे को लेकर कभी फाइट मत करना. बाप पर मत जाना. ये सुनकर मनोज तिवारी शरमा जाते हैं. बता दें कि मनोज तिवारी बिग बॉस के चौथे सीजन में कंटेस्टेंट बनकर आए थे. इस सीजन में डॉली बिंद्रा भी थीं. दोनों के बीच अंडे को लेकर लड़ाई हुई थी. मनोज तिवारी और डॉली बिंद्रा की ये फाइट शो के आइकॉनिक किस्सों में गिनी जाती है. चौथे सीजन की विनर श्वेता तिवारी थीं. क्या करती हैं रीति? रीति तिवारी, मनोज तिवारी और उनकी पहली पत्नी रानी तिवारी (प्रतीमा पांडे) की बेटी हैं. 23 जून 2001 को जन्मी रीति इस समय 25 साल की हैं और उन्होंने फिल्मी दुनिया से परे अपनी अलग पहचान बनाई है. रीति 'रीति स्पोर्ट्स' की डायरेक्टर हैं और साथ ही 'जूनी कंपनी' नाम की जूलरी फर्म की को-फाउंडर भी हैं. वह एक सिंगर, सॉन्गराइटर, कंपोजर और प्रोड्यूसर भी हैं. मनोज तिवारी ने बेटी रीति के लिए अपना पूरा सपोर्ट जताया है. हालांकि, उनकी पहली पत्नी रानी तिवारी से उनका रिश्ता टूट चुका है, लेकिन बेटी के लिए वे आज भी खड़े हैं. रीति तिवारी का शो में आना टीआरपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. उनके पिता की राजनीतिक छवि शो में नया ड्रामा और चर्चा पैदा कर सकती है. सलमान खान की वॉर्निंग के बाद अब देखना दिलचस्प होगा कि रीति शो में कैसे खेलती हैं और क्या वे अपने दम पर दर्शकों का दिल जीत पाती हैं.

फैजल को जीप से बांधकर पीटा, गुजरात पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल; जानें पूरा मामला

भावनगर पुलिस की जीप से बंधा एक शख्स, पीछे से उस पर ताबड़तोड़ बरसाता एक जवान… सोशल मीडिया पर तैर रही इस वीडियो को देखते ही हर किसी के जेहन में एक ही सवाल उठता है, अरे ऐसी पिटाई क्यों? इसी वीडियो का एक दूसरा हिस्सा भी है. जिसमें वहीं शख्स एक बेंच पर लेटा है, और उस पर पुलिस की लाठियां बरस रही है. यहां भी उसके हाथ बंधे हैं. इन दोनों वीडियो को देखकर किसी का भी हैरान हो जाना स्वभाविक है. क्योंकि वीडियो में पुलिस की पिटाई बेहद बर्बर है और भी खुलेआम सभी के सामने. लेकिन पुलिस के इस खतरनाक एक्शन के पीछे की कहानी भी उतनी ही भयावह है. आइए इस पूरे मामले को समझते हैं।  मामला गुजरात के भावनगर का मामला गुजरात के भावनगर का है. वीडियो में पुलिस से पीटता दिख रहा शख्स फैजल लखानी है. फैजल लखानी अभी पुलिस की गिरफ्त में है. जहां कानूनी प्रक्रिया के तहत उस पर एक्शन लिया जा रहा है. लेकिन उसकी पिटाई का वीडियो कानूनी प्रक्रिया से ऊपर का है. ऐसा क्यों है, जानिए।  महिला की हत्या का आरोपी है पीट रहा शख्स दरअसल फैजल लखानी ने एक महिला की हत्या का आरोपी है. उसने बीते दिनों काजल बरैया नामक एक महिला की बेरहमी से हत्या की थी. इसका वीडियो भी सामने आया था. महिला की पिटाई के सीसीटीवी वीडियो में फैजल काजल को लात-घूसों से पीटता दिख रहा है।  पुलिस ने क्यों दी ऐसी सजा, खुद बताया वो महिला की जिस बेरहमी के साथ पिटाई कर रहा है, उसे देखकर किसी का भी खून खौल जाए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई थी और इस घटना से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा था, इसलिए उन्हें 'एक कदम आगे बढ़कर' कार्रवाई करनी पड़ी।  लिव इन पार्टनर काजल की फैजल ने की हत्या दरअसल फैजल ने भावनगर शहर के बस स्टैंड पर काजल की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. यह पूरी घटना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है. सीसीटीवी फुटेज में आरोपी महिला को बेरहमी से पीटता हुआ दिख रहा है, जबकि आसपास मौजूद लोग मूकदर्शक बने हुए हैं।  आरोपी का आपराधिक इतिहास, जेल में था पुलिस उपाधीक्षक आर आर सिंघल ने बताया कि यह घटना नीलम बाग थाना क्षेत्र में हुई थी. उन्होंने बताया, 'काजल बरैया और फैजल लखानी पिछले करीब सात सालों से फुटपाथ पर एक साथ रह रहे थे. आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ डकैती तथा अन्य गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं।  काजल की हत्या के बाद पुलिस ने फैजल को गिरफ्तार किया. फिर शनिवार को उसे उसी स्थान पर ले गए, जहां उसने काजल की पिटाई की दी. क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान पुलिस ने फैजल की लाठियों से पिटाई की।  फैजल ने काजल की क्यों की हत्या? फैजल ने काजल की हत्या क्यों की, इसके पीछे की कहानी भी फिल्मी है. फैजल का आपराधिक इतिहास है. वह जेल में था. इसी दौरान उसकी लिव इन पार्टनर काजल की उसके ही एक परिचित रवि से संबंध बन गए. अधिकारी ने बताया कि जेल से छूटने के बाद जब फैजल को इस संबंध के बारे में पता चला तो वो बुरी तरह से भड़क गया।   

योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में बनेगा अत्याधुनिक सेंटर

खिलाड़ियों की चोट का इलाज अब लखनऊ में, तैयार हो रहा अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में बन रहा सेंटर अब दूसरे राज्यों का नहीं करना पड़ेगा रुख, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस होगा सेंटर सेंटर में होंगी क्रायोथेरेपी से लेकर शॉकवेव थेरेपी तक सात अत्याधुनिक मशीनों की सुविधा सिविल कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सेंटर को एक साल की समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रही है। राजधानी लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना की जा रही है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, खेल संबंधी चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन में सुधार के लिए वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। सेंटर के निर्माण के बाद प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल संबंधी चोटों के इलाज और आधुनिक पुनर्वास के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे खिलाड़ियों को समय पर उपचार मिलने के साथ उनकी रिकवरी और खेल में वापसी की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी। फिटनेस से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक एकीकृत व्यवस्था स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का उद्देश्य केवल घायल खिलाड़ियों का उपचार करना नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता का नियमित वैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रदर्शन में निरंतर सुधार करना भी है। सेंटर में खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स साइंस आधारित प्रशिक्षण, पोषण संबंधी परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मार्गदर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से खिलाड़ियों की फिटनेस का वैज्ञानिक आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और रिकवरी की रणनीति तैयार की जा सकेगी। चोट के बाद पुनर्वास से लेकर मैदान पर वापसी तक खिलाड़ियों को विशेषज्ञों की निगरानी में सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा तैयार स्पोर्ट्स सांइस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना के लिए शासन द्वारा 716.77 लाख रुपये (7.17 करोड़ रुपये) की स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए आधुनिक चिकित्सा, पुनर्वास और खेल विज्ञान से जुड़ा मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अभी तक ऐसा सेंटर नहीं था। इसमें बाहर के लोगों को भी इलाज की सुविधा दिए जाने का प्रस्ताव है। फीस देकर आमजन भी अपनी चोटों का इलाज और पुनर्वास करा सकेंगे। सात अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा सेंटर खिलाड़ियों के उपचार और रिकवरी के लिए सेंटर में सात प्रमुख अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इनमें हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर, रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस, टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण, वायवीय संपीडन चिकित्सा इकाई, कॉम्बो पेन मैनेजमेट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट, क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणासी, फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट शामिल हैं।  हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर सुविधा में तरल नाइट्रोजन के स्थान पर बिजली से संचालित क्रायोथेरेपी कक्ष की सुविधा होगी। इसमें -120°C से -140°C तक तापमान सीमा उपलब्ध होगी। जबकि रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस दो एकीकृत कंप्रेसर के माध्यम से उच्च आवृत्ति, 20 Hz तक के इम्पल्स देने में सक्षम होगा। इसका डिजाइन आधुनिक और उपयोग में आसान बताया गया है। वहीं टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण उच्च आवृत्ति इलेक्ट्रोथेरेपी के जरिए गहरे ऊतकों के उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से विभिन्न प्रकार की उपचार प्रणालियां उपलब्ध होंगी, जिनमें धाव, टैडन, लिगामेंट, जोड़ तथा मांसपेशियों के उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हैं। वायवीय संपीड़न चिकित्सा इकाई (प्न्यूमैटिक कंप्रेशन थेरेपी यूनिट) के माध्यम से दोनों पैरों, भुजाओं, कमर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों का एक साथ उपचार किया जा सकेगा। खिलाड़ियों के रिकवरी और पुनर्वास में यह उपयोगी होगा। कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट में समकालिक, वैकल्पिक, पृथक एवं क्रमिक चैनल मोड में इलेक्ट्रोस्टिमुलेशन की सुविधा होगी। इसके जरिए गैल्वैनिक, फैराडिक, ट्रेबर्ट, अल्ट्रा राइज, हाई वोल्ट, माइक्रो करंट तथा टीईएनएस जैसी विभिन्न करंट थेरेपी उपलब्ध होगी। क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली में 2 इंच या उससे अधिक बैकलिट टच स्क्रीन डिस्प्ले और क्लास-4 जीएएआईएएस डायोड लेजर स्रोत होगा। इसकी न्यूनतम 10 वाट या उससे अधिक आउटपुट क्षमता होगी। फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट में मायोफेशियल ट्रिगर प्वाइंट, पीठ दर्द और गर्दन दर्द आदि के उपचार में उपयोगी होगा। इसके जरिए कैल्सिफिक टेंडिनोपैथी जैसी समस्याओं के उपचार में भी सहायता मिलेगी। निर्माण कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद जल्द स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का सिविल निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान उपकरणों की खरीद के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया के बाद उपकरणों की खरीद की कार्यवाही शुरू की जाएगी। परियोजना को कार्य प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सेंटर के तैयार होने के बाद खिलाड़ियों को उपचार, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशिक्षकों और खेल विशेषज्ञों की भी बढ़ेगी क्षमता इस सेंटर को खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, खेल अधिकारियों और खेल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के लिए भी क्षमता विकास के मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे खेल से जुड़े मानव संसाधन को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और चोट प्रबंधन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर महत्वपूर्ण पहल  प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ-साथ अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन से जुड़ी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी। -कुमार विनीत, विशेष सचिव, खेल विभाग

पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी बने सचिन पायलट, वड़िंग और चन्नी गुट को साधना होगा सबसे बड़ा टास्क

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की अटकलों के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस मामलों का प्रभारी नियुक्त किया है। उन्हें भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद को साधने की हाईकमान की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सचिन पायलट का पंजाब से कोई सीधा राजनीतिक आधार नहीं रहा है। उनकी राजनीति मुख्य रूप से राजस्थान तक केंद्रित रही है। वह टोंक से कांग्रेस विधायक हैं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तथा उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। इससे पहले वह दौसा और अजमेर से लोकसभा सांसद भी रहे हैं। फिलहाल वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और दिसंबर 2023 में उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। पंजाब के पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी और उनका गुट बघेल और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से नाराज था। उनका आरोप था कि बघेल ने प्रदेश प्रभारी होने के बावजूद हाईकमान को जमीनी हकीकत नहीं बताई। उनका कहना था कि चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए किसी मजबूत नेता को कमान सौंपी जाए। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाईकमान ने यह मांग मान ली। पायलट को दोनों गुटों को करना होगा एकजुट पंजाब में उनकी सबसे बड़ी परीक्षा पार्टी की गुटबाजी को नियंत्रित करना होगी। प्रदेश कांग्रेस में एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का खेमा है, जबकि दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की अलग राजनीतिक सक्रियता दिखाई देती रही है। ऐसे में पायलट को दोनों पक्षों के बीच समन्वय कायम कर संगठन को एकजुट करना होगा। इसके अलावा प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी उनके लिए अहम होगा। खास बात यह है कि रंधावा इस समय राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं। ऐसे में पायलट और रंधावा का संगठनात्मक तालमेल दोनों राज्यों में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। पंजाब में बदलाव के पीछे भूपेश बघेल की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल भी अहम माने जा रहे हैं। पायलट को नया प्रभारी क्यों बनाया..3 पॉइंट     पंजाब कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और मतभेदों से जूझ रही है। हाईकमान का मानना है कि पायलट संगठन को एकजुट कर सकते हैं।     राजस्थान में 2013 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पायलट प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने पांच साल ग्राउंड पर काम किया और अलग-अलग गुटों से तालमेल बैठाते हुए 2018 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत दिला दिया। हाईकमान को उम्मीद है कि इसका फायदा पंजाब में मिलेगा।     पायलट का यूथ में बड़ा क्रेज है। पायलट ने जैसे 2018 में राजस्थान में कांग्रेस को जीत दिलाई थी, हाईकमान को उनसे पंजाब में वैसा ही करने उम्मीद है। पंजाब को लेकर लगातार मंथन उन पर राजा वड़िंग के पक्ष में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, जिससे पार्टी के दूसरे धड़ों में असंतोष की धारणा बनी। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल समेत वरिष्ठ नेताओं के बीच पंजाब को लेकर लगातार मंथन हुआ। इसके बाद बदलाव का फैसला सामने आया। अब पायलट के सामने 2027 के लिए कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति तैयार करने, नेताओं को एक मंच पर लाने और जमीनी संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। युवा चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता और राजस्थान में संगठन चलाने का अनुभव पंजाब कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

शिक्षक दिवस पर दिल्ली के 118 शिक्षकों का सम्मान, 10,417 शिक्षकों की भर्ती का ऐलान

नई दिल्ली शिक्षक दिवस पर 118 टीचर्स को 'दिल्ली स्टेट टीचर अवॉर्ड 2026' से सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में खास योगदान देने वाले इन टीचर्स को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को त्यागराज स्टेडियम मैं अवॉर्ड दिए। इन 118 टीचर्स में 20 स्कूल हेड, शिक्षा निदेशालय और एमसीडी स्कूलों के 69 शिक्षक, 3 सीएम श्री स्कूलों समेत लाइब्रेरियन, स्पेशल एजुकेटर, स्पोर्ट्स टीचर सहित शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले टीचर्स भी हैं। कार्यक्रम में क्या बोलीं सीएम रेखा गुप्ता कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों की उपलब्धियों का ही सम्मान नहीं, बल्कि उस समर्पण, धैर्य और विश्वास का सम्मान है, जिसके माध्यम से वे हमारे बच्चों के भविष्य को आकार देते है। वहीं, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि 10,417 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। 613 विशेष शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी। VSPK इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल को मिला अवॉर्ड रोहिणी के VSPK इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. संचिता गुप्ता को भी राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला। प्रिंसिपल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशें लागू होने के बाद स्कूलों पर सकारात्मक असर पड़ा है। स्कूल के चेयरमैन एसके गुप्ता ने प्रिंसिपल संचिता गुप्ता को बधाई देते हुए कहा है कि उनके नेतृत्व में स्कूल ने अकैडमिक, स्पोर्ट्स समेत हर क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। MCD शुरू करेगी 24 निगम श्री स्कूल शिक्षक दिवस पर केंद्रीय मंत्री और दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने MCD स्कूलों के 4 प्रिसिपल और 83 टीचर्स को सम्मानित किया। इस दौरान मेयर प्रवेश वाही ने बताया कि निगम में 24 निगम श्री स्कूल तैयार किए जा रहे है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही, डिप्टी मेयर डॉ मोनिका पंत्, नेता सदन जय भगवान यादव, स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा, शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा और एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार मौके पर मौजूद रहे।

रेलवे में SC-ST कर्मचारियों के लिए प्रमोशन आसान, ‘बेस्ट अमंग द फेल्ड’ योजना लागू

 अंबाला  रेलवे में पदोन्नति का इंतजार कर रहे अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रेलकर्मियों के लिए राहत है। आरक्षित पदों को खाली रहने से रोकने और पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से बनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए रेलवे बोर्ड ने अर्हता अंकों में छूट और ‘बेस्ट अमंग द फेल्ड’ योजना को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसका लाभ गैर-सुरक्षा श्रेणी के पदों पर होने वाली पदोन्नति में मिलेगा। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों, आरडीएसओ और अन्य संबंधित कार्यालयों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने कहा है कि समय-समय पर निर्देश जारी होने के बावजूद रेलवे और उत्पादन इकाइयों में नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इसे दूर करने के लिए मौजूदा प्रविधानों को दोहराते हुए उनकी स्थिति स्पष्ट की है। वरिष्ठता आधारित चयन में 10 प्रतिशत अंकों की छूट गैर-सुरक्षा श्रेणी में ग्रुप-सी के भीतर वरिष्ठता के आधार पर पैनल तैयार होने पर एससी-एसटी कर्मचारियों को सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित अर्हता अंकों में 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यह रियायत व्यावसायिक योग्यता और कुल अंकों दोनों में लागू होगी। यदि निर्धारित छूट और अन्य रियायतों के बावजूद आरक्षित रिक्तियों के अनुरूप पर्याप्त एससी-एसटी कर्मचारी पैनल में उपलब्ध नहीं होते हैं, तो ‘बेस्ट अमंग द फेल्ड’ योजना के तहत सामान्य अर्हता मानक पूरा नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों पर विचार किया जा सकेगा। इसके लिए लिखित परीक्षा, मौखिक परीक्षा, सेवा अभिलेख आदि प्रत्येक मद में और कुल मिलाकर कम से कम 20 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा। ऐसे कर्मचारियों को आरक्षित रिक्तियों की संख्या के अनुरूप पैनल में शामिल किया जा सकेगा। इस योजना के तहत पदोन्नति तदर्थ आधार पर होगी। छह महीने बाद प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और संतोषजनक प्रदर्शन होने पर सक्षम पैनल अनुमोदन प्राधिकारी द्वारा पदोन्नति नियमित की जा सकेगी। एलडीसीई में भी एससी-एसटी कर्मियों को राहत 30 प्रतिशत सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) में भी एससी-एसटी कर्मचारियों के लिए अर्हता मानकों में छूट जारी रहेगी। लिखित परीक्षा में उनके लिए अर्हता अंक सामान्य वर्ग के निर्धारित अंकों के तीन-पांचवें होंगे। मौखिक व सेवा अभिलेख के अंक मिलाकर एससी-एसटी उम्मीदवारों को कम से कम 18 अंक लेने होंगे, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह सीमा 30 अंक है। सेवा अभिलेख में न्यूनतम 15 अंक हासिल करना अनिवार्य रहेगा। एलडीसीई में पैनल योग्यता के आधार पर तैयार होता है, इसलिए इसमें ‘बेस्ट अमंग द फेल्ड’ योजना लागू नहीं होगी।  

झारखंड में SIR पर बड़ी राहत, दस्तावेज नहीं होने पर प्रखंड-अंचल कार्यालय से मिलेगी मदद

 रांची मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नोटिस पाने वाले वैसे मतदाता, जिनके पास निर्धारित 13 प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। वैसे मतदाताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था हैं। ऐसे मतदाता अपने, प्रखंड या अंचल कार्यालय में जाकर अधिकारियों से सहायता ले सकते हैं। वे परिवार के पुराने सदस्यों के नाम, माता-पिता अथवा अन्य पारिवारिक विवरण के आधार पर वंशावली तैयार कराकर सीओ से प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं। जिला उपनिर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन ने कहा कि वे अपने संबंधित प्रखंड एवं अंचल कार्यालय में संपर्क कर सीओ से निर्गत वंशावली, जाति प्रमाण पत्र, स्थानीय निवासी, आवासीय प्रमाण पत्र, व ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराकर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। ऐसे मतदाता आनलाइन के साथ ऑफलाइन माध्यम से भी आवश्यक प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्रमाण पत्रों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने को देखते हुए कार्मिक, प्रशासनिक विभाग की ओर से जाति, स्थानीय निवासी व ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनाने की ऑफलाइन व्यवस्था तीन माह तक रखी गई है। इससे खासकर ग्रामीण, गरीब और तकनीकी जानकारी नहीं रखने वाले मतदाताओं को सुविधा मिलेगी। 2003 की मतदाता सूची में नाम नहीं मिल रहा तो क्या करें एसआईआर में प्रारंभिक स्तर पर नाम हटाए गए मतदाताओं को संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में आधार, दसवीं का प्रमाण पत्र, माता-पिता से संबंधित प्रमाण पत्र, पासपोर्ट समेत 13 प्रकार के दस्तावेजों में से निर्धारित प्रमाण प्रस्तुत करने और नोटिस में दी गई तारीख व समय पर अंचल कार्यालय में उपस्थित होकर कर सकते है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जो कम पढ़े-लिखे हैं, मजदूरी करते हैं, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं, व दूसरे राज्य से आकर यहां बसे हैं। ऐसे मतदाता अपने , प्रखंड या अंचल कार्यालय में जाकर अधिकारियों से मदद ले सकते हैं। सहायता ले सकते हैं। परिवार के पुराने सदस्यों के नाम, माता-पिता अथवा अन्य पारिवारिक विवरण के आधार पर वंशावली तैयार कराकर सीओ से प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त किया जा सकता है। 10 दिनों में अब तक 30 हजार मतदाताओं सुनवाई हो चुकी एसआईआर के तहत 24 अगस्त से प्रखंड व अंचल कार्यालयों में मतदाताओं की सुनवाई जारी है। 24 अगस्त से 5 सितंबर तक अंचल कार्यालयों में 30 हजार से अधिक मतदाताओं की सुनवाई हो चुकी है। रोजाना करीब 200 मतदाताओं को सुनवाई के लिए तारीख दी जा रही है, लेकिन करीबन 70 से 80 मतदाता ही पहुंच रहे हैं। बता दे कि पांच अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद रांची जिले की सात विधानसभा सीटों के करीब 6.44 लाख मतदाताओं को अलग-अलग कारणों से नोटिस जारी किया गया था।

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हड़कंप, 12 की मौत और कई लोग अस्पताल में भर्ती

सागर मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में शनिवार रात जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार रात में करीब दर्जनभर लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 12 लोगों की मौत हो गई। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम बंडा अस्पताल में कराया जा रहा है। गंभीर हालत वाले पांच मरीजों को उपचार के लिए बीएमसी सागर भेजा गया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बंडा पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली और मामले की जांच शुरू कराई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बंडा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जिलाधिकारी ने दी जांच की सलाह जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की कि पिछले 24 से 48 घंटे के दौरान किसी भी प्रकार की शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि किसी तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो वह तुरंत चिकित्सक से जांच कराए। उन्होंने कहा, ”प्रशासन ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रहा है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बंडा के पूर्व विधायक की अपील बंडा के पूर्व विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि 9 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि बंडा विकासखंड के बराज, घूघर, नौराज और आसपास के गांवों में रहने वाले कई लोगों ने शनिवार रात शराब का सेवन किया था, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने बताया कि परिजन उन्हें इलाज के लिए बंडा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने कई लोगों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि चार-पांच लोग बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि चार-पांच लोगों को सागर भेजा गया है। तरवर लोधी ने लोगों से अपील की कि जिन लोगों ने पिछले दो-तीन दिनों में बंडा क्षेत्र की किसी दुकान या अवैध रूप से शराब बेचने वालों से शराब खरीदकर पी है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी भी परेशानी महसूस हो रही है, वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से जांच कराएं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस का दल मौके पर मौजूद है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। इनकी हुई मौत पुलिस के अनुसार मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), निवासी गूगरा खुर्द, दिग्विजय लोधी (28), निवासी नौराज, करतार सिंह लोधी (30), निवासी नौराज, उजियार सिंह लोधी (56), निवासी गूगरा खुर्द, रोशन लोधी (30), निवासी पाटन थाना विनायका और राजेंद्र लोधी (32), निवासी नौराज-गूगरा शामिल हैं। गोलू उर्फ चमन को पहले से कैंसर की शिकायत होने की जानकारी भी सामने आई है। पांच मरीज बीएमसी रेफर हरनाम राय (42), निवासी चौका, उत्तम नत्थू नायक (42), निवासी दलपतपुर, मंगल रजक (40), निवासी गूगरा खुर्द, परम आदिवासी, निवासी हिनौता और धनसिंह आदिवासी (30), निवासी हिनौता को गंभीर हालत में बीएमसी सागर रेफर किया गया है। प्रशासन और पुलिस द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जहरीली शराब की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।

गद्दे के नीचे भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, वास्तु के अनुसार बढ़ सकती है नकारात्मकता

बेडरूम घर का वह हिस्सा है जहां दिनभर की थकान के बाद व्यक्ति आराम करता है. इसलिए यहां का माहौल शांत और व्यवस्थित होना जरूरी माना जाता है. कई लोग जगह बचाने या जरूरत के समय सामान आसानी से मिल जाए, इसके लिए गद्दे के नीचे चीजें रख देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार गद्दे के नीचे रखा सामान घर की ऊर्जा और व्यक्ति की मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है. कुछ चीजों को तो यहां रखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता. गद्दे के नीचे चार्जर और तार न रखें आजकल मोबाइल चार्जर, ईयरफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक तारों को लोग अक्सर बेड के नीचे या गद्दे के नीचे रख देते हैं. वास्तु मान्यता के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता. कहा जाता है कि इससे मानसिक अशांति और नींद से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. व्यावहारिक रूप से भी तारों और चार्जर को गद्दे के नीचे रखने से दबाव और गर्मी की समस्या हो सकती है. पुराने कागज और रसीदें हटाएं पुरानी रसीदें, बिल, कागज या ऐसे दस्तावेज जिनकी अब जरूरत नहीं है, उन्हें गद्दे के नीचे जमा करके रखने से बचना चाहिए. वास्तु के अनुसार बेड के आसपास अनावश्यक सामान रखना सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता. जरूरी दस्तावेजों को किसी व्यवस्थित स्थान पर रखना बेहतर है. फटे-पुराने कपड़े न रखें पुराने या फटे हुए कपड़े भी गद्दे के नीचे रखने से बचने की सलाह दी जाती है. वास्तु मान्यताओं में इन्हें नकारात्मकता और ठहराव से जोड़कर देखा जाता है. घर में ऐसे कपड़े हैं जिनका इस्तेमाल नहीं होता, तो उन्हें अलग कर देना या जरूरतमंद को देना बेहतर विकल्प हो सकता है. नुकीली चीजें रखने की गलती न करें कैंची, पिन, चाकू या अन्य धारदार सामान को कभी भी गद्दे के नीचे नहीं रखना चाहिए. वास्तु मान्यता के अनुसार ऐसी चीजों को तनाव और विवाद से जोड़कर देखा जाता है. इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से भी बेड पर बैठते या लेटते समय इनके दबने या नुकसान पहुंचाने का खतरा हो सकता है. दवाइयां भी गद्दे के नीचे न रखें कई लोग रात में आसानी से मिल जाएं, इसलिए दवाइयां गद्दे के नीचे रख देते हैं.वास्तु शास्त्र में इसे भी उचित नहीं माना गया है. दवाइयों को हमेशा उनकी जरूरत और सुरक्षा के अनुसार साफ-सुथरी, सूखी और आसानी से पहुंच वाली जगह पर रखना चाहिए. बेडरूम को रखें साफ और व्यवस्थित वास्तु मान्यताओं के अनुसार बेडरूम में अनावश्यक सामान जमा नहीं होना चाहिए.खासतौर पर बेड के आसपास सफाई और व्यवस्था बनाए रखना जरूरी माना जाता है.गद्दे के नीचे स्टोरेज करने के बजाय जरूरत का सामान अलमारी, बेड बॉक्स या निर्धारित स्टोरेज में रखना बेहतर है.